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बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने दिवंगत बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के लखनऊ स्थित आवास पहुंचकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। लखनऊ बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने दिवंगत बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के लखनऊ स्थित आवास पहुंचकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने उमाशंकर सिंह के परिजनों से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त की।

3 hrs ago
user_Journalist prabhat kashyap
Journalist prabhat kashyap
Local News Reporter सदर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
3 hrs ago

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने दिवंगत बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के लखनऊ स्थित आवास पहुंचकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। लखनऊ बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने दिवंगत बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के लखनऊ स्थित आवास पहुंचकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने उमाशंकर सिंह के परिजनों से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त की।

More news from Lucknow and nearby areas
  • अधूरी नाली से बसहां में जलभराव, गंदगी और बीमारियों का खतरा"* _रामभरोस से अच्छे लाल निषाद के घर तक नाली बनी आगे धीरेंद्र कुमार दुबे के घर के पास नाला खोदकर छोड़ दिया, संचारी रोग अभियान की पोल खुली *सुलतानपुर।* विकासखंड दोस्तपुर की ग्राम पंचायत बसहां में अधूरे नाले के कारण ग्रामीणों का जीवन मुश्किल हो गया है। रामभरोस के घर से अच्छे लाल निषाद के घर तक नाली के आगे नाला खोदकर छोड़ दिया गया है। जिसके चलते बरसात में पूरे इलाके में जलभराव हो जाता है। *निकासी बंद, गांव बना तालाब* स्थानीय लोगों के अनुसार नाली का काम अधूरा छोड़ दिए जाने से पानी आगे नहीं निकल पाता। थोड़ी बारिश में ही घरों के सामने और रास्तों पर गंदा पानी भर जाता है। कीचड़ और बदबू के कारण लोगों का निकलना दुश्वार हो गया है। ग्रामीणों का कहना है, _"नाला बीच में ही बंद है। पानी आगे जाता ही नहीं। बरसात में घरों में पानी घुस जाता है और बच्चे-बुजुर्ग गिरकर चोटिल हो रहे हैं।"_ *संचारी रोग अभियान पर सवाल, बढ़ रही बीमारियां* एक तरफ सरकार संचारी रोग अभियान और स्वच्छता अभियान के तहत गांवों को रोगमुक्त करने का दावा कर रही है, वहीं बसहां में जलभराव और गंदगी के कारण डायरिया, बुखार, मलेरिया और त्वचा रोग जैसी बीमारियां बढ़ गई हैं। गंदे पानी से मच्छर पनप रहे हैं और दूषित माहौल से ग्रामीण परेशान हैं। *ग्रामवासियों का आरोप: जिम्मेदारों की लापरवाही* ग्रामीणों का आरोप है कि नाला निर्माण का काम शुरू कर बीच में ही छोड़ दिया गया। कई बार प्रधान और सचिव से शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी लापरवाही के कारण गांव में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। *मांग: जांच कर दोषियों पर कार्रवाई, नाला पूरा कराया जाए* पीड़ित ग्रामीणों ने बीडीओ दोस्तपुर और जिला प्रशासन से मांग की है कि बसहां में जलभराव का कारण पता कर संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। साथ ही रामभरोस से अच्छे लाल निषाद के घर के आगे निकासी का निर्माण तत्काल पूरा कराया जाए ताकि बरसात में लोगों को राहत मिल सके। इस संबंध में ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष नहीं मिल सका।
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    अधूरी नाली से बसहां में जलभराव, गंदगी और बीमारियों का खतरा"*  
_रामभरोस से अच्छे लाल निषाद के घर तक नाली बनी आगे धीरेंद्र कुमार दुबे के घर के पास नाला खोदकर छोड़ दिया, संचारी रोग अभियान की पोल खुली
*सुलतानपुर।* विकासखंड दोस्तपुर की ग्राम पंचायत बसहां में अधूरे नाले के कारण ग्रामीणों का जीवन मुश्किल हो गया है। रामभरोस के घर से अच्छे लाल निषाद के घर तक नाली के आगे नाला खोदकर छोड़ दिया गया है। जिसके चलते बरसात में पूरे इलाके में जलभराव हो जाता है। 
*निकासी बंद, गांव बना तालाब*  
स्थानीय लोगों के अनुसार नाली का काम अधूरा छोड़ दिए जाने से पानी आगे नहीं निकल पाता। थोड़ी बारिश में ही घरों के सामने और रास्तों पर गंदा पानी भर जाता है। कीचड़ और बदबू के कारण लोगों का निकलना दुश्वार हो गया है।  
ग्रामीणों का कहना है, _"नाला बीच में ही बंद है। पानी आगे जाता ही नहीं। बरसात में घरों में पानी घुस जाता है और बच्चे-बुजुर्ग गिरकर चोटिल हो रहे हैं।"_
*संचारी रोग अभियान पर सवाल, बढ़ रही बीमारियां*  
एक तरफ सरकार संचारी रोग अभियान और स्वच्छता अभियान के तहत गांवों को रोगमुक्त करने का दावा कर रही है, वहीं बसहां में जलभराव और गंदगी के कारण डायरिया, बुखार, मलेरिया और त्वचा रोग जैसी बीमारियां बढ़ गई हैं। गंदे पानी से मच्छर पनप रहे हैं और दूषित माहौल से ग्रामीण परेशान हैं।
*ग्रामवासियों का आरोप: जिम्मेदारों की लापरवाही*  
ग्रामीणों का आरोप है कि नाला निर्माण का काम शुरू कर बीच में ही छोड़ दिया गया। कई बार प्रधान और सचिव से शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी लापरवाही के कारण गांव में जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
*मांग: जांच कर दोषियों पर कार्रवाई, नाला पूरा कराया जाए*  
पीड़ित ग्रामीणों ने बीडीओ दोस्तपुर और जिला प्रशासन से मांग की है कि बसहां में जलभराव का कारण पता कर संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। साथ ही रामभरोस से अच्छे लाल निषाद के घर के आगे निकासी का निर्माण तत्काल पूरा कराया जाए ताकि बरसात में लोगों को राहत मिल सके।
इस संबंध में ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष नहीं मिल सका।
    user_क्राइम ब्यूरो लखनऊ उत्तर प्रदेश
    क्राइम ब्यूरो लखनऊ उत्तर प्रदेश
    Court reporter Sadar, Lucknow•
    1 hr ago
  • उत्तर प्रदेश में पहली बार लैब में तैयार सेल्स से यूरिथ्रल स्ट्रिक्चर का सफल इलाज, अपोलोमेडिक्स ने रचा इतिहास *उत्तर प्रदेश में पहली बार लैब में तैयार सेल्स से यूरिथ्रल स्ट्रिक्चर का सफल इलाज, अपोलोमेडिक्स ने रचा इतिहास* • सेल-आधारित यूरिथ्रल स्ट्रिक्चर सर्जरी, मरीज अगले दिन हुआ डिस्चार्ज • लैब में तैयार 50 लाख सेल्स से यूरिथ्रल स्ट्रिक्चर का सफल उपचार *लखनऊ, 6 अगस्त 2026,* उत्तर प्रदेश में पहली बार, लखनऊ के अपोलोमेडिक्स अस्पताल ने यूरिथ्रल स्ट्रिक्चर यानी पेशाब की नली के सिकुड़ जाने की समस्या से जूझ रहे एक मरीज का लैब में तैयार किए गए सेल्स की मदद से सफल इलाज किया है। डॉ. मयंक अग्रवाल, डॉ. वेद भास्कर और डॉ. शैलेंद्र गुप्ता की सर्जिकल टीम ने 30 वर्षीय मरीज का एडवांस्ड तकनीक से ऑपरेशन किया, जिसमें टिश्यू इंजीनियरिंग के जरिए लैब में तैयार किए गए सेल्स का इस्तेमाल किया गया। उत्तर प्रदेश में इस तकनीक का पहली बार उपयोग किया गया है। लखनऊ निवासी यह मरीज तीन सेंटीमीटर लंबी बुलबर यूरिथ्रा स्ट्रिक्चर से पीड़ित था। यह तकनीक यूरिथ्रल स्ट्रिक्चर के चुनिंदा मरीजों के लिए कम चीरफाड़ वाला एक नया और प्रभावी इलाज का विकल्प है। आमतौर पर इस बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टर बक्कल म्यूकोसा ग्राफ्ट यूरेथ्रोप्लास्टी (बीएमजीयू) की सलाह देते हैं। इस सर्जरी में मरीज के मुंह के अंदर से करीब पांच से छह सेंटीमीटर टिशू निकालना पड़ता है। इसके कारण मरीज को कई सप्ताह तक खाने और पीने में परेशानी होती है तथा गरम और मसालेदार भोजन से भी परहेज़ करना पड़ता है। इस बीमारी के इलाज का दूसरा विकल्प एंडोस्कोपिक या ऑप्टिकल इंटरनल यूरेथ्रोटॉमी है। हालांकि, इस प्रक्रिया में बीमारी दोबारा होने की आशंका अधिक रहती है। ऐसे मामलों में मरीज को लंबे समय तक स्वयं कैथेटर डालना पड़ सकता है, जिससे दर्द, खून आने और संक्रमण का खतरा बना रहता है। युवा मरीज इन दोनों प्रक्रियाओं से बचना चाहता था और किसी आधुनिक और कम चीरफाड़ वाले इलाज की तलाश में था। इस चुनौती को स्वीकार करते हुए डॉ. वेद भास्कर ने अपनी टीम के साथ विचार-विमर्श के बाद मरीज को आधुनिक सेल थेरेपी तकनीक का सुझाव दिया। इसके लिए मरीज के गाल के अंदर से केवल 10 मिलीमीटर लंबा और 5 मिलीमीटर चौड़ा एक छोटा सा ऊतक लिया गया। उसी समय वहां टांके लगा दिए गए, जिससे कोई खुला घाव नहीं रहा। इसका फायदा यह हुआ कि मरीज पहले ही दिन से सामान्य भोजन कर सका। उन्होंने आगे बताया कि यह प्रक्रिया सभी उम्र के मरीजों और एक साथ कई स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त रोगियों के लिए अत्यंत लाभकारी है, क्योंकि इसमें बड़े सर्जिकल चीरे लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाता है और पारंपरिक सर्जरी की तुलना में दर्द एवं असुविधा भी काफी कम होती है। मुंह से लिए गए इस छोटे से टिशू को हवाई मार्ग से पुणे की एक विशेष लैब में भेजा गया। वहां अगले दो सप्ताह तक टिशू इंजीनियरिंग की मदद से इसे विकसित कर करीब 50 लाख सेल्स तैयार किए गए। इन सेल्स की उपयोग अवधि केवल 72 घंटे होती है, इसलिए इन्हें आवश्यक कोल्ड चेन बनाए रखते हुए पूरी सुरक्षा के साथ वापस लखनऊ लाया गया। अगले ही दिन डॉ. वेद भास्कर ने इन तैयार सेल्स को लिक्विड थ्रोम्बिन के साथ मिलाकर दूरबीन की सहायता से सीधे सिकुड़े हुए हिस्से पर लगाया। इससे पहले उस स्थान को हल्का सा तैयार किया गया ताकि सेल्स वहां अच्छी तरह चिपक सकें। इसके बाद ये सेल्स घाव भरने की प्राकृतिक प्रक्रिया को बढ़ावा देते हैं और दोबारा निशान बनने या नली के फिर से सिकुड़ने की संभावना को कम करते हैं। पुरानी तकनीकों की तुलना में इस नई प्रक्रिया के फायदे बताते हुए अपोलोमेडिक्स अस्पताल, लखनऊ के डायरेक्टर एवं हेड, यूरोलॉजी और किडनी ट्रांसप्लांट, डॉ. मयंक मोहन अग्रवाल ने कहा, "इस तकनीक में मरीज के शरीर पर कोई बड़ा चीरा नहीं लगाया जाता। मुंह के अंदर भी केवल एक बहुत छोटा नमूना लिया जाता है, जिससे मरीज पहले दिन से सामान्य भोजन कर सकता है। पूरी प्रक्रिया 15 से 20 मिनट में पूरी हो जाती है। जहां सामान्य ओपन सर्जरी में मरीज को दो से तीन सप्ताह तक कैथेटर रखना पड़ता है, वहीं इस तकनीक में इसे केवल एक सप्ताह बाद हटाया जा सकता है।" उन्होंने बताया कि मरीज की हालत अच्छी रही और वह अगले ही दिन अस्पताल से छुट्टी पाने के लिए तैयार था। बीमारी के बारे में जानकारी देते हुए अपोलोमेडिक्स अस्पताल के एसोसिएट डायरेक्टर, यूरोलॉजी, डॉ. वेद भास्कर ने कहा, "पुरुषों में पेशाब की नली के सिकुड़ने की समस्या संक्रमण, चोट या पहले किए गए किसी इलाज के कारण हो सकती है। यह नई तकनीक हर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं है, लेकिन सही मरीजों में इसकी सफलता दर 70 से 80 प्रतिशत तक है, जो पारंपरिक ओपन सर्जरी के बराबर मानी जाती है।" इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, लखनऊ के एमडी एवं सीईओ, डॉ. मयंक सोमानी ने कहा, "अपोलोमेडिक्स हमेशा मरीजों तक विश्वस्तरीय और अत्याधुनिक इलाज पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। लैब में तैयार सेल्स पर आधारित यह तकनीक कम चीरफाड़ वाले इलाज की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। इससे मरीजों को कम दर्द होता है, रिकवरी तेज होती है और वे जल्द सामान्य जीवन में लौट पाते हैं।"
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    उत्तर प्रदेश में पहली बार लैब में तैयार सेल्स से यूरिथ्रल स्ट्रिक्चर का सफल इलाज, अपोलोमेडिक्स ने रचा इतिहास
*उत्तर प्रदेश में पहली बार लैब में तैयार सेल्स से यूरिथ्रल स्ट्रिक्चर का सफल इलाज, अपोलोमेडिक्स ने रचा इतिहास*
•	सेल-आधारित यूरिथ्रल स्ट्रिक्चर सर्जरी, मरीज अगले दिन हुआ डिस्चार्ज 
•	लैब में तैयार 50 लाख सेल्स से यूरिथ्रल स्ट्रिक्चर का सफल उपचार
*लखनऊ, 6 अगस्त 2026,* उत्तर प्रदेश में पहली बार, लखनऊ के अपोलोमेडिक्स अस्पताल ने यूरिथ्रल स्ट्रिक्चर यानी पेशाब की नली के सिकुड़ जाने की समस्या से जूझ रहे एक मरीज का लैब में तैयार किए गए सेल्स की मदद से सफल इलाज किया है। डॉ. मयंक अग्रवाल, डॉ. वेद भास्कर और डॉ. शैलेंद्र गुप्ता की सर्जिकल टीम ने 30 वर्षीय मरीज का एडवांस्ड तकनीक से ऑपरेशन किया, जिसमें टिश्यू इंजीनियरिंग के जरिए लैब में तैयार किए गए सेल्स का इस्तेमाल किया गया। उत्तर प्रदेश में इस तकनीक का पहली बार उपयोग किया गया है। लखनऊ निवासी यह मरीज तीन सेंटीमीटर लंबी बुलबर यूरिथ्रा स्ट्रिक्चर से पीड़ित था। यह तकनीक यूरिथ्रल स्ट्रिक्चर के चुनिंदा मरीजों के लिए कम चीरफाड़ वाला एक नया और प्रभावी इलाज का विकल्प है।
आमतौर पर इस बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टर बक्कल म्यूकोसा ग्राफ्ट यूरेथ्रोप्लास्टी (बीएमजीयू) की सलाह देते हैं। इस सर्जरी में मरीज के मुंह के अंदर से करीब पांच से छह सेंटीमीटर टिशू निकालना पड़ता है। इसके कारण मरीज को कई सप्ताह तक खाने और पीने में परेशानी होती है तथा गरम और मसालेदार भोजन से भी परहेज़ करना पड़ता है।
इस बीमारी के इलाज का दूसरा विकल्प एंडोस्कोपिक या ऑप्टिकल इंटरनल यूरेथ्रोटॉमी है। हालांकि, इस प्रक्रिया में बीमारी दोबारा होने की आशंका अधिक रहती है। ऐसे मामलों में मरीज को लंबे समय तक स्वयं कैथेटर डालना पड़ सकता है, जिससे दर्द, खून आने और संक्रमण का खतरा बना रहता है। युवा मरीज इन दोनों प्रक्रियाओं से बचना चाहता था और किसी आधुनिक और कम चीरफाड़ वाले इलाज की तलाश में था।
इस चुनौती को स्वीकार करते हुए डॉ. वेद भास्कर ने अपनी टीम के साथ विचार-विमर्श के बाद मरीज को आधुनिक सेल थेरेपी तकनीक का सुझाव दिया। इसके लिए मरीज के गाल के अंदर से केवल 10 मिलीमीटर लंबा और 5 मिलीमीटर चौड़ा एक छोटा सा ऊतक लिया गया। उसी समय वहां टांके लगा दिए गए, जिससे कोई खुला घाव नहीं रहा। इसका फायदा यह हुआ कि मरीज पहले ही दिन से सामान्य भोजन कर सका। उन्होंने आगे बताया कि यह प्रक्रिया सभी उम्र  के मरीजों और एक साथ कई स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त रोगियों के लिए अत्यंत लाभकारी है, क्योंकि इसमें बड़े सर्जिकल चीरे लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाता है और पारंपरिक सर्जरी की तुलना में दर्द एवं असुविधा भी काफी कम होती है।
मुंह से लिए गए इस छोटे से टिशू को हवाई मार्ग से पुणे की एक विशेष लैब में भेजा गया। वहां अगले दो सप्ताह तक टिशू इंजीनियरिंग की मदद से इसे विकसित कर करीब 50 लाख सेल्स तैयार किए गए। इन सेल्स की उपयोग अवधि केवल 72 घंटे होती है, इसलिए इन्हें आवश्यक कोल्ड चेन बनाए रखते हुए पूरी सुरक्षा के साथ वापस लखनऊ लाया गया।
अगले ही दिन डॉ. वेद भास्कर ने इन तैयार सेल्स को लिक्विड थ्रोम्बिन के साथ मिलाकर दूरबीन की सहायता से सीधे सिकुड़े हुए हिस्से पर लगाया। इससे पहले उस स्थान को हल्का सा तैयार किया गया ताकि सेल्स वहां अच्छी तरह चिपक सकें। इसके बाद ये सेल्स घाव भरने की प्राकृतिक प्रक्रिया को बढ़ावा देते हैं और दोबारा निशान बनने या नली के फिर से सिकुड़ने की संभावना को कम करते हैं।
पुरानी तकनीकों की तुलना में इस नई प्रक्रिया के फायदे बताते हुए अपोलोमेडिक्स अस्पताल, लखनऊ के डायरेक्टर एवं हेड, यूरोलॉजी और किडनी ट्रांसप्लांट, डॉ. मयंक मोहन अग्रवाल ने कहा, "इस तकनीक में मरीज के शरीर पर कोई बड़ा चीरा नहीं लगाया जाता। मुंह के अंदर भी केवल एक बहुत छोटा नमूना लिया जाता है, जिससे मरीज पहले दिन से सामान्य भोजन कर सकता है। पूरी प्रक्रिया 15 से 20 मिनट में पूरी हो जाती है। जहां सामान्य ओपन सर्जरी में मरीज को दो से तीन सप्ताह तक कैथेटर रखना पड़ता है, वहीं इस तकनीक में इसे केवल एक सप्ताह बाद हटाया जा सकता है।"
उन्होंने बताया कि मरीज की हालत अच्छी रही और वह अगले ही दिन अस्पताल से छुट्टी पाने के लिए तैयार था।
बीमारी के बारे में जानकारी देते हुए अपोलोमेडिक्स अस्पताल के एसोसिएट डायरेक्टर, यूरोलॉजी, डॉ. वेद भास्कर ने कहा, "पुरुषों में पेशाब की नली के सिकुड़ने की समस्या संक्रमण, चोट या पहले किए गए किसी इलाज के कारण हो सकती है। यह नई तकनीक हर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं है, लेकिन सही मरीजों में इसकी सफलता दर 70 से 80 प्रतिशत तक है, जो पारंपरिक ओपन सर्जरी के बराबर मानी जाती है।"
इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, लखनऊ के एमडी एवं सीईओ, डॉ. मयंक सोमानी ने कहा, "अपोलोमेडिक्स हमेशा मरीजों तक विश्वस्तरीय और अत्याधुनिक इलाज पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। लैब में तैयार सेल्स पर आधारित यह तकनीक कम चीरफाड़ वाले इलाज की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। इससे मरीजों को कम दर्द होता है, रिकवरी तेज होती है और वे जल्द सामान्य जीवन में लौट पाते हैं।"
    user_Journalist Himanshu Garg
    Journalist Himanshu Garg
    Local News Reporter सदर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • भगवान शिव पर मौलाना जर्जीस अंसारी की कथित आपत्तिजनक टिप्पणी पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने दी कड़ी प्रतिक्रिया लखनऊ भगवान शिव पर मौलाना जर्जीस अंसारी की कथित आपत्तिजनक टिप्पणी पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सनातन आस्था और देवी-देवताओं का अपमान किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। कानून के दायरे में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
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    भगवान शिव पर मौलाना जर्जीस अंसारी की कथित आपत्तिजनक टिप्पणी पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने दी कड़ी प्रतिक्रिया
लखनऊ
भगवान शिव पर मौलाना जर्जीस अंसारी की कथित आपत्तिजनक टिप्पणी पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सनातन आस्था और देवी-देवताओं का अपमान किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। कानून के दायरे में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
    user_Journalist prabhat kashyap
    Journalist prabhat kashyap
    Local News Reporter सदर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • वृंदावन :शुभ कर्मों का फल, आज बोए गए भक्ति रूपी बीज, समय आने पर जीवन को परम आनंद, कल अवश्य देगा : प्रेमानंद महाराज कल अवश्य देगा वृंदावन :पूज्य प्रेमानंद महाराज जी आध्यात्मिक चिंतन के दौरान विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और संबल प्रदान करते अनमोल वचन शेयर कहते हैं कि भले ही आज आपका समय कमजोर हो या परिस्थितियां विपरीत हों, लेकिन घबराएं मत! आज आप जो धर्म, नाम जप और शुभ कर्मों का बीजारोपण कर रहे हैं, जब यह फलीभूत होगा तो आपका जीवन निहाल हो जाएगा| उनका कहना है कि वर्तमान का कठिन समय या कमजोरी अस्थायी है, लेकिन आज किया गया नाम जप और सत्कर्म भविष्य में सुखद परिणाम लाता है| दुःख और विपरीत समय सदा नहीं रहते; वे कर्मों का फल देकर समाप्त हो जाते हैं| उड़ने यह भी कहा की भगवान का नाम और स्मरण मनुष्य को हर संकट से उबरने की आंतरिक शक्ति देता है| शुभ कर्मों का फल, आज बोए गए भक्ति रूपी बीज समय आने पर जीवन को परम आनंद से भर देते हैं| जीवन में अपनाने योग्य बातेंघबराएं नहीं: कठिन समय में विचलित होने के बजाय भगवान के चरणों में ध्यान लगाए,निरंतर जप करें| अपनी श्वासों के साथ प्रभु के नाम का स्मरण जारी रखें| सदा दुख एवं परीक्षाओं में धैर्य रखना आवश्यक है साथ ही उन्होंने अपनी ओजस्वी वाणी में यह भी कहा कि धैर्य रखें, सत्कर्मों का फल निश्चित ही उचित समय पर प्राप्त होता है| #highlights2026 #sanatandharma #lifelesson #विश्वास #ViralNewsUpdate #RakeshPandey #highlightsfollowers 🚩
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    वृंदावन :शुभ कर्मों का फल, आज बोए गए भक्ति रूपी बीज, समय आने पर जीवन को परम  आनंद,  कल अवश्य देगा : प्रेमानंद महाराज कल अवश्य देगा
वृंदावन :पूज्य प्रेमानंद महाराज जी  आध्यात्मिक चिंतन के दौरान  विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और संबल प्रदान करते
अनमोल वचन शेयर  कहते हैं कि भले ही आज आपका समय कमजोर हो या परिस्थितियां विपरीत हों, लेकिन घबराएं मत!
आज आप जो धर्म, नाम जप और शुभ कर्मों का बीजारोपण कर रहे हैं, जब यह फलीभूत होगा तो आपका जीवन निहाल हो जाएगा|
उनका कहना है कि वर्तमान का कठिन समय या कमजोरी अस्थायी है, लेकिन आज किया गया नाम जप और सत्कर्म भविष्य में सुखद परिणाम लाता है|
दुःख और विपरीत समय सदा नहीं रहते; वे कर्मों का फल देकर समाप्त हो जाते हैं|
उड़ने यह भी कहा की भगवान का नाम और स्मरण मनुष्य को हर संकट से उबरने की आंतरिक शक्ति देता है|
शुभ कर्मों का फल, आज बोए गए भक्ति रूपी बीज समय आने पर जीवन को परम आनंद से भर देते हैं|
जीवन में अपनाने योग्य बातेंघबराएं नहीं: कठिन समय में विचलित होने के बजाय भगवान के चरणों में ध्यान लगाए,निरंतर जप करें|
अपनी श्वासों के साथ प्रभु के नाम का स्मरण जारी रखें|
सदा दुख एवं परीक्षाओं में धैर्य रखना आवश्यक है साथ ही
उन्होंने अपनी ओजस्वी वाणी  में  यह भी कहा कि धैर्य रखें, सत्कर्मों का फल निश्चित ही उचित समय पर प्राप्त होता है|
#highlights2026 #sanatandharma #lifelesson #विश्वास #ViralNewsUpdate #RakeshPandey #highlightsfollowers 
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    user_AmanTv
    AmanTv
    Archive सदर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • थाने से 100 मीटर दूर दुकान में चोरी का प्रयास सायरन बजते ही घबराकर भागे शातिर चोर लखनऊ दुकान में चोरी का प्रयास किया गया थाने से 100 मीटर दूर चोरी का प्रयास दुकान शटर काट रहे थे 2 नकाबपोश चोर सायरन बजते ही घबराकर भागे शातिर चोर एक चोर जंजीर में फंसकर सड़क पर गिरा गोमती नगर थाने से 100 मीटर दूर चोरी का प्रयास
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    थाने से 100 मीटर दूर दुकान में चोरी का प्रयास सायरन बजते ही घबराकर भागे शातिर चोर
लखनऊ 
दुकान में चोरी का प्रयास किया गया
थाने से 100 मीटर दूर चोरी का प्रयास
दुकान शटर काट रहे थे 2 नकाबपोश चोर
सायरन बजते ही घबराकर भागे शातिर चोर
एक चोर जंजीर में फंसकर सड़क पर गिरा
गोमती नगर थाने से 100 मीटर दूर चोरी का प्रयास
    user_Anurag Kashyap
    Anurag Kashyap
    Local News Reporter Sadar, Lucknow•
    39 min ago
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