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चंडीगढ़, हरियाणा- नन्ही बच्ची ने लिया सीएम का इंटरव्यू बच्ची के हौसले को सलाम मैं इस बच्ची के उज्जवल भविष्य की कामना करता हूं

1 hr ago
user_सतीश कुमार
सतीश कुमार
Local News Reporter महेंद्रगढ़, महेंद्रगढ़, हरियाणा•
1 hr ago

चंडीगढ़, हरियाणा- नन्ही बच्ची ने लिया सीएम का इंटरव्यू बच्ची के हौसले को सलाम मैं इस बच्ची के उज्जवल भविष्य की कामना करता हूं

More news from राजस्थान and nearby areas
  • सभापति बनते ही एक्शन मोड में कमल यादव, सुबह-सुबह नगर परिषद पहुंचकर संभाला सफाई व्यवस्था का मोर्चा बहरोड़,नवनिर्वाचित सभापति कमल यादव पदभार संभालते ही एक्शन मोड में आ गए हैं। पदभार ग्रहण करने के साथ ही उन्होंने कामकाज शुरू कर दिया है। सभापति कमल यादव सुबह जल्दी नगर परिषद पहुंचे और सफाई व्यवस्था का मोर्चा संभाला। उन्होंने सफाई कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। कमल यादव के नेतृत्व में बहरोड़ में स्वच्छता अभियान शुरू हुआ है। सभापति ने कहा कि अब बहरोड़ को स्वच्छ और सुंदर बनाया जाएगा। शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर सभापति का बड़ा बयान भी सामने आया है। उन्होंने स्वच्छ शहर के संकल्प को दोहराया।
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    सभापति बनते ही एक्शन मोड में कमल यादव, सुबह-सुबह नगर परिषद पहुंचकर संभाला सफाई व्यवस्था का मोर्चा
बहरोड़,नवनिर्वाचित सभापति कमल यादव पदभार संभालते ही एक्शन मोड में आ गए हैं। पदभार ग्रहण करने के साथ ही उन्होंने कामकाज शुरू कर दिया है।
सभापति कमल यादव सुबह जल्दी नगर परिषद पहुंचे और सफाई व्यवस्था का मोर्चा संभाला। उन्होंने सफाई कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
कमल यादव के नेतृत्व में बहरोड़ में स्वच्छता अभियान शुरू हुआ है। सभापति ने कहा कि अब बहरोड़ को स्वच्छ और सुंदर बनाया जाएगा। शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर सभापति का बड़ा बयान भी सामने आया है। उन्होंने स्वच्छ शहर के संकल्प को दोहराया।
    user_NARESH Kumar Khanna
    NARESH Kumar Khanna
    Local News Reporter बहरोड़, अलवर, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • रोहतक में पूर्व CM भूपेंद्र सिंह हुड्डा का बयान #rohtak #viral #bhupendersinghhooda #congress #viralvideo रोहतक में पूर्व CM भूपेंद्र सिंह हुड्डा का बयान #rohtak #viral #bhupendersinghhooda #congress #viralvideo
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    रोहतक में पूर्व CM भूपेंद्र सिंह हुड्डा का बयान #rohtak #viral #bhupendersinghhooda #congress #viralvideo
रोहतक में पूर्व CM भूपेंद्र सिंह हुड्डा का बयान #rohtak #viral #bhupendersinghhooda #congress #viralvideo
    user_J D Duggal
    J D Duggal
    Local News Reporter भिवानी, भिवानी, हरियाणा•
    5 hrs ago
  • फसल बर्बादी का मुआवजा दो! भिवानी में किसानों का बड़ा प्रदर्शन फसल बर्बादी का मुआवजा दो! भिवानी में किसानों का बड़ा प्रदर्शन
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    फसल बर्बादी का मुआवजा दो! भिवानी में किसानों का बड़ा प्रदर्शन


फसल बर्बादी का मुआवजा दो! भिवानी में किसानों का बड़ा प्रदर्शन
    user_Bhajan Lal
    Bhajan Lal
    भिवानी, भिवानी, हरियाणा•
    7 hrs ago
  • करनाल का मामला: पीड़ित महिला ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए गंभीर सवाल, इंसाफ की लगाई गुहार! परिवार ने लगाए मारपीट और जान से मारने की धमकी के आरोप, महिला ने बताई पूरी आपबीती। मामला क्या है? वीडियो में सुनिए पीड़ित महिला की जुबानी। #Karnal #KarnalNews #HaryanaNews #CrimeNews #Police #Justice #ViralVideo #BreakingNews #KGBDigitalMedia
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    करनाल का मामला: पीड़ित महिला ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए गंभीर सवाल, इंसाफ की लगाई गुहार!
परिवार ने लगाए मारपीट और जान से मारने की धमकी के आरोप, महिला ने बताई पूरी आपबीती।
मामला क्या है? वीडियो में सुनिए पीड़ित महिला की जुबानी।
#Karnal #KarnalNews #HaryanaNews #CrimeNews #Police #Justice #ViralVideo #BreakingNews #KGBDigitalMedia
    user_INDIA PARTH MEDIA
    INDIA PARTH MEDIA
    Local News Reporter Farrukhnagar, Gurugram•
    4 hrs ago
  • मैं सोचा भजन लाल भला आदमी है लेकिन यह भला आदमी ऐसा निकलेगा सोचा नहीं अशोक गहलोत मैं सोचा भजन लाल भला आदमी है लेकिन यह भला आदमी ऐसा निकलेगा सोचा नहीं अशोक गहलोत
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    मैं सोचा भजन लाल भला आदमी है लेकिन यह भला आदमी ऐसा निकलेगा सोचा नहीं अशोक गहलोत
मैं सोचा भजन लाल भला आदमी है लेकिन यह भला आदमी ऐसा निकलेगा सोचा नहीं अशोक गहलोत
    user_PGS INDIA NEWS
    PGS INDIA NEWS
    Court reporter झुंझुनू, झुंझुनू, राजस्थान•
    1 hr ago
  • जय गुरुदेव नाम प्रभु का प्रभु का पवन नाम जय गुरुदेव प्रभुप्यारा नाम जय गुरुदेव जय गुरुदेव नाम की सब प्रभु का प्रभु जय गुरुदेव प्रभु का जन्मदिन जय गुरुदेव जय गुरुदेव जय गुरुदेव जय गुरुदेव जय गुरुदेव जय गुरुदेव जय गुरुदेव जय गुरुदेव
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    जय गुरुदेव नाम प्रभु का प्रभु का पवन नाम जय गुरुदेव प्रभुप्यारा नाम जय गुरुदेव
जय गुरुदेव नाम की सब प्रभु का प्रभु जय गुरुदेव प्रभु का जन्मदिन जय गुरुदेव जय गुरुदेव जय गुरुदेव जय गुरुदेव जय गुरुदेव जय गुरुदेव जय गुरुदेव जय गुरुदेव
    user_Jay Gurudev Vaani
    Jay Gurudev Vaani
    झुंझुनू, झुंझुनू, राजस्थान•
    3 hrs ago
  • सामाजिक न्याय और आरक्षण की मांगों को लेकर भीम आर्मी ने किया विशाल प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन सामाजिक न्याय और आरक्षण की मांगों को लेकर भीम आर्मी ने किया विशाल प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन नारनौल, 24 सितंबर: (सतीश कुमार शर्मा) विभिन्न संगठनों द्वारा भीम आर्मी के तत्वावधान में महेंद्रगढ़ रोड स्थित डॉ. बी.आर. अंबेडकर स्टैच्यू प्रांगण में एक दिवसीय विशाल धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया। भीम आर्मी अध्यक्ष संदीप चेडवाल की अगुवाई और संघर्ष समिति के महासचिव एवं कबीर सामाजिक उत्थान संस्था के वाइस चेयरमैन बिरदी चंद गोठवाल की अध्यक्षता में आयोजित इस प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं द्वारा एक विशाल आक्रोश जुलूस निकाला गया। प्रदर्शन के अंत में राष्ट्रपति के नाम नारनौल के तहसीलदार लच्छी राम को ज्ञापन सौंपा गया। कार्यक्रम का सफल संचालन लाजपत महाशय द्वारा किया गया। धरने को संबोधित करते हुए धरना प्रदर्शन के अध्यक्ष बिरदी चंद गोठवाल और भीम आर्मी के अध्यक्ष संदीप चेडवाल ने स्पष्ट कहा कि देश में दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सामाजिक न्याय के बिना देश का लोकतंत्र अधूरा है । प्रमुख मांगें: महिला आरक्षण, नारी शक्ति वंदन अधिनियम में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही इसमें SC, ST और OBC वर्ग की महिलाओं के लिए 'कोटे के अंदर कोटा' (सब-कोटा) लागू हो और स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50% आरक्षण दिया जाए। मेडिकल कॉलेजों में 70% आरक्षण की बहाली: उत्तर प्रदेश के कन्नौज, अंबेडकर नगर, जालौन और सहारनपुर के मेडिकल कॉलेजों में समाप्त की गई SC/ST विद्यार्थियों की 70% आरक्षण व्यवस्था को विशेष अधिनियम बनाकर तत्काल पुनः लागू किया जाए। OBC समाज का राजनीतिक प्रतिनिधित्व: अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को आबादी के अनुपात में लोकसभा और विधानसभाओं में उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रदान किया जाए। कार्यक्रम में गुरु रविदास महासभा के प्रधान बाबूलाल नारनोलिया, जगराम कालिया, सोमवीर आर्य और शेर सिंह बाछोदिया ने भी अपने विचार रखे। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो देशभर में उग्र आंदोलन किया जाएगा। उपस्थित गण: भीम आर्मी की महासचिव प्रियंका, सर्व अजा संघर्ष समिति के प्रधान चन्दन सिंह जालवान, भूपेंद्र नांगल सोडा, पूर्ण चंद, जिले सिंह, अमरनाथ सिरोहा, महावीर प्रसाद, अतर सिंह खिंची, दुष्यंत, रीना कुमारी, राकेश, धर्मपाल, संदीप, राहुल, पूर्व सरपंच बनवारी लाल, पूर्णमल, मुकेश बौद्ध, सुखवीर, सोमवीर कुमार, सुमेरसिंह गोठवाल, सोमवीर, सुनील, हरिराम सिरोहा, तुलसी राम, सुनील मिस्त्री, मनोज बौद्ध, संदीप बौद्ध, धर्मवीर, जोनी, मनीषा, सुनील, सुणा राम, अनूप सिंह, राजेश, यादराम, दीपक, महेश, प्रवेश, हजारीलाल खटावला, सीमा, राजबाला, निहालसिंह, राजकपूर, धर्मवीर, मनोज, रोशन, जोनी, सुमित, मनीष आदि अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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    सामाजिक न्याय और आरक्षण की मांगों को लेकर भीम आर्मी ने किया विशाल प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
सामाजिक न्याय और आरक्षण की मांगों को लेकर भीम आर्मी ने किया विशाल प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
नारनौल, 24 सितंबर: 
(सतीश कुमार शर्मा)
विभिन्न संगठनों द्वारा भीम आर्मी के तत्वावधान में महेंद्रगढ़ रोड स्थित डॉ. बी.आर. अंबेडकर स्टैच्यू प्रांगण में एक दिवसीय विशाल धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया। भीम आर्मी अध्यक्ष संदीप चेडवाल की अगुवाई और संघर्ष समिति के महासचिव एवं कबीर सामाजिक उत्थान संस्था के वाइस चेयरमैन बिरदी चंद गोठवाल की अध्यक्षता में आयोजित इस प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं द्वारा एक विशाल आक्रोश जुलूस निकाला गया। प्रदर्शन के अंत में राष्ट्रपति के नाम नारनौल के तहसीलदार लच्छी राम को ज्ञापन सौंपा गया। कार्यक्रम का सफल संचालन लाजपत महाशय द्वारा किया गया।
धरने को संबोधित करते हुए धरना प्रदर्शन के अध्यक्ष बिरदी चंद गोठवाल और भीम आर्मी के अध्यक्ष संदीप चेडवाल ने स्पष्ट कहा कि देश में दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सामाजिक न्याय के बिना देश का लोकतंत्र अधूरा है ।
प्रमुख मांगें:
महिला आरक्षण, नारी शक्ति वंदन अधिनियम में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही इसमें SC, ST और OBC वर्ग की महिलाओं के लिए 'कोटे के अंदर कोटा' (सब-कोटा) लागू हो और स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50% आरक्षण दिया जाए।
मेडिकल कॉलेजों में 70% आरक्षण की बहाली: उत्तर प्रदेश के कन्नौज, अंबेडकर नगर, जालौन और सहारनपुर के मेडिकल कॉलेजों में समाप्त की गई SC/ST विद्यार्थियों की 70% आरक्षण व्यवस्था को विशेष अधिनियम बनाकर तत्काल पुनः लागू किया जाए।
OBC समाज का राजनीतिक प्रतिनिधित्व: अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को आबादी के अनुपात में लोकसभा और विधानसभाओं में उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रदान किया जाए।
कार्यक्रम में गुरु रविदास महासभा के प्रधान बाबूलाल नारनोलिया, जगराम कालिया, सोमवीर आर्य और शेर सिंह बाछोदिया ने भी अपने विचार रखे। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो देशभर में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
उपस्थित गण:
भीम आर्मी की महासचिव प्रियंका, सर्व अजा संघर्ष समिति के प्रधान चन्दन सिंह जालवान, भूपेंद्र नांगल सोडा, पूर्ण चंद, जिले सिंह, अमरनाथ सिरोहा, महावीर प्रसाद, अतर सिंह खिंची, दुष्यंत, रीना कुमारी, राकेश, धर्मपाल, संदीप, राहुल, पूर्व सरपंच बनवारी लाल, पूर्णमल, मुकेश बौद्ध, सुखवीर, सोमवीर कुमार, सुमेरसिंह गोठवाल, सोमवीर, सुनील, हरिराम सिरोहा, तुलसी राम, सुनील मिस्त्री, मनोज बौद्ध, संदीप बौद्ध, धर्मवीर, जोनी, मनीषा, सुनील, सुणा राम, अनूप सिंह, राजेश, यादराम, दीपक, महेश, प्रवेश, हजारीलाल खटावला, सीमा, राजबाला, निहालसिंह, राजकपूर, धर्मवीर, मनोज, रोशन, जोनी, सुमित, मनीष आदि अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
    user_सतीश कुमार
    सतीश कुमार
    Local News Reporter महेंद्रगढ़, महेंद्रगढ़, हरियाणा•
    6 hrs ago
  • भिवानी में किसानों का प्रदर्शन #bhiwani #viral #kisan #protest #farmer #trending #viralvideo #newseason भिवानी में किसानों का प्रदर्शन #bhiwani #viral #kisan #protest #farmer #trending #viralvideo #newseason
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    भिवानी में किसानों का प्रदर्शन #bhiwani #viral #kisan #protest #farmer #trending #viralvideo #newseason
भिवानी में किसानों का प्रदर्शन #bhiwani #viral #kisan #protest #farmer #trending #viralvideo #newseason
    user_J D Duggal
    J D Duggal
    Local News Reporter भिवानी, भिवानी, हरियाणा•
    8 hrs ago
  • संघर्ष समिति से निकले सियासी चेहरे: किसका उदय, किसका अस्त? खैरथल। नगरपरिषद चुनाव खत्म हो चुके हैं। नतीजे सामने हैं, चेहरे साफ हैं और सियासी तस्वीर पहले से कहीं ज्यादा स्पष्ट। लेकिन इन नतीजों के बीच खैरथल की उस सियासी कहानी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, जिसकी पटकथा नगरपरिषद चुनाव से काफी पहले लिखी जा चुकी थी। *यह कहानी है खैरथल जिला मुख्यालय बचाओ संघर्ष समिति की।* एक साल से ज्यादा समय तक चला आंदोलन। धरने, प्रदर्शन, सभाएं और जिला मुख्यालय के मुद्दे पर सड़क से लेकर सत्ता के गलियारों तक संघर्ष। इस आंदोलन ने सिर्फ एक मांग को आवाज नहीं दी, बल्कि खैरथल की स्थानीय राजनीति में कई नए चेहरों को जन्म दिया। आंदोलन की जमीन से निकले इन चेहरों ने अब नगरपरिषद चुनाव में अपनी-अपनी राजनीतिक ताकत का इम्तिहान दिया। *नतीजे दिलचस्प रहे।* पंकज रोघा संघर्ष समिति के युवा चेहरों में तेजी से उभरे और पार्षद निर्वाचित हुए। आंदोलन की जमीन से चुनावी राजनीति तक का यह सफर उनके लिए सियासी उपलब्धि के तौर पर देखा जा सकता है। वहीं संघर्ष समिति के सबसे चर्चित चेहरों में शुमार कृष्णा चौधरी को कांग्रेस का टिकट नहीं मिला। उन्होंने निर्दलीय मैदान संभाला, लेकिन जनता ने इस बार उनका साथ नहीं दिया। टिकट न मिलने से शुरू हुई कहानी हार पर जाकर खत्म हुई। सर्वेश गुप्ता, जो व्यापार समिति के अध्यक्ष होने के साथ संघर्ष समिति के मजबूत आधार स्तंभों में रहे, कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते। आंदोलन की सियासी पूंजी को चुनावी जीत में बदलने वाले चेहरों में उनका नाम भी शामिल हो गया। इसके उलट ओमप्रकाश रोघा का चुनावी सफर बेहद दिलचस्प रहा। संघर्ष समिति के प्रखर चेहरों में रहे रोघा कांग्रेस के टिकट पर पार्षद का चुनाव हार गए। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। कांग्रेस ने हार के बावजूद उन पर भरोसा जताया और सभापति पद के लिए मैदान में उतार दिया। मुकाबला लॉटरी तक पहुंचा और किस्मत ने इस बार भी साथ नहीं दिया। यानी पार्षद चुनाव में हार और सभापति चुनाव में लॉटरी से हार—सियासत ने उन्हें दो बार मौका दिया, लेकिन दोनों बार परिणाम उनके पक्ष में नहीं आया। गिरीश डाटा की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं रही। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य और कांग्रेस के प्रमुख स्थानीय चेहरों में शामिल डाटा महज दो वोटों के अंतर से चुनाव हार गए। राजनीति में कभी-कभी दो वोट भी पूरी कहानी बदल देते हैं और इस चुनाव ने इसकी मिसाल पेश कर दी। लेकिन सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ आया विक्की चौधरी के मामले में। संघर्ष समिति से निकले युवा और मुखर चेहरों में शामिल तथा नगरपरिषद में तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष रहे विक्की चौधरी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते। लेकिन जीत के बाद राजनीतिक पाला बदल गया। उन्होंने भाजपा का दामन थामा और अंततः नगरपरिषद की सभापति की कुर्सी तक पहुंच गए। यानी संघर्ष समिति की जमीन से निकला एक चेहरा उस कुर्सी तक पहुंच गया, जो नगरपरिषद की स्थानीय सत्ता का सबसे बड़ा केंद्र मानी जाती है। *आंदोलन की जमीन, राजनीति की मंजिल?* अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि कौन जीता और कौन हारा। बड़ा सवाल यह है कि जिस संघर्ष समिति ने इन चेहरों को पहचान दी, उसका आगे क्या होगा? क्या आंदोलन की वह ऊर्जा फिर से जिला मुख्यालय के मुद्दे पर दिखाई देगी? क्या संघर्ष समिति एक बार फिर सड़क पर उतरेगी? क्या जिला मुख्यालय की लड़ाई नगरपरिषद चुनाव के बाद भी उतनी ही प्राथमिकता रहेगी, जितनी चुनाव से पहले थी? या फिर यह पूरा आंदोलन धीरे-धीरे चुनावी राजनीति की सीढ़ी बनकर रह जाएगा? क्योंकि तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। संघर्ष समिति से जुड़े कई चेहरे चुनावी राजनीति में उतरे। किसी ने जीत हासिल की, किसी को हार मिली, किसी की राजनीतिक दिशा बदली और किसी की उम्मीद लॉटरी के फैसले पर आकर अटक गई। यानी संघर्ष समिति ने चेहरे तो बहुत दिए, लेकिन अब सवाल उसके अपने भविष्य का है। क्या संघर्ष समिति फिर खड़ी होगी या उसके योद्धा अपनी-अपनी राजनीतिक मंजिलों की ओर निकल चुके हैं? कहीं ऐसा तो नहीं कि जिस आंदोलन ने नेताओं को जन्म दिया, वही नेता अब आंदोलन से आगे निकल गए हैं? खैरथल की राजनीति में आने वाले दिनों में इस सवाल का जवाब बेहद महत्वपूर्ण होगा। क्योंकि जिला मुख्यालय का मुद्दा अभी खत्म नहीं हुआ है। और अगर मुद्दा जिंदा है, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि संघर्ष समिति भी जिंदा रहती है या सिर्फ उसकी राजनीतिक विरासत। फिलहाल नगरपरिषद चुनाव ने इतना तो साफ कर दिया है कि संघर्ष समिति की कहानी में कई किरदार थे—कुछ चुनाव जीतकर आगे बढ़े, कुछ हारकर पीछे छूट गए और कुछ सत्ता की सीढ़ियां चढ़ गए। अब अगला अध्याय जनता लिखेगी— संघर्ष समिति के आंदोलन का या फिर उसके आंदोलन से निकले नेताओं की राजनीति का।
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    संघर्ष समिति से निकले सियासी चेहरे: किसका उदय, किसका अस्त?
खैरथल। नगरपरिषद चुनाव खत्म हो चुके हैं। नतीजे सामने हैं, चेहरे साफ हैं और सियासी तस्वीर पहले से कहीं ज्यादा स्पष्ट। लेकिन इन नतीजों के बीच खैरथल की उस सियासी कहानी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, जिसकी पटकथा नगरपरिषद चुनाव से काफी पहले लिखी जा चुकी थी।
*यह कहानी है खैरथल जिला मुख्यालय बचाओ संघर्ष समिति की।*
एक साल से ज्यादा समय तक चला आंदोलन। धरने, प्रदर्शन, सभाएं और जिला मुख्यालय के मुद्दे पर सड़क से लेकर सत्ता के गलियारों तक संघर्ष। इस आंदोलन ने सिर्फ एक मांग को आवाज नहीं दी, बल्कि खैरथल की स्थानीय राजनीति में कई नए चेहरों को जन्म दिया। आंदोलन की जमीन से निकले इन चेहरों ने अब नगरपरिषद चुनाव में अपनी-अपनी राजनीतिक ताकत का इम्तिहान दिया।
*नतीजे दिलचस्प रहे।*
पंकज रोघा संघर्ष समिति के युवा चेहरों में तेजी से उभरे और पार्षद निर्वाचित हुए। आंदोलन की जमीन से चुनावी राजनीति तक का यह सफर उनके लिए सियासी उपलब्धि के तौर पर देखा जा सकता है।
वहीं संघर्ष समिति के सबसे चर्चित चेहरों में शुमार कृष्णा चौधरी को कांग्रेस का टिकट नहीं मिला। उन्होंने निर्दलीय मैदान संभाला, लेकिन जनता ने इस बार उनका साथ नहीं दिया। टिकट न मिलने से शुरू हुई कहानी हार पर जाकर खत्म हुई।
सर्वेश गुप्ता, जो व्यापार समिति के अध्यक्ष होने के साथ संघर्ष समिति के मजबूत आधार स्तंभों में रहे, कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते। आंदोलन की सियासी पूंजी को चुनावी जीत में बदलने वाले चेहरों में उनका नाम भी शामिल हो गया।
इसके उलट ओमप्रकाश रोघा का चुनावी सफर बेहद दिलचस्प रहा। संघर्ष समिति के प्रखर चेहरों में रहे रोघा कांग्रेस के टिकट पर पार्षद का चुनाव हार गए। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। कांग्रेस ने हार के बावजूद उन पर भरोसा जताया और सभापति पद के लिए मैदान में उतार दिया। मुकाबला लॉटरी तक पहुंचा और किस्मत ने इस बार भी साथ नहीं दिया। यानी पार्षद चुनाव में हार और सभापति चुनाव में लॉटरी से हार—सियासत ने उन्हें दो बार मौका दिया, लेकिन दोनों बार परिणाम उनके पक्ष में नहीं आया।
गिरीश डाटा की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं रही। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य और कांग्रेस के प्रमुख स्थानीय चेहरों में शामिल डाटा महज दो वोटों के अंतर से चुनाव हार गए। राजनीति में कभी-कभी दो वोट भी पूरी कहानी बदल देते हैं और इस चुनाव ने इसकी मिसाल पेश कर दी।
लेकिन सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ आया विक्की चौधरी के मामले में।
संघर्ष समिति से निकले युवा और मुखर चेहरों में शामिल तथा नगरपरिषद में तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष रहे विक्की चौधरी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते। लेकिन जीत के बाद राजनीतिक पाला बदल गया। उन्होंने भाजपा का दामन थामा और अंततः नगरपरिषद की सभापति की कुर्सी तक पहुंच गए।
यानी संघर्ष समिति की जमीन से निकला एक चेहरा उस कुर्सी तक पहुंच गया, जो नगरपरिषद की स्थानीय सत्ता का सबसे बड़ा केंद्र मानी जाती है।
*आंदोलन की जमीन, राजनीति की मंजिल?*
अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि कौन जीता और कौन हारा।
बड़ा सवाल यह है कि जिस संघर्ष समिति ने इन चेहरों को पहचान दी, उसका आगे क्या होगा?
क्या आंदोलन की वह ऊर्जा फिर से जिला मुख्यालय के मुद्दे पर दिखाई देगी?
क्या संघर्ष समिति एक बार फिर सड़क पर उतरेगी?
क्या जिला मुख्यालय की लड़ाई नगरपरिषद चुनाव के बाद भी उतनी ही प्राथमिकता रहेगी, जितनी चुनाव से पहले थी?
या फिर यह पूरा आंदोलन धीरे-धीरे चुनावी राजनीति की सीढ़ी बनकर रह जाएगा?
क्योंकि तस्वीर का दूसरा पहलू भी है।
संघर्ष समिति से जुड़े कई चेहरे चुनावी राजनीति में उतरे। किसी ने जीत हासिल की, किसी को हार मिली, किसी की राजनीतिक दिशा बदली और किसी की उम्मीद लॉटरी के फैसले पर आकर अटक गई।
यानी संघर्ष समिति ने चेहरे तो बहुत दिए, लेकिन अब सवाल उसके अपने भविष्य का है।
क्या संघर्ष समिति फिर खड़ी होगी या उसके योद्धा अपनी-अपनी राजनीतिक मंजिलों की ओर निकल चुके हैं?
कहीं ऐसा तो नहीं कि जिस आंदोलन ने नेताओं को जन्म दिया, वही नेता अब आंदोलन से आगे निकल गए हैं?
खैरथल की राजनीति में आने वाले दिनों में इस सवाल का जवाब बेहद महत्वपूर्ण होगा।
क्योंकि जिला मुख्यालय का मुद्दा अभी खत्म नहीं हुआ है। और अगर मुद्दा जिंदा है, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि संघर्ष समिति भी जिंदा रहती है या सिर्फ उसकी राजनीतिक विरासत।
फिलहाल नगरपरिषद चुनाव ने इतना तो साफ कर दिया है कि संघर्ष समिति की कहानी में कई किरदार थे—कुछ चुनाव जीतकर आगे बढ़े, कुछ हारकर पीछे छूट गए और कुछ सत्ता की सीढ़ियां चढ़ गए।
अब अगला अध्याय जनता लिखेगी—
संघर्ष समिति के आंदोलन का या फिर उसके आंदोलन से निकले नेताओं की राजनीति का।
    user_Pramod Kewlani
    Pramod Kewlani
    Local News Reporter खैरथल, अलवर, राजस्थान•
    5 hrs ago
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