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मेरठ में एसपी सिटी ने पीएल शर्मा रोड पर स्थित कोचिंग सेंटरों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने इन सेंटरों में सुरक्षा मानकों, फायर सेफ्टी व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरों की स्थिति और उनके रजिस्ट्रेशन संबंधी दस्तावेजों की गहनता से जांच की।
मोहम्मद अतीक
मेरठ में एसपी सिटी ने पीएल शर्मा रोड पर स्थित कोचिंग सेंटरों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने इन सेंटरों में सुरक्षा मानकों, फायर सेफ्टी व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरों की स्थिति और उनके रजिस्ट्रेशन संबंधी दस्तावेजों की गहनता से जांच की।
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- लंबी सड़क यात्राओं के दौरान अक्सर हाईवे और सड़कों के किनारे बड़ी संख्या में बबूल के पेड़ दिखाई देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे एक प्राकृतिक कारण है, जिसमें बबूल के बीज हवा, पक्षियों और जानवरों के माध्यम से दूर-दूर तक फैल जाते हैं। ये बीज सड़क किनारे की खाली भूमि और कम देखभाल वाले क्षेत्रों में आसानी से अंकुरित होकर पेड़ का रूप ले लेते हैं। बबूल का पेड़ कम पानी और कठिन परिस्थितियों में भी तेजी से बढ़ने की क्षमता रखता है। यही विशेषता इसे सड़क किनारे, बंजर भूमि और खुले क्षेत्रों में अत्यधिक रूप से दिखाई देने का मुख्य कारण बनाती है। हालांकि, कई लोगों को बबूल के फूलों की गंध पसंद नहीं आती और वे इसे सूंघने पर बेचैनी या उल्टी जैसा महसूस करते हैं। यह अनुभव हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकता है, जहाँ कुछ लोग इसकी गंध के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, वहीं अन्य को इससे कोई परेशानी नहीं होती। प्रकृति की यह खासियत है कि कुछ पौधे और पेड़ अपने वातावरण के अनुसार खुद को आसानी से ढाल लेते हैं, और बबूल भी उन्हीं पेड़ों में से एक है जो सीमित संसाधनों में भी तेजी से बढ़कर पर्यावरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है।1
- मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने मेरठ में 'मोहल्ला मीटिंग कैंपेन' का आगाज किया है, जिसके तहत लोगों से सियासत में सक्रिय भागीदारी निभाने का पुरजोर आह्वान किया जा रहा है। AIMIM के महानगर अध्यक्ष इमरान अंसारी ने जनता से अपील की है कि वे उठें और जागो, क्योंकि राजनीति में जितनी देर से हिस्सा लिया जाएगा, नुकसान उतना ही बड़ा होगा। अंसारी ने लोगों को 'तथाकथित सेकुलर पार्टियों' के जाल से बाहर निकलने और अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की हिफाज़त के लिए AIMIM का साथ देने के लिए प्रेरित किया। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को राजनीतिक रूप से जागरूक करना है ताकि वे अपने मुस्तकबिल के लिए सही निर्णय ले सकें।1
- cut godi dono bhai ki inki masti rog deko ye dono best bhi h inko dekne ke ley cement kero cut bhi1
- मेरठ के कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र में एक वीभत्स घटना सामने आई है, जहाँ युवाओं की ईंटों से बेरहमी से कूच-कूच कर हत्या कर दी गई।1
- हाल ही में नाज़िया इलाही नामक महिला द्वारा प्यारे पैगंबर की शान में इंतिहाई नाज़ेबा और तौहीनआमेज़ टिप्पणियाँ करने के बाद मुसलमानों में शदीद ग़ुस्सा और बेचैनी फैल गई है। यह बदज़ुबानी, जिसे 'नबी की शान में गुस्ताख़ी हरगिज़ बर्दाश्त नहीं!' के रूप में वर्णित किया गया है, ने दुनिया भर के मुसलमानों के दिलों को छलनी कर दिया है, जिससे देश का अमन-ओ-अमान दांव पर लगने का आरोप है। हुकूमत-ए-हिन्द और संबंधित पुलिस प्रशासन से पुरज़ोर मुतालिबा किया गया है कि नाज़िया इलाही को, जिसे मुल्क का अमन-ओ-अमान दांव पर लगाने वाली बताया गया है, बिना किसी देरी के तुरंत गिरफ्तार किया जाए। इसके अतिरिक्त, माँग की गई है कि उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर ऐसी इबरतनाक सज़ा दी जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति किसी भी धार्मिक रहनुमा के खिलाफ इस तरह की बकवास करने की हिम्मत न कर सके।1
- सुबह की पहली किरण के साथ ही गांव में मुर्गों की बांग सुनाई देने लगी, जिससे पूरे माहौल में एक नई ताजगी छा गई। मुर्गों की आवाज़ के साथ ही ग्रामीणों की दिनचर्या भी शुरू हो गई; कोई खेतों की ओर निकल पड़ा, तो कोई पशुओं की देखभाल में जुट गया। गांव की सुबह का यह दृश्य आज भी अपनी पुरानी पहचान बनाए हुए है। जहां शहरों में लोग मोबाइल और अलार्म की आवाज से जागते हैं, वहीं गांवों में आज भी मुर्गों की बांग लोगों को नए दिन का संदेश देती है। सुबह की ठंडी हवा, पक्षियों की चहचहाहट और मुर्गों की बांग से पूरा वातावरण जीवंत नज़र आया, जिसे ग्रामीण गांव की असली पहचान और खूबसूरती का आधार मानते हैं। तेजी से बदलते दौर में भी गांवों की यह परंपरा लोगों को प्रकृति से जोड़ने का काम कर रही है। मुर्गों की बांग के साथ शुरू होने वाली यह सुबह आज भी ग्रामीण जीवन की सादगी और खूबसूरती को बखूबी बयां करती है।1
- एक सड़क पर लगाए गए सफेद डिस्प्ले वाले एक होर्डिंग ने लोगों का ध्यान खींचा है, जिस पर खाद्य बर्बादी को रोकने के संबंध में एक महत्वपूर्ण और मार्मिक संदेश दिया गया है। इस होर्डिंग के निचले हिस्से में एक पट्टी पर स्पष्ट रूप से लिखा है कि "देश में 20 करोड़ देशवासी प्रतिदिन भूखे सोते हैं इसलिए थाली में उतना ही पड़ोसी जो फेंकना पड़े।" यह संदेश भारत में व्याप्त भूखमरी की गंभीर वास्तविकता को दर्शाता है और लोगों से अन्न का सम्मान करने तथा उतनी ही मात्रा में भोजन परोसने का आग्रह करता है, जितना आवश्यक हो, ताकि कोई भी अन्न व्यर्थ न जाए। इस शक्तिशाली संदेश को पढ़कर लोगों की आँखें खुल गईं और जिसने भी इसे देखा, वह हैरान रह गया। इस अनूठे और 'गजब के' संदेश को राष्ट्रीय विकास संगठन के बिजनौर पदाधिकारी रविंद्र ककराज ने इस सफेद होर्डिंग के माध्यम से प्रसारित किया है, जिसकी लोगों द्वारा व्यापक रूप से सराहना की जा रही है।1
- राष्ट्रीय विकास संगठन मानवता की मिसाल बनकर हर क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है। इसी क्रम में, हाल ही में संगठन के उत्तर प्रदेश के प्रदेश मंत्री पवन चौधरी, जो मथुरा निवासी हैं, ने एक गंभीर रूप से घायल युवक को तत्काल कार्यवाही करते हुए अस्पताल पहुँचाया। इस कार्य के माध्यम से, राष्ट्रीय विकास संगठन ने एक बार फिर मानवता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया और अपने संगठन का नाम रोशन किया।1