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दिल्ली पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों से संयम बरतने और शांति व कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस का सहयोग करने की अपील की है। पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों से अनुरोध किया गया है कि वे अपना प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से करें। किसी भी प्रकार की गैर-कानूनी या हिंसक गतिविधि में शामिल न हों और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों द्वारा दिए गए कानूनी निर्देशों का पालन करें। इसके साथ ही, आम जनता को सलाह दी गई है कि वे किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चल रही अफवाहों, गलत और अपुष्ट जानकारियों पर विश्वास न करें और न ही उन्हें दूसरों के साथ साझा करें। पुलिस ने नागरिकों से केवल विश्वसनीय स्रोतों पर ही भरोसा करने और शांति, सद्भाव व कानून-व्यवस्था बनाए रखने में दिल्ली पुलिस का सहयोग करने का अनुरोध किया है।
JOURNALIST MOHD JUNAID
दिल्ली पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों से संयम बरतने और शांति व कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस का सहयोग करने की अपील की है। पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों से अनुरोध किया गया है कि वे अपना प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से करें। किसी भी प्रकार की गैर-कानूनी या हिंसक गतिविधि में शामिल न हों और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों द्वारा दिए गए कानूनी निर्देशों का पालन करें। इसके साथ ही, आम जनता को सलाह दी गई है कि वे किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चल रही अफवाहों, गलत और अपुष्ट जानकारियों पर विश्वास न करें और न ही उन्हें दूसरों के साथ साझा करें। पुलिस ने नागरिकों से केवल विश्वसनीय स्रोतों पर ही भरोसा करने और शांति, सद्भाव व कानून-व्यवस्था बनाए रखने में दिल्ली पुलिस का सहयोग करने का अनुरोध किया है।
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- उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में वर्ल्ड ब्रेन डे के अवसर पर मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल ने लोगों से अपनी ब्रेन हेल्थ के प्रति अधिक जागरूक रहने की अपील की है। अस्पताल के डॉक्टरों ने गंभीर चेतावनी दी है कि बदलती लाइफस्टाइल, लंबे समय से अनियंत्रित बीमारियां और इलाज में देरी होने के कारण न्यूरोलॉजिकल बीमारियां अब कम उम्र के लोगों को भी तेजी से प्रभावित कर रही हैं। पिछले पांच वर्षों में इन बीमारियों के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। तनाव, पर्याप्त नींद न लेना, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और बढ़ती उम्र इसके मुख्य जिम्मेदार कारक हैं। इसके अलावा, कोविड के बाद के समय में नसों से जुड़ी बीमारियों और कम उम्र के लोगों में स्ट्रोक के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी गई है। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ में न्यूरोलॉजी के सीनियर डायरेक्टर डॉ. अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि स्ट्रोक और न्यूरोलॉजिकल बीमारियां अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं हैं। अब 30 और 40 वर्ष की आयु के मरीज भी बड़ी संख्या में स्ट्रोक और नसों की समस्याओं के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान, तनाव, पर्याप्त नींद न लेना और शारीरिक गतिविधियों की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। हालांकि, उन्होंने राहत की बात यह भी बताई कि स्वस्थ लाइफस्टाइल, नियमित हेल्थ चेकअप और जोखिम वाले कारणों का समय पर इलाज करके लगभग 70 से 80 प्रतिशत स्ट्रोक के मामलों को रोका जा सकता है। उत्तर प्रदेश की स्थिति पर बात करते हुए डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि बेहतर नतीजों में सबसे बड़ी रुकावट समय पर इलाज की व्यवस्था न हो पाना है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के मरीज स्ट्रोक के शुरुआती संकेतों जैसे शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी आना, बोलने में परेशानी होना, चेहरे का एक तरफ झुक जाना या तेज सिरदर्द को नहीं पहचान पाते और महत्वपूर्ण समय सीमा निकल जाने के बाद अस्पताल पहुंचते हैं। डॉक्टरों ने लोगों को 'एफएएसटी' (FAST) सिद्धांत यानी चेहरा टेढ़ा होना (Face), हाथ में कमजोरी आना (Arm), बोलने में दिक्कत होना (Speech) और समय रहते अस्पताल पहुंचना (Time) के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी है। इसके साथ ही, जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय रोग है या जिनके परिवार में स्ट्रोक का इतिहास रहा है, उन्हें नियमित न्यूरोलॉजिकल स्क्रीनिंग कराने की सलाह दी गई है।3
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