प्रमोद कुमार कश्यप मोदीनगर एवं बागपत जिला प्रभारी निषाद पार्टी सेवा में, दिनांक 5-8-2026 मा. मुख्यमंत्री महोदय, उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ प्रतिलिपि: पुलिस महानिदेशक महोदय, उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ विषय: दीपा कश्यप (धीमर समाज), रेनू शर्मा (गरीब ब्राह्मण परिवार) एवं उनकी वृद्ध माता के साथ कथित बर्बर मारपीट, अमानवीय व्यवहार तथा वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने के संबंध में—तत्काल कठोर कार्रवाई हेतु। महोदय, निवेदन है कि निम्नलिखित अत्यंत गंभीर एवं संवेदनशील प्रकरण पर तत्काल संज्ञान लेने की कृपा करें— दिनांक 3-8-2026 को एक गाय को अपने घर ले जा रही पांच महिलाओं, जिनमें रेनू शर्मा एवं उनकी माता तथा गाय दिलाने वाली दीपा कश्यप शामिल थीं, के साथ रास्ते में कथित रूप से गंभीर घटना घटित हुई। आरोप है कि स्वयं को गोरक्षक बताने वाले तथाकथित नेता पंकज व उसके अन्य साथी एवं उसकी पत्नी सपना ने मिलकर उन्हें रास्ते में रोक लिया और बिना किसी उचित कारण या सुनवाई के उनके साथ मारपीट की। पीड़ित पक्ष का कहना है कि उनकी कोई गलती नहीं थी, इसके बावजूद उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। जिसकी वीडिओ सोशल मिडिया पर ओर समस्त इलेक्ट्रॉनिक चैनलो पर प्रसारित हो रहा है। इस पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने का भी गंभीर आरोप है। साथ ही यह भी आरोप है कि संबंधित व्यक्ति द्वारा यह कहा गया कि “कोई भी रिपोर्ट लिखवा दे, पुलिस मेरा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती,” जो कानून व्यवस्था के प्रति गंभीर चुनौती को दर्शाता है। इससे पूर्व भी कई घटना कारित करने की सूचना भी है। अतः आपसे सविनय एवं सख्त मांग की जाती है कि— इस पूरे प्रकरण की तत्काल, निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध उच्चस्तरीय जांच कराई जाकर, दोषियों के विरुद्ध बिना किसी नरमी या पक्षपात के कठोरतम दंडात्मक एवं कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। पीड़ित महिलाओं एवं उनकी माता को तत्काल न्याय, पूर्ण सुरक्षा एवं आवश्यक कानूनी संरक्षण प्रदान किया जाए। वीडियो प्रसारित करने एवं भीड़तंत्र को बढ़ावा देने वाले सभी व्यक्तियों/संगठनों की भी पहचान कर ऐसे अपराधियों के विरुद्ध जिले व शहरों में अमन व शांति बनाये रखने हेतू "उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम, 1970" में कार्यवाही की जाए। यह स्पष्ट है कि भारत में कानून का शासन सर्वोपरि है। किसी भी व्यक्ति या संगठन को कानून अपने हाथ में लेने, सुनियोजित हिंसा करने, अपमानित करने अथवा किसी का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित कर भीड़तंत्र को बढ़ावा देने का कोई अधिकार नहीं है। गोरक्षा या किसी भी अन्य उद्देश्य के नाम पर इस प्रकार की हिंसा, गुंडागर्दी एवं कानून से ऊपर होकर कार्य करना पूर्णतः अस्वीकार्य, दंडनीय एवं लोकतंत्र के विरुद्ध है। अतः न्यायहित में यह आवश्यक है कि ऐसे कृत्यों पर कठोरतम कार्रवाई कर उदाहरण प्रस्तुत किया जाए, जिससे भविष्य में कोई भी व्यक्ति कानून को अपने हाथ में लेने का दुस्साहस न कर सके। मो 6397876161
प्रमोद कुमार कश्यप मोदीनगर एवं बागपत जिला प्रभारी निषाद पार्टी सेवा में, दिनांक 5-8-2026 मा. मुख्यमंत्री महोदय, उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ प्रतिलिपि: पुलिस महानिदेशक महोदय, उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ विषय: दीपा कश्यप (धीमर समाज), रेनू शर्मा (गरीब ब्राह्मण परिवार) एवं उनकी वृद्ध माता के साथ कथित बर्बर मारपीट, अमानवीय व्यवहार तथा वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने के संबंध में—तत्काल कठोर कार्रवाई हेतु। महोदय, निवेदन है कि निम्नलिखित अत्यंत गंभीर एवं संवेदनशील प्रकरण पर तत्काल संज्ञान लेने की कृपा करें— दिनांक 3-8-2026 को एक गाय को अपने घर ले जा रही पांच महिलाओं, जिनमें रेनू शर्मा एवं उनकी माता तथा गाय दिलाने वाली दीपा कश्यप शामिल थीं, के साथ रास्ते में कथित रूप से गंभीर घटना घटित हुई। आरोप है कि स्वयं को गोरक्षक बताने वाले तथाकथित नेता पंकज व उसके अन्य साथी एवं उसकी पत्नी सपना ने मिलकर उन्हें रास्ते में रोक लिया और बिना किसी उचित कारण या सुनवाई के उनके साथ मारपीट की। पीड़ित पक्ष का कहना है कि उनकी कोई गलती नहीं थी, इसके बावजूद उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। जिसकी वीडिओ सोशल मिडिया पर ओर समस्त इलेक्ट्रॉनिक चैनलो पर प्रसारित हो रहा है। इस पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने का भी गंभीर आरोप है। साथ ही यह भी आरोप है कि संबंधित व्यक्ति द्वारा यह कहा गया कि “कोई भी रिपोर्ट लिखवा दे, पुलिस मेरा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती,” जो कानून व्यवस्था के प्रति गंभीर चुनौती को दर्शाता है। इससे पूर्व भी कई घटना कारित करने की सूचना भी है। अतः आपसे सविनय एवं सख्त मांग की जाती है कि— इस पूरे प्रकरण की तत्काल, निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध उच्चस्तरीय जांच कराई जाकर, दोषियों के विरुद्ध बिना किसी नरमी या पक्षपात के कठोरतम दंडात्मक एवं कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। पीड़ित महिलाओं एवं उनकी माता को तत्काल न्याय, पूर्ण सुरक्षा एवं आवश्यक कानूनी संरक्षण प्रदान किया जाए। वीडियो प्रसारित करने एवं भीड़तंत्र को बढ़ावा देने वाले सभी व्यक्तियों/संगठनों की भी पहचान कर ऐसे अपराधियों के विरुद्ध जिले व शहरों में अमन व शांति बनाये रखने हेतू "उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम, 1970" में कार्यवाही की जाए। यह स्पष्ट है कि भारत में कानून का शासन सर्वोपरि है। किसी भी व्यक्ति या संगठन को कानून अपने हाथ में लेने, सुनियोजित हिंसा करने, अपमानित करने अथवा किसी का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित कर भीड़तंत्र को बढ़ावा देने का कोई अधिकार नहीं है। गोरक्षा या किसी भी अन्य उद्देश्य के नाम पर इस प्रकार की हिंसा, गुंडागर्दी एवं कानून से ऊपर होकर कार्य करना पूर्णतः अस्वीकार्य, दंडनीय एवं लोकतंत्र के विरुद्ध है। अतः न्यायहित में यह आवश्यक है कि ऐसे कृत्यों पर कठोरतम कार्रवाई कर उदाहरण प्रस्तुत किया जाए, जिससे भविष्य में कोई भी व्यक्ति कानून को अपने हाथ में लेने का दुस्साहस न कर सके। मो 6397876161
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