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क्यों हम साधारण नागरिक रिकालिस्ट्स बन गए? तो किस प्रेरणा ने हमें रिकालिस्ट्स बना दिया? हमें नहीं पता कि, किस प्रेरणा ने हमें रिकालिस्ट्स बना दिया। न ही हम यह जानते है कि हमारे द्वारा लिखे गए विवरणों को पढ़कर कई कार्यकर्ता क्यों रिकालिस्ट्स बन गए। न ही हमें इस कारण का कोई अंदाजा कि क्यों 1920 में महात्मा चन्द्रशेखर आजाद रिकालिस्ट्स बन गए, और क्यों 1927 में अहिंसामूर्ती महात्मा भगत सिंह जी रिकालिस्ट बन गए थे। हालांकि इस सम्बन्ध में हमारे पास कोई ठोस कारण नहीं है, कि किस विचार ने हमें रिकालिस्ट्स बनने की प्रेरणा दी। लेकिन जितना हम देख पाते है, हमें इसके दो संभावित कारण नज़र आते है; 1. सहज बोध यानी कॉमन सेन्स (Common sense) 2. अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, पाकिस्तान, सऊदी अरब तथा बांग्लादेश आदि से होने वाले युद्ध का भय। (2.1) सहज बोधः पहला कारण सीधा सादा सहज बोध है। सामान्य समझ, जो कि हर मनुष्य में स्वाभाविक तौर पर मौजूद होती है। सबसे पहले हम आपसे एक सवाल करना चाहेंगे। यदि आप इस सवाल का जवाब देने से इंकार करते है, तो हम आपको अपनी बात नहीं समझा पाएंगे। इसलिए हमारा आग्रह है कि आप इस सवाल का अपने विवेक से जवाब दें। इसके उपरान्त ही आगे पढ़े। मान लीजिये कि आप एक कारखाने के मालिक है, जिसमे 1000 कर्मचारी और प्रबंधक वगेरह कार्य करते है। और अचानक सरकार निम्नांकित क़ानून लागू कर देती है: 1. आप किसी भी प्रबंधक को 60 वर्ष की आयु पूर्ण करने से पहले, तथा किसी भी कर्मचारी को 5 वर्ष से पहले नौकरी से नहीं निकाल सकेंगे। 2. आपको सभी कर्मचारियों को अगले 5 वर्ष के लिए और प्रबंधको को उनकी 35 वर्षीय सेवाकाल के लिए देय वेतन हेतु अग्रिम भुगतान के चेक देने होंगे। 3. यहां तक कि यदि कोई आपके कारखाने से सामान की चोरी कर रहा है तो, किसी न्यायधीश की अनुमति बिना, न तो आप उसे निकाल सकेंगे न ही दंड दे सकेंगे, न ही उसे आपके कारखाने में आने से रोक सकेंगे। हमारा आपसे सवाल है कि ऐसी स्थिति में 'अगले 3 महीनो में आपके कारखाने में अनुशासन का स्तर सुधरेगा या बिगड़ेगा'? कृपया इस सवाल का जवाब देने के बाद ही आप आगे पढ़े। हम अपना प्रश्न फिर से दोहराते है: 'क्या इन कानूनो के आने के बाद, अगले 3 महीनो में आपके कारखाने में कर्मचारियों और प्रबंधको के अनुशासन का स्तर सुधरेगा या बिगड़ेगा'? दूसरे शब्दों में, यदि हम नागरिको के पास जजो, सांसदों, विधायको, मंत्रियो, प्रशासनिक अधिकारियों आदि को नौकरी से निकालने का अधिकार नहीं हुआ तो, ये सभी पदाधिकारी भ्रष्ट और अनुशासनहीन हो जाएंगे। इसीलिए महात्मा चंद्रशेखर आजाद ने 1925 में कहा था कि वोट वापसी कानूनो के अभाव में लोकतंत्र एक मजाक बन कर रह जाएगा'। ठीक यही बात महर्षि दयानंद सरस्वती ने अपने ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश के छठे अध्याय के प्रथम पृष्ठ में कही थी कि - यदि राजा प्रजा के अधीन नहीं हुआ तो, वह प्रजा को लूट लेगा और राज्य का विनाश होगा। जूरी प्रक्रियाएं ग्रीस में 600 ईसा पूर्व लागू हुयी थी। जिसके परिणामस्वरूप ग्रीस अपने आप को इतना ताकतवर बना पाया कि उन्होंने सिर्फ 1 लाख सैनिको की मदद से अपने साम्राज्य का विस्तार तुर्की से लेकर यमुना नदी के किनारे तक कर लिया था। अमेरिका में 1750 ईस्वी में बोट वापसी एवं जूरी प्रक्रियाएं लागू हुई, और यह मुख्य कारण था जिससे अमेरिका इराक़, सऊदी अरब, पाकिस्तान और लीबिया को कब्जे में कर पाया। अमेरिका की सूची में अगले नाम ईरान और भारत है। लेकिन किसी सामान्य समझ के व्यक्ति को वोट वापसी एवं जूरी प्रक्रियाओं की उपयोगिता समझने के लिए इतिहास की किताबो के पन्ने पलटने या अमेरिका के उदाहरण देखने की जरुरत नहीं है - क्योंकि बोट वापसी एवं जूरी प्रक्रियाओ का महत्त्व समझने के लिए जिस चीज की आवश्यकता है, वह 'कॉमन सेन्स' है। हमारे देश से जुडी नागरिक समस्याएं किसी भी प्रकार से उस कारखाने की स्थिति से अलग नहीं है, जहां कारखाने के मालिक को अपने कर्मचारियों और प्रबंधको को 5-35 वर्ष तक नौकरी से निकालने का अधिकार नहीं दिया गया है। हमारे देश की समस्याओ का समाधान भी वही है, जो कि अमुक कारखाने की समस्याओ का समाधान है 'भ्रष्ट जजो, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियो को नौकरी से निकालने का अधिकार नागरिको के बहुमत को दे दिया जाए'। यह पुस्तक जूरी प्रक्रियाओ एवं बोट वापसी कानूनो के बारे में है, जिनकी सहायता से भारत के नागरिक "बहुमत का प्रदर्शन" करके भ्रष्ट अधिकारियों और नेताओ को नौकरी से निकाल सकेंगे। पुस्तक में वे विवरण भी दर्ज किये गए है, जिनका पालन करके इन प्रक्रियाओ को जन साधारण देश में लागू करवा सकेंते है । *The Greatest Revolutionary Book in the history of mankind " VOTEVAPSI DHANVAPASI " describing root cause of every problem our society/ Country is facing as a whole & most importantly permanent solutions to end the same* 🇮🇳 🔥 *भारत के इतिहास में सबसे बड़े आंदोलन/क्रांति की मेनिफेस्टो बुक Amazon, Flipkart व Notion press में जाहिर हो चुकी है कृपया आप इसे लिंक से खरीद ले* 👇🔥🇮🇳 सूचना : *वोटवापसी जूरी खंबा आंदोलन(राईट टू रिकॉल पार्टी इसका एक हिस्सा है)का राष्ट्रिय घोषणा पत्र* अब अमेजन, फ्लिपकार्ट एवं नोशन प्रेस पर पेपर बेक संस्करण में उपलब्ध है : . पुस्तक का नाम - " *वोट वापसी धन वापसी* " . भाग - 1 ; 192 पृष्ठ , भाग - 2 ; 200 पृष्ठ . (1) Notion press store : . Discount coupon code : RECALLIST . वोट वापसी धन वापसी भाग -1 . https://notionpress.com/read/vote-vapsi-dhan-vapasi-part-1 . वोट वापसी धन वापसी भाग - 2 . https://notionpress.com/read/vote-vapasi-dhan-vapasi-part-2 . ------------ . पीडीऍफ़ डाउनलोड - tinyurl.com/SolutionRTR . ------------

10 hrs ago
user_Vote Vapsi Pasbook
Vote Vapsi Pasbook
गायघाट, मुजफ्फरपुर, बिहार•
10 hrs ago
81d5490e-e9b2-40ab-98e3-a8e81e91dbf8

क्यों हम साधारण नागरिक रिकालिस्ट्स बन गए? तो किस प्रेरणा ने हमें रिकालिस्ट्स बना दिया? हमें नहीं पता कि, किस प्रेरणा ने हमें रिकालिस्ट्स बना दिया। न ही हम यह जानते है कि हमारे द्वारा लिखे गए विवरणों को पढ़कर कई कार्यकर्ता क्यों रिकालिस्ट्स बन गए। न ही हमें इस कारण का कोई अंदाजा कि क्यों 1920 में महात्मा चन्द्रशेखर आजाद रिकालिस्ट्स बन गए, और क्यों 1927 में अहिंसामूर्ती महात्मा भगत सिंह जी रिकालिस्ट बन गए थे। हालांकि इस सम्बन्ध में हमारे पास कोई ठोस कारण नहीं है, कि किस विचार ने हमें रिकालिस्ट्स बनने की प्रेरणा दी। लेकिन जितना हम देख पाते है, हमें इसके दो संभावित कारण नज़र आते है; 1. सहज बोध यानी कॉमन सेन्स (Common sense) 2. अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, पाकिस्तान, सऊदी अरब तथा बांग्लादेश आदि से होने वाले युद्ध का भय। (2.1) सहज बोधः पहला कारण सीधा सादा सहज बोध है। सामान्य समझ, जो कि हर मनुष्य में स्वाभाविक तौर पर मौजूद होती है। सबसे पहले हम आपसे एक सवाल करना चाहेंगे। यदि आप इस सवाल का जवाब देने से इंकार करते है, तो हम आपको अपनी बात नहीं समझा पाएंगे। इसलिए हमारा आग्रह है कि आप इस सवाल का अपने विवेक से जवाब दें। इसके उपरान्त ही आगे पढ़े। मान लीजिये कि आप एक कारखाने के मालिक है, जिसमे 1000 कर्मचारी और प्रबंधक वगेरह कार्य करते है। और अचानक सरकार निम्नांकित क़ानून लागू कर देती है: 1. आप किसी भी प्रबंधक को 60 वर्ष की आयु पूर्ण करने से पहले, तथा किसी भी कर्मचारी को 5 वर्ष से पहले नौकरी से नहीं निकाल सकेंगे। 2. आपको सभी कर्मचारियों को अगले 5 वर्ष के लिए और प्रबंधको को उनकी 35 वर्षीय सेवाकाल के लिए देय वेतन हेतु अग्रिम भुगतान के चेक देने होंगे। 3. यहां तक कि यदि कोई आपके कारखाने से सामान की चोरी कर रहा है तो, किसी न्यायधीश की अनुमति बिना, न तो आप उसे निकाल सकेंगे न ही दंड दे सकेंगे, न ही उसे आपके कारखाने में आने से रोक सकेंगे। हमारा आपसे सवाल है कि ऐसी स्थिति में 'अगले 3 महीनो में आपके कारखाने में अनुशासन का स्तर सुधरेगा या बिगड़ेगा'? कृपया इस सवाल का जवाब देने के बाद ही आप आगे पढ़े। हम अपना प्रश्न फिर से दोहराते है: 'क्या इन कानूनो के आने के बाद, अगले 3 महीनो में आपके कारखाने में कर्मचारियों और प्रबंधको के अनुशासन का स्तर सुधरेगा या बिगड़ेगा'? दूसरे शब्दों में, यदि हम नागरिको के पास जजो, सांसदों, विधायको, मंत्रियो, प्रशासनिक अधिकारियों आदि को नौकरी से निकालने का अधिकार नहीं हुआ तो, ये सभी पदाधिकारी भ्रष्ट और अनुशासनहीन हो जाएंगे। इसीलिए महात्मा चंद्रशेखर आजाद ने 1925 में कहा था कि वोट वापसी कानूनो के अभाव में लोकतंत्र एक मजाक बन कर रह जाएगा'। ठीक यही बात महर्षि दयानंद सरस्वती ने अपने ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश के छठे अध्याय के प्रथम पृष्ठ में कही थी कि - यदि राजा प्रजा के अधीन नहीं हुआ तो, वह प्रजा को लूट लेगा और राज्य का विनाश होगा। जूरी प्रक्रियाएं ग्रीस में 600 ईसा पूर्व लागू हुयी थी। जिसके परिणामस्वरूप ग्रीस अपने आप को इतना ताकतवर बना पाया कि उन्होंने सिर्फ 1 लाख सैनिको की मदद से अपने साम्राज्य का विस्तार तुर्की से लेकर यमुना नदी के किनारे तक कर लिया था। अमेरिका में 1750 ईस्वी में बोट वापसी एवं जूरी प्रक्रियाएं लागू हुई, और यह मुख्य कारण था जिससे अमेरिका इराक़, सऊदी अरब, पाकिस्तान और लीबिया को कब्जे में कर पाया। अमेरिका की सूची में अगले नाम ईरान और भारत है। लेकिन किसी सामान्य समझ के व्यक्ति को वोट वापसी एवं जूरी प्रक्रियाओं की उपयोगिता समझने के लिए इतिहास की किताबो के पन्ने पलटने या अमेरिका के उदाहरण देखने की जरुरत नहीं है - क्योंकि बोट वापसी एवं जूरी प्रक्रियाओ का महत्त्व समझने के लिए जिस चीज की आवश्यकता है, वह 'कॉमन सेन्स' है। हमारे देश से जुडी नागरिक समस्याएं किसी भी प्रकार से उस कारखाने की स्थिति से अलग नहीं है, जहां कारखाने के मालिक को अपने कर्मचारियों और प्रबंधको को 5-35 वर्ष तक नौकरी से निकालने का अधिकार नहीं दिया गया है। हमारे देश की समस्याओ का समाधान भी वही है, जो कि अमुक कारखाने की समस्याओ का समाधान है 'भ्रष्ट जजो, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियो को नौकरी से निकालने का अधिकार नागरिको के बहुमत को दे दिया जाए'। यह पुस्तक जूरी प्रक्रियाओ एवं बोट वापसी कानूनो के बारे में है, जिनकी सहायता से भारत के नागरिक "बहुमत का प्रदर्शन" करके भ्रष्ट अधिकारियों और नेताओ को नौकरी से निकाल सकेंगे। पुस्तक में वे विवरण भी दर्ज किये गए है, जिनका पालन करके इन प्रक्रियाओ को जन साधारण देश में लागू करवा सकेंते है । *The Greatest Revolutionary Book in the history of mankind " VOTEVAPSI DHANVAPASI " describing root cause of every problem our society/ Country is facing as a whole & most importantly permanent solutions to end the same* 🇮🇳 🔥 *भारत के इतिहास में सबसे बड़े आंदोलन/क्रांति की मेनिफेस्टो बुक Amazon, Flipkart व Notion press में जाहिर हो चुकी है कृपया आप इसे लिंक से खरीद ले* 👇🔥🇮🇳 सूचना : *वोटवापसी जूरी खंबा आंदोलन(राईट टू रिकॉल पार्टी इसका एक हिस्सा है)का राष्ट्रिय घोषणा पत्र* अब अमेजन, फ्लिपकार्ट एवं नोशन प्रेस पर पेपर बेक संस्करण में उपलब्ध है : . पुस्तक का नाम - " *वोट वापसी धन वापसी* " . भाग - 1 ; 192 पृष्ठ , भाग - 2 ; 200 पृष्ठ . (1) Notion press store : . Discount coupon code : RECALLIST . वोट वापसी धन वापसी भाग -1 . https://notionpress.com/read/vote-vapsi-dhan-vapasi-part-1 . वोट वापसी धन वापसी भाग - 2 . https://notionpress.com/read/vote-vapasi-dhan-vapasi-part-2 . ------------ . पीडीऍफ़ डाउनलोड - tinyurl.com/SolutionRTR . ------------

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