राज्य शिक्षा केंद्र ने कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य संरक्षण, परीक्षा तनाव में कमी लाने और आनंददायी शिक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के तहत, विद्यार्थियों के लिए एक सकारात्मक और सहयोगात्मक शैक्षणिक वातावरण विकसित करने हेतु बहुस्तरीय समितियों का गठन किया जाएगा। नीमच जिले में, जिला परियोजना समन्वयक डीके व्यास ने सभी शासकीय, अशासकीय विद्यालयों और मदरसों को इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। नई व्यवस्था के तहत, जिला स्तर से लेकर विद्यालय स्तर तक समितियां गठित की जाएंगी, जिनका कार्य विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक सुरक्षा और विद्यालयी वातावरण की निगरानी करना होगा। निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि स्कूलों में ऐसा माहौल बनाया जाए जहाँ विद्यार्थी अपनी समस्याएं शिक्षकों के साथ आसानी से साझा कर सकें। परीक्षा, ग्रेड और शैक्षणिक प्रदर्शन को लेकर बच्चों पर किसी भी प्रकार का अनावश्यक दबाव नहीं डाला जाएगा। इसके लिए शिक्षकों और अभिभावकों दोनों को जागरूक किया जाएगा, तथा पालक बैठकों के माध्यम से बच्चों की रुचि, क्षमता और मनोस्थिति के अनुरूप सहयोग करने का संदेश दिया जाएगा। जिले में एक 14 सदस्यीय जिला स्तरीय समिति बनेगी, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त, विकासखंड, संकुल, जन शिक्षा केंद्र और विद्यालय स्तर पर भी अलग-अलग समितियां गठित होंगी, जो मानसिक स्वास्थ्य और विद्यालयी वातावरण से जुड़े विषयों की निगरानी कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएंगी। शिकायतों के समाधान के लिए, प्रत्येक विद्यालय और जन शिक्षा केंद्र में शिकायत पेटी स्थापित की जाएगी, जिसमें विद्यार्थी अपनी समस्याएं, सुझाव या शिकायतें लिखित रूप में दर्ज कर सकेंगे। इन शिकायतों की नियमित समीक्षा कर समाधान प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, काउंसलरों और प्रशिक्षित शिक्षकों की सहायता से परामर्श भी उपलब्ध कराया जाएगा। राज्य शिक्षा केंद्र ने विद्यार्थियों की गरिमा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए शारीरिक दंड और मानसिक प्रताड़ना पर सख्त रोक लगाई है। शिक्षकों को ऐसे व्यवहार या भाषा से बचने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे बच्चों को मानसिक आघात पहुँचे या उनका आत्मविश्वास प्रभावित हो। विद्यालयों को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने और समावेशी वातावरण विकसित करने को भी कहा गया है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य केवल परीक्षा परिणामों में सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास को भी समान महत्व देना है। शिक्षा विभाग का मानना है कि एक सकारात्मक वातावरण, संवाद और सहयोग आधारित शिक्षण प्रणाली से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ेगा, सीखने की रुचि विकसित होगी और वे बिना तनाव के बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे। नीमच के जिला अकादमिक समन्वयक पंडित अबिकाप्रसाद जोशी ने बताया कि राज्य स्तर से प्राप्त निर्देशों के अनुरूप जिले में समिति गठन की प्रक्रिया प्रस्तावित है। विभिन्न अकादमिक कार्यशालाओं के माध्यम से शिक्षकों को बच्चों के सर्वांगीण विकास पर केंद्रित शिक्षण पद्धतियों के लिए निर्देशित किया जा रहा है। खेल-खेल में शिक्षण, गतिविधि आधारित अध्ययन, जिज्ञासु किट और जादुई पिटारा जैसे नवाचारों के माध्यम से प्राथमिक एवं माध्यमिक कक्षाओं में शिक्षण कार्य को अधिक रुचिकर और प्रभावी बनाया जा रहा है, जिससे अध्ययन का माहौल अधिक सहज, सुरक्षित और विद्यार्थी केंद्रित बन सके।
राज्य शिक्षा केंद्र ने कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य संरक्षण, परीक्षा तनाव में कमी लाने और आनंददायी शिक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के तहत, विद्यार्थियों के लिए एक सकारात्मक और सहयोगात्मक शैक्षणिक वातावरण विकसित करने हेतु बहुस्तरीय समितियों का गठन किया जाएगा। नीमच जिले में, जिला परियोजना समन्वयक डीके व्यास ने सभी शासकीय, अशासकीय विद्यालयों और मदरसों को इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। नई व्यवस्था के तहत, जिला स्तर से लेकर विद्यालय स्तर तक समितियां गठित की जाएंगी, जिनका कार्य विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक सुरक्षा और विद्यालयी वातावरण की निगरानी करना होगा। निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि स्कूलों में ऐसा माहौल बनाया जाए जहाँ विद्यार्थी अपनी समस्याएं शिक्षकों के साथ आसानी से साझा कर सकें। परीक्षा, ग्रेड और शैक्षणिक प्रदर्शन को लेकर बच्चों पर किसी भी प्रकार का अनावश्यक दबाव नहीं डाला जाएगा। इसके लिए शिक्षकों और अभिभावकों दोनों को जागरूक किया जाएगा, तथा पालक बैठकों के माध्यम से बच्चों की रुचि, क्षमता और मनोस्थिति के अनुरूप सहयोग करने का संदेश दिया जाएगा। जिले में एक 14 सदस्यीय जिला स्तरीय समिति बनेगी, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त, विकासखंड, संकुल, जन शिक्षा केंद्र और विद्यालय स्तर पर भी अलग-अलग समितियां गठित होंगी, जो मानसिक स्वास्थ्य और विद्यालयी वातावरण से जुड़े विषयों की निगरानी कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएंगी। शिकायतों के समाधान के लिए, प्रत्येक विद्यालय और जन शिक्षा केंद्र में शिकायत पेटी स्थापित की जाएगी, जिसमें विद्यार्थी अपनी समस्याएं, सुझाव या शिकायतें लिखित रूप में दर्ज कर सकेंगे। इन शिकायतों की नियमित समीक्षा कर समाधान प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, काउंसलरों और प्रशिक्षित शिक्षकों की सहायता से परामर्श भी उपलब्ध कराया जाएगा। राज्य शिक्षा केंद्र ने विद्यार्थियों की गरिमा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए शारीरिक दंड और मानसिक प्रताड़ना पर सख्त रोक लगाई है। शिक्षकों को ऐसे व्यवहार या भाषा से बचने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे बच्चों को मानसिक आघात पहुँचे या उनका आत्मविश्वास प्रभावित हो। विद्यालयों को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने और समावेशी वातावरण विकसित करने को भी कहा गया है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य केवल परीक्षा परिणामों में सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास को भी समान महत्व देना है। शिक्षा विभाग का मानना है कि एक सकारात्मक वातावरण, संवाद और सहयोग आधारित शिक्षण प्रणाली से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ेगा, सीखने की रुचि विकसित होगी और वे बिना तनाव के बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे। नीमच के जिला अकादमिक समन्वयक पंडित अबिकाप्रसाद जोशी ने बताया कि राज्य स्तर से प्राप्त निर्देशों के अनुरूप जिले में समिति गठन की प्रक्रिया प्रस्तावित है। विभिन्न अकादमिक कार्यशालाओं के माध्यम से शिक्षकों को बच्चों के सर्वांगीण विकास पर केंद्रित शिक्षण पद्धतियों के लिए निर्देशित किया जा रहा है। खेल-खेल में शिक्षण, गतिविधि आधारित अध्ययन, जिज्ञासु किट और जादुई पिटारा जैसे नवाचारों के माध्यम से प्राथमिक एवं माध्यमिक कक्षाओं में शिक्षण कार्य को अधिक रुचिकर और प्रभावी बनाया जा रहा है, जिससे अध्ययन का माहौल अधिक सहज, सुरक्षित और विद्यार्थी केंद्रित बन सके।
- मिड डे मील की गुणवत्ता में सुधार लाने की पहल के तहत, नीमच जिले के जावद क्षेत्र में रसोइया दीदियों का सम्मान किया गया। इस विशेष अवसर पर, एक ब्लॉक स्तरीय व्यंजन प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें रसोइया दीदियों ने अपनी बेहतरीन पाक कला का प्रदर्शन किया। यह आयोजन मिड डे मील की गुणवत्ता बढ़ाने और रसोइया दीदियों के योगदान को मान्यता देने के उद्देश्य से किया गया था।1
- नीमच जिले के रामपुरा क्षेत्र में लापता युवती का मामला शनिवार को उस वक्त गरमा गया, जब गांधी सागर-रावतभाटा मार्ग पर एक कंकाल मिलने की सूचना मिली। इस खबर के बाद युवती के परिजन और ग्रामीण भड़क उठे और उन्होंने बड़ी संख्या में रामपुरा थाने के सामने चक्का जाम कर दिया, जिससे स्टेट हाईवे-31 पर आवागमन पूरी तरह अवरुद्ध हो गया। प्रदर्शनकारी आरोपी पर सख्त कार्रवाई करने और उसके मकान पर बुलडोजर चलाने की मांग कर रहे थे। सूचना पर एसडीओपी निकिता सिंह मौके पर पहुंचीं और लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया। उनके आश्वासन के बाद सड़क जाम समाप्त हो सका। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और कंकाल की पुष्टि होने के बाद ही इस संबंध में आगे की कार्रवाई की जाएगी।1
- रामपुरा पुलिस ने पुलिस अधीक्षक राजेश व्यास के नेतृत्व और एसडीओपी निकिता सिंह के मार्गदर्शन में अवैध शराब के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी विपिन मसीह और रामपुरा थाना पुलिस बल ने आमेड और बुज नाले क्षेत्र में छापेमारी करते हुए लगभग 400 लीटर लहान और 10 लीटर कच्ची शराब जब्त की। मौके पर ही अवैध शराब निर्माण में उपयोग की जा रही सामग्री को भी नष्ट कर दिया गया। पुलिस को लगातार क्षेत्र में अवैध रूप से कच्ची शराब बनाए जाने की सूचनाएं मिल रही थीं। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर थाना पुलिस ने एक योजनाबद्ध तरीके से अभियान चलाया और आमेड तथा बुज नाले के आसपास के क्षेत्रों में दबिश दी। इस दौरान भारी मात्रा में लहान और कच्ची शराब बरामद हुई, जिसे जब्त कर नियमानुसार नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में अवैध शराब के निर्माण एवं बिक्री पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध कारोबार में संलिप्त लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और जिले में अवैध गतिविधियों के खिलाफ यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। रामपुरा पुलिस की इस कार्रवाई से अवैध शराब कारोबारियों में हड़कंप मच गया है, जबकि स्थानीय लोगों ने पुलिस की इस पहल की सराहना करते हुए क्षेत्र में ऐसे अभियानों को निरंतर जारी रखने की मांग की है।1
- यह घोषणा की गई है कि गौ माता से संबंधित १६ एकड़ भूमि को जिन लोगों ने कथित रूप से हड़पा है, वे कभी फलीभूत नहीं हो पाएंगे। इस संदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ऐसी भूमि का अधिग्रहण करने वालों को इसका कोई शुभ फल प्राप्त नहीं होगा।1
- मनासा क्षेत्र के हांसपुर गांव में समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से 21 जून से 27 जून तक सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ कथा का आयोजन किया जा रहा है। आज रविवार को इस पावन कथा के शुभारंभ पर एक भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसने पूरे भक्तिमय आयोजन का उत्साहपूर्वक आगाज किया। यह कलश यात्रा सुबह मंशापूर्ण महादेव मंदिर से प्रारंभ हुई, जहाँ कलशों में जल भरकर बैंड-बाजों के साथ विधिवत पूजा-अर्चना की गई। यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अत्यंत उत्साह के साथ हिस्सा लिया, जिनमें कई महिलाएं अपने सिर पर कलश धारण किए हुए थीं। नगर भ्रमण के दौरान, ग्रामीणजनों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर कलश यात्रा का भव्य स्वागत किया। नगर भ्रमण के उपरांत, कलश यात्रा कथा स्थल कुशवाह समाज धर्मशाला प्रांगण पहुँची, जहाँ पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलशों की स्थापना की गई। इसके बाद, कथावाचक पंडित रमेश जी पुरोहित डांगड़ी वाले ने श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत शुभारंभ किया और भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का मनोहारी प्रसंग सुनाया। यह कथा प्रतिदिन दोपहर 12:15 बजे से 3:15 बजे तक आयोजित की जाएगी।1
- NEET परीक्षा के दौरान योगी की पुलिस ने एक सराहनीय कार्य किया है। जानकारी के अनुसार, एक छात्रा गलती से किसी और परीक्षा केंद्र पर पहुँच गई थी। इस स्थिति में, पुलिसकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए उसे अपनी कार में बिठाकर सही परीक्षा केंद्र तक पहुँचाया। इतना ही नहीं, छात्रा को देरी होने के बावजूद परीक्षा में बैठने दिया गया और उसने अपना एग्जाम सफलतापूर्वक दिया।1
- महेश नवमी के अवसर पर निकलने वाली भव्य शोभायात्रा की तैयारियों में मातृशक्ति पूरे उत्साह के साथ जुटी हुई है। इस शोभायात्रा के लिए मातृशक्ति ने ढोल-नगाड़ों के साथ परेड अभ्यास किया, जिसमें उत्सव का माहौल स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।1
- 5 जुलाई को नीमच के टाउन हॉल में, कलेक्टर चंदा ने राष्ट्रीय टूर्नामेंट के अवसर पर शतरंज सीख रहे बच्चों का हौसला बढ़ाया।1