logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

iran powercity in the depth of earth above 500 meters.granite हालिया मध्य-पूर्व के तनावों के बीच, ईरान के भूमिगत सैन्य ठिकानों, जिन्हें 'मिसाइल सिटीज़' (Missile Cities) कहा जाता है, ने पूरी दुनिया के सैन्य विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। इस इन्फोग्राफिक को ध्यान से देखें। यह महज़ एक कल्पना नहीं, बल्कि ईरान की रणनीतिक गहराई (Strategic Depth) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। आखिर क्यों इन ठिकानों को तबाह करना नामुमकिन के बराबर माना जाता है? आइए ग्राफिक के ज़रिए इसके विज्ञान और भूगोल को समझते हैं: ⛰️ 1. ग्रेनाइट का कुदरती कवच: यह बेस महज़ मिट्टी में नहीं खुदा है। यह 'शिरकुह' (Shirkuh) जैसे पहाड़ों की सख्त ग्रेनाइट चट्टानों के नीचे स्थित है। ग्रेनाइट दुनिया के सबसे कठोर पत्थरों में से एक है। यह ऊपर होने वाले भीषण धमाकों के कंपन (Shockwaves) को सोख लेता है, जिससे नीचे मौजूद मिसाइलें सुरक्षित रहती हैं। 👇 2. अथाह गहराई (500 मीटर): ग्राफिक में बाईं ओर लगे स्केल को देखें। यह बेस 500 मीटर (आधा किलोमीटर) की गहराई पर है! तुलना के लिए: अमेरिका का सबसे शक्तिशाली 'बंकर बस्टर' बम (GBU-57 MOP) भी अधिकतम 60 मीटर तक ही भेद सकता है। यानी यह बेस अमेरिकी बमों की पहुँच से 8 गुना ज़्यादा गहरा है। 🔄 3. ऑटोमेटेड 'किल चेन': यह सिर्फ़ एक गोदाम नहीं है। जैसा कि ग्राफिक के निचले हिस्से में लाल तीरों से दिखाया गया है, यहाँ रेल पटरियों और सुरंगों का एक जटिल नेटवर्क है। • रोबोटिक आर्म्स स्वचालित रूप से मिसाइलों को लोड करती हैं। • पलक झपकते ही मिसाइल लॉन्च पैड पर पहुँचती है और दाग दी जाती है। यह त्वरित रिलोडिंग क्षमता ईरान को भारी गोलाबारी करने की शक्ति देती है। 🚛 4. पूरी तरह आत्मनिर्भर शहर: इन्फोग्राफिक के सबसे निचले हिस्से में 'सुरक्षित और स्वतंत्र आपूर्ति श्रृंखला' को देखें। इन सुरंगों के अंदर ही हथियारों को असेंबल करने, स्टोर करने और ट्रांसपोर्ट करने की पूरी व्यवस्था है। यदि सतह पर युद्ध छिड़ता है और बाहरी सप्लाई कट जाती है, तब भी यह 'अंडरग्राउंड सिटी' महीनों तक काम करती रह सकती है। 🚀 GeoChapter टेक: भौगोलिक बनावट (Geography) और इंजीनियरिंग का यह संगम ईरान को एक ऐसी 'अभेद्य ढाल' प्रदान करता है, जिसे भेदना इज़राइल या अमेरिका जैसी आधुनिक सेनाओं के लिए भी एक बहुत बड़ी सैन्य चुनौती है। यह दिखाता है कि कैसे भूगोल, युद्ध की रणनीति को बदल सकता है। आपको क्या लगता है, क्या आधुनिक तकनीक इस तरह के प्राकृतिक किलों को कभी भेद पाएगी? अपने विचार कमेंट्स में साझा करें! 👇 #GeoChapter #Geopolitics #Iran #MissileCity #MilitaryEngineering #Defense #IranWar #MiddleEastCrisis #InternationalRelations #IsraelIranConflict #Trump #StrategicDepth #MiddleEastConflict

22 hrs ago
user_INDIA TIMES NEWS AGENCY SDR Riyaj khan journalist
INDIA TIMES NEWS AGENCY SDR Riyaj khan journalist
इटवा, सिद्धार्थ नगर, उत्तर प्रदेश•
22 hrs ago
6065ff62-87d8-47ba-91b1-c332776504a4

iran powercity in the depth of earth above 500 meters.granite हालिया मध्य-पूर्व के तनावों के बीच, ईरान के भूमिगत सैन्य ठिकानों, जिन्हें 'मिसाइल सिटीज़' (Missile Cities) कहा जाता है, ने पूरी दुनिया के सैन्य विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। इस इन्फोग्राफिक को ध्यान से देखें। यह महज़ एक कल्पना नहीं, बल्कि ईरान की रणनीतिक गहराई (Strategic Depth) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। आखिर क्यों इन ठिकानों को तबाह करना नामुमकिन के बराबर माना जाता है? आइए ग्राफिक के ज़रिए इसके विज्ञान और भूगोल को समझते हैं: ⛰️ 1. ग्रेनाइट का कुदरती कवच: यह बेस महज़ मिट्टी में नहीं खुदा है। यह 'शिरकुह' (Shirkuh) जैसे पहाड़ों की सख्त ग्रेनाइट चट्टानों के नीचे स्थित है। ग्रेनाइट दुनिया के सबसे कठोर पत्थरों में से एक है। यह ऊपर होने वाले भीषण धमाकों के कंपन (Shockwaves) को सोख लेता है, जिससे नीचे मौजूद मिसाइलें सुरक्षित रहती हैं। 👇 2. अथाह गहराई (500 मीटर): ग्राफिक में बाईं ओर लगे स्केल को देखें। यह बेस 500 मीटर (आधा किलोमीटर) की गहराई पर है! तुलना के लिए: अमेरिका का सबसे शक्तिशाली 'बंकर बस्टर' बम (GBU-57 MOP) भी अधिकतम 60 मीटर तक ही भेद सकता है। यानी यह बेस अमेरिकी बमों की पहुँच से 8 गुना ज़्यादा गहरा है। 🔄 3. ऑटोमेटेड 'किल चेन': यह सिर्फ़ एक गोदाम नहीं है। जैसा कि ग्राफिक के निचले हिस्से में लाल तीरों से दिखाया गया है, यहाँ रेल पटरियों और सुरंगों का एक जटिल नेटवर्क है। • रोबोटिक आर्म्स स्वचालित रूप से मिसाइलों को लोड करती हैं। • पलक झपकते ही मिसाइल लॉन्च पैड पर पहुँचती है और दाग दी जाती है। यह त्वरित रिलोडिंग क्षमता ईरान को भारी गोलाबारी करने की शक्ति देती है। 🚛 4. पूरी तरह आत्मनिर्भर शहर: इन्फोग्राफिक के सबसे निचले हिस्से में 'सुरक्षित और स्वतंत्र आपूर्ति श्रृंखला' को देखें। इन सुरंगों के अंदर ही हथियारों को असेंबल करने, स्टोर करने और ट्रांसपोर्ट करने की पूरी व्यवस्था है। यदि सतह पर युद्ध छिड़ता है और बाहरी सप्लाई कट जाती है, तब भी यह 'अंडरग्राउंड सिटी' महीनों तक काम करती रह सकती है। 🚀 GeoChapter टेक: भौगोलिक बनावट (Geography) और इंजीनियरिंग का यह संगम ईरान को एक ऐसी 'अभेद्य ढाल' प्रदान करता है, जिसे भेदना इज़राइल या अमेरिका जैसी आधुनिक सेनाओं के लिए भी एक बहुत बड़ी सैन्य चुनौती है। यह दिखाता है कि कैसे भूगोल, युद्ध की रणनीति को बदल सकता है। आपको क्या लगता है, क्या आधुनिक तकनीक इस तरह के प्राकृतिक किलों को कभी भेद पाएगी? अपने विचार कमेंट्स में साझा करें! 👇 #GeoChapter #Geopolitics #Iran #MissileCity #MilitaryEngineering #Defense #IranWar #MiddleEastCrisis #InternationalRelations #IsraelIranConflict #Trump #StrategicDepth #MiddleEastConflict

More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • Post by Pramatma Prasad
    1
    Post by Pramatma Prasad
    user_Pramatma Prasad
    Pramatma Prasad
    Farmer बंसी, सिद्धार्थ नगर, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • सिद्धार्थनगर में जल जीवन मिशन के 'हर घर नल, हर घर जल' योजना के तहत कराए जा रहे कार्यों में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच जांच प्रक्रिया भी विवादों में घिर गई है। स्थानीय निवासियों की शिकायत पर गठित तीन सदस्यीय जांच टीम सोमवार, 30 मार्च को जांच के लिए पहुंची, लेकिन मौके पर हुई कार्रवाई ने पूरे प्रकरण को संदेह के घेरे में ला दिया। यह शिकायत मुख्य रूप से विकासखंड नौगढ़ के बेलवा सिरवत, बरगदवा पकड़ी, विकासखंड जोगिया के सेहुड़ा तथा विकासखंड शोहरतगढ़ के टेडिया कौवा, कपिया ग्रांट और अलिदापुर गांवों से संबंधित थी। इन गांवों में पाइपलाइन बिछाने और सड़क तोड़ने के कार्यों में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। जांच टीम में जल निगम विभाग के अपर अभियंता अवधेश कुमार, डीपीएमयू राजेश कुमार मिश्रा और डीपीएम अभिषेक शामिल थे। टीम सबसे पहले बेलवा गांव पहुंची, जहां इंटरलॉकिंग सड़क को खुदवाकर एचडीपीई पाइप की गहराई की जांच की गई। मौके पर पाइप की गहराई लगभग 33 इंच पाई गई, जबकि मानक के अनुसार इसे 40 इंच होना चाहिए था। इससे निर्माण कार्य में स्पष्ट लापरवाही सामने आई।
    1
    सिद्धार्थनगर में जल जीवन मिशन के 'हर घर नल, हर घर जल' योजना के तहत कराए जा रहे कार्यों में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच जांच प्रक्रिया भी विवादों में घिर गई है। स्थानीय निवासियों की शिकायत पर गठित तीन सदस्यीय जांच टीम सोमवार, 30 मार्च को जांच के लिए पहुंची, लेकिन मौके पर हुई कार्रवाई ने पूरे प्रकरण को संदेह के घेरे में ला दिया।
यह शिकायत मुख्य रूप से विकासखंड नौगढ़ के बेलवा सिरवत, बरगदवा पकड़ी, विकासखंड जोगिया के सेहुड़ा तथा विकासखंड शोहरतगढ़ के टेडिया कौवा, कपिया ग्रांट और अलिदापुर गांवों से संबंधित थी। इन गांवों में पाइपलाइन बिछाने और सड़क तोड़ने के कार्यों में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था।
जांच टीम में जल निगम विभाग के अपर अभियंता अवधेश कुमार, डीपीएमयू राजेश कुमार मिश्रा और डीपीएम अभिषेक शामिल थे। टीम सबसे पहले बेलवा गांव पहुंची, जहां इंटरलॉकिंग सड़क को खुदवाकर एचडीपीई पाइप की गहराई की जांच की गई। मौके पर पाइप की गहराई लगभग 33 इंच पाई गई, जबकि मानक के अनुसार इसे 40 इंच होना चाहिए था। इससे निर्माण कार्य में स्पष्ट लापरवाही सामने आई।
    user_Shashank Mishra
    Shashank Mishra
    Local News Reporter बंसी, सिद्धार्थ नगर, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जोगिया आँख के मरीजों के लिए निःशुल्क आँख का इलाज एवं चश्मा दिए जाने के लिए वार्ड निश्चित है! गरीब मजदूर किसानो को चश्मा नही दिया जाता है मरीज के मुताबिक जाँच के बाद चिकित्सक द्वारा बताया गया 400 रूपये लाइए चश्मा मिल जायेगा लेकिन ज़ब पैसा लेकर आँख का मरीज पंहुचा तो चिकित्सक यह कहकर भगा दिया कि जाइए चश्मा कही और बनवाइये यहां नही मिलेगा! सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जोगिया मे निःशुल्क मिलने वाली चश्मा का करना पड़ता है भुगतान ऐसे मे देखा जाए तो सरकारी अस्पताल मे भी करना होता है मरीजों को भुगतान!
    1
    सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जोगिया आँख के मरीजों के लिए निःशुल्क आँख का इलाज एवं चश्मा दिए जाने के लिए वार्ड निश्चित है!
गरीब मजदूर किसानो को चश्मा नही दिया जाता है मरीज के मुताबिक जाँच के बाद चिकित्सक द्वारा बताया गया 400 रूपये लाइए चश्मा मिल जायेगा लेकिन ज़ब पैसा लेकर आँख का मरीज पंहुचा तो चिकित्सक यह कहकर भगा दिया कि जाइए चश्मा कही और बनवाइये यहां नही मिलेगा!
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जोगिया मे निःशुल्क मिलने वाली चश्मा का करना पड़ता है भुगतान ऐसे मे देखा जाए तो सरकारी अस्पताल मे भी करना होता है मरीजों को भुगतान!
    user_Ravindra kumar Kashyap
    Ravindra kumar Kashyap
    नौगढ़, सिद्धार्थ नगर, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • Post by राम विलास वरुण जनता का सच हिंदी साप्ताहिक ख़बर पत्रकार
    1
    Post by राम विलास वरुण जनता का सच हिंदी साप्ताहिक ख़बर पत्रकार
    user_राम विलास वरुण जनता का सच हिंदी साप्ताहिक ख़बर पत्रकार
    राम विलास वरुण जनता का सच हिंदी साप्ताहिक ख़बर पत्रकार
    नौगढ़, सिद्धार्थ नगर, उत्तर प्रदेश•
    10 hrs ago
  • Post by Umesh Kumar
    1
    Post by Umesh Kumar
    user_Umesh Kumar
    Umesh Kumar
    नौगढ़, सिद्धार्थ नगर, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
  • #शिक्षा #जरूरी है #लेकिन ऐसे #अध्यापक नही ये #बच्चों के लिए #अभिशाप और #काल है #viralreelsviralfollower #nonfollowerviraltrendingvideo
    1
    #शिक्षा #जरूरी है #लेकिन ऐसे #अध्यापक नही ये #बच्चों के लिए #अभिशाप और #काल है 
#viralreelsviralfollower #nonfollowerviraltrendingvideo
    user_Janta ki awaz 647
    Janta ki awaz 647
    बलरामपुर, बलरामपुर, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • अजीत मिश्रा (खोजी) 🚨बस्ती: हरियाली पर 'आरा', जिम्मेदारों का 'सांत्वना' वाला खेल; बिना परमिट कट गए जामुन के पेड़!🚨 🌳वन विभाग की नाक के नीचे कटी लकड़ियां, रेंजर ने की जांच; पर 'मुकदमे' के लिए आखिर किस शुभ मुहूर्त का है इंतजार? 🌳बस्ती: रंगे हाथ पकड़े गए लकड़ी तस्कर, फिर भी FIR के नाम पर क्यों कांप रहे हैं जिम्मेदारों के हाथ? ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश स्थान: कप्तानगंज, बस्ती बस्ती। मुख्यमंत्री के 'मिशन पौधरोपण' को पलीता लगाने वाले लकड़ी तस्करों के हौसले कप्तानगंज रेंज में बुलंद हैं। ताजा मामला ग्राम पंचायत फरेंदा सेंगर के राजस्व गांव भैरोपुर का है, जहां लकड़ी ठेकेदार ने बेखौफ होकर प्रतिबंधित हरे जामुन के पेड़ों पर बिना किसी वैध परमिट के आरा चलवा दिया। ताज्जुब की बात यह है कि जब तक वन विभाग की 'नींद' खुली, तब तक हरियाली जमींदोज हो चुकी थी। 🔔ठेकेदार की दबंगई या विभाग की ढिलाई? सूत्रों के मुताबिक, महुलानी निवासी लकड़ी ठेकेदार गया प्रसाद शर्मा ने नियमों को ताक पर रखकर भैरोपुर में जामुन के दो हरे पेड़ों को बिना परमिट के कटवा दिया। सूचना जंगल की आग की तरह फैली, तब जाकर रेंजर राजू प्रसाद ने मामले का संज्ञान लिया और आनन-फानन में टीम को मौके पर भेजा। 🔔जांच में खुली पोल, रंगे हाथ मिली लकड़ी रेंजर के निर्देश पर पहुंची वन विभाग की टीम को मौके पर चार हरे पेड़ों के अवशेष मिले। विभाग का दावा है कि इनमें से दो पेड़ 'छूट' की श्रेणी के थे, लेकिन 02 जामुन के पेड़ पूरी तरह अवैध रूप से काटे गए थे। बाद में उड़ाका दल (Flying Squad) ने भी घटनास्थल का मुआयना किया और कार्रवाई का कोरम पूरा करते हुए 'आश्वासन' का झुनझुना थमा दिया। 🔔मुकदमे के नाम पर 'कल' का इंतजार क्यों? बड़ा सवाल यह है कि जब अपराध मौके पर सिद्ध हो चुका है और लकड़ियां बरामद हैं, तो खबर लिखे जाने तक ठेकेदार गया प्रसाद शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया गया? आखिर विभाग को किस 'शुभ मुहूर्त' का इंतजार है? क्या सिस्टम किसी दबाव में है या फिर लकड़ी तस्करों के साथ कोई 'भीतरी सेटिंग' चल रही है? 👉प्रशासन और विभाग के लिए कड़वे सवाल: ⭐मुकदमे में देरी क्यों? – जब रेंजर और उड़ाका दल ने मौके पर जाकर पुष्टि कर दी कि 02 जामुन के पेड़ बिना परमिट के अवैध रूप से काटे गए हैं, तो लकड़ी ठेकेदार गया प्रसाद शर्मा के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज क्यों नहीं की गई? क्या किसी रसूखदार का दबाव है? ⭐वन विभाग की सतर्कता पर सवाल? – बिना परमिट के हरे पेड़ों पर आरा चल गया और लकड़ियां कटकर तैयार हो गईं, तब जाकर विभाग को 'सूत्रों' से सूचना मिली। क्या कप्तानगंज रेंज के बीट कर्मियों की कोई मिलीभगत है या वे अपने क्षेत्र की सुरक्षा में पूरी तरह फेल हैं? ⭐ठेकेदार पर मेहरबानी क्यों? – महुलानी निवासी ठेकेदार द्वारा सरेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। क्या विभाग सिर्फ 'आश्वासन' का खेल खेलकर मामले को ठंडा करना चाहता है, या इस बार कोई ऐसी ठोस कार्रवाई होगी जो नजीर बने? ⭐अवैध कटान की भरपाई कैसे? – मुख्यमंत्री जी एक तरफ 'मिशन पौधरोपण' चला रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ माफिया फलदार और प्रतिबंधित पेड़ों को काट रहे हैं। विभाग इन कटे हुए पेड़ों की क्षतिपूर्ति और पर्यावरण को हुए नुकसान की वसूली कैसे करेगा? ⭐उड़ाका दल की भूमिका? – उड़ाका दल (Flying Squad) मौके पर पहुंचा, जांच भी की, लेकिन क्या उनका काम सिर्फ मौके का मुआयना करना है? अब तक ठेकेदार की मशीनों या लकड़ी को जब्त करने की प्रक्रिया में इतनी सुस्ती क्यों दिखाई जा रही है? वन विभाग की टीम का कहना है कि मुकदमा कल दर्ज किया जा सकता है। अब देखना यह होगा कि कप्तानगंज वन रेंज के अधिकारी इन 'पर्यावरण के दुश्मनों' पर सख्त कार्रवाई करते हैं या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है।
    1
    अजीत मिश्रा (खोजी)
🚨बस्ती: हरियाली पर 'आरा', जिम्मेदारों का 'सांत्वना' वाला खेल; बिना परमिट कट गए जामुन के पेड़!🚨
🌳वन विभाग की नाक के नीचे कटी लकड़ियां, रेंजर ने की जांच; पर 'मुकदमे' के लिए आखिर किस शुभ मुहूर्त का है इंतजार?
🌳बस्ती: रंगे हाथ पकड़े गए लकड़ी तस्कर, फिर भी FIR के नाम पर क्यों कांप रहे हैं जिम्मेदारों के हाथ?
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश स्थान: कप्तानगंज, बस्ती
बस्ती। मुख्यमंत्री के 'मिशन पौधरोपण' को पलीता लगाने वाले लकड़ी तस्करों के हौसले कप्तानगंज रेंज में बुलंद हैं। ताजा मामला ग्राम पंचायत फरेंदा सेंगर के राजस्व गांव भैरोपुर का है, जहां लकड़ी ठेकेदार ने बेखौफ होकर प्रतिबंधित हरे जामुन के पेड़ों पर बिना किसी वैध परमिट के आरा चलवा दिया। ताज्जुब की बात यह है कि जब तक वन विभाग की 'नींद' खुली, तब तक हरियाली जमींदोज हो चुकी थी।
🔔ठेकेदार की दबंगई या विभाग की ढिलाई?
सूत्रों के मुताबिक, महुलानी निवासी लकड़ी ठेकेदार गया प्रसाद शर्मा ने नियमों को ताक पर रखकर भैरोपुर में जामुन के दो हरे पेड़ों को बिना परमिट के कटवा दिया। सूचना जंगल की आग की तरह फैली, तब जाकर रेंजर राजू प्रसाद ने मामले का संज्ञान लिया और आनन-फानन में टीम को मौके पर भेजा।
🔔जांच में खुली पोल, रंगे हाथ मिली लकड़ी
रेंजर के निर्देश पर पहुंची वन विभाग की टीम को मौके पर चार हरे पेड़ों के अवशेष मिले। विभाग का दावा है कि इनमें से दो पेड़ 'छूट' की श्रेणी के थे, लेकिन 02 जामुन के पेड़ पूरी तरह अवैध रूप से काटे गए थे। बाद में उड़ाका दल (Flying Squad) ने भी घटनास्थल का मुआयना किया और कार्रवाई का कोरम पूरा करते हुए 'आश्वासन' का झुनझुना थमा दिया।
🔔मुकदमे के नाम पर 'कल' का इंतजार क्यों?
बड़ा सवाल यह है कि जब अपराध मौके पर सिद्ध हो चुका है और लकड़ियां बरामद हैं, तो खबर लिखे जाने तक ठेकेदार गया प्रसाद शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया गया? आखिर विभाग को किस 'शुभ मुहूर्त' का इंतजार है? क्या सिस्टम किसी दबाव में है या फिर लकड़ी तस्करों के साथ कोई 'भीतरी सेटिंग' चल रही है?
👉प्रशासन और विभाग के लिए कड़वे सवाल:
⭐मुकदमे में देरी क्यों? – जब रेंजर और उड़ाका दल ने मौके पर जाकर पुष्टि कर दी कि 02 जामुन के पेड़ बिना परमिट के अवैध रूप से काटे गए हैं, तो लकड़ी ठेकेदार गया प्रसाद शर्मा के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज क्यों नहीं की गई? क्या किसी रसूखदार का दबाव है?
⭐वन विभाग की सतर्कता पर सवाल? – बिना परमिट के हरे पेड़ों पर आरा चल गया और लकड़ियां कटकर तैयार हो गईं, तब जाकर विभाग को 'सूत्रों' से सूचना मिली। क्या कप्तानगंज रेंज के बीट कर्मियों की कोई मिलीभगत है या वे अपने क्षेत्र की सुरक्षा में पूरी तरह फेल हैं?
⭐ठेकेदार पर मेहरबानी क्यों? – महुलानी निवासी ठेकेदार द्वारा सरेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। क्या विभाग सिर्फ 'आश्वासन' का खेल खेलकर मामले को ठंडा करना चाहता है, या इस बार कोई ऐसी ठोस कार्रवाई होगी जो नजीर बने?
⭐अवैध कटान की भरपाई कैसे? – मुख्यमंत्री जी एक तरफ 'मिशन पौधरोपण' चला रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ माफिया फलदार और प्रतिबंधित पेड़ों को काट रहे हैं। विभाग इन कटे हुए पेड़ों की क्षतिपूर्ति और पर्यावरण को हुए नुकसान की वसूली कैसे करेगा?
⭐उड़ाका दल की भूमिका? – उड़ाका दल (Flying Squad) मौके पर पहुंचा, जांच भी की, लेकिन क्या उनका काम सिर्फ मौके का मुआयना करना है? अब तक ठेकेदार की मशीनों या लकड़ी को जब्त करने की प्रक्रिया में इतनी सुस्ती क्यों दिखाई जा रही है?
वन विभाग की टीम का कहना है कि मुकदमा कल दर्ज किया जा सकता है। अब देखना यह होगा कि कप्तानगंज वन रेंज के अधिकारी इन 'पर्यावरण के दुश्मनों' पर सख्त कार्रवाई करते हैं या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है।
    user_अजीत मिश्रा (खोजी)
    अजीत मिश्रा (खोजी)
    बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • जोगिया ब्लॉक के ग्राम पंचायत टिकरिया मे राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा कार्यक्रम को लेकर बैठक किया गया जिसमे उपस्थिति जन समुदाय को जागरूक किया गया!
    1
    जोगिया ब्लॉक के ग्राम पंचायत टिकरिया मे राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा कार्यक्रम को लेकर बैठक किया गया जिसमे उपस्थिति जन समुदाय को जागरूक किया गया!
    user_Ravindra kumar Kashyap
    Ravindra kumar Kashyap
    नौगढ़, सिद्धार्थ नगर, उत्तर प्रदेश•
    10 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.