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औरैया जिले के अजीतमल के 65 वर्षीय राकेश यादव ने मार्च 2026 में अपने जीवित रहते हुए स्वयं का तेरहवीं संस्कार और भंडारा आयोजित करने का अनोखा निर्णय लिया। अविवाहित राकेश ने अपने दो भाइयों के निधन के बाद अकेलेपन और भविष्य में कोई संस्कार करने वाला न होने के डर के कारण यह कदम उठाया। लक्ष्मणपुर गांव के राकेश यादव, स्वर्गीय हरवंश यादव के सबसे बड़े पुत्र हैं। उनके छोटे भाइयों में से एक की बीमारी के कारण मृत्यु हुई और दूसरे की हत्या कर दी गई। परिवार में आई इन त्रासदियों के बाद राकेश पूरी तरह अकेले रह गए। इस आयोजन के लिए उन्होंने निमंत्रण कार्ड बांटकर लगभग 1,900 लोगों को भोज में आमंत्रित किया है।
Gaurav verma
औरैया जिले के अजीतमल के 65 वर्षीय राकेश यादव ने मार्च 2026 में अपने जीवित रहते हुए स्वयं का तेरहवीं संस्कार और भंडारा आयोजित करने का अनोखा निर्णय लिया। अविवाहित राकेश ने अपने दो भाइयों के निधन के बाद अकेलेपन और भविष्य में कोई संस्कार करने वाला न होने के डर के कारण यह कदम उठाया। लक्ष्मणपुर गांव के राकेश यादव, स्वर्गीय हरवंश यादव के सबसे बड़े पुत्र हैं। उनके छोटे भाइयों में से एक की बीमारी के कारण मृत्यु हुई और दूसरे की हत्या कर दी गई। परिवार में आई इन त्रासदियों के बाद राकेश पूरी तरह अकेले रह गए। इस आयोजन के लिए उन्होंने निमंत्रण कार्ड बांटकर लगभग 1,900 लोगों को भोज में आमंत्रित किया है।
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