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पश्चिम बंगाल के सोनारपुर में सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले को अत्यंत निंदनीय और लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताया गया है। इस घटना की कड़ी आलोचना की गई है, जिसमें एक जनप्रतिनिधि पर पत्थर और अंडे फेंकने के साथ-साथ शारीरिक हमला भी किया गया। स्पष्ट किया गया है कि राजनीतिक मतभेदों को सुलझाने का तरीका हिंसा बिल्कुल नहीं हो सकता। यह भी रेखांकित किया गया है कि लोकतंत्र सभी को अपनी असहमति व्यक्त करने का अधिकार देता है, लेकिन किसी जनप्रतिनिधि पर इस तरह का शारीरिक हमला या वस्तुएँ फेंकना कतई स्वीकार्य नहीं है। इसलिए, यह मांग की गई है कि इस घटना के दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था सुरक्षित रह सके और कोई भी व्यक्ति भविष्य में कानून को अपने हाथ में लेने की हिम्मत न कर पाए।
BIRSA SOY
पश्चिम बंगाल के सोनारपुर में सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले को अत्यंत निंदनीय और लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताया गया है। इस घटना की कड़ी आलोचना की गई है, जिसमें एक जनप्रतिनिधि पर पत्थर और अंडे फेंकने के साथ-साथ शारीरिक हमला भी किया गया। स्पष्ट किया गया है कि राजनीतिक मतभेदों को सुलझाने का तरीका हिंसा बिल्कुल नहीं हो सकता। यह भी रेखांकित किया गया है कि लोकतंत्र सभी को अपनी असहमति व्यक्त करने का अधिकार देता है, लेकिन किसी जनप्रतिनिधि पर इस तरह का शारीरिक हमला या वस्तुएँ फेंकना कतई स्वीकार्य नहीं है। इसलिए, यह मांग की गई है कि इस घटना के दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था सुरक्षित रह सके और कोई भी व्यक्ति भविष्य में कानून को अपने हाथ में लेने की हिम्मत न कर पाए।
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- कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) ने 30 मई 2026 को "Mission LiFE" के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय व्याख्यान तथा वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम पर्यावरण संकट के विषय पर केंद्रित था, जिसका मुख्य उद्देश्य युवाओं में पर्यावरण संरक्षण, हरित जीवनशैली और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. सुनीता कुमारी, प्रभारी विभागाध्यक्ष, भूगोल विभाग, कोल्हान विश्वविद्यालय ने पर्यावरण संकट, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन और पर्यावरण संरक्षण हेतु जनभागीदारी की आवश्यकता पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने सभी से "प्लास्टिक को ना कहने और शून्य प्रदूषण के सृजनकर्ता बनने" का आह्वान किया। उनके व्याख्यान के बाद, उपस्थित प्रतिभागियों ने 'Mission LiFE' के पाँच प्रमुख संकल्प बिंदुओं को अपनाने की शपथ ली। इन संकल्पों में ऊर्जा की बचत व जल संरक्षण को बढ़ावा देना, सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग बंद करना, स्वच्छता व कचरा प्रबंधन को जीवनशैली का हिस्सा बनाना, पर्यावरण अनुकूल व टिकाऊ जीवनशैली अपनाना और वृक्षारोपण व जैव विविधता संरक्षण के लिए सक्रिय योगदान देना शामिल है। इस अवसर पर माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) अंजिला गुप्ता ने अपनी शुभकामनाएँ भेजीं और सभी सदस्यों, शिक्षकों व विद्यार्थियों को "एक व्यक्ति–एक पौधा" अभियान अपनाने तथा अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. परशुराम सियाल, डीन, सामाजिक विज्ञान संकाय, कोल्हान विश्वविद्यालय ने युवाओं को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक व जिम्मेदार बनने का संदेश दिया। उन्होंने जोर दिया कि वृक्षारोपण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। कार्यक्रम के तहत विश्वविद्यालय परिसर में वृक्षारोपण भी किया गया, जिसमें राष्ट्रीय सेवा योजना के 100 पीजी स्वयंसेवकों ने सक्रियता से भाग लिया। वृक्षारोपण के दौरान कुलसचिव डॉ. रंजीत कुमार कर्ण ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे केवल पौधे लगाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी न मानें, बल्कि पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान उनकी देखभाल भी करें। इस पूरे कार्यक्रम का संयोजन डॉ. मीनाक्षी मुंडा, निदेशक, राष्ट्रीय सेवा योजना, कोल्हान विश्वविद्यालय ने किया, जबकि डॉ. जैक्लिन तिर्की, कार्यक्रम पदाधिकारी, राष्ट्रीय सेवा योजना और सहायक प्राध्यापक डॉ. कंचन कच्छप ने सह-संयोजक के रूप में इसके सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम में डॉ. तनुजा मोहंती, सहायक प्राध्यापक, भूविज्ञान विभाग; जुरा बारी, शिक्षण सहायक, मानवशास्त्र विभाग; रोहित कुड़ादा, शिक्षण सहायक, भूगोल विभाग और पीएच.डी. शोधार्थीगण सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन डॉ. कंचन कच्छप द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने मुख्य अतिथि, वक्ता, विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों, स्वयंसेवकों और सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।1
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