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मुजफ्फरनगर के ग्राम पीनना NHAI हाईवे पर किसानों ने दे रखा था 3 साल से धरना किसने की मांग थी कि यहां पर अंडर पास ना बनाएं किसने की मांग थी यहां पर पुल का निर्माण ही कराया जाए ताकि यहां से चार-पांच गांव के लिए रास्ता जाता है अंडर पास बनने पर जल भराव की समस्या ज्यादा रहती है इसी वजह से यहां पर पुल का निर्माण कराया जाएगा किसानों का 3 साल से धरना देखते हुए सरकार इस बात को मान गई है कि यहां पर अब पल का ही निर्माण कराया जाएगा फूल निर्माण के लिए जो रसूल से कम शुरू कर दिया गया
Sameer Kumar
मुजफ्फरनगर के ग्राम पीनना NHAI हाईवे पर किसानों ने दे रखा था 3 साल से धरना किसने की मांग थी कि यहां पर अंडर पास ना बनाएं किसने की मांग थी यहां पर पुल का निर्माण ही कराया जाए ताकि यहां से चार-पांच गांव के लिए रास्ता जाता है अंडर पास बनने पर जल भराव की समस्या ज्यादा रहती है इसी वजह से यहां पर पुल का निर्माण कराया जाएगा किसानों का 3 साल से धरना देखते हुए सरकार इस बात को मान गई है कि यहां पर अब पल का ही निर्माण कराया जाएगा फूल निर्माण के लिए जो रसूल से कम शुरू कर दिया गया
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- मुजफ्फरनगर। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा ने आज जिला अस्पताल, रैन बसेरा, रेलवे स्टेशन तथा शीतकालीन व्यवस्थाओं (अलाव) का संयुक्त रूप से निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं सर्दी से बचाव की व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान रेलवे स्टेशन पर यात्रियों से संवाद कर सुविधाओं की जानकारी ली गई। रैन बसेरा व अलाव स्थलों पर मौजूद आमजन ने व्यवस्थाओं को संतोषजनक बताया। जिला अस्पताल में भर्ती सड़क दुर्घटना में घायल बच्चे के स्वास्थ्य की जानकारी लेकर चिकित्सकों को बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।1
- राष्ट्रीय महिला एकता संगठन1
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- *मुजफ्फरनगर- सड़क हादसे में बाइक सवार पति-पत्नी और एक बच्ची की दर्दनाक मौत, एक बच्चा गंभीर रूप से घायल* उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल घटना की सूचना मिलते ही तुरंत मौके पर पहुंचे और उसके बाद घायल बच्चे का हाल-चाल लेने के लिए अस्पताल भी पहुंचे2
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- तितावी: भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत जी से मिले बघरा ब्लॉक अध्यक्ष रमेश मलिक जी की मुलाकात , जिसमें उन्होंने किसानों की समस्याओं और आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की इस अच्छे पल की घड़ी में दोनों दिग्गज नेताओं ने एक साथ खाना खाया और साथ-साथ मुलाकात में राकेश टिकैत जी ने कहा कि सरकारें किसानों के हित में काम नहीं करती हैं और केवल हवाई बातें करती है बघरा ब्लॉक अध्यक्ष रमेश मलिक जी ने अन्य विषय पर चर्चा की - *गन्ना मूल्य*: गन्ने के रेट बढ़ाने की मांग - *भूमि अधिग्रहण*: भूमि अधिग्रहण कानून के खिलाफ आवाज उठाने के लिए कार्रवाई की मांग - *किसानों की समस्याएं*: खाद संकट, बिजली बिल भुगतान, और सड़क-पानी समस्याएं1
- मुजफ्फरनगर। थाना सिविल लाइन पुलिस ने महिला से स्नैचिंग के मामले में वांछित और 25 हजार रुपये के इनामी अभियुक्त को पुलिस मुठभेड़ के दौरान घायल अवस्था में गिरफ्तार किया है। मुठभेड़ के दौरान अभियुक्त ने पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके जवाब में की गई आत्मरक्षार्थ कार्रवाई में वह घायल हो गया। गिरफ्तार अभियुक्त के कब्जे से एक अवैध तमंचा, कारतूस व एक बिना नंबर की मोटरसाइकिल बरामद की गई है। घायल अभियुक्त को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस के अनुसार अभियुक्त शातिर किस्म का अपराधी है और पूर्व में महिला से चैन स्नैचिंग की घटना में शामिल रहा है। मामले में आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।1
- गन्ना किसानों पर मंडराया संकट: रेड रॉट और पोक्का बोइंग रोग ने घटाई पैदावार शाहपुर (मुजफ्फरनगर)। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शाहपुर क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में इस साल गन्ने की फसल पर बीमारियों का गहरा प्रभाव दिखाई दे रहा है। किसानों ने बताया कि रेड रॉट (लाल सड़न रोग) और पोक्का बोइंग जैसी घातक बीमारियों ने पैदावार को पिछले वर्षों के मुकाबले काफी कम कर दिया है। इन बीमारियों के बढ़ने का कारण बेमौसम बारिश और अनियमित मौसम को माना जा रहा है। गन्ना किसानों के लिए यह एक दोहरी मार साबित हो रही है, जहां एक ओर उत्पादन घटा है तो दूसरी ओर बीमारी नियंत्रण की अतिरिक्त लागत ने समस्या बढ़ा दी है। रोगों की पहचान और लक्षण 1. रेड रॉट (लाल सड़न रोग): · यह एक घातक फफूंदजनित बीमारी है जिसका कारक कोलेटोट्रिकम फालकैटम नामक फफूंद है। · प्रमुख लक्षण: गन्ने की डंठल को चीरने पर अंदर का गूदा लाल रंग का दिखता है, जिस पर सफेद आड़ी धारियां (क्रॉस लाइंस) नजर आती हैं। · प्रभावित पौधे की पत्तियां पीली पड़कर सूखने लगती हैं और अंत में पूरा पौधा मर सकता है। · यह रोग संक्रमित बीज, खेत या नमी-भरे माहौल से फैलता है। 2. पोक्का बोइंग रोग: · यह भी एक खतरनाक फफूंदजनित रोग है जो Fusarium moniliforme नामक फफूंद से फैलता है। · प्रमुख लक्षण: पत्तियों पर पीले धब्बे दिखना, पत्तियों का मुड़ना और एक-दूसरे में फंसना, पत्तियों के ऊपरी गुच्छे (स्पिंडल) का सड़कर सूख जाना। · इस रोग के कारण पौधे की बढ़वार रुक जाती है और पत्तियों पर बड़े-बड़े पीले धब्बे दिखने लगते हैं। बीमारियों के फैलने के कारण कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार इन बीमारियों के गंभीर रूप लेने के पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं: · अत्यधिक वर्षा और नमी: हाल ही में हुई भारी बारिश और उमस भरे माहौल ने फफूंदजनित रोगों को फैलने के लिए आदर्श स्थिति प्रदान की है। · खेत में जलभराव: बारिश के बाद खेतों में पानी का ठहराव होना रोग फैलने का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। · संक्रमित बीज या खेत: रोग प्रतिरोधी किस्मों के बजाय संक्रमित बीजों का उपयोग या पहले से प्रभावित खेत में गन्ना लगाना भी एक प्रमुख वजह है। बचाव और नियंत्रण के उपाय उत्तर प्रदेश गन्ना शोध संस्थान के प्रसार अधिकारी डॉ. संजीव कुमार पाठक के अनुसार, सावधानी और समय रहते उपाय करने से इन बीमारियों पर काबू पाया जा सकता है: · बीज उपचार: बुवाई से पहले गन्ने के बीज के टुकड़ों (सेट्स) को थायोफिनेट मिथाइल (1 ग्राम/लीटर) या कार्बेन्डाजिम के घोल में 10 मिनट तक उपचारित करना चाहिए। गर्म पानी (50°C) में 30 मिनट तक बीज उपचार भी एक देसी और कारगर उपाय है। · मृदा उपचार: अंतिम जुताई से पहले, ट्राइकोडर्मा (10 किलोग्राम) को 2-3 क्विंटल सड़ी हुई गोबर की खाद में मिलाकर पूरे खेत में बिखेर दें। · फसल चक्र अपनाएं: जिस खेत में एक बार रेड रॉट आ चुका हो, वहां कम से कम 6 महीने तक गन्ने की फसल नहीं लगानी चाहिए, क्योंकि रोग के कारक इतने समय तक मिट्टी में जीवित रहते हैं। · रोग प्रतिरोधी किस्में: सबसे महत्वपूर्ण उपाय है रोग प्रतिरोधी किस्मों का चयन करना। Co 0238, Co 0118, Co 15023 जैसी किस्मों पर विचार करें। COH-188, COH-176 और कृष्णा (CoSe 17451) जैसी नई किस्में भी 2026 में उपलब्ध होंगी, जो रेड रॉट के प्रति अधिक सहनशील हैं। · उचित जल निकास: खेत में कभी भी पानी जमा न होने दें, इसके लिए उचित जल निकासी की व्यवस्था करें। सरकारी सहायता बिहार जैसे राज्यों में, सरकार ने गन्ना फसल को नुकसान होने पर फसल बीमा लाभ सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है। साथ ही, छोटे गुड़ उत्पादकों को भी प्रोत्साहन योजनाओं से जोड़ा जा रहा है ताकि किसानों की आय में विविधता लाई जा सक1
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