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बिहार में पत्रकार पेंशन नियमावली-----

2 hrs ago
user_S.alam D.A.T/M.D.E news
S.alam D.A.T/M.D.E news
पत्रकार छातापुर, सुपौल, बिहार•
2 hrs ago
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बिहार में पत्रकार पेंशन नियमावली-----

More news from बिहार and nearby areas
  • #shuruapps #madhepura
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    #shuruapps #madhepura
    user_Vijay kumar
    Vijay kumar
    Artist कुमारखंड, मधेपुरा, बिहार•
    11 hrs ago
  • बिहार सरकार भले ही स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के बड़े-बड़े दावे करती हो, लेकिन कोसी प्रमंडल से जो तस्वीर सामने आई है, वह इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मधेपुरा स्थित जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, जिसे 800 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया, आज खुद संसाधनों और डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रहा है। हालात ऐसे हैं कि यह मेडिकल कॉलेज खुद ‘आईसीयू’ में नजर आ रहा है। 232 स्वीकृत चिकित्सकों के पदों वाले इस मेडिकल कॉलेज में फिलहाल सिर्फ 51 डॉक्टर कार्यरत हैं। यानी करीब 78 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं। 23 विभागों वाले इस संस्थान में प्रोफेसर के 23 पदों में से मात्र 3, एसोसिएट प्रोफेसर के 43 में से 7, असिस्टेंट प्रोफेसर के 76 में से 10 और सीनियर रेजिडेंट व ट्यूटर के 90 में से केवल 31 पद ही भरे हुए हैं। इन 51 डॉक्टरों पर इलाज, इमरजेंसी ड्यूटी और मेडिकल छात्रों को पढ़ाने की तिहरी जिम्मेदारी है। नतीजा—मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा और छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। स्थिति सिर्फ स्टाफ की कमी तक सीमित नहीं है। अस्पताल में एमआरआई और अल्ट्रासाउंड जैसी बुनियादी जांच सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं हैं। दूर-दराज से आने वाले मरीजों को हल्के से गंभीर मामलों तक में रेफर कर दिया जाता है। मजबूरी में लोगों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ और बढ़ जाता है। मंगलवार को कोसी प्रमंडल के आयुक्त राजेश कुमार ने मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने डॉक्टरों की भारी कमी और साफ-सफाई की बदहाल स्थिति पर नाराजगी जताई। सवाल यह है कि जब उच्च अधिकारी खुद खामियों को स्वीकार कर रहे हैं, तो समाधान अब तक क्यों नहीं निकला? यह मुद्दा विधानसभा और विधान परिषद में भी उठ चुका है, लेकिन सुधार की बजाय हालात और बिगड़े हैं। पहले 62 डॉक्टर कार्यरत थे, जो अब घटकर 51 रह गए हैं। मेडिकल कॉलेज सिर्फ इलाज का केंद्र नहीं होता, बल्कि यह भविष्य के डॉक्टर तैयार करने की प्रयोगशाला भी होता है। यदि फैकल्टी की इतनी भारी कमी रहेगी, तो इसका असर आने वाले वर्षों में पूरे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पर दिखेगा। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सुविधाएँ रेफरल अस्पताल जैसी हों, तो 800 करोड़ की इस परियोजना का औचित्य क्या है? क्या यह संस्थान सिर्फ भवन तक सीमित रह गया है? कोसी क्षेत्र के लाखों लोगों की उम्मीदें इस मेडिकल कॉलेज से जुड़ी हैं। अब देखना होगा कि आयुक्त के निरीक्षण के बाद क्या सरकार ठोस कदम उठाती है? क्या रिक्त पदों पर नियुक्ति होगी? क्या बुनियादी जांच सुविधाएँ बहाल होंगी? या फिर यूँ ही बदहाल रहेगा मधेपुरा का स्वास्थ्य तंत्र? बाइट --- राजेश कुमार ,कोसी प्रमंडल के आयुक्त
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    बिहार सरकार भले ही स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के बड़े-बड़े दावे करती हो, लेकिन कोसी प्रमंडल से जो तस्वीर सामने आई है, वह इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मधेपुरा स्थित जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, जिसे 800 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया, आज खुद संसाधनों और डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रहा है। हालात ऐसे हैं कि यह मेडिकल कॉलेज खुद ‘आईसीयू’ में नजर आ रहा है।
232 स्वीकृत चिकित्सकों के पदों वाले इस मेडिकल कॉलेज में फिलहाल सिर्फ 51 डॉक्टर कार्यरत हैं। यानी करीब 78 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं।
23 विभागों वाले इस संस्थान में प्रोफेसर के 23 पदों में से मात्र 3, एसोसिएट प्रोफेसर के 43 में से 7, असिस्टेंट प्रोफेसर के 76 में से 10 और सीनियर रेजिडेंट व ट्यूटर के 90 में से केवल 31 पद ही भरे हुए हैं।
इन 51 डॉक्टरों पर इलाज, इमरजेंसी ड्यूटी और मेडिकल छात्रों को पढ़ाने की तिहरी जिम्मेदारी है। नतीजा—मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा और छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
स्थिति सिर्फ स्टाफ की कमी तक सीमित नहीं है। अस्पताल में एमआरआई और अल्ट्रासाउंड जैसी बुनियादी जांच सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं हैं। दूर-दराज से आने वाले मरीजों को हल्के से गंभीर मामलों तक में रेफर कर दिया जाता है।
मजबूरी में लोगों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ और बढ़ जाता है।
मंगलवार को कोसी प्रमंडल के आयुक्त राजेश कुमार ने मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने डॉक्टरों की भारी कमी और साफ-सफाई की बदहाल स्थिति पर नाराजगी जताई।
सवाल यह है कि जब उच्च अधिकारी खुद खामियों को स्वीकार कर रहे हैं, तो समाधान अब तक क्यों नहीं निकला?
यह मुद्दा विधानसभा और विधान परिषद में भी उठ चुका है, लेकिन सुधार की बजाय हालात और बिगड़े हैं। पहले 62 डॉक्टर कार्यरत थे, जो अब घटकर 51 रह गए हैं।
मेडिकल कॉलेज सिर्फ इलाज का केंद्र नहीं होता, बल्कि यह भविष्य के डॉक्टर तैयार करने की प्रयोगशाला भी होता है। यदि फैकल्टी की इतनी भारी कमी रहेगी, तो इसका असर आने वाले वर्षों में पूरे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पर दिखेगा।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सुविधाएँ रेफरल अस्पताल जैसी हों, तो 800 करोड़ की इस परियोजना का औचित्य क्या है? क्या यह संस्थान सिर्फ भवन तक सीमित रह गया है?
कोसी क्षेत्र के लाखों लोगों की उम्मीदें इस मेडिकल कॉलेज से जुड़ी हैं। अब देखना होगा कि आयुक्त के निरीक्षण के बाद क्या सरकार ठोस कदम उठाती है? क्या रिक्त पदों पर नियुक्ति होगी? क्या बुनियादी जांच सुविधाएँ बहाल होंगी?
या फिर यूँ ही बदहाल रहेगा मधेपुरा का स्वास्थ्य तंत्र?
बाइट --- राजेश कुमार ,कोसी प्रमंडल के आयुक्त
    user_RAMAN KUMAR
    RAMAN KUMAR
    REPORTER मधेपुरा, मधेपुरा, बिहार•
    1 hr ago
  • मधेपुरा मे कीरीमन का तांडव
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    मधेपुरा मे कीरीमन का तांडव
    user_Pintu Bihari
    Pintu Bihari
    Farmer Madhepura, Bihar•
    21 hrs ago
  • jila paschimi Champaran Bihar Bharat Chauraha
    1
    jila paschimi Champaran Bihar Bharat Chauraha
    user_Pintu Nishad Raj
    Pintu Nishad Raj
    अररिया, अररिया, बिहार•
    2 hrs ago
  • अररिया नेताजी सुभाष स्टेडियम मैदान में दौर रेस करते छात्रा।
    1
    अररिया नेताजी सुभाष स्टेडियम मैदान में दौर रेस करते छात्रा।
    user_Araria News
    Araria News
    Media company Araria, Bihar•
    3 hrs ago
  • Post by विकास कुमार
    1
    Post by विकास कुमार
    user_विकास कुमार
    विकास कुमार
    Electrician अररिया, अररिया, बिहार•
    4 hrs ago
  • #news #trending #shuruapps
    1
    #news #trending #shuruapps
    user_Vijay kumar
    Vijay kumar
    Artist कुमारखंड, मधेपुरा, बिहार•
    23 hrs ago
  • बिहार के मधेपुरा जिले में आज से मैट्रिक वार्षिक परीक्षा शांतिपूर्ण माहौल में शुरू हो गई है। 25 फरवरी तक चलने वाली इस परीक्षा में 44 केंद्रों पर 28 हजार से ज्यादा परीक्षार्थी शामिल हो रहे हैं। प्रशासन की ओर से कदाचारमुक्त परीक्षा को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। मधेपुरा में आज से मैट्रिक की वार्षिक परीक्षा शुरू हो गई है। परीक्षा जिले के कुल 44 केंद्रों पर आयोजित की जा रही है, जहां 28,115 परीक्षार्थी शामिल हो रहे हैं। परीक्षा दो पालियों में हो रही है। पहली पाली सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक संचालित की जा रही है। पहली पाली में 14,095 और दूसरी पाली में 14,020 परीक्षार्थी परीक्षा दे रहे हैं। जिले के 44 केंद्रों में से 25 केंद्र जिला मुख्यालय क्षेत्र में और 19 केंद्र उदाकिशुनगंज अनुमंडल में बनाए गए हैं। छात्राओं के लिए 21 और छात्रों के लिए 23 केंद्र निर्धारित किए गए हैं। प्रशासन ने परीक्षा को कदाचारमुक्त और पारदर्शी बनाने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। पहली पाली के परीक्षार्थियों को सुबह 9 बजे तक और दूसरी पाली के परीक्षार्थियों को दोपहर 1:30 बजे तक ही प्रवेश की अनुमति दी जा रही है। निर्धारित समय के बाद किसी भी परीक्षार्थी को केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण—जैसे मोबाइल फोन, ब्लूटूथ, स्मार्ट वॉच या इलेक्ट्रॉनिक घड़ी—ले जाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है। परीक्षा केंद्रों के आसपास फोटोस्टेट और साइबर कैफे की दुकानों पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है। सभी केंद्रों पर दंडाधिकारी, पुलिस बल और केंद्राधीक्षक की तैनाती की गई है। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। परीक्षा को पूरी तरह कदाचारमुक्त और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी केंद्रों पर पर्याप्त सुरक्षा बल और दंडाधिकारियों की तैनाती की गई है। समय सीमा के बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
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    बिहार के मधेपुरा जिले में आज से मैट्रिक वार्षिक परीक्षा शांतिपूर्ण माहौल में शुरू हो गई है। 25 फरवरी तक चलने वाली इस परीक्षा में 44 केंद्रों पर 28 हजार से ज्यादा परीक्षार्थी शामिल हो रहे हैं। प्रशासन की ओर से कदाचारमुक्त परीक्षा को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
मधेपुरा में आज से मैट्रिक की वार्षिक परीक्षा शुरू हो गई है। परीक्षा जिले के कुल 44 केंद्रों पर आयोजित की जा रही है, जहां 28,115 परीक्षार्थी शामिल हो रहे हैं।
परीक्षा दो पालियों में हो रही है। पहली पाली सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक संचालित की जा रही है। पहली पाली में 14,095 और दूसरी पाली में 14,020 परीक्षार्थी परीक्षा दे रहे हैं।
जिले के 44 केंद्रों में से 25 केंद्र जिला मुख्यालय क्षेत्र में और 19 केंद्र उदाकिशुनगंज अनुमंडल में बनाए गए हैं। छात्राओं के लिए 21 और छात्रों के लिए 23 केंद्र निर्धारित किए गए हैं।
प्रशासन ने परीक्षा को कदाचारमुक्त और पारदर्शी बनाने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। पहली पाली के परीक्षार्थियों को सुबह 9 बजे तक और दूसरी पाली के परीक्षार्थियों को दोपहर 1:30 बजे तक ही प्रवेश की अनुमति दी जा रही है। निर्धारित समय के बाद किसी भी परीक्षार्थी को केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।
किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण—जैसे मोबाइल फोन, ब्लूटूथ, स्मार्ट वॉच या इलेक्ट्रॉनिक घड़ी—ले जाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है।
परीक्षा केंद्रों के आसपास फोटोस्टेट और साइबर कैफे की दुकानों पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है। सभी केंद्रों पर दंडाधिकारी, पुलिस बल और केंद्राधीक्षक की तैनाती की गई है।
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
परीक्षा को पूरी तरह कदाचारमुक्त और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी केंद्रों पर पर्याप्त सुरक्षा बल और दंडाधिकारियों की तैनाती की गई है। समय सीमा के बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
    user_RAMAN KUMAR
    RAMAN KUMAR
    REPORTER मधेपुरा, मधेपुरा, बिहार•
    7 hrs ago
  • Majid Bombay
    1
    Majid Bombay
    user_Hdmfbsm
    Hdmfbsm
    अररिया, अररिया, बिहार•
    5 hrs ago
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