हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर कलम की शक्ति और उसके ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला गया है, जहाँ बताया गया कि जब कलम ने पहली बार सत्ता की आँखों में आँखें डालकर देखा होगा, तभी शायद किसी अख़बार का जन्म हुआ होगा। इस पत्रकारिता ने कागज़ पर यह लिखा कि सच केवल राजमहलों का नहीं, बल्कि झोपड़ियों का भी होता है, यह समझाते हुए कि समाचार सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन है। हिंदी पत्रकारिता इसी धड़कन की भाषा बनी, जो खेतों से उठती है, मज़दूरों के पसीने से गुज़रती है, चूल्हे की राख में दबे सपनों को पढ़कर उनकी आवाज़ को अदालतों, संसदों और गलियारों तक पहुँचाती है। इसने साम्राज्यों के सामने प्रश्न रखे, विद्रोहियों को शब्द दिए, स्वतंत्रता सेनानियों के संदेश छापे, और अपने ही अक्षरों के लिए कई बार प्रताड़नाएं भी झेलीं, जिसमें कई संपादक जेल गए और कई संवाददाता अभाव में भी समाचार को जीवित रखे। आज भले ही समय बदल गया हो, जहाँ स्याही की जगह स्क्रीन चमक रही है और प्रेस की घरघराहट को मोबाइल की घंटियां बदल रही हैं, और समाचार सेकंडों में महाद्वीप पार कर जाते हैं; परंतु चुनौती आज भी वही है—सच और शोर के बीच अंतर को पहचानना। हिंदी पत्रकारिता दिवस हमें याद दिलाता है कि पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि लोकतंत्र की स्मृति है। यह तब इतिहास को याद दिलाती है जब वह भूलने लगता है, सत्ता के बहुत ऊँचे होने पर प्रश्नों की सीढ़ी लगाती है, समाज के बँटने पर संवाद का पुल बनाती है, और अंधेरा बढ़ने पर एक छोटी-सी खबर भी दीये की तरह जल उठती है। यह उन सभी ज्ञात-अज्ञात पत्रकारों को नमन है जिनकी कलम ने भय से बड़ी हिम्मत और सुविधा से बड़ा सत्य लिखा।
हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर कलम की शक्ति और उसके ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला गया है, जहाँ बताया गया कि जब कलम ने पहली बार सत्ता की आँखों में आँखें डालकर देखा होगा, तभी शायद किसी अख़बार का जन्म हुआ होगा। इस पत्रकारिता ने कागज़ पर यह लिखा कि सच केवल राजमहलों का नहीं, बल्कि झोपड़ियों का भी होता है, यह समझाते हुए कि समाचार सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन है। हिंदी पत्रकारिता इसी धड़कन की भाषा बनी, जो खेतों से उठती है, मज़दूरों के पसीने से गुज़रती है, चूल्हे की राख में दबे सपनों को पढ़कर उनकी आवाज़ को अदालतों, संसदों और गलियारों तक पहुँचाती है। इसने साम्राज्यों के सामने प्रश्न रखे, विद्रोहियों को शब्द दिए, स्वतंत्रता सेनानियों के संदेश छापे, और अपने ही अक्षरों के लिए कई बार प्रताड़नाएं भी झेलीं, जिसमें कई संपादक जेल गए और कई संवाददाता अभाव में भी समाचार को जीवित रखे। आज भले ही समय बदल गया हो, जहाँ स्याही की जगह स्क्रीन चमक रही है और प्रेस की घरघराहट को मोबाइल की घंटियां बदल रही हैं, और समाचार सेकंडों में महाद्वीप पार कर जाते हैं; परंतु चुनौती आज भी वही है—सच और शोर के बीच अंतर को पहचानना। हिंदी पत्रकारिता दिवस हमें याद दिलाता है कि पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि लोकतंत्र की स्मृति है। यह तब इतिहास को याद दिलाती है जब वह भूलने लगता है, सत्ता के बहुत ऊँचे होने पर प्रश्नों की सीढ़ी लगाती है, समाज के बँटने पर संवाद का पुल बनाती है, और अंधेरा बढ़ने पर एक छोटी-सी खबर भी दीये की तरह जल उठती है। यह उन सभी ज्ञात-अज्ञात पत्रकारों को नमन है जिनकी कलम ने भय से बड़ी हिम्मत और सुविधा से बड़ा सत्य लिखा।
- धर्मजयगढ़ वनमंडल के बोरो वन परिक्षेत्र में वन विभाग ने देर रात एक जेसीबी मशीन को जब्त किया है। यह कार्रवाई बोरो रेंज के जबगा बीट क्षेत्र में की गई, जहाँ संरक्षित वन (पीएफ) क्षेत्र में संदिग्ध परिस्थितियों में जेसीबी मशीन मिली। जब्त की गई मशीन को धर्मजयगढ़ काष्ठागार में सुरक्षित रखा गया है और मामले की गहनता से जांच की जा रही है। वन विभाग को बीती रात सूचना मिली थी कि पीएफ क्षेत्र में जेसीबी मशीन के माध्यम से अवैध निर्माण या खुदाई जैसी गतिविधियां चल रही हैं। इस सूचना पर वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुँचे और जबगा बीट के कक्ष क्रमांक 600 के पीएफ जंगल क्षेत्र में देर रात जेसीबी मशीन को पाया। विभागीय अधिकारियों ने मशीन जब्त कर ली है और अब यह पता लगाया जा रहा है कि यह जेसीबी जंगल क्षेत्र में किस उद्देश्य से लाई गई थी और क्या वहां कोई अवैध गतिविधि संचालित की जा रही थी। यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि धर्मजयगढ़ वन क्षेत्र में पिछले कुछ समय से जेसीबी मशीनों के जरिए जंगल भूमि को नुकसान पहुँचाने और अवैध निर्माण की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। फिलहाल, वन विभाग इस मामले की जांच में जुटा हुआ है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इसमें क्या तथ्य सामने आते हैं और विभाग संबंधित लोगों के खिलाफ क्या वैधानिक कार्रवाई करेगा। संरक्षित वन क्षेत्र के भीतर आधी रात को जेसीबी मशीन की मौजूदगी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनके जवाब जांच के निष्कर्षों के बाद ही सामने आ सकेंगे।4
- जशपुर जिले के पत्थलगांव क्षेत्र में प्रेम प्रसंग के कारण एक 34 वर्षीय युवक सुशील खलखो की पत्थर से सिर कुचलकर हत्या कर दी गई। पुलिस जांच में सामने आया है कि मृतक सुशील खलखो और आरोपी जयलाल एक्का की पत्नी के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध थे। एक सामाजिक बैठक के बाद महिला मृतक के साथ रहने लगी थी, जिससे जयलाल एक्का और अन्य आरोपी अत्यंत नाराज थे। इसी नाराजगी के चलते 27 मई की रात जयलाल एक्का (34), जयमन एक्का (36) और एक 17 वर्षीय किशोर ने मिलकर सुशील खलखो के साथ पहले मारपीट की और फिर पत्थर से सिर कुचलकर उसकी हत्या कर दी। घटना की सूचना मिलने के बाद पत्थलगांव पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को अपनी हिरासत में ले लिया। पूछताछ के दौरान, आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किए गए पत्थर को भी जब्त कर लिया है। इस मामले में बीएनएस की धारा 103(1) और 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया गया है। नाबालिग आरोपी को बाल संप्रेषण गृह भेजा गया है, जबकि अन्य दो आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।1
- पूरे भारत में एक वीडियो पहुँचाने, उसे लाइक करने और उस पर कमेंट करने का आग्रह किया गया है। विशेष रूप से, नमादपुर स्कूल से संबंधित इस वीडियो को छत्तीसगढ़ के हर हिस्से में शेयर करने और एक लाइक देने की अपील की गई है।1
- पंजाब को देश और कांग्रेस दोनों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण राज्य बताते हुए, वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए, सभी कार्यकर्ता और नेता एकजुट होकर संगठन को मजबूत करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यकर्ता जनता के मुद्दों को लेकर मैदान में उतरेंगे। बघेल ने इस बात पर जोर दिया कि पार्टी की मजबूती, कार्यकर्ताओं की एकता और जनता का विश्वास ही पंजाब में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन का आधार बनेगा। उन्होंने सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं से एक साथ मिलकर संगठन को और अधिक सशक्त बनाने का आह्वान किया।1
- छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के करतला में एक घटना सामने आई है, जहाँ ग्रामीणों ने पौधारोपण के लिए की जा रही 14 एकड़ भूमि के सीमांकन का कड़ा विरोध किया। इस दौरान मौके पर काफी हंगामा हुआ, जिसके चलते प्रशासनिक अधिकारियों को सीमांकन की कार्रवाई रोकनी पड़ी।1
- चैनपुर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी श्रुति अग्रवाल द्वारा अवैध बालू उठाव के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान से चैनपुर प्रखंड क्षेत्र में बालू कारोबार से जुड़े ट्रैक्टर मालिकों के बीच हड़कंप मच गया है। पुलिस ने हाल ही में अवैध रूप से बालू उठाव कर रहे तीन ट्रैक्टरों को जब्त किया है। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र की नदियों से होने वाला अवैध बालू उठाव लगभग पूरी तरह बंद हो गया है। चैनपुर में अवैध बालू उठाव पर पुलिस की इस सख्ती का असर अब आम लोगों और सरकारी योजनाओं पर भी पड़ने लगा है।1
- कोरबा जिले के गोढ़ी में 'सुशासन तिहार' कार्यक्रम के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस आमने-सामने आ गए।1