बिना परमिट, बिना फिटनेस और बिना लाइसेंस दौड़ रहे वाहन, जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल परमिशन के नाम पर शहाबगंज में अवैध खनन का खेल! बिना परमिट, बिना फिटनेस और बिना लाइसेंस दौड़ रहे वाहन, जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल शहाबगंज/चंदौली। प्रदेश सरकार द्वारा अवैध खनन के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई और “जीरो टॉलरेंस” नीति की बात कही जा रही है, लेकिन जनपद चंदौली के शहाबगंज थाना क्षेत्र में जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। यहां रात के अंधेरे में अवैध मिट्टी खनन का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन माफिया बिना किसी भय के मिट्टी की खुदाई कर रहे हैं और ओवरलोड वाहनों से उसका परिवहन भी धड़ल्ले से जारी है। सबसे गंभीर बात यह है कि जिन वाहनों से मिट्टी ढोई जा रही है, उनमें से कई बिना कमर्शियल रजिस्ट्रेशन, बिना परमिट, बिना फिटनेस और बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इसके बावजूद कार्रवाई न होना स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। शहाबगंज क्षेत्र बना अवैध खनन का केंद्र स्थानीय लोगों के अनुसार शहाबगंज क्षेत्र इन दिनों मिट्टी खनन माफियाओं का सुरक्षित ठिकाना बन चुका है। गांवों और संपर्क मार्गों के आसपास रात होते ही जेसीबी मशीनें सक्रिय हो जाती हैं। खेतों और सरकारी जमीनों से बड़े पैमाने पर मिट्टी निकाली जाती है और फिर उसे ट्रैक्टर-ट्रालियों तथा अन्य वाहनों के जरिए अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा खेल लंबे समय से चल रहा है। कई बार शिकायतें भी की गईं, लेकिन कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई। एक ग्रामीण ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया, “रात में 8 बजे के बाद जेसीबी मशीनें चलने लगती हैं। पूरी रात मिट्टी की ढुलाई होती रहती है। सुबह तक दर्जनों वाहन निकल जाते हैं, लेकिन कोई रोकने वाला नहीं होता।” “परमिशन” के नाम पर चल रहा अवैध खेल क्षेत्रीय नागरिकों का आरोप है कि अवैध खनन को “परमिशन” का नाम देकर वैध दिखाने की कोशिश की जाती है। कई बार मामूली निर्माण कार्यों के नाम पर सीमित अनुमति ली जाती है, लेकिन उसकी आड़ में बड़े पैमाने पर अवैध खनन शुरू कर दिया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि अनुमति यदि किसी निजी निर्माण या तालाब खुदाई के लिए भी दी जाती है, तो उसका दुरुपयोग करते हुए निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक मिट्टी निकाली जाती है। इसके बाद बिना किसी रोक-टोक के उसका व्यावसायिक परिवहन किया जाता है। एक स्थानीय युवक ने बताया, “कुछ लोगों के पास छोटे काम की अनुमति होती है, लेकिन वे उसी के नाम पर रातभर सैकड़ों ट्रॉली मिट्टी बेचते हैं। प्रशासन सब जानता है, लेकिन कार्रवाई नहीं होती।” बिना फिटनेस और बिना परमिट दौड़ रहे वाहन शहाबगंज क्षेत्र में चल रहे अवैध खनन के साथ-साथ अवैध वाहनों का मुद्दा भी गंभीर होता जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार अधिकांश ट्रैक्टर-ट्रालियां और मिट्टी ढोने वाले वाहन परिवहन नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। इनमें से कई वाहनों के पास न तो वैध परमिट है, न फिटनेस प्रमाणपत्र और न ही कमर्शियल रजिस्ट्रेशन। इसके बावजूद वे मुख्य सड़कों पर खुलेआम दौड़ते नजर आते हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ओवरलोड वाहन तेज रफ्तार से गांवों और बाजारों से गुजरते हैं, जिससे हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है। एक दुकानदार ने बताया, “स्कूल जाने वाले बच्चे और राहगीर हमेशा डर में रहते हैं। मिट्टी लदे ट्रैक्टर इतनी तेज रफ्तार में चलते हैं कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।” सड़कों की हालत बदहाल ओवरलोड वाहनों के लगातार संचालन से क्षेत्र की कई सड़कें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। गांवों को जोड़ने वाली सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिससे आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है। सड़कें कीचड़ में बदल जाती हैं और राहगीरों का चलना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़कें टूटने के बाद भी न तो मरम्मत होती है और न ही ओवरलोड वाहनों पर रोक लगाई जाती है। “सिस्टम” के जरिए चलता है पूरा खेल ? क्षेत्र में चर्चा है कि अवैध खनन के पीछे एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है। सूत्रों के अनुसार बिचौलियों के माध्यम से पूरा “सिस्टम” संचालित किया जाता है। आरोप है कि नियमित रूप से वसूली होने के कारण कार्रवाई नहीं होती। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा आम है कि बिना संरक्षण के इतने बड़े स्तर पर अवैध खनन संभव नहीं हो सकता। एक कथित खनन कारोबारी ने नाम न छापने की शर्त पर दावा किया, “हर स्तर पर सेटिंग होती है, तभी गाड़ियां रातभर चलती हैं। अगर सिस्टम साथ न हो तो एक भी ट्रैक्टर नहीं निकल सकता।” थाना स्तर की भूमिका पर सवाल स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि क्षेत्र में लगातार शिकायतों के बावजूद थाना स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जब भी अवैध खनन की शिकायत की जाती है, तो कुछ समय के लिए गतिविधियां धीमी हो जाती हैं, लेकिन फिर पहले की तरह शुरू हो जाती हैं। एक बुजुर्ग ग्रामीण ने कहा, “अगर पुलिस चाहे तो एक रात में पूरा खेल बंद हो सकता है, लेकिन कार्रवाई न होने से साफ है कि कहीं न कहीं लापरवाही जरूर है।” खनन विभाग और आरटीओ विभाग पर भी उठ रहे सवाल अवैध खनन और अवैध वाहनों के मामले में खनन विभाग और आरटीओ विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नियमित जांच अभियान चलाया जाए, तो बड़ी संख्या में बिना फिटनेस और बिना परमिट वाले वाहन पकड़े जा सकते हैं। लेकिन जिम्मेदार विभाग केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नजर आते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन विभाग की टीम क्षेत्र में शायद ही कभी दिखाई देती है। वहीं आरटीओ विभाग भी ओवरलोड और अवैध वाहनों के खिलाफ सख्त अभियान चलाने में विफल साबित हो रहा है। पर्यावरण को हो रहा भारी नुकसान विशेषज्ञों के अनुसार अवैध मिट्टी खनन केवल राजस्व चोरी का मामला नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा है। एक किसान ने बताया, “ट्रैक्टरों की आवाजाही से खेतों की मेड़ टूट जाती है। कई बार मिट्टी निकालने के कारण खेत की जमीन भी कमजोर हो जाती है।” प्रशासनिक कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित? स्थानीय लोगों का कहना है कि समय-समय पर अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई के दावे जरूर किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उसका असर दिखाई नहीं देता। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ छोटे मामलों में औपचारिक कार्रवाई कर दी जाती है, लेकिन बड़े स्तर पर चल रहे नेटवर्क तक प्रशासन पहुंच ही नहीं पाता या पहुंचना नहीं चाहता। क्षेत्रीय लोगों में बढ़ता आक्रोश लगातार बढ़ रहे अवैध खनन और प्रशासनिक निष्क्रियता को लेकर क्षेत्रीय लोगों में भारी आक्रोश है। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है। लोगों ने जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक और शासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। लोगों की प्रमुख मांगें क्षेत्रीय नागरिकों ने प्रशासन से निम्न मांगें उठाई हैं— अवैध खनन में शामिल लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। बिना परमिट और बिना फिटनेस चल रहे वाहनों को तत्काल सीज किया जाए। ओवरलोड वाहनों के खिलाफ नियमित जांच अभियान चलाया जाए। थाना स्तर पर जवाबदेही तय की जाए। खनन विभाग और आरटीओ विभाग की कार्यप्रणाली की जांच हो। रात में विशेष अभियान चलाकर अवैध खनन पर रोक लगाई जाए। सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति पर सवाल प्रदेश सरकार लगातार अवैध खनन के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात करती रही है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath कई बार अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दे चुके हैं कि अवैध खनन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लेकिन शहाबगंज क्षेत्र की तस्वीर इन दावों को चुनौती देती नजर आ रही है। यदि स्थानीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति केवल भाषणों और फाइलों तक सीमित रह जाएगी। क्या होगी कार्रवाई? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि लगातार उठ रही शिकायतों और गंभीर आरोपों के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है। क्या वास्तव में अवैध खनन के इस नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई होगी, या फिर यह कारोबार पहले की तरह चलता रहेगा? क्षेत्रीय लोगों की नजर अब जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो शहाबगंज क्षेत्र में अवैध खनन का यह कारोबार और अधिक फैल सकता है, जिससे राजस्व, पर्यावरण और जनसुरक्षा—तीनों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
बिना परमिट, बिना फिटनेस और बिना लाइसेंस दौड़ रहे वाहन, जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल परमिशन के नाम पर शहाबगंज में अवैध खनन का खेल! बिना परमिट, बिना फिटनेस और बिना लाइसेंस दौड़ रहे वाहन, जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल शहाबगंज/चंदौली। प्रदेश सरकार द्वारा अवैध खनन के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई और “जीरो टॉलरेंस” नीति की बात कही जा रही है, लेकिन जनपद चंदौली के शहाबगंज थाना क्षेत्र में जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। यहां रात के अंधेरे में अवैध मिट्टी खनन का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन माफिया बिना किसी भय के मिट्टी की खुदाई कर रहे हैं और ओवरलोड वाहनों से उसका परिवहन भी धड़ल्ले से जारी है। सबसे गंभीर बात यह है कि जिन वाहनों से मिट्टी ढोई जा रही है, उनमें से कई बिना कमर्शियल रजिस्ट्रेशन, बिना परमिट, बिना फिटनेस और बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इसके बावजूद कार्रवाई न होना स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। शहाबगंज क्षेत्र बना अवैध खनन का केंद्र स्थानीय लोगों के अनुसार शहाबगंज क्षेत्र इन दिनों मिट्टी खनन माफियाओं का सुरक्षित ठिकाना बन चुका है। गांवों और संपर्क मार्गों के आसपास रात होते ही जेसीबी मशीनें सक्रिय हो जाती हैं। खेतों और सरकारी जमीनों से बड़े पैमाने पर मिट्टी निकाली जाती है और फिर उसे ट्रैक्टर-ट्रालियों तथा अन्य वाहनों के जरिए अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा खेल लंबे समय से चल रहा है। कई बार शिकायतें भी की गईं, लेकिन कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई। एक ग्रामीण ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया, “रात में 8 बजे के बाद जेसीबी मशीनें चलने लगती हैं। पूरी रात मिट्टी की ढुलाई होती रहती है। सुबह तक दर्जनों वाहन निकल जाते हैं, लेकिन कोई रोकने वाला नहीं होता।” “परमिशन” के नाम पर चल रहा अवैध खेल क्षेत्रीय नागरिकों का आरोप है कि अवैध खनन को “परमिशन” का नाम देकर वैध दिखाने की कोशिश की जाती है। कई बार मामूली निर्माण कार्यों के नाम पर सीमित अनुमति ली जाती है, लेकिन उसकी आड़ में बड़े पैमाने पर अवैध खनन शुरू कर दिया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि अनुमति यदि किसी निजी निर्माण या तालाब खुदाई के लिए भी दी जाती है, तो उसका दुरुपयोग करते हुए निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक मिट्टी निकाली जाती है। इसके बाद बिना किसी रोक-टोक के उसका व्यावसायिक परिवहन किया जाता है। एक स्थानीय युवक ने बताया, “कुछ लोगों के पास छोटे काम की अनुमति होती है, लेकिन वे उसी के नाम पर रातभर सैकड़ों ट्रॉली मिट्टी बेचते हैं। प्रशासन सब जानता है, लेकिन कार्रवाई नहीं होती।” बिना फिटनेस और बिना परमिट दौड़ रहे वाहन शहाबगंज क्षेत्र में चल रहे अवैध खनन के साथ-साथ अवैध वाहनों का
मुद्दा भी गंभीर होता जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार अधिकांश ट्रैक्टर-ट्रालियां और मिट्टी ढोने वाले वाहन परिवहन नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। इनमें से कई वाहनों के पास न तो वैध परमिट है, न फिटनेस प्रमाणपत्र और न ही कमर्शियल रजिस्ट्रेशन। इसके बावजूद वे मुख्य सड़कों पर खुलेआम दौड़ते नजर आते हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ओवरलोड वाहन तेज रफ्तार से गांवों और बाजारों से गुजरते हैं, जिससे हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है। एक दुकानदार ने बताया, “स्कूल जाने वाले बच्चे और राहगीर हमेशा डर में रहते हैं। मिट्टी लदे ट्रैक्टर इतनी तेज रफ्तार में चलते हैं कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।” सड़कों की हालत बदहाल ओवरलोड वाहनों के लगातार संचालन से क्षेत्र की कई सड़कें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। गांवों को जोड़ने वाली सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिससे आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है। सड़कें कीचड़ में बदल जाती हैं और राहगीरों का चलना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़कें टूटने के बाद भी न तो मरम्मत होती है और न ही ओवरलोड वाहनों पर रोक लगाई जाती है। “सिस्टम” के जरिए चलता है पूरा खेल ? क्षेत्र में चर्चा है कि अवैध खनन के पीछे एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है। सूत्रों के अनुसार बिचौलियों के माध्यम से पूरा “सिस्टम” संचालित किया जाता है। आरोप है कि नियमित रूप से वसूली होने के कारण कार्रवाई नहीं होती। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा आम है कि बिना संरक्षण के इतने बड़े स्तर पर अवैध खनन संभव नहीं हो सकता। एक कथित खनन कारोबारी ने नाम न छापने की शर्त पर दावा किया, “हर स्तर पर सेटिंग होती है, तभी गाड़ियां रातभर चलती हैं। अगर सिस्टम साथ न हो तो एक भी ट्रैक्टर नहीं निकल सकता।” थाना स्तर की भूमिका पर सवाल स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि क्षेत्र में लगातार शिकायतों के बावजूद थाना स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जब भी अवैध खनन की शिकायत की जाती है, तो कुछ समय के लिए गतिविधियां धीमी हो जाती हैं, लेकिन फिर पहले की तरह शुरू हो जाती हैं। एक बुजुर्ग ग्रामीण ने कहा, “अगर पुलिस चाहे तो एक रात में पूरा खेल बंद हो सकता है, लेकिन कार्रवाई न होने से साफ है कि कहीं न कहीं लापरवाही जरूर है।” खनन विभाग और आरटीओ विभाग पर भी उठ रहे सवाल अवैध खनन और अवैध वाहनों के मामले में खनन विभाग और आरटीओ विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नियमित जांच अभियान चलाया जाए, तो बड़ी संख्या में बिना फिटनेस और बिना परमिट वाले वाहन पकड़े जा सकते हैं। लेकिन जिम्मेदार विभाग
केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नजर आते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन विभाग की टीम क्षेत्र में शायद ही कभी दिखाई देती है। वहीं आरटीओ विभाग भी ओवरलोड और अवैध वाहनों के खिलाफ सख्त अभियान चलाने में विफल साबित हो रहा है। पर्यावरण को हो रहा भारी नुकसान विशेषज्ञों के अनुसार अवैध मिट्टी खनन केवल राजस्व चोरी का मामला नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा है। एक किसान ने बताया, “ट्रैक्टरों की आवाजाही से खेतों की मेड़ टूट जाती है। कई बार मिट्टी निकालने के कारण खेत की जमीन भी कमजोर हो जाती है।” प्रशासनिक कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित? स्थानीय लोगों का कहना है कि समय-समय पर अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई के दावे जरूर किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उसका असर दिखाई नहीं देता। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ छोटे मामलों में औपचारिक कार्रवाई कर दी जाती है, लेकिन बड़े स्तर पर चल रहे नेटवर्क तक प्रशासन पहुंच ही नहीं पाता या पहुंचना नहीं चाहता। क्षेत्रीय लोगों में बढ़ता आक्रोश लगातार बढ़ रहे अवैध खनन और प्रशासनिक निष्क्रियता को लेकर क्षेत्रीय लोगों में भारी आक्रोश है। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है। लोगों ने जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक और शासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। लोगों की प्रमुख मांगें क्षेत्रीय नागरिकों ने प्रशासन से निम्न मांगें उठाई हैं— अवैध खनन में शामिल लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। बिना परमिट और बिना फिटनेस चल रहे वाहनों को तत्काल सीज किया जाए। ओवरलोड वाहनों के खिलाफ नियमित जांच अभियान चलाया जाए। थाना स्तर पर जवाबदेही तय की जाए। खनन विभाग और आरटीओ विभाग की कार्यप्रणाली की जांच हो। रात में विशेष अभियान चलाकर अवैध खनन पर रोक लगाई जाए। सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति पर सवाल प्रदेश सरकार लगातार अवैध खनन के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात करती रही है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath कई बार अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दे चुके हैं कि अवैध खनन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लेकिन शहाबगंज क्षेत्र की तस्वीर इन दावों को चुनौती देती नजर आ रही है। यदि स्थानीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति केवल भाषणों और फाइलों तक सीमित रह जाएगी। क्या होगी कार्रवाई? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि लगातार उठ रही शिकायतों और गंभीर आरोपों के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है। क्या वास्तव में अवैध खनन के इस नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई होगी, या फिर यह कारोबार पहले की तरह चलता रहेगा? क्षेत्रीय लोगों की नजर अब जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो शहाबगंज क्षेत्र में अवैध खनन का यह कारोबार और अधिक फैल सकता है, जिससे राजस्व, पर्यावरण और जनसुरक्षा—तीनों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
- उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में अलीनगर स्थित कमलापुर जीवक हॉस्पिटल में गोलीबारी की घटना हुई है। इस वारदात में एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई है।1
- चंदौली जिले के सैयदराजा में 14 बिस्सा का एक प्लॉट बिक्री के लिए उपलब्ध है। यह फुटिया मार्ग पर हाइवे से मात्र 300 मीटर अंदर स्थित है। इसकी दर 9.5 लाख रुपये प्रति बिस्सा है।4
- चंदौली के मुगलसराय में जीटी रोड स्थित काली मंदिर पर लगाया गया एक विरोध बैनर लोगों के बीच बहस का केंद्र बन गया है। बैनर लगाने वाला कौन है और इसके पीछे की वजह क्या है, इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं, और प्रशासन भी मामले की जांच में जुटा है। यह भी अटकलें हैं कि मंदिर अतिक्रमण की जद में आ रहा है।1
- शहीदगांव-धानापुर में स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी का भव्य स्वागत चंदौली जनपद के धानापुर क्षेत्र स्थित शहीदगांव में जगद्गुरु स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी के प्रथम आगमन पर क्षेत्र के गो-सेवकों एवं ग्रामीणों द्वारा भव्य स्वागत किया गया। गांव में जगह-जगह स्वागत बैनर लगाए गए और श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम के दौरान गो-सेवा और सनातन संस्कृति के संरक्षण को लेकर लोगों ने स्वामी जी का अभिनंदन किया। गो-सेवकों ने माल्यार्पण कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा क्षेत्र में धार्मिक और सामाजिक जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। स्वागत बैनर में गो-सेवक धनेश तिवारी, रमेश उपाध्याय, राकेश तिवारी, धनंजय पाण्डेय, गोपाल पाण्डेय, हरीशंकर तिवारी ‘दीपू’ एवं परमानन्द तिवारी सहित कई लोगों के नाम शामिल रहे। ग्रामीणों ने कहा कि स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी का आगमन पूरे क्षेत्र के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय है। संवाददाता पंकज तिवारी चन्दौली2
- रानी रात भर जगा देना रात भर जगा देना रात भर चावल रात भर चावल रात भर जगा रानी1
- कैमूर जिले की दुर्गावती नदी से दो संदिग्ध सूटकेस बरामद होने से हड़कंप मच गया। पुलिस ने खोला तो अंदर कटे हुए मानव शरीर के अंग मिले, जिससे पूरे बिहार में सनसनी फैल गई। एक बच्चे और एक वयस्क के अवशेषों की आशंका है, पुलिस पहचान के लिए पड़ोसी जिलों से संपर्क कर रही है।1
- कैमूर के मोहनिया में अर्जुन बिंद के घर में अचानक लगी भीषण आग से पूरे घर का सामान जलकर राख हो गया। इस हादसे में 10 बकरियों और एक भैंस के बच्चे की जलकर मौत हो गई, जबकि दो भैंस गंभीर रूप से झुलस गईं। आग बुझाने के प्रयास में गृहस्वामी भी झुलस गए, और लाखों का अनाज व नकदी भी जल गई।2
- चंदौली के सकलडीहा में एक घर के सामने की नाली लंबे समय से गंदी पड़ी है और उसकी सफाई नहीं हुई है। स्थानीय लोगों को इससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन से जल्द इस समस्या को हल करने की मांग की गई है।1
- Post by @PappuKumar-ky6qb you tube my channel1