कुमावत समाज की हुंकार: राजनीतिक उपेक्षा पर आक्रोश, मांगों को लेकर उग्र आंदोलन की चेतावनी बुंदी/ राजस्थान क्षत्रिय कुमावत युवाशक्ति समिति ने समाज के राजनीतिक इस्तेमाल और लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समिति ने स्पष्ट किया है कि कुमावत समाज अपनी स्वतंत्र पहचान और अधिकारों के लिए अब किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगा। प्रदेश अध्यक्ष घनश्याम साबलिया ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि कुछ नेता अपने राजनीतिक लाभ के लिए समाज का उपयोग कर रहे हैं, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुमावत समाज एक स्वतंत्र जाति है, जिसका मुख्य कार्य भवन निर्माण, शिल्पकला और निर्माण कार्य है। जातीय जनगणना में भी समाज की अलग पहचान सुनिश्चित की जानी चाहिए। सरकार के समक्ष रखी गई 5 मुख्य मांगें: समिति ने सरकार के सामने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट करते हुए निम्नलिखित बिंदुओं पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है: स्थापत्य कला बोर्ड का पुनर्गठन: समाज की शिल्पकला को संरक्षण देने के लिए स्थापत्य कला बोर्ड का गठन पुनः किया जाए। जातीय जनगणना में पृथक कॉलम: जातीय जनगणना के दौरान कुमावत जाति के लिए अलग से कॉलम निर्धारित हो, ताकि समाज की सही संख्यात्मक स्थिति स्पष्ट हो सके। कारीगरों के लिए विशेष योजनाएं: भवन निर्माण और शिल्पकारी से जुड़े कारीगरों के आर्थिक उत्थान के लिए अलग से कल्याणकारी योजनाएं बनाई जाएं। सिलिकोसिस पीड़ितों को तत्काल सहायता: शिल्पकला के कार्य के दौरान सिलिकोसिस जैसी घातक बीमारी से पीड़ित कामगारों को बिना विलंब सरकारी सहायता और उपचार मिले। बोर्ड अध्यक्ष की नियुक्ति: स्थापत्य कला बोर्ड के अध्यक्ष का चयन तुरंत प्रभाव से किया जाए ताकि बोर्ड सुचारू रूप से कार्य कर सके। आगामी चुनावों में दिखेगा असर प्रदेश अध्यक्ष साबलिया ने कहा कि यदि सरकार इन मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लेती है, तो राजस्थान क्षत्रिय कुमावत युवाशक्ति समिति पूरे प्रदेश में जिला स्तर पर धरना-प्रदर्शन और उग्र आंदोलन करेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समाज के जो नेता सरकार में बैठे हैं, उन्हें भी समाज की नाराजगी झेलनी होगी। समिति ने ऐलान किया है कि आगामी पंचायत एवं निकाय चुनावों में कुमावत समाज एकजुट होकर सरकार को अपनी ताकत का अहसास कराएगा और उसे 'आईना' दिखाने का काम करेगा। "कुमावत जाति का किसी दूसरी जाति से कोई संबंध नहीं है, यह एक स्वतंत्र पहचान है। हम अपने अधिकारों से वंचित नहीं रहेंगे।" — घनश्याम साबलिया, प्रदेश अध्यक्ष
कुमावत समाज की हुंकार: राजनीतिक उपेक्षा पर आक्रोश, मांगों को लेकर उग्र आंदोलन की चेतावनी बुंदी/ राजस्थान क्षत्रिय कुमावत युवाशक्ति समिति ने समाज के राजनीतिक इस्तेमाल और लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समिति ने स्पष्ट किया है कि कुमावत समाज अपनी स्वतंत्र पहचान और अधिकारों के लिए अब किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगा। प्रदेश अध्यक्ष घनश्याम साबलिया ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि कुछ नेता अपने राजनीतिक लाभ के लिए समाज का उपयोग कर रहे हैं, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुमावत समाज एक स्वतंत्र जाति है, जिसका मुख्य कार्य भवन निर्माण, शिल्पकला और निर्माण कार्य है। जातीय जनगणना में भी समाज की अलग पहचान सुनिश्चित की जानी चाहिए। सरकार के समक्ष रखी गई 5 मुख्य मांगें: समिति ने सरकार के सामने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट करते हुए निम्नलिखित बिंदुओं पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है: स्थापत्य कला बोर्ड का पुनर्गठन: समाज की शिल्पकला को संरक्षण देने के लिए स्थापत्य कला बोर्ड का गठन पुनः किया जाए। जातीय जनगणना में पृथक कॉलम: जातीय जनगणना के दौरान कुमावत जाति के लिए अलग से कॉलम निर्धारित हो, ताकि समाज की सही संख्यात्मक स्थिति स्पष्ट हो सके। कारीगरों के लिए विशेष योजनाएं: भवन निर्माण और शिल्पकारी से जुड़े कारीगरों के आर्थिक उत्थान के लिए अलग से कल्याणकारी योजनाएं बनाई जाएं। सिलिकोसिस पीड़ितों को तत्काल सहायता: शिल्पकला के कार्य के दौरान सिलिकोसिस जैसी घातक बीमारी से पीड़ित कामगारों को बिना विलंब सरकारी सहायता और उपचार मिले। बोर्ड अध्यक्ष की नियुक्ति: स्थापत्य कला बोर्ड के अध्यक्ष का चयन तुरंत प्रभाव से किया जाए ताकि बोर्ड सुचारू रूप से कार्य कर सके। आगामी चुनावों में दिखेगा असर प्रदेश अध्यक्ष साबलिया ने कहा कि यदि सरकार इन मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लेती है, तो राजस्थान क्षत्रिय कुमावत युवाशक्ति समिति पूरे प्रदेश में जिला स्तर पर धरना-प्रदर्शन और उग्र आंदोलन करेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समाज के जो नेता सरकार में बैठे हैं, उन्हें भी समाज की नाराजगी झेलनी होगी। समिति ने ऐलान किया है कि आगामी पंचायत एवं निकाय चुनावों में कुमावत समाज एकजुट होकर सरकार को अपनी ताकत का अहसास कराएगा और उसे 'आईना' दिखाने का काम करेगा। "कुमावत जाति का किसी दूसरी जाति से कोई संबंध नहीं है, यह एक स्वतंत्र पहचान है। हम अपने अधिकारों से वंचित नहीं रहेंगे।" — घनश्याम साबलिया, प्रदेश अध्यक्ष
- Post by Vijay sain Bundi1
- ऐसे अध्यापक और वार्ड पार्षद हर क्षेत्र में होने चाहिए1
- Post by Yashpal sen1
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- बूंदी जिले के एक कस्बे में जोरदार आंधी तूफान बरसात में एक शादी बर्बाद कर दी1
- कोटा विकास प्राधिकरण की अतिक्रमण निरोधक टीम ने मंगलवार को शहर में बड़ी कार्रवाई करते हुए जवाहर नगर डिस्ट्रिक्ट सेंटर में सड़क सीमा में लगे ठेले-थड़ियों को हटाया, पुलिस कंट्रोल रूम के सामने सार्वजनिक शौचालय के पास से अतिक्रमण साफ कराया और कृष्णा नगर रंगबाड़ी क्षेत्र में सड़क सीमा में बनाई गई दीवार को हटाकर रास्ता खुलवाया। यह अभियान दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक चला, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस जाप्ते की मौजूदगी में कार्रवाई को अंजाम दिया गया।1
- कोटा में तीन मंजिला मकान भरभराकर गिर गया। घटना गुमानपुरा थाना क्षेत्र के बल्लभबाड़ी स्थित घोसी मोहल्ला की है। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। मौके पर लोगों की भीड़ लग गई। सूचना पर पुलिस और प्रशासन की टीम में मौके पर पहुंची।डीएसपी योगेश शर्मा ने बताया कि घटना मंगलवार शाम लगभग साढ़े 4 बजे की है। मकान में रिपेयरिंग का काम चल रहा था। अचानक से मकान ढह गया। फिलहाल जनहानि की सूचना नहीं है। फिर भी एहतियातन रेस्क्यू अभियान चलाया है। डॉग स्क्वॉड को भी मौके पर बुलाया है।1
- Post by Vijay sain Bundi1