Shuru
Apke Nagar Ki App…
नालंदा जिले के बिहारशरीफ में मुखिया रुकमिणी कुमारी और उनके परिवार को बदमाशों ने जान से मारने की धमकी दी है। इस धमकी के कारण मुखिया रुकमिणी कुमारी और उनके परिवार की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।
बिहार जंक्शन न्यूज
नालंदा जिले के बिहारशरीफ में मुखिया रुकमिणी कुमारी और उनके परिवार को बदमाशों ने जान से मारने की धमकी दी है। इस धमकी के कारण मुखिया रुकमिणी कुमारी और उनके परिवार की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।
More news from बिहार and nearby areas
- बिहार के नालंदा जिले के बिहारशरीफ में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भाकपा माले, AISA और RYA के देशव्यापी आह्वान पर एक विशाल विरोध मार्च निकाला गया। यह प्रदर्शन दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक और शिक्षा-परीक्षा में भ्रष्टाचार के खिलाफ छात्र-युवाओं द्वारा किए जा रहे संसद मार्च के समर्थन में आयोजित किया गया था। दिल्ली में चल रहे इस आंदोलन में सोनम वांगचुक, AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा, मनीष और आमीन पिछले कई दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं, जिनके समर्थन में देश भर में विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। बिहारशरीफ के कमरुद्दीन गंज स्थित भाकपा माले पार्टी कार्यालय से शुरू हुआ यह मार्च एलआईसी और सरकारी बस स्टैंड होते हुए अस्पताल चौराहा पहुंचा, जहां यह एक विरोध सभा में बदल गया। इस मार्च का नेतृत्व माले जिला सचिव कॉमरेड श्रीनिवास शर्मा, RYA के जिला अध्यक्ष कॉमरेड बिरेश कुमार, माले नेता कॉमरेड महेंद्र राम, ऐपवा नेत्री कॉमरेड रेनू देवी, गिरिजा देवी, सुनील कुमार, सरफराज, सत्येंद्र रविदास, रामप्रीत केवट, सुभाष शर्मा, श्रवण सिंह और सुदर्शन मिश्रा सहित कई अन्य नेताओं ने किया। इस मार्च में बड़ी संख्या में छात्र, युवा और आम जनता शामिल हुए। सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले के जिला सचिव कॉमरेड श्रीनिवास शर्मा ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के जरिए गरीब, दलित, पिछड़े और आदिवासी छात्रों को शिक्षा से बाहर करने तथा शिक्षा के निजीकरण की साजिश कर रही है। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर बैठे अनशनकारी छात्रों और सोनम वांगचुक जैसे बुद्धिजीवियों की आवाज को दबाने के लिए सरकार तानाशाही पर उतर आई है। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करने, पेपर लीक पर रोक लगाने, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को भंग करने, नई शिक्षा नीति 2020 को तुरंत रद्द करने, शिक्षा का बजट बढ़ाकर जीडीपी का 10 प्रतिशत करने और सरकारी शिक्षण संस्थानों को बचाने की मांग की। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाएंगी, तब तक आंदोलन और तेज किया जाएगा।1
- केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर एक मार्च निकाला गया है। इस मार्च के जरिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से पद छोड़ने की मांग की गई है।1
- नालंदा जिले के बिहार शरीफ से 'हरे कृष्णा जय जगन्नाथ' के पावन जयकारे के साथ एक अत्यंत भक्तिमय और श्रद्धा से भरपूर शॉर्ट वीडियो साझा किया गया है। इस संदेश में विभिन्न श्रद्धासूचक और मांगलिक प्रतीकों का उपयोग करते हुए ईश्वर के प्रति अपनी अटूट आस्था प्रकट की गई है।1
- उपेंद्र कुमार विभूति ने सरकार से राजगीर के ऐतिहासिक कुंडों को बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने इन ऐतिहासिक कुंडों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए सरकार से इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने की अपील की है।1
- श्री श्री 108 ऊं नमः शिवाय और हर हर महादेव जी के पावन जयघोष के साथ सभी के कल्याण की कामना की गई है। बाबा शिव गुरु की जय बोलते हुए यह प्रार्थना की गई है कि सबका जीवन मंगलमय हो और सबके जीवन में खुशियों की बरसात हो। इस संदेश को वीडियो नंबर 574 के रूप में साझा किया गया है।1
- नालंदा जिले के बिहार शरीफ में बारिश के बाद सड़कों पर भारी जलजमाव की स्थिति पैदा हो गई है। कल जहां लॉर्ड्स के मैदान पर रन बरस रहे थे, वहीं आज बिहार शरीफ की सड़कों पर पानी बह रहा है। इस जमीनी हकीकत को सामने लाने के लिए ग्राउंड रिपोर्ट की गई है ताकि वहां की वास्तविक स्थिति को दिखाया जा सके। सड़कों पर हुए इस जलभराव को देखते हुए यह तीखा सवाल उठाया गया है कि आखिर इस पानी वाली "क्रीज़" पर आम जनता कब तक टिक पाएगी? इसके साथ ही लोगों से कमेंट बॉक्स में अपनी राय देने और इस वीडियो को अधिक से अधिक शेयर करने की अपील की गई है, ताकि यह आवाज संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तक पहुंच सके।1
- नालंदा के बिहारशरीफ में अंजनी पुत्र हनुमान की आराधना करते हुए उन्हें लाल लंगोटे वाला और अंजनी का लाला बताया गया है। इन पंक्तियों के जरिए उनके प्रति गहरी आस्था और भक्ति का भाव प्रकट किया गया है।1
- बिहार में 551 सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालय) का शुभारंभ किया गया है। इस पहल के जरिए सरकारी शिक्षा को एक नई दिशा मिल रही है।1