दरोगा सुसाइड केस में हनीट्रैप सिंडिकेट का पर्दाफाश, महिला समेत 3 गिरफ्तार प्रदेश के बस्ती जिले में वाल्टरगंज थाने के पूर्व थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में एक महिला, उसके पिता और एक वकील को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. पुलिस के मुताबिक, आरोपियों द्वारा ब्लैकमेलिंग और मानसिक प्रताड़ना किए जाने से परेशान होकर दरोगा सूर्य प्रकाश सिंह ने आत्महत्या कर ली थी। पुलिस के अनुसार, मृतक थानाध्यक्ष के बेटे संदीप सिंह ने 5 सितंबर को प्रार्थना पत्र देकर मामले में शिकायत दर्ज कराई थी. इसके आधार पर कोतवाली बस्ती में मुकदमा दर्ज किया गया और जांच शुरू हुई। जांच के बाद कोतवाली पुलिस और सर्विलांस टीम ने सदर अस्पताल चौराहे के पास से मुख्य आरोपी प्रियंका चौधरी, उसके पिता रामनयन चौधरी और वकील विजय प्रकाश यादव को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल होने का दावा की गई एक बोलेरो गाड़ी और तीन मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। पुलिस का आरोप है कि मुख्य आरोपी महिला संपन्न और रसूखदार लोगों को अपने जाल में फंसाती थी. इसके बाद कथित तौर पर उन्हें ब्लैकमेल कर पैसे वसूले जाते थे. पुलिस का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क में महिला का पिता और वकील भी शामिल थे. वकील पर कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पीड़ितों पर दबाव बनाने में भूमिका निभाने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, जांच में कई लोगों से लाखों रुपये की वसूली के मामले सामने आए हैं। मामले में तीनों आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है. पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया। डीआईजी बस्ती मंडल संजीव त्यागी के मुताबिक, गिरोह के संपर्कों और अन्य संभावित पीड़ितों की जांच जारी है. पुलिस का कहना है कि जांच में आगे और भी अहम खुलासे हो सकते हैं।
दरोगा सुसाइड केस में हनीट्रैप सिंडिकेट का पर्दाफाश, महिला समेत 3 गिरफ्तार प्रदेश के बस्ती जिले में वाल्टरगंज थाने के पूर्व थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में एक महिला, उसके पिता और एक वकील को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. पुलिस के मुताबिक, आरोपियों द्वारा ब्लैकमेलिंग और मानसिक प्रताड़ना किए जाने से परेशान होकर दरोगा सूर्य प्रकाश सिंह ने आत्महत्या कर ली थी। पुलिस के अनुसार, मृतक थानाध्यक्ष के बेटे संदीप सिंह ने 5 सितंबर को प्रार्थना पत्र देकर मामले में शिकायत दर्ज कराई थी. इसके आधार पर कोतवाली बस्ती में मुकदमा दर्ज किया गया और जांच शुरू हुई। जांच के बाद कोतवाली पुलिस और सर्विलांस टीम ने सदर अस्पताल चौराहे के पास से मुख्य आरोपी प्रियंका चौधरी, उसके पिता रामनयन चौधरी और वकील विजय प्रकाश यादव को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल होने का दावा की गई एक बोलेरो गाड़ी और तीन मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। पुलिस का आरोप है कि मुख्य आरोपी महिला संपन्न और रसूखदार लोगों को अपने जाल में फंसाती थी. इसके बाद कथित तौर पर उन्हें ब्लैकमेल कर पैसे वसूले जाते थे. पुलिस का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क में महिला का पिता और वकील भी शामिल थे. वकील पर कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पीड़ितों पर दबाव बनाने में भूमिका निभाने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, जांच में कई लोगों से लाखों रुपये की वसूली के मामले सामने आए हैं। मामले में तीनों आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है. पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया। डीआईजी बस्ती मंडल संजीव त्यागी के मुताबिक, गिरोह के संपर्कों और अन्य संभावित पीड़ितों की जांच जारी है. पुलिस का कहना है कि जांच में आगे और भी अहम खुलासे हो सकते हैं।
- एम एस आई इन्टर कॉलेज में साप्ताहिक उर्दू जल्सा, ब-यादगारः-वारिसे लौह ओ कलम मुहिब्बे उर्दू , मोहम्मद हामिद अली बैत बाज़ी मुकाबला-2026, एवं शरीके मुक़ाबला इदारा, इमामबाड़ा मुस्लिम गर्ल्स इण्टर कॉलेज मियाँ बाजार, एवं एम एस आई इण्टर कॉलेज, वष्शीपुर मौलाना आजाद गर्ल्स इण्टर कॉलेज गोरखनाथ इस्लामिक नर्सरी व गर्ल्स जु.ह. स्कूल, रहमत नगर इसलामिक एकेडमी, निजामपुर मॉडल एजुकेशनल इंस्टीट्यूट, घासीकटरा जे. एफ. एफ. गोरखनाथ माउन्ट सीना गोरखनाथ इस्लामिया गर्ल्स स्कूल गोरखनाथ अलबनात, काजीपुर खुर्द चौधरी पब्लिक गर्ल्स स्कूल गोरखनाथ आमना गर्ल्स इण्टर कॉलेज, बहरामपुर एवं काज़ी तवस्सुल हुसैन (सदर) Mahboob Sayeed 'हारिस' (सेक्रेटरी) सौजन्य से :- साजिद अली मेमोरियल कमेटी, गोरखपुर (उ०प्र०) दिनांक 7,8,9 ,2026,तीन दिवसीय कार्यक्रम गोरखपुर के आडिटोरियम् हाल एम. एस. आई. इण्टर कालेज बख़्शीपुर, गोरखपुर आयोजित हुआ1
- पनियरा में निषाद समाज को साधने की तैयारी? टिकट का फैसला 2027 में बदल सकता है पूरा खेल! #पनियरा #पनियरा_विधानसभा #निषाद_समाज #निषाद_वोट #भाजपा #समाजवादी_पार्टी #SP #BJP #UPPolitics #UPElection2027 #उत्तरप्रदेश_चुनाव #2027चुनाव #गोरखपुर #महराजगंज #सियासी_समीकरण #राजनीतिक_खबर #ABC_Hindustan #UPबोलेगा2027तयकरेगा1
- पीपीगंज में बिना अनुमति रैली को लेकर हंगामा, सपा प्रत्याशी साधु यादव की पुलिस से हुई नोकझोंक गोरखपुर। पीपीगंज थाना क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी साधु यादव द्वारा बिना अनुमति रैली निकाले जाने को लेकर हंगामा हो गया। रैली के चलते क्षेत्र में जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और रैली को बिना अनुमति निकाले जाने से रोकने का प्रयास किया। पुलिस के अनुसार, बिना अनुमति रैली निकाले जाने से यातायात प्रभावित हो रहा था। पुलिसकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर आयोजकों और रैली में शामिल लोगों को रैली रोकने के लिए कहा। इसी दौरान पुलिस और रैली में शामिल लोगों के बीच नोकझोंक हो गई। स्थिति बिगड़ने की सूचना पर अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया। अतिरिक्त पुलिस बल के पहुंचने के बाद पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया और मौके पर शांति व्यवस्था कायम कराई। पुलिस का कहना है कि बिना अनुमति रैली निकालने और पुलिस के कार्य में बाधा डालने के मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।1
- चौकी परिसर में युवा नेता का जन्मदिन मनाना पड़ा भारी, चौकी प्रभारी समेत 6 पुलिसकर्मी निलंबित महराजगंज के नौतनवा थाना क्षेत्र के अड्डा बाजार पुलिस चौकी परिसर में युवा नेता का जन्मदिन मनाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होना पुलिसकर्मियों को भारी पड़ गया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक महराजगंज शक्ति मोहन अवस्थी ने मामले का तत्काल संज्ञान लिया और क्षेत्राधिकारी निचलौल को जांच के निर्देश दिए। जांच में प्रथम दृष्टया अनुशासनहीनता और पदीय दायित्वों के प्रति लापरवाही सामने आने पर एसपी ने अड्डा बाजार चौकी प्रभारी समेत छह पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया, जिसमें उपनिरीक्षक अखिलेश यादव – चौकी प्रभारी, अड्डा बाजार उपनिरीक्षक विकास कुमार गौड़ कांस्टेबल प्रभार गौड़ कांस्टेबल अभिमन्यु खरवार कांस्टेबल रामकृत यादव कांस्टेबल प्रशांत कुमार बताया जा रहा है कि चौकी परिसर में जन्मदिन समारोह से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला अधिकारियों के संज्ञान में आया। इसके बाद जांच कराई गई और प्रथम दृष्टया अनुशासनहीनता पाए जाने पर छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई। पुलिस विभाग की इस कार्रवाई के बाद महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। मामले में आगे की विभागीय कार्रवाई जांच के आधार पर की जाएगी।1
- यूपी में बीजेपी के गढ़ में सरकार के नीतियों के खिलाफ बीजेपी के पक्के वोटर,UGC रोल बैक के नारे लगें..। यूपी में बीजेपी के गढ़ में सरकार के नीतियों के खिलाफ बीजेपी के पक्के वोटर,UGC रोल बैक के नारे लगें..।1
- गोरखपुर गोरक्षघाट हादसा: 2 अधिवक्ताओं की मौत, जिला अस्पताल के CMO-JE-AE पर केस | Gorakhpur News1
- सहारनपुर में माननीय सांसद इकरा चौधरी की दमदार आवाज के साथ प्रेस कांफ्रेंस1
- सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत ढही, सात की मौत; अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल 27 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन, मलबे से निकाले गए शव; बेसमेंट में चल रहा था मरम्मत का काम, G+1 की अनुमति पर खड़ी कर दी गईं पांच मंजिलें नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार, 6 सितंबर 2026 को एक दर्दनाक हादसे में छात्रों के लिए संचालित पांच मंजिला पीजी इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। हादसे के समय इमारत में कई छात्र मौजूद थे। देखते ही देखते पूरी इमारत मलबे में तब्दील हो गई और कई लोग उसके नीचे दब गए। हादसे में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए। घटना के बाद करीब 27 घंटे तक बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, एनडीआरएफ, डीडीएमए, सिविल डिफेंस समेत अन्य राहत एजेंसियां मौके पर पहुंचीं। मलबा काफी भारी और इमारत की संरचना अस्थिर होने के कारण बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। राहतकर्मियों ने आधुनिक उपकरणों की मदद से मलबे को सावधानीपूर्वक हटाया और एक-एक कर फंसे लोगों को बाहर निकाला। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। बेसमेंट में चल रहा था मरम्मत का काम प्रारंभिक जांच में हादसे को लेकर कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि करीब 40 से 50 वर्ष पुरानी इमारत के बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर मरम्मत अथवा रेनोवेशन का काम चल रहा था। बेसमेंट में लंबे समय से पानी का रिसाव और सीलन होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या मरम्मत के दौरान भवन की संरचनात्मक मजबूती प्रभावित हुई और इसी वजह से इमारत अचानक ढह गई। G+1 की अनुमति, पांच मंजिल तक निर्माण का आरोप हादसे के बाद सबसे गंभीर सवाल अवैध निर्माण को लेकर उठ रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार भवन को मूल रूप से ग्राउंड प्लस एक मंजिल (G+1) के लिए अनुमति मिली थी, लेकिन बाद में कथित तौर पर इसमें अतिरिक्त मंजिलें बनाकर इसे करीब पांच मंजिला कर दिया गया। इतनी पुरानी इमारत पर अतिरिक्त निर्माण किए जाने के बावजूद संबंधित विभागों की निगरानी पर सवाल खड़े हो गए हैं। यह भी जांच का विषय है कि भवन में पीजी का संचालन किस आधार पर किया जा रहा था और क्या वहां रहने वाले छात्रों की सुरक्षा के लिए आवश्यक मानकों का पालन किया जा रहा था। मालिक समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज हादसे के बाद दिल्ली पुलिस ने भवन मालिक हरिराम बंसल और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी हादसे के वास्तविक कारणों, अवैध निर्माण, मरम्मत कार्य तथा भवन की अनुमति से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मामले में मजिस्ट्रेट जांच के निर्देश दिए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। MCD की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में हादसे ने दिल्ली में अवैध निर्माण और पुराने भवनों की सुरक्षा जांच की व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि यदि भवन में स्वीकृत नक्शे के विपरीत अतिरिक्त मंजिलें बनाई गई थीं और वह लंबे समय से जर्जर स्थिति में था तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? छात्रों के रहने के लिए पीजी के रूप में इस्तेमाल होने वाली इमारत की सुरक्षा जांच समय-समय पर क्यों नहीं की गई? हादसे के बाद नगर निगम ने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तेज करने और चिन्हित अवैध संरचनाओं को सील करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है तथा लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई की बात कही गई है। छात्रों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल सत्य निकेतन दिल्ली का प्रमुख छात्र इलाका है, जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी पीजी और किराये के मकानों में रहते हैं। ऐसे में इस हादसे ने राजधानी में पीजी, हॉस्टल और किराये की इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन को ऐसे सभी पुराने भवनों का संरचनात्मक ऑडिट कराना चाहिए, जहां बड़ी संख्या में छात्र या अन्य लोग रह रहे हैं। विशेष रूप से उन भवनों की जांच जरूरी है, जिनमें स्वीकृत मानकों से अधिक निर्माण किया गया है। जिम्मेदारी तय होने का इंतजार सत्य निकेतन हादसे ने एक साथ कई सवाल खड़े किए हैं—क्या अवैध निर्माण पर समय रहते कार्रवाई हुई थी? क्या भवन की संरचनात्मक जांच की गई थी? बेसमेंट में चल रहे काम की अनुमति किसने दी? और यदि भवन असुरक्षित था तो उसमें छात्रों के रहने की व्यवस्था कैसे चलती रही? अब लोगों की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई पर है। हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के लिए यह अपूरणीय क्षति है। जरूरत है कि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरी हो तथा केवल भवन मालिक ही नहीं, बल्कि यदि किसी अधिकारी या संबंधित विभाग की लापरवाही सामने आती है तो उसकी भी जवाबदेही तय की जाए। सत्य निकेतन का मलबा हटाने के साथ राहत अभियान भले समाप्त हो गया हो, लेकिन यह हादसा दिल्ली में भवन सुरक्षा और अवैध निर्माण की निगरानी व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल छोड़ गया है।1