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शाही किले में मनाया जा रहा हजरत सैयद हाशिम पीर का सालाना उर्स लखीमपुर खीरी:कस्बा खीरी स्थित हजरत सैयद हाशिम पीर रहमतुल्लाह अलैह का सालाना उर्स 4 से 8 फरवरी 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। उर्स की शुरुआत जश्न-ए-चरागां और नजर की रस्म के साथ हुई, जिसमें दूर-दराज से अकीदतमंद पहुंच रहे हैं।हर साल यह उर्स हकीकत और तहजीबी रिवायतों के साथ मनाया जाता है। उर्स के मौके पर शाही किले के प्रांगण में मेला भी लगता है, जहां फूल, चादर, अगरबत्ती, तबर्रुक की दुकानों के साथ-साथ मिठाई और बच्चों के खिलौनों की दुकानें सजती हैं। मेले में स्थानीय लोगों और जायरीन की अच्छी-खासी भीड़ देखी जा रही है।उर्स के दौरान कुरआनख्वानी, गागर-चादर, कुल शरीफ और महफिल-ए-समाअ जैसे धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिनका समापन 8 फरवरी को होगा।
Shahnawaz Gauri
शाही किले में मनाया जा रहा हजरत सैयद हाशिम पीर का सालाना उर्स लखीमपुर खीरी:कस्बा खीरी स्थित हजरत सैयद हाशिम पीर रहमतुल्लाह अलैह का सालाना उर्स 4 से 8 फरवरी 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। उर्स की शुरुआत जश्न-ए-चरागां और नजर की रस्म के साथ हुई, जिसमें दूर-दराज से अकीदतमंद पहुंच रहे हैं।हर साल यह उर्स हकीकत और तहजीबी रिवायतों के साथ मनाया जाता है। उर्स के मौके पर शाही किले के प्रांगण में मेला भी लगता है, जहां फूल, चादर, अगरबत्ती, तबर्रुक की दुकानों के साथ-साथ मिठाई और बच्चों के खिलौनों की दुकानें सजती हैं। मेले में स्थानीय लोगों और जायरीन की अच्छी-खासी भीड़ देखी जा रही है।उर्स के दौरान कुरआनख्वानी, गागर-चादर, कुल शरीफ और महफिल-ए-समाअ जैसे धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिनका समापन 8 फरवरी को होगा।
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- लखीमपुर खीरी के ओयल कस्बे में स्थित मेंढक मंदिर अपनी अनोखी बनावट और रहस्यमयी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। यह प्राचीन शिव मंदिर एक विशाल मेंढक की आकृति पर बना है, जिसका निर्माण 19वीं सदी में ओयल रियासत के राजा ने तांत्रिक सलाह पर कराया था। मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग दिन में तीन बार रंग बदलता है। मंदिर परिसर में बना कुआं पास की झील से जुड़ा बताया जाता है, जिसे लोग रहस्य मानते हैं। सावन और महाशिवरात्रि पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।1
- पलिया क्षेत्र में जंगली हाथियों का आतंक किसानों की फसलें रौंदी, वन विभाग की लापरवाही से ग्रामीणों में आक्रोश 05/02/2026 पलियाकलां-खीरी। पलिया क्षेत्र में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे किसानों की मुश्किलें दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही हैं। क्षेत्र की ग्राम पंचायत पटिहन के अंतर्गत आने वाले ग्राम खुशीपुर में जंगली हाथियों ने जमकर उत्पात मचाते हुए कई किसानों की गन्ना व गेहूं की फसलों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया। इस घटना से क्षेत्र के किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों के अनुसार, हाथियों के झुंड ने बीती रात खेतों में घुसकर कन्हैया, संजय कुमार, जस्सा सिंह एवं रामसहारे सहित कई किसानों की एकड़ों फसल रौंद डाली। सुबह खेतों में पहुंचने पर जब किसानों ने अपनी मेहनत पर पानी फिरता देखा तो उनके होश उड़ गए। खेतों में हर तरफ गिरी पड़ी फसल और टूटे पौधे हाथियों की तबाही की गवाही दे रहे थे। किसानों का कहना है कि इस समस्या को लेकर वे कई बार वन विभाग से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। हाथियों की लगातार बढ़ती गतिविधियों के बावजूद न तो निगरानी बढ़ाई गई और न ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए, जिससे ग्रामीण खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। बता दें कि पूर्व में हाथियों के हमलों से क्षेत्र के कई लोगों की जानें भी जा चुकी हैं।, इसके बावजूद वन विभाग की ओर से केवल आश्वासन ही दिए जाते रहे हैं। किसानों का आरोप है कि यदि जंगली जानवर उनकी फसलें बर्बाद कर दें तो कोई सुनवाई नहीं होती, लेकिन अगर गलती से भी किसी जानवर को नुकसान पहुंच जाए तो वन विभाग तत्काल मुकदमा दर्ज करा देता है। इस दोहरे रवैये से किसानों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों ने मांग की है कि वन विभाग तत्काल प्रभाव से हाथियों को आबादी और खेती वाले क्षेत्रों से दूर रखने के लिए ठोस कदम उठाए, मुआवजा व्यवस्था को सरल बनाए और स्थायी समाधान निकाले। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। क्षेत्र में बढ़ते हाथियों के आतंक से न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ रहा है, बल्कि ग्रामीणों की जान-माल की सुरक्षा भी खतरे में पड़ती जा रही है। अब देखना होगा कि वन विभाग इस गंभीर समस्या को लेकर कब तक ठोस कदम उठाता है।1
- नौरंगाबाद चौराहे पर लगा भीषण जाम में फंसी दो एंबुलेंस रिपोर्टर श्याम पाण्डे।1
- लखीमपुर खीरी जिले के थाना सिंगाही क्षेत्र के अंतर्गत अवैध मिट्टी खनन का खेल लगातार जारी है। खनन माफिया बेखौफ होकर दिन-रात मिट्टी खनन में लगे हुए हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग और प्रशासन पूरी तरह मौन नजर आ रहा है। हैरानी की बात यह है कि सोशल मीडिया पर लगातार वीडियो और खबरें सामने आने के बावजूद संबंधित विभाग द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उल्लेखनीय है कि इसी क्षेत्र में पूर्व में खनन अधिकारी एवं उनके गनर के साथ हाथापाई की घटना भी सामने आ चुकी है, इसके बावजूद अवैध खनन पर रोक नहीं लग पा रही है। इससे खनन माफियाओं के हौसले और भी बुलंद होते दिखाई दे रहे हैं। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह नियमों को ताक पर रखकर लगातार मिट्टी खनन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायतों और सबूतों के बावजूद प्रशासन की निष्क्रियता अवैध खनन को बढ़ावा दे रही है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इन वायरल वीडियो और खबरों का संज्ञान लेगा या खनन माफिया इसी तरह खुलेआम कानून को चुनौती देते रहेंगे?1
- Post by INDIA TV24 NEWS1
- पलिया में नगर पालिका की करोड़ों की जमीन पर फिर चला निर्माण, प्रशासन की सख्ती बेअसर? लखीमपुर खीरी की पलिया तहसील स्थित दुधवा रोड पर नगर पालिका परिषद की करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि पर अवैध निर्माण एक बार फिर शुरू हो गया है। हैरानी की बात यह है कि मंगलवार को ही एसडीएम पलिया अवनीश कुमार ने लेखपाल को मौके पर भेजकर निर्माण कार्य रुकवाया था, बावजूद इसके आज फिर से निर्माण गतिविधियां शुरू हो गईं। स्थानीय लोगों के अनुसार, बार-बार प्रशासनिक रोक के बाद भी निर्माण का दोबारा शुरू होना कई सवाल खड़े करता है। क्या भूमाफियाओं में तहसील प्रशासन का कोई डर नहीं है? या फिर प्रशासनिक मिलीभगत के चलते ही हर बार आदेशों को ठेंगा दिखाया जा रहा है? नगर पालिका की भूमि पर खुलेआम हो रहे इस अवैध निर्माण ने एसडीएम पलिया की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। यदि प्रशासन के स्पष्ट निर्देशों के बाद भी निर्माण नहीं रुक पा रहा, तो आदेशों की प्रभावशीलता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न उठना लाज़मी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस बार सिर्फ निर्माण रुकवाने तक सीमित रहता है या अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त और स्थायी कार्रवाई करता है। पलिया की जनता जवाब चाहती1
- पता नहीं किसकी नजर लग गई 😔😭1
- लखीमपुर खीरी:कस्बा खीरी में गुरुवार रात करीब 10 बजे से अचानक कोहरे की घनी धुंध छा गई। कोहरे के कारण दृश्यता कम हो गई, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मौसम में आई इस अचानक ठंडक और कोहरे से सर्दी का असर बढ़ गया है।1