मौसम के मिजाज ने बढ़ाई किसानों की चिंता: बुवाई विलंब से खराब हो सकती है सरसों की फसल, फंगस रोग का खतरा मंडराया मुजफ्फरनगर, 04 जनवरी 2026। जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। समय पर लेथ (रबी की एक प्रमुख फसल) की बुवाई न हो पाने के कारण अब सरसों की फसल पर फंगस जनित रोगों के हमले का खतरा मंडराने लगा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सतर्कता और उचित प्रबंधन नहीं किया गया, तो इस सीजन में किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। जलवायु परिवर्तन और विलंबित बुवाई: एक दोहरी मार इस साल मानसून के देरी से विदा होने और बेमौसम बारिश के चलते जनपद के बड़े हिस्से में लेथ की बुवाई समय पर नहीं हो पाई। इस विलंब का सीधा असर अब सरसों पर पड़ने वाला है। विशेषज्ञ बताते हैं कि देर से बोई गई फसलें अक्सर कमजोर होती हैं और उनमें रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। ऊपर से पिछले कुछ दिनों से दिन के तापमान में गिरावट और रात के समय कोहरे में बढ़ोतरी ने परिस्थितियों को और चिंताजनक बना दिया है। बढ़ता खतरा: झुलसा और सफेद रतुआ रोग कृषि विज्ञान केंद्र, मुजफ्फरनगर के एक वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक ने बताया, "वर्तमान में बढ़ी हुई नमी और कम तापमान का मिश्रण 'ऑल्टरनेरिया ब्लाइट' (झुलसा रोग) और 'व्हाइट रस्ट' (सफेद रतुआ) जैसे फंगस रोगों के लिए आदर्श स्थिति है। ये रोग पत्तियों, तनों और फलियों पर हमला करते हैं, जिससे पौधे की प्रकाश संश्लेषण की क्षमता कम हो जाती है और दाने ठीक से नहीं बन पाते। अगर रोकथाम न की गई, तो पैदावार में 30 से 50 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है।" किसानों की मुश्किलें और विभाग की सलाह जनपद के एक प्रगतिशील किसान सुरेंद्र सिंह ने बताया, "पहले ही बुवाई में देरी से चिंता थी, अब यह नया खतरा सामने आ गया है। कीटनाशकों का खर्च बढ़ेगा और मेहनत भी ज्यादा लगेगी।" इस चुनौती को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। इसमें फसल की नियमित निगरानी करने, शुरुआती लक्षण दिखते ही कवकनाशी दवाओं (जैसे कि मैंकोजेब या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव) का उपयोग करने और खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखने की सलाह दी गई है। साथ ही, संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन के प्रयोग पर जोर दिया गया है, क्योंकि अधिक नाइट्रोजन भी फंगस को बढ़ावा दे सकती है। जिले में कृषि संबंधी चुनौतियों का संदर्भ मुजफ्फरनगर जनपद में कृषि संबंधी मुद्दे नए नहीं हैं। इससे पहले भी सिंचाई विभाग द्वारा किए गए घटिया निर्माण कार्यों, जिसमें पांच दिन में उखड़ जाने वाली सड़क भी शामिल है, के कारण किसानों को सिंचाई सुविधाओं को लेकर दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। एक समाजसेवी द्वारा इन मुद्दों को उठाने के लिए भूख हड़ताल तक की गई थी। ऐसे में, फसलों पर रोगों का खतरा किसानों की मुश्किलों को और बढ़ा सकता है। क्या है समाधान का रास्ता? विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए दीर्घकालिक रणनीति पर काम करना होगा। शॉर्ट ड्यूरेशन और रोग प्रतिरोधी किस्मों के बीजों को बढ़ावा देना, जलवायु के अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाना और मौसम पूर्वानुमान के आधार पर किसानों को समय पर सलाह देना ही इसका समाधान है। अगर समय रहते सावधानी बरती गई, तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
मौसम के मिजाज ने बढ़ाई किसानों की चिंता: बुवाई विलंब से खराब हो सकती है सरसों की फसल, फंगस रोग का खतरा मंडराया मुजफ्फरनगर, 04 जनवरी 2026। जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। समय पर लेथ (रबी की एक प्रमुख फसल) की बुवाई न हो पाने के कारण अब सरसों की फसल पर फंगस जनित रोगों के हमले का खतरा मंडराने लगा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सतर्कता और उचित प्रबंधन नहीं किया गया, तो इस सीजन में किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। जलवायु परिवर्तन और विलंबित बुवाई: एक दोहरी मार इस साल मानसून के देरी से विदा होने और बेमौसम बारिश के चलते जनपद के बड़े हिस्से में लेथ की बुवाई समय पर नहीं हो पाई। इस विलंब का सीधा असर अब सरसों पर पड़ने वाला है। विशेषज्ञ बताते हैं कि देर से बोई गई फसलें अक्सर कमजोर होती हैं और उनमें रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। ऊपर से पिछले कुछ दिनों से दिन के तापमान में गिरावट और रात के समय कोहरे में बढ़ोतरी ने परिस्थितियों को और चिंताजनक बना दिया है। बढ़ता खतरा: झुलसा और सफेद रतुआ रोग कृषि विज्ञान केंद्र, मुजफ्फरनगर के एक वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक ने बताया, "वर्तमान में बढ़ी हुई नमी और कम तापमान का मिश्रण 'ऑल्टरनेरिया ब्लाइट' (झुलसा रोग) और 'व्हाइट रस्ट' (सफेद रतुआ) जैसे फंगस रोगों के लिए आदर्श स्थिति है। ये रोग पत्तियों, तनों और फलियों पर हमला करते हैं, जिससे पौधे की प्रकाश संश्लेषण की क्षमता कम हो जाती है और दाने ठीक से नहीं बन पाते। अगर रोकथाम न की गई, तो पैदावार में 30 से 50 प्रतिशत
तक की गिरावट आ सकती है।" किसानों की मुश्किलें और विभाग की सलाह जनपद के एक प्रगतिशील किसान सुरेंद्र सिंह ने बताया, "पहले ही बुवाई में देरी से चिंता थी, अब यह नया खतरा सामने आ गया है। कीटनाशकों का खर्च बढ़ेगा और मेहनत भी ज्यादा लगेगी।" इस चुनौती को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। इसमें फसल की नियमित निगरानी करने, शुरुआती लक्षण दिखते ही कवकनाशी दवाओं (जैसे कि मैंकोजेब या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव) का उपयोग करने और खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखने की सलाह दी गई है। साथ ही, संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन के प्रयोग पर जोर दिया गया है, क्योंकि अधिक नाइट्रोजन भी फंगस को बढ़ावा दे सकती है। जिले में कृषि संबंधी चुनौतियों का संदर्भ मुजफ्फरनगर जनपद में कृषि संबंधी मुद्दे नए नहीं हैं। इससे पहले भी सिंचाई विभाग द्वारा किए गए घटिया निर्माण कार्यों, जिसमें पांच दिन में उखड़ जाने वाली सड़क भी शामिल है, के कारण किसानों को सिंचाई सुविधाओं को लेकर दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। एक समाजसेवी द्वारा इन मुद्दों को उठाने के लिए भूख हड़ताल तक की गई थी। ऐसे में, फसलों पर रोगों का खतरा किसानों की मुश्किलों को और बढ़ा सकता है। क्या है समाधान का रास्ता? विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए दीर्घकालिक रणनीति पर काम करना होगा। शॉर्ट ड्यूरेशन और रोग प्रतिरोधी किस्मों के बीजों को बढ़ावा देना, जलवायु के अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाना और मौसम पूर्वानुमान के आधार पर किसानों को समय पर सलाह देना ही इसका समाधान है। अगर समय रहते सावधानी बरती गई, तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
- पुरकाजी / मुज़फ्फरनगर जिला पुलिस प्रशासन की मुहिम NO HELMET NO HIGHWAY के समर्थन में उतरे पुरकाजी नगर पंचायत अध्यक्ष जहीर फारुकी, सोशल मीडिया के माध्यम सें लोगों को किया जागरूक..1
- बड़ी खबर: मुज़फ़्फरनगर में कलेक्ट्रेट परिषर में बांग्लादेश में हुई निर्मम हत्या के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन! आज मुज़फ़्फरनगर के कलेक्ट्रेट परिसर में जय समता पार्टी के युवा और स्थानीय नागरिकों ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक युवक दीपू चंद्र दास की निर्मम हत्या के खिलाफ जमकर आवाज़ उठाई। उन्होंने दीपू चंद्र दास की श्रद्धांजलि दी और इंसाफ की कड़ी मांग की। प्रदर्शनकर्ताओं ने कहा कि मानवता की हत्या किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है और सीमा पार पर इसलिए भी हर तरह की अत्याचार की निंदा करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के हिमायती कानून और लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन नहीं हो रहा है। 🔹 घटना का सच: बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले के भालुका में 27 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास को भीड़ ने बेरहमी से पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया था। पहले फ़ैक्ट्री में उसके साथ विवाद हुआ, फिर उस पर इश्निंदा के झूठे आरोप लगाए गए और भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई। उसकी लिंचिंग और हत्या को लेकर अल्पसंख्यक संगठनों ने न्याय की मांग की है। प्रदर्शन में समाजसेवी और युवा संगठनों ने बांग्लादेश सरकार से दोषियों को कड़ी सजा देने और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने की अपील की। 🔹 प्रदर्शन में उठाए गए बड़े मुद्दे: • “मानवता की हत्या नहीं सहेंगे।” • “धर्म, जाति या समुदाय की वजह से किसी की जान नहीं ले सकते।” • “अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों के तहत दोषियों को दंडित करो।” • “भारत सरकार से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर कड़ा रुख अपनाने की मांग।”1
- मुजफ्फरनगर थाना बुढ़ाना पुलिस व अंतरराज्य शतिर लुटेरों के बीच मुठभेड़, मुठभेड़ में 25000 के इनामी शातिर लुटेरे गुलजार ( मामा) घायल सहित दो गिरफ्तार । बाईट SP RURAL श्री आदित्य बंसल ।1
- *आवश्यक सूचना-पुलिस मुठभेड* *थाना बुढाना पुलिस एवं बदमाशों के बीच मुठभेड जारी।1
- पुरकाजी विधानसभा क्षेत्र के रामपुर तिराहे पर हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय बजरंग दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. प्रवीण तोगड़िया का फूलमाला पहनाकर जोरदार स्वागत किया गया। इस दौरान जिला अध्यक्ष देशराज चौहान, नरेन्द्र पंवार आदि मौजूद रहे।3
- प्रदूषण विभाग की जाँच टीम के साथ ही पहुँचे किसान संगठन के सदस्य, मुजफ्फरनगर में मुद्दा गरम लखनऊ से आई टीम और क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी के साथ हुई मुठभेड़, किसान यूनियन ने किया मामला गरम मुजफ्फरनगर में प्रदूषण को लेकर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। बुधवार को लखनऊ से प्रदूषण नियंत्रण विभाग की एक विशेष निरीक्षण टीम मुजफ्फरनगर पहुँची। टीम के साथ क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी गीतेश चंद्रा भी मौजूद रहे। उनका उद्देश्य जिले में प्रदूषण संबंधी शिकायतों का स्थल पर निरीक्षण करना था। हालाँकि, जैसे ही टीम मूलचंद रिजॉर्ट पहुँची, भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के सदस्य भी वहाँ पहुँच गए। किसान संगठन के लोगों ने टीम के पीछे-पीछे चलकर अपनी माँगों को रखना शुरू किया और प्रदूषण नियंत्रण में हो रही कथित लापरवाही के खिलाफ आवाज उठाई। क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी गीतेश चंद्रा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, "लखनऊ से हमारी टीम निरीक्षण के लिए आई है। संगठन के लोगों का कहना है कि वे भी प्रदूषण के मुद्दे पर अपनी बात रखना चाहते हैं। हम उनकी चिंताओं को गंभीरता से ले रहे हैं और आवश्यक कार्रवाई करेंगे।" स्थानीय सूत्रों के अनुसार, किसान संगठन ने आरोप लगाया है कि जिले में औद्योगिक और कृषि प्रदूषण की समस्या गंभीर है, लेकिन प्रदूषण विभाग द्वारा पर्याप्त कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने टीम के सामने ठोस सबूत पेश करने की भी माँग की। इस घटना से जिले में प्रदूषण को लेकर चल रही बहस एक बार फिर गरमा गई है। अधिकारियों ने बताया कि निरीक्षण टीम अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएँगे। वहीं, किसान नेताों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे आंदोलन तेज कर देंगे।3
- मुज़फ्फरनगर पहुंचे हिंदू नेता प्रवीण तोगड़िया का ब्यान आया समाने! मुज़फ्फरनगर | बड़ी राजनीतिक बयानबाज़ी अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद के अध्यक्ष डॉ. प्रवीण तोगड़िया मंगलवार को मुज़फ्फरनगर पहुंचे, जहां उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान बांग्लादेश, लव जिहाद और जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर कड़े और विवादित बयान दिए। उनके बयानों के बाद सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है। डॉ. तोगड़िया ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार से सख्त रुख अपनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में लगातार हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है और भारत सरकार को अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाना चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे पर तीखे शब्दों में प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिसे लेकर राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर बहस छिड़ने की संभावना जताई जा रही है। लव जिहाद के सवाल पर डॉ. तोगड़िया ने कहा कि वह इसे एक “गंभीर सामाजिक बीमारी” मानते हैं और दावा किया कि उनकी संस्था हिंदू बेटियों को इससे बचाने के लिए अभियान चला रही है। उन्होंने समाज से एकजुट होकर ऐसे मामलों का विरोध करने की अपील की। जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर डॉ. तोगड़िया ने सख्त कानून की वकालत करते हुए कहा कि दो से अधिक बच्चों के मामले में सरकारी सुविधाओं से जुड़े प्रतिबंधों पर विचार होना चाहिए। उनके इस बयान पर कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया आना तय मानी जा रही है। इसके अलावा, डॉ. तोगड़िया ने मुज़फ्फरनगर में बड़े स्तर पर हनुमान चालीसा पाठ अभियान चलाने की घोषणा की और इसे सामाजिक एकजुटता व सेवा से जोड़ा। डॉ. तोगड़िया के इन बयानों को लेकर जहां उनके समर्थकों में उत्साह देखा गया, वहीं विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने इसे उकसाऊ और विभाजनकारी बताते हुए आलोचना की है। प्रशासनिक स्तर पर फिलहाल स्थिति पर नजर रखे जाने की बात कही जा रही है। 👉 नोट: यह रिपोर्ट सार्वजनिक मंच पर दिए गए बयानों पर आधारित है। विभिन्न मुद्दों पर आगे राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और कानूनी पक्ष सामने आने की संभावना है।1
- मुज़फ्फरनगर से होकर बहने वाली काली नदी की हालत लगातार बदतर होती जा रही है। सामने आए ताज़ा दृश्य साफ़ दिखाते हैं कि नदी में प्लास्टिक, घरेलू कूड़ा, गंदा नाला पानी और अन्य अपशिष्ट खुलेआम डाला जा रहा है। कभी क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली यह नदी आज बदबू और प्रदूषण का केंद्र बन चुकी है। नदी किनारे बसे इलाकों के लोगों का कहना है कि गंदगी के कारण स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ गया है। मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है और बीमारियों की आशंका बनी हुई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि नगर पालिका, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित विभाग इस हालात पर चुप क्यों हैं। जनता मांग कर रही है कि जिलाधिकारी और प्रशासन तुरंत संज्ञान लें, नदी में गिरने वाले अवैध नालों पर रोक लगे और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। काली नदी को बचाना सिर्फ ज़रूरत नहीं, जिम्मेदारी है। Bhai1
- जनपद मुजफ्फरनगर की बुढाना तहसील क्षेत्र के अंतर्गत गांव फुगाना में बने शौचालय को लेकर सुबह के समय महिला कर्मचारी द्वारा शौचालय के सामने अपना फोटो खिंचवाकर खंड विकास अधिकारी कार्यालय के ग्रुप पर डाल देती है फिर उसके बाद ताला लगाकर सुबह से शाम तक गुम रहती है, और सरकार द्वारा जगह-जगह बने शौचालय में नौकरी पर रखकर तनख्वा देते नजर आ रहे हैं मैं सरकार के स्वच्छता अभियान को भी पलीता लगाया जा रहा है, ग्रामीण द्वारा उपजिलाधिकारी को शिकायत करने के बाद भी नहीं हुई कार्यवाही, आप साफ-साफ तौर पर वीडियो में देख सकते हो किस तरीके से शौचालय का ताला लगा हुआ है।।1