लाट साहब के जुलूस में 'हुड़दंगियों' की कुंडली खंगाल रही पुलिस; डीआईजी साहनी बोले- निर्दोषों पर डंडा नहीं चलना चाहिए.. शाहजहांपुर की होली और लाट साहब का जुलूस ये दो ऐसी चीजें हैं जिनका मिजाज भांपना अच्छे-अच्छों के बस की बात नहीं। यहाँ की आबो-हवा में रंग कम और रोमांच ज्यादा उड़ता है। लेकिन इस बार बरेली रेंज के डीआईजी अजय कुमार साहनी ने इस रोमांच में 'अनुशासन' का तड़का लगाने की ठान ली है। उन्होंने साफ कर दिया है कि जुलूस की रवायत बनी रहे, यह तो ठीक है, लेकिन छतों से बरसते जूते और कांच की बोतलें किसी भी सूरत में 'स्वस्थ परंपरा' का हिस्सा नहीं हो सकतीं। डीआईजी साहब ने जिले के कप्तान (एसपी) को दो-टूक शब्दों में फोर्स की ब्रीफिंग करने को कहा है। उनका इशारा साफ था पिछली बार जो लाठीचार्ज की 'किरकिरी' हुई थी, वो इस बार दोहराई न जाए। उन्होंने याद दिलाया कि होली उमंग का त्योहार है, लोग नशे की तरंग में भी हो सकते हैं, ऐसे में पुलिस अपना आपा न खोए। किसी भी शरीफ और निर्दोष आदमी की पीठ पर पुलिस का 'प्रसाद' नहीं पड़ना चाहिए। पुलिस का काम माहौल बनाना है, बिगाड़ना नहीं। लेकिन, जो लोग भीड़ की आड़ में अपनी 'गुंडई' का हुनर दिखाते हैं, उनके लिए डीआईजी के पास अलग ही 'ट्रीटमेंट' है। साल 2020, 2022 और 2023 की फाइलों को झाड़-पोछकर बाहर निकाला गया है। उन चेहरों की पहचान की जा रही है जिन्होंने पिछले सालों में पुलिसवालों को घेरकर पीटने की हिमाकत की थी। डीआईजी ने निर्देश दिए हैं कि इन सभी मुकदमों की पैरवी तेज की जाए और ऐसे तत्वों को जुलूस से कोसों दूर रखा जाए, ताकि आम जनता चैन की सांस ले सके। उन्होंने कहा कि ड्यूटी पर तैनात होने वाले सीएपीएफ और आरएएफ के जवान असम, बंगाल या तमिलनाडु जैसे सुदूर प्रांतों से आते हैं। उन्हें क्या पता कि यहाँ 'सम्मान' में छतों से जूते और टिन के कनस्तर फेंके जाते हैं! उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह 'अमानवीय' कृत्य बंद होना चाहिए। कांच की बोतलें किसी का सिर फोड़ सकती हैं, पैर लहूलुहान कर सकती हैं। आखिर हम बाहर से आए जवानों को क्या संदेश दे रहे हैं? डीआईजी ने एक ऐसी तस्वीर पेश की जिसमें पुलिस और जनता के बीच 'इश्क' का पैगाम हो। उन्होंने कहा कि माहौल ऐसा बनाओ कि अगले साल रेंज के बाकी जिलों के पुलिसकर्मी और पैरामिलिट्री के जवान खुद सिफारिश लगवाएं कि "सर, इस बार मेरी ड्यूटी शाहजहांपुर की होली में ही लगाना, वहां बड़ा मजा आता है।
लाट साहब के जुलूस में 'हुड़दंगियों' की कुंडली खंगाल रही पुलिस; डीआईजी साहनी बोले- निर्दोषों पर डंडा नहीं चलना चाहिए.. शाहजहांपुर की होली और लाट साहब का जुलूस ये दो ऐसी चीजें हैं जिनका मिजाज भांपना अच्छे-अच्छों के बस की बात नहीं। यहाँ की आबो-हवा में रंग कम और रोमांच ज्यादा उड़ता है। लेकिन इस बार बरेली रेंज के डीआईजी अजय कुमार साहनी ने इस रोमांच में 'अनुशासन' का तड़का लगाने की ठान ली है। उन्होंने साफ कर दिया है कि जुलूस की रवायत बनी रहे, यह तो ठीक है, लेकिन छतों से बरसते जूते और कांच की बोतलें किसी भी सूरत में 'स्वस्थ परंपरा' का हिस्सा नहीं हो सकतीं। डीआईजी साहब ने जिले के कप्तान (एसपी) को दो-टूक शब्दों में फोर्स की ब्रीफिंग करने को कहा है। उनका इशारा साफ था पिछली बार जो लाठीचार्ज की 'किरकिरी' हुई थी, वो इस बार दोहराई न जाए। उन्होंने याद दिलाया कि होली उमंग का त्योहार है, लोग नशे की तरंग में भी हो सकते हैं, ऐसे में पुलिस अपना आपा न खोए। किसी भी शरीफ और निर्दोष आदमी की पीठ पर पुलिस का 'प्रसाद' नहीं पड़ना चाहिए। पुलिस का काम माहौल बनाना है, बिगाड़ना नहीं। लेकिन, जो लोग भीड़ की आड़ में अपनी 'गुंडई' का हुनर दिखाते हैं, उनके लिए डीआईजी के पास अलग ही 'ट्रीटमेंट' है। साल 2020, 2022 और 2023 की फाइलों को झाड़-पोछकर बाहर निकाला गया है। उन चेहरों की पहचान की जा रही है जिन्होंने पिछले सालों में पुलिसवालों को घेरकर पीटने की हिमाकत की थी। डीआईजी ने निर्देश दिए हैं कि इन सभी मुकदमों की पैरवी तेज की जाए और ऐसे तत्वों को जुलूस से कोसों दूर रखा जाए, ताकि आम जनता चैन की सांस ले सके। उन्होंने कहा कि ड्यूटी पर तैनात होने वाले सीएपीएफ और आरएएफ के जवान असम, बंगाल या तमिलनाडु जैसे सुदूर प्रांतों से आते हैं। उन्हें क्या पता कि यहाँ 'सम्मान' में छतों से जूते और टिन के कनस्तर फेंके जाते हैं! उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह 'अमानवीय' कृत्य बंद होना चाहिए। कांच की बोतलें किसी का सिर फोड़ सकती हैं, पैर लहूलुहान कर सकती हैं। आखिर हम बाहर से आए जवानों को क्या संदेश दे रहे हैं? डीआईजी ने एक ऐसी तस्वीर पेश की जिसमें पुलिस और जनता के बीच 'इश्क' का पैगाम हो। उन्होंने कहा कि माहौल ऐसा बनाओ कि अगले साल रेंज के बाकी जिलों के पुलिसकर्मी और पैरामिलिट्री के जवान खुद सिफारिश लगवाएं कि "सर, इस बार मेरी ड्यूटी शाहजहांपुर की होली में ही लगाना, वहां बड़ा मजा आता है।
- उत्तर प्रदेश के जनपद शाहजहांपुर की सदर तहसील क्षेत्र अंतर्गत खाई खेड़ा चौराहा इन दिनों बदहाली की ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है, जिसे देखकर यही सवाल उठता है कि क्या विकास सिर्फ कागजों और फाइलों तक ही सीमित रह गया है? करोड़ों रुपये की लागत से चमकाने का दावा करने वाले विभाग आज इस चौराहे की दुर्दशा पर आंखें मूंदे बैठे हैं। शाम ढलते ही यहां ऐसा अंधेरा छा जाता है मानो बिजली व्यवस्था ने भी इस इलाके से किनारा कर लिया हो।1
- Post by Samajsevi Kumar Sagar1
- ब्राह्मणवाद पर खुलकर बोले मिथिलेश तिवारी विधायक आप भी सुने1
- Post by Asha Rani1
- जनपद शाहजहांपुर न्यायाधीश गन्ना शोध परिषद में कार्यक्रम में फीता काटकर कार्यक्रम को आगे बढ़ाया1
- शाहजहांपुर।आज शाहजहाँपुर में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के आगमन पर युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष राम जी अवस्थी ने उनका पुष्प गुच्छ और भगवान परशुराम जी का प्रतीकात्मक फरसा देकर हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया। इस अवसर पर अजय राय ने युवा कांग्रेस की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि युवा कांग्रेस द्वारा भगवान परशुराम जी का फरसा देकर स्वागत करना न केवल सांस्कृतिक सम्मान है, बल्कि पार्टी को जिले में नई धार और ऊर्जा प्रदान करने का प्रतीकात्मक संदेश भी है।1
- डिक्की पब्लिक जूनियर हाई स्कूल में धूमधाम से मनाया गया 40वां स्थापना दिवस ‘माणिक जयंती’ खुदागंज क्षेत्र स्थित डिक्की पब्लिक जूनियर हाई स्कूल में 40वां स्थापना दिवस बड़े उत्साह और गरिमामय वातावरण में ‘माणिक जयंती’ के रूप में मनाया गया। विद्यालय परिसर को आकर्षक सजावट से सजाया गया था और कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने रंगारंग प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया।1
- जलालाबाद कस्बे की सड़कों पर हर दिन की तरह स्कूल की छुट्टी के बाद बच्चों की चहल-पहल दिखाई दे रही थी। मासूम चेहरे, कंधों पर टंगे भारी बस्ते और घर पहुंचने की जल्दी—सब कुछ सामान्य लग रहा था। लेकिन इसी सामान्य दृश्य के पीछे एक ऐसी लापरवाही छिपी थी, जो किसी भी दिन बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। छुट्टी के बाद बच्चों को घर छोड़ने जा रही एक इको गाड़ी में क्षमता से कहीं अधिक छात्र-छात्राओं को ठूंस-ठूंसकर बैठाया गया था। देखने वालों को यह दृश्य किसी स्कूल वाहन से अधिक भूसे से भरी गाड़ी जैसा प्रतीत हो रहा था।1