मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए सभी विभागों में चेयरमैन, वाइस चेयरमैन और सदस्यों के लिए एक समान सुविधाओं और मानदेय की व्यवस्था लागू की है। इस कदम से अलग-अलग विभागों में सुविधाओं को लेकर चली आ रही असमानता और भ्रम खत्म होगा। मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से जारी आदेश में वर्ष 2017, 2019 और 2021 के विभिन्न नियमों को एकीकृत कर एक साझा रूपरेखा तैयार की गई है, जिसके तहत गैर-सरकारी चेयरमैन, वाइस चेयरमैन और सदस्यों के लिए पहली बार एक समान सेवा शर्तें लागू हुई हैं। नई नीति के अनुसार, अब बोर्डों, निगमों, प्राधिकरणों और समितियों में नियुक्त गैर-सरकारी चेयरमैन या चेयरपर्सन को हर महीने 75 हजार रुपए तक का मानदेय मिलेगा। इसके अतिरिक्त, उन्हें 50 हजार रुपए तक मकान किराया भत्ता या वास्तविक किराया (जो भी कम हो), सरकारी गाड़ी, ड्राइवर और स्टाफ की सुविधा (अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी जैसी स्टाफ कार सुविधा), कार्यालय और आवास दोनों पर टेलीफोन सुविधा, तथा ग्रुप-ए अधिकारियों के बराबर मोबाइल सुविधा दी जाएगी। वाइस चेयरमैन या डिप्टी चेयरमैन को हर महीने 45 हजार रुपए तक मानदेय मिलेगा, साथ ही उन्हें मकान किराया भत्ता और अन्य सरकारी सुविधाएं भी मिलेंगी। नियमित जिम्मेदारी निभाने वाले सदस्यों को 30 हजार रुपए तक मानदेय निर्धारित किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई गैर-सरकारी पदाधिकारी विधायक भी है और पहले से सरकारी फ्लैट में रह रहा है, तो उसे अलग से मकान किराया भत्ता नहीं मिलेगा; केवल लाइसेंस फीस की प्रतिपूर्ति की जाएगी। यात्रा भत्ते और दैनिक भत्ते के लिए चेयरमैन और वाइस चेयरमैन को हरियाणा सिविल सेवा (TA) नियम 2016 के अनुसार ग्रेड-1 अधिकारियों के बराबर सुविधा मिलेगी, हालांकि सरकारी दौरे पर एक महीने में 10 दिन से अधिक दैनिक भत्ता नहीं दिया जाएगा। हरियाणा और दिल्ली से बाहर यात्रा करने पर, यदि सरकारी गाड़ी का उपयोग नहीं हुआ है, तो ग्रेड-1 अधिकारियों के हिसाब से यात्रा भत्ता देय होगा। मेडिकल सुविधाओं के मामले में भी चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन को राज्य सरकार के ग्रुप-ए अधिकारियों जैसी सुविधाएं मिलेंगी। इससे पहले, विभिन्न बोर्डों और निगमों में चेयरमैन और वाइस चेयरमैन की सुविधाएं अलग-अलग थीं, जैसे हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड के चेयरमैन को कैबिनेट मंत्री स्तर का प्रोटोकॉल मिलता था। अब सरकार ने साफ कहा है कि तय नियमों से अलग किसी विशेष सुविधा या अतिरिक्त छूट की मांग पर विचार नहीं किया जाएगा, जिससे नियुक्तियों और सुविधाओं में मनमानी की गुंजाइश कम होगी।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए सभी विभागों में चेयरमैन, वाइस चेयरमैन और सदस्यों के लिए एक समान सुविधाओं और मानदेय की व्यवस्था लागू की है। इस कदम से अलग-अलग विभागों में सुविधाओं को लेकर चली आ रही असमानता और भ्रम खत्म होगा। मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से जारी आदेश में वर्ष 2017, 2019 और 2021 के विभिन्न नियमों को एकीकृत कर एक साझा रूपरेखा तैयार की गई है, जिसके तहत गैर-सरकारी चेयरमैन, वाइस चेयरमैन और सदस्यों के लिए पहली बार एक समान सेवा शर्तें लागू हुई हैं। नई नीति के अनुसार, अब बोर्डों, निगमों, प्राधिकरणों और समितियों में नियुक्त गैर-सरकारी चेयरमैन या चेयरपर्सन को हर महीने 75 हजार रुपए तक का मानदेय मिलेगा। इसके अतिरिक्त, उन्हें 50 हजार रुपए तक मकान किराया भत्ता या वास्तविक किराया (जो भी कम हो), सरकारी गाड़ी, ड्राइवर और स्टाफ की सुविधा (अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी जैसी स्टाफ कार सुविधा), कार्यालय और आवास दोनों पर टेलीफोन सुविधा, तथा ग्रुप-ए अधिकारियों के बराबर मोबाइल सुविधा दी जाएगी। वाइस चेयरमैन या डिप्टी चेयरमैन को हर महीने 45 हजार रुपए तक मानदेय मिलेगा, साथ ही उन्हें मकान किराया भत्ता और अन्य सरकारी सुविधाएं भी मिलेंगी। नियमित जिम्मेदारी निभाने वाले सदस्यों को 30 हजार रुपए तक मानदेय निर्धारित किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई गैर-सरकारी पदाधिकारी विधायक भी है और पहले से सरकारी फ्लैट में रह रहा है, तो उसे अलग से मकान किराया भत्ता नहीं मिलेगा; केवल लाइसेंस फीस की प्रतिपूर्ति की जाएगी। यात्रा भत्ते और दैनिक भत्ते के लिए चेयरमैन और वाइस चेयरमैन को हरियाणा सिविल सेवा (TA) नियम 2016 के अनुसार ग्रेड-1 अधिकारियों के बराबर सुविधा मिलेगी, हालांकि सरकारी दौरे पर एक महीने में 10 दिन से अधिक दैनिक भत्ता नहीं दिया जाएगा। हरियाणा और दिल्ली से बाहर यात्रा करने पर, यदि सरकारी गाड़ी का उपयोग नहीं हुआ है, तो ग्रेड-1 अधिकारियों के हिसाब से यात्रा भत्ता देय होगा। मेडिकल सुविधाओं के मामले में भी चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन को राज्य सरकार के ग्रुप-ए अधिकारियों जैसी सुविधाएं मिलेंगी। इससे पहले, विभिन्न बोर्डों और निगमों में चेयरमैन और वाइस चेयरमैन की सुविधाएं अलग-अलग थीं, जैसे हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड के चेयरमैन को कैबिनेट मंत्री स्तर का प्रोटोकॉल मिलता था। अब सरकार ने साफ कहा है कि तय नियमों से अलग किसी विशेष सुविधा या अतिरिक्त छूट की मांग पर विचार नहीं किया जाएगा, जिससे नियुक्तियों और सुविधाओं में मनमानी की गुंजाइश कम होगी।
- महेंद्रगढ़ जिले के नांगल चौधरी में स्थित CIIT संस्थान को सरकारी मान्यता प्रदान की गई है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के बाद, अब संस्थान के विद्यार्थियों को आधुनिक कौशल विकास के क्षेत्र में विभिन्न अवसर प्राप्त होंगे, जिससे उनके भविष्य की संभावनाएं बेहतर होंगी।1
- एक जोड़े ने अपनी विवाह की 25वीं सालगिरह मनाई। इस खास अवसर पर उन्होंने अपने बुजुर्गों से आशीर्वाद प्राप्त किया।1
- एक अद्भुत और विस्मयकारी दृश्य साझा किया गया है, जिसमें एक बाघ और एक कोबरा को एक साथ दिखाया गया है। यह नजारा सभी भाइयों से देखने का आग्रह किया गया है।1
- कष्ट निवारण समिति की बैठक के दौरान, 'गब्बर' नाम से जाने जाने वाले विज ने गैस घोटाले के मुद्दे पर अपना सख्त रुख प्रदर्शित किया है। उन्होंने इस पूरे मामले को देश के लिए एक गंभीर मुद्दा करार दिया है। विज ने सीधे तौर पर यह प्रश्न उठाया है कि आखिर उपभोक्ताओं के 14 में से 9 गैस सिलेंडर कहां जा रहे हैं।1
- कोटपूतली-बहरोड़ जिले की बेटी और चौमूं के चित्तवाडी की बहू अनु मीणा ने अपने घर में फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। आरोप है कि उनके पति गौतम मीणा उन्हें रोज़ प्रताड़ित करते थे, जिससे पति-पत्नी का रिश्ता शर्मसार हुआ है। यह घटना सामने आने के बाद इलाके में आक्रोश है और अनु मीणा के लिए न्याय की मांग उठ रही है। इस मामले में सचिव कांग्रेस सेक्रेटरी शीशराम गुर्जर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि सरकार और प्रशासन ने इस विषय पर विचार करने के लिए दो दिन का समय मांगा है। गुर्जर ने स्पष्ट किया कि वे अनु मीणा को न्याय दिलाने के लिए किसी भी हद तक पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि दो दिन के भीतर न्याय नहीं मिला, तो वे शहीद स्मारक पर धरने पर बैठेंगे और प्रदर्शन करेंगे।1
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- देश में महंगाई बहुत ज़्यादा बढ़ गई है, जिससे आम जनता पर भारी असर पड़ रहा है। इस स्थिति पर तंज कसते हुए कहा गया है कि जहाँ साल 2013 में महंगाई को 'देहाती' समझा जाता था, वहीं साल 2026 में इसे 'देशहित' का नाम दे दिया गया है।1