राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के केंद्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद श्री के.सी. त्यागी जी की अध्यक्षता में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। बैठक के बाद, राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री माननीय चौधरी जयंत सिंह जी ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि पार्टी का संसदीय बोर्ड समय-समय पर नियमित बैठकें करेगा। इन बैठकों में पार्टी से जुड़े महत्वपूर्ण और बड़े विषयों पर विचार-विमर्श कर आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संसदीय बोर्ड संगठन को और अधिक सशक्त, सक्रिय एवं प्रभावी बनाने के साथ-साथ पार्टी की नीतियों, संगठनात्मक विस्तार और भविष्य की रणनीतियों को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राष्ट्रीय लोकदल चौधरी चरण सिंह जी की किसान, मजदूर एवं सामाजिक न्याय की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। माननीय चौधरी जयंत सिंह जी के नेतृत्व में संगठन को और अधिक मजबूत बनाने और जनसेवा के संकल्प के साथ कार्य निरंतर जारी रहेगा। पार्टी ने अपनी पहचान एक मजबूत संगठन, स्पष्ट विचार और समर्पित नेतृत्व के रूप में स्थापित की है।
राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के केंद्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद श्री के.सी. त्यागी जी की अध्यक्षता में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। बैठक के बाद, राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री माननीय चौधरी जयंत सिंह जी ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि पार्टी का संसदीय बोर्ड समय-समय पर नियमित बैठकें करेगा। इन बैठकों में पार्टी से जुड़े महत्वपूर्ण और बड़े विषयों पर विचार-विमर्श कर आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संसदीय बोर्ड संगठन को और अधिक सशक्त, सक्रिय एवं प्रभावी बनाने के साथ-साथ पार्टी की नीतियों, संगठनात्मक विस्तार और भविष्य की रणनीतियों को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राष्ट्रीय लोकदल चौधरी चरण सिंह जी की किसान, मजदूर एवं सामाजिक न्याय की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। माननीय चौधरी जयंत सिंह जी के नेतृत्व में संगठन को और अधिक मजबूत बनाने और जनसेवा के संकल्प के साथ कार्य निरंतर जारी रहेगा। पार्टी ने अपनी पहचान एक मजबूत संगठन, स्पष्ट विचार और समर्पित नेतृत्व के रूप में स्थापित की है।
- भारी बारिश के चलते शुकतीर्थ के प्रसिद्ध हनुमन्तधाम में अत्यधिक जल भराव हो गया है।1
- सभी देशवासियों को अमरनाथ यात्रा और कांवड़ यात्रा के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएँ और बधाई दी गई हैं। भोलेनाथ के उपलक्ष्य पर सावन के महीने में कांवड़ यात्रा शुरू हो गई है, जिसमें श्रद्धालु हरिद्वार से गंगाजल लेकर मेरठ के पुरा महादेव सहित भारत के विभिन्न शहरों में जाते हैं। कांवड़ सेवा संघ और सोनू कुमार बाबरा की ओर से यह शुभकामनाएँ व्यक्त की गई हैं। इस संदेश में लोगों से इसे लाइक, फॉलो, कमेंट और शेयर करने का आग्रह भी किया गया है। 'जय भोलेनाथ', 'ओम नमः शिवाय', 'जय हिंद', 'जय भारत' के उद्घोष के साथ सभी को शुभ प्रभात कहा गया है।4
- मुजफ्फरनगर में कांवड़ यात्रा-2026 को सकुशल, सुरक्षित, दुर्घटनामुक्त और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस और प्रशासन ने अपनी तैयारियां अंतिम चरण में पहुँचा दी हैं। इसी कड़ी में, बुधवार को रिजर्व पुलिस लाइन स्थित सभागार में अपर पुलिस महानिदेशक मेरठ जोन भानु भास्कर ने अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की। इस बैठक में पुलिस उपमहानिरीक्षक सहारनपुर परिक्षेत्र अभिषेक सिंह, जिलाधिकारी उमेश मिश्रा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा भी मौजूद रहे।1
- मुजफ्फरनगर में आगामी कांवड़ यात्रा के दृष्टिगत, अपर पुलिस महानिदेशक मेरठ जोन मेरठ ने अधिकारियों के साथ एक समीक्षा गोष्ठी की। इस बैठक में उन्होंने सुरक्षा व्यवस्थाओं का विस्तृत जायजा लिया। समीक्षा के बाद, अपर पुलिस महानिदेशक ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए, जिसका मुख्य उद्देश्य कांवड़ यात्रा के दौरान सुदृढ़ सुरक्षा सुनिश्चित करना था।1
- जनपद की तहसील में भ्रष्टाचार के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने मोर्चा खोल दिया है। मूसलाधार बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में किसान तहसील परिसर पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। उन्होंने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि भ्रष्टाचार पर तत्काल रोक नहीं लगी और किसानों का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। भाकियू नेताओं ने आरोप लगाया कि तहसील में दाखिल-खारिज, अंश निर्धारण और अन्य राजस्व संबंधी कार्यों के लिए खुलेआम रिश्वत मांगी जाती है। उनके अनुसार, पहले जानबूझकर गलतियां की जाती हैं और फिर उन्हें ठीक कराने के नाम पर किसानों को बार-बार चक्कर लगवाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, राशन कार्ड की यूनिट काटने और गरीबों को सरकारी योजनाओं से वंचित करने जैसे गंभीर आरोप भी प्रशासन पर लगाए गए हैं। भारतीय किसान यूनियन के पुरकाजी ब्लॉक अध्यक्ष मोनू चौधरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि "भ्रष्टाचार नहीं रुका तो धरना नहीं उठेगा।" धरने पर बैठे किसानों ने प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कुछ कर्मचारी सरकार की छवि खराब कर रहे हैं और यदि अधिकारी व कर्मचारी ईमानदारी से काम करें तो किसानों को धरना देने की नौबत ही न आती। उन्होंने यह भी कहा कि वे अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए हर परिस्थिति में तैयार हैं। संगठन ने साफ चेतावनी दी है कि किसानों की जेब काटना और उनका शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि यदि वार्ता में कोई समाधान निकलता है तो आगे की रणनीति तय की जाएगी, अन्यथा आंदोलन और भी उग्र रूप लेगा।4
- मुजफ्फरनगर जिले के भोपा थाना क्षेत्र में फिरोजपुर खादर स्थित शुक्रताल दुर्गा धाम गंगा घाट के पास भूमि पर निर्माण को लेकर एक गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि वैध बैनामों के आधार पर प्लॉट खरीदने के बाद जब उन्होंने निर्माण कार्य शुरू किया, तो वन विभाग की टीम ने उसे रुकवा दिया। इसी संदर्भ में, जगन्नाथ पुरी की निवासी अनुराधा ने बताया कि उन्होंने भी यहीं भूमि खरीदी है और खाटू श्याम मंदिर के निर्माण का संकल्प लिया है। हालांकि, उनका दावा है कि वन विभाग उनके अभिलेखों को अधूरा बताते हुए निर्माण की अनुमति नहीं दे रहा है, जिससे मंदिर निर्माण में बाधा आ रही है। इस पूरे मामले के विरोध में, अनुराधा पाल, बालेश्वरी, जग्गू पाल, रामशरण शर्मा, सुशील, मुकेश शर्मा, जोगिंदर, प्रिंस, रवित और मोहित सहित कई अन्य लोगों ने मिलकर प्रदर्शन किया। इन सभी प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से इस समस्या का शीघ्र समाधान करने की मांग की है। वहीं, इस विवाद पर वन विभाग का पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका।1
- मुज़फ्फरनगर जिले के खड़के से एबीसी न्यूज़ के सोशल मीडिया रिपोर्टर कुलदीप कुमार बाबर ने गंगा द्वार और चंडी घाट पर जाने वाले लोगों का फोटो लोकेशन और संगीत के साथ हार्दिक स्वागत किया है। उन्होंने सभी से चंडी देवी मंदिर में पधारने का आग्रह किया, और एक भावुक संदेश देते हुए लोगों को गंगा किनारे आकर गंगा को अपनी मां मानने का भी आह्वान किया।1