Shuru
Apke Nagar Ki App…
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के सालेपाल गांव में ₹32.83 करोड़ की लागत से 480 सीटों वाले एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय का भूमिपूजन हुआ। सांसद महेश कश्यप और विधायक विनायक गोयल ने इसे जनजातीय बच्चों के सुनहरे भविष्य की नींव बताया। यह विद्यालय स्थानीय प्रतिभाओं को आधुनिक शिक्षा देकर शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति लाएगा।
Yogesh Sao
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के सालेपाल गांव में ₹32.83 करोड़ की लागत से 480 सीटों वाले एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय का भूमिपूजन हुआ। सांसद महेश कश्यप और विधायक विनायक गोयल ने इसे जनजातीय बच्चों के सुनहरे भविष्य की नींव बताया। यह विद्यालय स्थानीय प्रतिभाओं को आधुनिक शिक्षा देकर शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति लाएगा।
More news from छत्तीसगढ़ and nearby areas
- सल्फी को नई पहचान देने की कोशिश : बस्तर के हर्षवर्धन का अनोखा प्रयोग... इनोवेशन महाकुंभ 1.0 में मिला सम्मान, सल्फी की गुणवत्ता और उपयोगिता बढ़ाने पर कर रहे काम... जगदलपुर। बस्तर की पहचान मानी जाने वाली पारंपरिक पेय “सल्फी” को नई वैज्ञानिक सोच और आधुनिक प्रयोगों के माध्यम से स्वास्थ्यवर्धक पेय के रूप में स्थापित करने की दिशा में युवा नवाचारक हर्षवर्धन बाजपेयी महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं। शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित “इनोवेशन महाकुंभ 1.0” में उनके इस प्रयोग को विशेष सराहना मिली और उन्हें “न्यू इनोवेशन अवार्ड” में तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। हर्षवर्धन “बस्तर इंडिजीनियस नेक्टर एग्रीकल्चर्स” के माध्यम से सल्फी पेय की सेल्फ लाइफ बढ़ाने पर कार्य कर रहे हैं। उनका उद्देश्य सल्फी के प्राकृतिक स्वाद और पोषक गुणों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना है, ताकि यह केवल पारंपरिक पेय तक सीमित न रहकर स्वास्थ्यवर्धक प्राकृतिक ड्रिंक के रूप में भी पहचान बना सके।1
- बस्तर जिले के करनदोला भानपुरी में एक ईसाई महिला के अंतिम संस्कार को लेकर विवाद खड़ा हो गया। वन भूमि पर शव दफनाने के विरोध में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई। पुलिस की समझाइश के बाद परिजन शव को जगदलपुर के करकापाल कब्रिस्तान ले गए, जहां अंतिम संस्कार किया गया। बस्तर जिले के करनदोला भानपुरी में एक ईसाई महिला के अंतिम संस्कार को लेकर विवाद खड़ा हो गया। वन भूमि पर शव दफनाने के विरोध में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई। पुलिस की समझाइश के बाद परिजन शव को जगदलपुर के करकापाल कब्रिस्तान ले गए, जहां अंतिम संस्कार किया गया।1
- बड़ेबेंद्री में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही नाली: ग्रामीणों ने निर्माण कार्य पर उठाए गंभीर सवाल कोंडागांव | शासकीय राशि का दुरुपयोग और निर्माण कार्यों में लापरवाही का एक ताजा मामला कोंडागांव जिले के ग्राम पंचायत बड़ेबेंद्री से सामने आया है। यहाँ के मुरमारी पारा में निर्माणाधीन नाली की बदहाली को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। ग्रामीणों ने ठेकेदार पर सीधे तौर पर गुणवत्ताहीन निर्माण का आरोप लगाया है। निर्माण पूरा होने से पहले ही दरकने लगी नाली हैरानी की बात यह है कि नाली का निर्माण अभी पूरी तरह संपन्न भी नहीं हुआ है, लेकिन जगह-जगह से कंक्रीट उखड़ने लगा है और दरारें दिखाई देने लगी हैं। ग्रामीणों के अनुसार: क्यूरिंग (तराई) का अभाव: निर्माण के दौरान एक बार भी पानी से (Curing) नहीं की गई, जिससे सीमेंट की पकड़ कमजोर हो गई है। लीपापोती की कोशिश: नाली अभी बनी ही है और ठेकेदार द्वारा जगह-जगह रिपेयरिंग का काम शुरू कर दिया गया है, जो घटिया सामग्री के इस्तेमाल की ओर साफ इशारा करता है। ग्रामीणों की चिंता: "बरसात में क्या होगा?"1
- दांतेवाड़ा जिले के समेली बोड़ेपारा में पानी की गंभीर समस्या से स्थानीय महिलाएं बेहद परेशान हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सरपंच इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। प्रशासन से जल्द से जल्द इस जल संकट का समाधान करने की अपील की गई है।1
- कांकेर में नगरीय निकाय और पंचायत उप निर्वाचन की समय-सारणी जारी1
- 😱💯अपने बच्चों को सुन सुन पर कृपया कुरकुरी से सावधानी बनाएं बचत बचाओ करने के लिए लालच बच्चों को ना दें कृपया जय जोहार 😱💯अपने बच्चों को सुन सुन पर कृपया कुरकुरी से सावधानी बनाएं बचत बचाओ करने के लिए लालच बच्चों को ना दें कृपया जय जोहार1
- सोशल मीडिया पर गांव और शहर की तुलना वाली टिप्पणी पर लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि गांव ही शहरों की मूल आवश्यकताएं पूरी करते हैं, इसलिए गांवों को कमतर आंकना अनुचित है। लोगों ने देश की अर्थव्यवस्था में गांव के योगदान को स्वीकारते हुए आपसी सम्मान बनाए रखने की अपील की।1
- कोंडागांव में सड़क निर्माण के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में एक रोड-रोलर की चपेट में आने से पिता की मौके पर मौत हो गई। उनकी 9 वर्षीय बेटी गंभीर रूप से घायल है और अस्पताल में जिंदगी से जूझ रही है। स्थानीय लोगों ने सुरक्षा उपायों की कमी पर प्रशासन और ठेकेदार के खिलाफ लापरवाही के आरोप लगाए हैं।1