पूर्णिया जिले के ग्रामीण अंचलों में हिंसक वन्य जीवों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल है। बुधवार को जिला मुख्यालय से सटे कसबा थाना क्षेत्र की बेतोना पंचायत में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब खेतों में कृषि कार्य कर रहे मजदूरों और किसानों पर एक जंगली गीदड़ (सियार) ने अचानक धावा बोल दिया। इस अप्रत्याशित हमले में एक आठ वर्षीय बच्ची और महिलाओं समेत कुल छह लोग बुरी तरह कटकर लहूलुहान हो गए। हिंसक गीदड़ ने ग्रामीणों को दौड़ा-दौड़ा कर काटा और जरू उरांव नामक ग्रामीण के होंठ को बुरी तरह नोच लिया, जिससे उनकी हालत काफी नाजुक बनी हुई है। बेतोना गांव में चीख-पुकार मचने के बाद, खुद को ग्रामीणों से घिरता देख गीदड़ और अधिक हिंसक हो गया, जिसके बाद आत्मरक्षार्थ एकजुट हुए ग्रामीणों ने लाठी-डंडों से पीट-पीटकर उस हिंसक पशु को मौके पर ही मार गिराया। इस हमले में जख्मी हुए लोगों में बेतोना निवासी पुनिता देवी, रामरेती उरांव, जरू उरांव, आठ वर्षीय बच्ची मीनाक्षी और बीरेंद्र उरांव के साथ एक अन्य ग्रामीण शामिल हैं। घटना के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीणों की मदद से सभी घायलों को पास के स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद, घाव की गंभीरता और रेबीज के संक्रमण के खतरे को देखते हुए चिकित्सकों ने सभी को राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (GMCH), पूर्णिया रेफर कर दिया है, जहां फिलहाल इमरजेंसी वार्ड में उनका इलाज चल रहा है। इस घटना के बाद से बेतोना और आस-पास के ग्रामीण इलाकों में भय का सन्नाटा पसरा हुआ है, क्योंकि धान के चालू सीजन में किसान और खेतिहर मजदूर अब खेतों की ओर जाने से कतरा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे पहले से ही क्षेत्र में तेंदुए की आहट से डरे हुए थे, और अब इस घटना ने उनके डर को और बढ़ा दिया है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने वन विभाग के अधिकारियों से क्षेत्र में गश्त बढ़ाने, जंगली जानवरों के रिहायशी इलाकों में प्रवेश को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम करने और इस हमले में घायल हुए गरीब मजदूरों के लिए उचित सरकारी आर्थिक मुआवजे की मांग की है, ताकि अस्पताल में उनका इलाज सुचारू रूप से हो सके।
पूर्णिया जिले के ग्रामीण अंचलों में हिंसक वन्य जीवों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल है। बुधवार को जिला मुख्यालय से सटे कसबा थाना क्षेत्र की बेतोना पंचायत में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब खेतों में कृषि कार्य कर रहे मजदूरों और किसानों पर एक जंगली गीदड़ (सियार) ने अचानक धावा बोल दिया। इस अप्रत्याशित हमले में एक आठ वर्षीय बच्ची और महिलाओं समेत कुल छह लोग बुरी तरह कटकर लहूलुहान हो गए। हिंसक गीदड़ ने ग्रामीणों को दौड़ा-दौड़ा कर काटा और जरू उरांव नामक ग्रामीण के होंठ को बुरी तरह नोच लिया, जिससे उनकी हालत काफी नाजुक बनी हुई है। बेतोना गांव में चीख-पुकार मचने के बाद, खुद को ग्रामीणों से घिरता देख गीदड़ और अधिक हिंसक हो गया, जिसके बाद आत्मरक्षार्थ एकजुट हुए ग्रामीणों ने लाठी-डंडों से पीट-पीटकर उस हिंसक पशु को मौके पर ही मार गिराया। इस हमले में जख्मी हुए लोगों में बेतोना निवासी पुनिता देवी, रामरेती उरांव, जरू उरांव, आठ वर्षीय बच्ची मीनाक्षी और बीरेंद्र उरांव के साथ एक अन्य ग्रामीण शामिल हैं। घटना के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीणों की मदद से सभी घायलों को पास के स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद, घाव की गंभीरता और रेबीज के संक्रमण के खतरे को देखते हुए चिकित्सकों ने सभी को राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (GMCH), पूर्णिया रेफर कर दिया है, जहां फिलहाल इमरजेंसी वार्ड में उनका इलाज चल रहा है। इस घटना के बाद से बेतोना और आस-पास के ग्रामीण इलाकों में भय का सन्नाटा पसरा हुआ है, क्योंकि धान के चालू सीजन में किसान और खेतिहर मजदूर अब खेतों की ओर जाने से कतरा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे पहले से ही क्षेत्र में तेंदुए की आहट से डरे हुए थे, और अब इस घटना ने उनके डर को और बढ़ा दिया है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने वन विभाग के अधिकारियों से क्षेत्र में गश्त बढ़ाने, जंगली जानवरों के रिहायशी इलाकों में प्रवेश को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम करने और इस हमले में घायल हुए गरीब मजदूरों के लिए उचित सरकारी आर्थिक मुआवजे की मांग की है, ताकि अस्पताल में उनका इलाज सुचारू रूप से हो सके।
- जगदीशपुर पंचायत के जगदीशपुर ग्रामीण बरबीघा क्षेत्र में 'सहायता कांड' की घटना सामने आई है। इस घटना के लिए सीधे तौर पर संचालक सम्राट चौबे को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।1
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- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो में नीतीश कुमार एक बयान देते हुए दिख रहे हैं। हालांकि, 'टुडे रियल न्यूज' इस वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करती है। वीडियो में नीतीश कुमार को यह कहते हुए सुना जा रहा है कि, 'कोर्ट फांसी दे, गोली कैसे मार देंगे'।1
- एक ओर जहां देश डिजिटल युग में आगे बढ़ रहा है, वहीं हसनगंज के कोला गांव में आज तक बिजली नहीं पहुंची है। पूरा गांव आज भी अंधेरे में रहने को मजबूर है, जिसके कारण यहां के बच्चों को अपनी पढ़ाई 'डिग्री' के सहारे करनी पड़ रही है।1
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- हसनगंज पुलिस ने मुहर्रम के मद्देनज़र एक फ्लैग मार्च का आयोजन किया। इस मार्च का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में शांति और सुरक्षा का संदेश देना था।1