फरोग-ए-उर्दू सेमिनार, कार्यशाला एवं मुशायरा का हुआ सफल आयोजन नवादा लाइव नेटवर्क। ककोलत महोत्सव के तीसरे एवं अंतिम दिन जिला उर्दू भाषा कोषांग द्वारा खेल भवन, नवादा में फरोग-ए-उर्दू सेमिनार, कार्यशाला एवं मुशायरा का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन जिला उर्दू भाषा कोषांग के प्रभारी मनोज चौधरी एवं अन्य पदाधिकारियों तथा गणमान्य अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ स्वागत भाषण से हुआ, जिसमें उर्दू भाषा के महत्व, इसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत तथा गंगा-जमुनी तहजीब में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला गया। अतिथियों ने अपने संबोधन में उर्दू को सामाजिक सद्भाव एवं सांस्कृतिक एकता की भाषा बताते हुए इसके अध्ययन, संरक्षण एवं दैनिक उपयोग को बढ़ावा देने का आह्वान किया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, शिक्षाविद, साहित्यकार एवं उर्दू प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। “डिजिटल दुनिया और उर्दू-दाँ की ज़िम्मेदारियाँ” विषय पर आयोजित कार्यशाला में वक्ताओं ने बताया कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से उर्दू भाषा को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई जा सकती है। प्रतिभागियों को उर्दू टाइपिंग, डिजिटल प्रकाशन, यूनिकोड के उपयोग तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से भाषा प्रचार-प्रसार के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत विद्वानों द्वारा उर्दू भाषा एवं साहित्य पर आलेख प्रस्तुत किए गए। शिक्षाविदों ने उर्दू की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, साहित्यिक परंपरा तथा डिजिटल युग में इसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के अंतिम चरण में आयोजित मुशायरे ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। विभिन्न शायरों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रेम, सामाजिक सरोकार, राष्ट्रीय एकता एवं मानवीय संवेदनाओं को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया। श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से शायरों का उत्साहवर्धन किया। अंत में साहित्यकारों, शिक्षाविदों एवं उर्दू प्रेमियों को सम्मानित किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
फरोग-ए-उर्दू सेमिनार, कार्यशाला एवं मुशायरा का हुआ सफल आयोजन नवादा लाइव नेटवर्क। ककोलत महोत्सव के तीसरे एवं अंतिम दिन जिला उर्दू भाषा कोषांग द्वारा खेल भवन, नवादा में फरोग-ए-उर्दू सेमिनार, कार्यशाला एवं मुशायरा का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन जिला उर्दू भाषा कोषांग के प्रभारी मनोज चौधरी एवं अन्य पदाधिकारियों तथा गणमान्य अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ स्वागत भाषण से हुआ, जिसमें उर्दू भाषा के महत्व, इसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत तथा गंगा-जमुनी तहजीब में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला गया। अतिथियों ने अपने संबोधन में उर्दू को सामाजिक सद्भाव एवं सांस्कृतिक एकता की भाषा बताते हुए इसके अध्ययन, संरक्षण एवं दैनिक उपयोग को बढ़ावा देने का आह्वान किया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, शिक्षाविद, साहित्यकार एवं उर्दू प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। “डिजिटल दुनिया और उर्दू-दाँ की ज़िम्मेदारियाँ” विषय पर आयोजित कार्यशाला में वक्ताओं ने
बताया कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से उर्दू भाषा को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई जा सकती है। प्रतिभागियों को उर्दू टाइपिंग, डिजिटल प्रकाशन, यूनिकोड के उपयोग तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से भाषा प्रचार-प्रसार के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत विद्वानों द्वारा उर्दू भाषा एवं साहित्य पर आलेख प्रस्तुत किए गए। शिक्षाविदों ने उर्दू की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, साहित्यिक परंपरा तथा डिजिटल युग में इसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के अंतिम चरण में आयोजित मुशायरे ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। विभिन्न शायरों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रेम, सामाजिक सरोकार, राष्ट्रीय एकता एवं मानवीय संवेदनाओं को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया। श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से शायरों का उत्साहवर्धन किया। अंत में साहित्यकारों, शिक्षाविदों एवं उर्दू प्रेमियों को सम्मानित किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।