बंगाणा क्षेत्र का बेडू वृक्ष, जिसका वैज्ञानिक नाम फिकस पाल्माटा है, हिमालय की समशीतोष्ण और उपोष्णकटिबंधीय जलवायु में पनपने वाली जंगली अंजीर की एक प्रजाति है। यह उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और नेपाल के कुछ हिस्सों में 900 से 2,000 मीटर की ऊंचाई पर प्रचुर मात्रा में उगता है। विश्व भर में बेडू की लगभग 800 प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जो इस फल की व्यापकता को दर्शाती हैं। बेडू एक बहुमुखी फल है जिसका स्वाद मीठा और हल्का खट्टा होता है। इसे आमतौर पर ताजा खाया जाता है, साथ ही सुखाकर या विभिन्न व्यंजनों में संसाधित करके भी उपयोग किया जाता है। यह फल प्राकृतिक रूप से जंगलों, खेतों की मेड़ों और सड़कों के किनारे बिना किसी विशेष देखभाल के उगता है। लगभग 25 से 30 फीट ऊंचे इस पेड़ की छाल चिकनी और भूरे रंग की होती है, जिसमें मजबूत तने और फैलावदार शाखाएँ होती हैं। इसके फल गोल या हल्के अंडाकार होते हैं, जो कच्चे होने पर हरे या बैंगनी और पकने पर पीले या नारंगी रंग के हो जाते हैं। पकने के बाद इसका गूदा मुलायम, मीठा और रसदार होता है, जिसका सेवन पहाड़ी इलाकों में लोग ताजा तोड़कर करते हैं। कुछ स्थानों पर इससे चटनी और पारंपरिक व्यंजन भी बनाए जाते हैं। पोषण की दृष्टि से बेडू अत्यंत लाभकारी माना जाता है क्योंकि इसमें विटामिन ए, सी और के प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो आँखों, त्वचा और प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसमें आयरन, कैल्शियम और पोटेशियम जैसे खनिज तत्व भी होते हैं; आयरन खून की कमी दूर करने, कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाने और पोटेशियम हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। प्राकृतिक और रसायन मुक्त होने के कारण यह सेहत के लिए एक सुरक्षित फल है। आयुर्वेद और लोक चिकित्सा में भी बेडू का विशेष स्थान है, जहाँ इसे श्वसन रोग, खांसी, जुकाम और कब्ज की समस्या में फायदेमंद बताया गया है। कुछ जगहों पर बेडू के पत्तों और छाल का उपयोग घरेलू औषधि के रूप में किया जाता है, और बुजुर्गों के अनुसार यह गुर्दे से जुड़ी समस्याओं में भी सहायक है। ग्रामीण समाज आधुनिक चिकित्सा से पहले ऐसे फलों और जड़ी-बूटियों पर ही निर्भर रहता था। बेडू का वृक्ष पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। इसके फलों को पक्षी, बंदर और अन्य जंगली जानवर भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं, जिससे जंगलों में खाद्य श्रृंखला संतुलित रहती है। कई पक्षी इसकी शाखाओं पर घोंसले भी बनाते हैं। यह केवल एक जंगली फल नहीं, बल्कि हिमालय की समृद्ध पारिस्थितिक व्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इसके पौष्टिक गुण, पाक कला में बहुमुखी प्रतिभा और सांस्कृतिक महत्व इसे हिमालयी समुदायों के जीवन का एक अभिन्न अंग बनाते हैं।
बंगाणा क्षेत्र का बेडू वृक्ष, जिसका वैज्ञानिक नाम फिकस पाल्माटा है, हिमालय की समशीतोष्ण और उपोष्णकटिबंधीय जलवायु में पनपने वाली जंगली अंजीर की एक प्रजाति है। यह उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और नेपाल के कुछ हिस्सों में 900 से 2,000 मीटर की ऊंचाई पर प्रचुर मात्रा में उगता है। विश्व भर में बेडू की लगभग 800 प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जो इस फल की व्यापकता को दर्शाती हैं। बेडू एक बहुमुखी फल है जिसका स्वाद मीठा और हल्का खट्टा होता है। इसे आमतौर पर ताजा खाया जाता है, साथ ही सुखाकर या विभिन्न व्यंजनों में संसाधित करके भी उपयोग किया जाता है। यह फल प्राकृतिक रूप से जंगलों, खेतों की मेड़ों और
सड़कों के किनारे बिना किसी विशेष देखभाल के उगता है। लगभग 25 से 30 फीट ऊंचे इस पेड़ की छाल चिकनी और भूरे रंग की होती है, जिसमें मजबूत तने और फैलावदार शाखाएँ होती हैं। इसके फल गोल या हल्के अंडाकार होते हैं, जो कच्चे होने पर हरे या बैंगनी और पकने पर पीले या नारंगी रंग के हो जाते हैं। पकने के बाद इसका गूदा मुलायम, मीठा और रसदार होता है, जिसका सेवन पहाड़ी इलाकों में लोग ताजा तोड़कर करते हैं। कुछ स्थानों पर इससे चटनी और पारंपरिक व्यंजन भी बनाए जाते हैं। पोषण की दृष्टि से बेडू अत्यंत लाभकारी माना जाता है क्योंकि इसमें विटामिन ए, सी और के
प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो आँखों, त्वचा और प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसमें आयरन, कैल्शियम और पोटेशियम जैसे खनिज तत्व भी होते हैं; आयरन खून की कमी दूर करने, कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाने और पोटेशियम हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। प्राकृतिक और रसायन मुक्त होने के कारण यह सेहत के लिए एक सुरक्षित फल है। आयुर्वेद और लोक चिकित्सा में भी बेडू का विशेष स्थान है, जहाँ इसे श्वसन रोग, खांसी, जुकाम और कब्ज की समस्या में फायदेमंद बताया गया है। कुछ जगहों पर बेडू के पत्तों और छाल का उपयोग घरेलू औषधि के रूप में किया जाता है, और बुजुर्गों के अनुसार यह
गुर्दे से जुड़ी समस्याओं में भी सहायक है। ग्रामीण समाज आधुनिक चिकित्सा से पहले ऐसे फलों और जड़ी-बूटियों पर ही निर्भर रहता था। बेडू का वृक्ष पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। इसके फलों को पक्षी, बंदर और अन्य जंगली जानवर भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं, जिससे जंगलों में खाद्य श्रृंखला संतुलित रहती है। कई पक्षी इसकी शाखाओं पर घोंसले भी बनाते हैं। यह केवल एक जंगली फल नहीं, बल्कि हिमालय की समृद्ध पारिस्थितिक व्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इसके पौष्टिक गुण, पाक कला में बहुमुखी प्रतिभा और सांस्कृतिक महत्व इसे हिमालयी समुदायों के जीवन का एक अभिन्न अंग बनाते हैं।
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- कांग्रेस पार्टी के पूर्व मुख्य प्रवक्ता प्रेम कौशल ने हमीरपुर में एक प्रेस वार्ता के दौरान दावा किया कि देश अमेरिका की गुलामी की तरफ बढ़ रहा है। कौशल ने आगे आरोप लगाया कि देश के प्रधानमंत्री एक डरे, सहमे और कमजोर शासक की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री की जवाहरलाल नेहरू से तुलना को हास्यास्पद करार दिया। स्थानीय मुद्दों पर भी बात करते हुए, कौशल ने कहा कि सांसद ठाकुर हमीरपुर मेडिकल कॉलेज को लेकर सरासर झूठ बोल रहे हैं।1
- हमीरपुर पुलिस ने बाईपास मार्ग पर पेठा भंडार के बाहर से चोरी हुई एक वैन को जम्मू के राजौरी से बरामद कर लिया है। पुलिस ने लोकेशन ट्रेस करते हुए राजौरी पहुंचकर स्थानीय लोगों की मदद से वाहन चोरी करने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। चोरी की इस वारदात को नौ जून 2026 की रात को अंजाम दिया गया था, जिसके बाद 10 जून को वाहन चोरी का मामला पुलिस तक पहुँचाया गया। सीसीटीवी फुटेज से साक्ष्य जुटाते हुए तथा अन्य संपर्कों के माध्यम से सदर पुलिस थाना की टीम जम्मू कश्मीर पहुंची और आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस तीनों आरोपियों को चोरी किए गए वाहन सहित हमीरपुर ले आई है, और अब उन्हें माननीय अदालत में पेश किया जाएगा। यह भी बात सामने आई है कि आरोपी चोरी के अन्य मामलों में भी संलिप्त हो सकते हैं, जिसके चलते पकड़े गए आरोपियों के बारे में अन्य जिलों की पुलिस को भी सूचित किया गया है ताकि पता लगाया जा सके कि वे कहीं अन्य मामलों में वांछित तो नहीं हैं। पुलिस अधीक्षक हमीरपुर बलबीर सिंह ने बताया कि पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए वाहन चोरी मामले में संलिप्त तीनों लोगों को राजौरी से गिरफ्तार किया है। मामले में आगामी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है और पुलिस हर पहलू से इसकी जांच कर रही है।1
- ऊना शहर में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक और हाल ही में दो बच्चियों पर हुए हमलों के बाद नगर निगम ऊना अब पूरी तरह अलर्ट हो गया है। शहरवासियों की लगातार मिल रही शिकायतों और उनकी बढ़ती चिंता को देखते हुए निगम ने आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया है। जानकारी के अनुसार, पिछले तीन दिनों के भीतर ऊना शहर में दो अलग-अलग घटनाओं में आवारा कुत्तों ने बच्चियों पर हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया था। हमलों में घायल दोनों बच्चियों का इलाज क्षेत्रीय अस्पताल ऊना में चल रहा है। इन घटनाओं के बाद शहरवासियों में भारी रोष देखने को मिला और उन्होंने आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान की मांग को लेकर नगर निगम प्रशासन को एक ज्ञापन भी सौंपा था। शहरवासियों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए, नगर निगम ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है। वीरवार को निगम की टीम ने शहर के संवेदनशील क्षेत्रों में यह अभियान चलाया, जो शुक्रवार सुबह भी जारी रहा। विशेष रूप से चंद्रलोक कॉलोनी और पुल वाला बाजार क्षेत्र में आवारा कुत्तों को पकड़ने पर जोर दिया गया। इस अभियान के तहत बीते दो दिनों के भीतर कुल 9 आवारा कुत्तों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है। नगर निगम ऊना के आयुक्त पृथीपाल सिंह ने बताया कि निगम द्वारा रेस्क्यू किए गए 9 आवारा कुत्तों को मलाहत स्थित एबीसी सेंटर भेजा गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शहरवासियों की सुरक्षा निगम की सर्वोच्च प्राथमिकता है, और जहां कहीं से भी शिकायतें प्राप्त होंगी, वहां तुरंत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने नागरिकों से भी अपील की है कि वे आवारा कुत्तों से संबंधित किसी भी समस्या की सूचना तुरंत नगर निगम को दें, ताकि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।1
- आज अजौली गांव में श्रद्धा और भक्ति का एक विशेष वातावरण देखने को मिला, जहाँ श्री बाल बाबा जी के आगमन पर बड़ी संख्या में संगत एकत्रित हुई। बाबा जी ने अपने प्रेरणादायक प्रवचनों और कथा-वाचन के माध्यम से उपस्थित श्रद्धालुओं को गहरा आध्यात्मिक संदेश प्रदान किया। इस दौरान संगत में भारी उत्साह और भक्ति का संचार हुआ, जिसका प्रमाण भजन-कीर्तन के आयोजन में भी देखने को मिला। इस अवसर पर राम और कृष्ण जी की महिमा का गुणगान किया गया, और सभी श्रद्धालु भक्ति रस में पूरी तरह सराबोर होकर बाबा जी के विचारों को ध्यानपूर्वक सुनते रहे।1
- पुलिस ने जम्मू के राजौरी से वाहन चोरों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने हमीरपुर के बाईपास मार्ग से सड़क किनारे खड़ी एक वैन चुराई थी। पुलिस आधी रात को तीनों आरोपियों को हमीरपुर ले आई। इन तीनों की संलिप्तता चोरी के अन्य मामलों में भी पाई गई है। पुलिस फिलहाल मामले की आगे की जांच कर रही है।1
- सुजानपुर के सैनिक स्कूल की छात्राओं ने शहर में पर्यावरण को बचाने और नशे को मिटाने के उद्देश्य से एक जागरूकता रैली निकाली है। इस रैली के दौरान छात्राओं ने शहर वासियों को पर्यावरण संरक्षण के तरीके बताए और साथ ही हिमाचल प्रदेश में दिन-प्रतिदिन बढ़ते नशे की समस्या को खत्म करने के लिए जागरूक किया।1
- हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिला के भालू गांव निवासी 23 वर्षीय मर्चेंट नेवी कैडेट आदित्य शर्मा के अमेरिकी हमले में जान गंवाने के बाद उनका परिवार पार्थिव शरीर घर पहुंचने का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। आदित्य की मौत से पूरे गांव में शोक का माहौल है, और उनके माता-पिता, दादी सहित अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, क्योंकि परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। आदित्य के पिता राजेश शर्मा ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि उनका शव अभी जहाज पर है और उसे पोस्टमार्टम के लिए दूसरी जगह भेजा जा रहा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आदित्य के सिर में गंभीर चोट लगी थी। परिवार अब भी अपने बेटे के पार्थिव शरीर के भारत आने का इंतजार कर रहा है। आदित्य के चाचा हिमांशु शर्मा ने डीजी शिपिंग के अधिकारियों से टेलीफोन पर बात की है, जिन्होंने हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए मामले की हर पहलू से जांच का आश्वासन दिया है। हिमांशु शर्मा ने कंपनी के दावों पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि कंपनी का कहना है कि जहाज एक जगह खड़ा था, जबकि आदित्य ने अपने पिता को बताया था कि जहाज ईरान की तरफ बढ़ रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में, जहां समुद्री लुटेरों या युद्ध जैसी परिस्थितियों का खतरा रहता है, वहां सुरक्षा गार्ड तैनात होने चाहिए थे, लेकिन कंपनी ने पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं की थी। हिमांशु शर्मा ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। डीजी शिपिंग ने परिवार को आश्वासन दिया है कि आदित्य की मौत से जुड़े सभी तथ्यों की गहन जांच की जाएगी, ताकि सच्चाई सामने आ सके और परिवार को न्याय मिल सके। भालू गांव और आसपास के इलाकों में शोक का माहौल है, और बड़ी संख्या में लोग परिवार को ढांढस बंधाने उनके घर पहुंच रहे हैं। परिवार की निगाहें अब उस पल पर टिकी हैं, जब उनके इकलौते बेटे आदित्य का पार्थिव शरीर अंतिम विदाई के लिए घर पहुंचेगा।1