अशोकनगर जिले की पिपरई में 'अस्पताल बचाओ संघर्ष समिति' ने पिपरई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की मांग को लेकर प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा है। यह ज्ञापन पिपरई तहसीलदार अंजनी कुमार चौधरी को दिया गया, जिसे जिला कलेक्टर तक पहुँचाया जाना है। समिति की मुख्य मांग क्षेत्र की जनता को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। समिति के वरिष्ठ सदस्य डॉ. शाकिर अहमद ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि पिपरई का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लगभग 50 से अधिक गांवों की आबादी के लिए एक प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है, जहाँ सामान्य और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए हजारों ग्रामीण निर्भर करते हैं। समिति के सदस्य विक्रम तांवरे ने यह भी बताया कि नवीन और विशाल भवन होने के बावजूद, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विशेषज्ञ चिकित्सकों, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और आवश्यक संसाधनों की कमी है। इसी अभाव के कारण मरीजों को मामूली जांच और उपचार के लिए भी अशोकनगर, गुना या अन्य जिलों में रेफर किया जाता है, जिससे मरीजों को धन और समय दोनों की हानि होती है और कई बार उनकी जान पर भी संकट आ जाता है। समिति की प्रमुख मांगों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पर्याप्त संख्या में विशेषज्ञ चिकित्सकों जैसे महिला रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट), शिशु रोग विशेषज्ञ और सर्जन की नियुक्ति शामिल है। इसके अतिरिक्त, एक्स-रे मशीन की स्थापना और नियमित संचालन, सोनोग्राफी (अल्ट्रासाउंड) सुविधा तत्काल प्रारंभ करने, पैथोलॉजी लैब स्थापित कर सभी आवश्यक जांचों की व्यवस्था करने, पर्याप्त संख्या में स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट और वार्ड बॉय की नियुक्ति करने, कम से कम 24 घंटे उपलब्ध रहने वाली दो से तीन एंबुलेंस की व्यवस्था करने और एक शव वाहन की व्यवस्था करने की मांग की गई है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। ज्ञापन सौंपते समय मुख्य रूप से रमेश रजक, गोविंद अहिरवार, निखिल अहिरवार और अलग-अलग गांवों से अन्य लोग उपस्थित थे।
अशोकनगर जिले की पिपरई में 'अस्पताल बचाओ संघर्ष समिति' ने पिपरई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की मांग को लेकर प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा है। यह ज्ञापन पिपरई तहसीलदार अंजनी कुमार चौधरी को दिया गया, जिसे जिला कलेक्टर तक पहुँचाया जाना है। समिति की मुख्य मांग क्षेत्र की जनता को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। समिति के वरिष्ठ सदस्य डॉ. शाकिर अहमद ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि पिपरई का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लगभग 50 से अधिक गांवों की आबादी के लिए एक प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है, जहाँ सामान्य और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए हजारों ग्रामीण निर्भर करते हैं। समिति के सदस्य विक्रम तांवरे ने यह भी बताया कि नवीन और विशाल भवन होने के बावजूद, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विशेषज्ञ चिकित्सकों, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और आवश्यक संसाधनों की कमी है। इसी अभाव के कारण मरीजों को मामूली जांच और उपचार के लिए भी अशोकनगर, गुना या अन्य जिलों में रेफर किया जाता है, जिससे मरीजों को धन और समय दोनों की हानि होती है और कई बार उनकी जान पर भी संकट आ जाता है। समिति की प्रमुख मांगों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पर्याप्त संख्या में विशेषज्ञ चिकित्सकों जैसे महिला रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट), शिशु रोग विशेषज्ञ और सर्जन की नियुक्ति शामिल है। इसके अतिरिक्त, एक्स-रे मशीन की स्थापना और नियमित संचालन, सोनोग्राफी (अल्ट्रासाउंड) सुविधा तत्काल प्रारंभ करने, पैथोलॉजी लैब स्थापित कर सभी आवश्यक जांचों की व्यवस्था करने, पर्याप्त संख्या में स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट और वार्ड बॉय की नियुक्ति करने, कम से कम 24 घंटे उपलब्ध रहने वाली दो से तीन एंबुलेंस की व्यवस्था करने और एक शव वाहन की व्यवस्था करने की मांग की गई है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। ज्ञापन सौंपते समय मुख्य रूप से रमेश रजक, गोविंद अहिरवार, निखिल अहिरवार और अलग-अलग गांवों से अन्य लोग उपस्थित थे।
- मध्य प्रदेश के विदिशा में एसबीआई गोल्ड लोन फर्जीवाड़े की सीबीआई जांच के दायरे में आए बैंककर्मी मनोज सोनी ने अपने खामखेड़ा स्थित फार्म हाउस में खुद को छर्रे वाली बंदूक से गोली मार ली। इस घटना में उन्हें गंभीर चोटें आईं, जिसमें एक छर्रा उनके दिल के ऊपर लगा और एक अन्य जगह पर। फार्म हाउस पर मौजूद कर्मचारियों ने तुरंत उनके परिवार को सूचना दी, जिसके बाद उन्हें पहले जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां से उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, और बाद में बेहतर इलाज के लिए भोपाल भेजा गया। बता दें कि सीबीआई द्वारा एसबीआई बैंक में हुए करोड़ों के गोल्ड लोन फर्जीवाड़े की जांच की जा रही है, और इसी जांच में मनोज सोनी भी शामिल हैं। दो दिन पहले ही सीबीआई ने बैंक लोन फर्जीवाड़े की जांच के दौरान मनोज सोनी के परिवार द्वारा संचालित एमपी ज्वैलर्स को सील किया था। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई।4
- बीना में अधिवक्ता संघ के चुनावों के लिए शनिवार को सुबह 10:00 बजे से मतदान शुरू हो गया, जो शाम 4:00 बजे तक चलेगा। मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल जबलपुर के तहत हो रहे ये चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराए जा रहे हैं। इसमें कुल 269 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं, जो अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, सह सचिव और पुस्तकालय अध्यक्ष के पदों के लिए वोट डाल रहे हैं। मतदान प्रक्रिया मुख्य चुनाव अधिकारी एड. राकेश मिश्रा, सहायक मुख्य चुनाव अधिकारी एड. धीरज सिंह लोधी और एड. नेहा मिश्रा की निगरानी में पूरी की जा रही है। अध्यक्ष पद के लिए त्रिकोणीय मुकाबला देखा जा रहा है, जिसमें एड. सुरेंद्र सोनी, एड. अनिल शर्मा और एड. रामकुमार पुरोहित चुनाव मैदान में हैं। उपाध्यक्ष पद के लिए एड. प्रीति लखेरा, एड. कृष्णा केथोरिया, एड. सुरेंद्र चौधरी और एड. शैलेंद्र दुबे के बीच प्रतिस्पर्धा है। इसी तरह, सचिव पद पर एड. सुरेश यादव और एड. त्रिलोक सिंह राजपूत; सह सचिव पद पर एड. अभिषेक राजे और एड. अमित सेन; तथा पुस्तकालय अध्यक्ष पद पर एड. आरती राय और एड. पूनम खटीक के बीच वोटिंग हो रही है। इस बीच, कार्यकारिणी सदस्य पद पर एड. डी के जैन, एड. टी आर सुमन और एड. नारायण प्रसाद गौतम निर्विरोध चुने जा चुके हैं। महिला कार्यकारिणी में भी एड. लक्ष्मी सोनी और एड. शिखा विश्वकर्मा को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया है। बीना की विधायक एडवोकेट निर्मला सप्रे ने भी मतदान केंद्र पहुंचकर अपना वोट डाला और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लिया। मतदान के दौरान ऐसे चेहरे भी देखने को मिले जो कभी वकालत के सिलसिले में अदालत नहीं आए, लेकिन आज संघ चुनाव में मतदान करने पहुंचे। शाम 4 बजे के बाद मतगणना की जाएगी और परिणामों की घोषणा की जाएगी।4
- आज बीना में ब्लॉक अधिवक्ता संघ के चुनाव को लेकर वकीलों में खासा उत्साह देखा गया। मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल के निर्देशन में आयोजित इस चुनाव में कुल 269 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। मतदान सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगा, जिसके बाद शाम 5 बजे से मतगणना शुरू की जाएगी। बीना बार में इस लोकतांत्रिक महापर्व के माध्यम से नए पदाधिकारियों का फैसला किया जाएगा।1
- बीना विधायक निर्मला सप्रे के कथित दल-बदल मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को बड़ा झटका दिया है, उनकी याचिका खारिज कर दी गई है। हाईकोर्ट ने गुरुवार को सुरक्षित रखे गए फैसले को सुनाते हुए यह स्पष्ट किया कि मामला फिलहाल विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित है, इसलिए इस स्तर पर न्यायालय के हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि विधानसभा अध्यक्ष को किसी मामले में निर्णय लेने के लिए निर्देश जारी नहीं किए जा सकते। इसके अतिरिक्त, याचिकाकर्ता द्वारा कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए, जिससे याचिका में कोई तात्कालिकता भी प्रतीत नहीं हुई। यह पूरा मामला वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से जुड़ा है, जब निर्मला सप्रे ने कांग्रेस के टिकट पर बीना विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी, जिसमें उन्होंने भाजपा प्रत्याशी महेश राय को 6,155 वोटों से हराया था। इसके बाद, 5 मई 2024 को वह राहतगढ़ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंच पर दिखाई दीं और 6 मई 2024 को उनके भाजपा में शामिल होने का दावा किया गया। इसी घटना को आधार बनाकर 5 जुलाई 2024 को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के समक्ष निर्मला सप्रे की सदस्यता समाप्त करने की मांग करते हुए एक याचिका दायर की थी। बाद में नवंबर 2024 में इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, जिस पर 9 दिसंबर 2024 को हाईकोर्ट ने निर्मला सप्रे और विधानसभा अध्यक्ष को नोटिस जारी किया था। उमंग सिंघार का आरोप है कि कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित होने के बावजूद निर्मला सप्रे ने भाजपा सरकार का समर्थन किया और भाजपा की शपथ लेने के बाद भी विधानसभा सदस्यता बरकरार रखी, जो दल-बदल कानून का उल्लंघन है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद, अब इस पूरे विवाद पर अंतिम निर्णय विधानसभा अध्यक्ष के स्तर पर ही लिया जाएगा। इस बीच, बीना में कांग्रेस नेता प्रदीप राय ने प्रेस वार्ता कर हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुए कहा है कि कांग्रेस इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी और अपनी न्यायिक लड़ाई जारी रखेगी।1
- आज एक वीडियो सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर वायरल हो रहा है। हालाँकि, यह वीडियो कहाँ का है, इस बात की अभी तक पुष्टि नहीं हो पाई है।1
- उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर राज्य भर में मादक पदार्थों के खिलाफ विशेष अभियान 'ऑपरेशन दहन' चलाया जा रहा है। इसी क्रम में, पुलिस अधीक्षक ललितपुर मोहम्मद मुश्ताक के मार्गदर्शन में जनपद के सभी थाना प्रभारियों को माल मुकदमाती (मादक पदार्थ) के निस्तारण के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। आज इसी अभियान के तहत, थाना जाखलौन पुलिस ने एक गठित समिति की मौजूदगी में और माननीय न्यायालय से नियमानुसार अनुमति प्राप्त कर, थाना जाखलौन पर पंजीकृत कुल 53 अभियोगों से संबंधित मादक पदार्थों का निस्तारण किया। इस कार्रवाई में कुल 210 लीटर अवैध कच्ची शराब और 870 क्वार्टर देशी शराब नष्ट कराई गई। जाखलौन पुलिस द्वारा चलाए गए इस ‘ऑपरेशन दहन’ अभियान के तहत कुल 63,500 रुपये मूल्य के मादक पदार्थों का सफल निस्तारण किया गया है।1
- गुना जिले में अवैध शराब कारोबार और नशा तस्करों के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत फतेहगढ़ थाना पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस अधीक्षक श्रीमती हितिका वासल के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रशांत सिंह सुमन के मार्गदर्शन और एसडीओपी विवेक अस्थाना के पर्यवेक्षण में, फतेहगढ़ थाना प्रभारी उपनिरीक्षक अभिषेक तिवारी और उनकी टीम ने एक कार्रवाई के दौरान एक तस्कर को 70 लीटर अवैध कच्ची शराब के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, 27 जून 2026 को मुखबिर से सूचना मिली थी कि डोबरा गांव का एक व्यक्ति हीरो स्प्लेंडर मोटरसाइकिल पर प्लास्टिक की केनों में अवैध कच्ची शराब भरकर कोहन क्षेत्र की ओर ले जाने वाला है। इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए, पुलिस टीम ने डोबरा रोड स्थित सीएम राइज स्कूल के पास घेराबंदी कर चेकिंग शुरू की। कुछ देर बाद संदिग्ध मोटरसाइकिल आते दिखी, जिसे रोककर तलाशी ली गई। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम अमर सिंह पुत्र दौलतराम भील (27 वर्ष), निवासी ग्राम डोबरा, थाना फतेहगढ़, जिला गुना बताया। मोटरसाइकिल पर लटकी दो प्लास्टिक की केनों की जांच करने पर उनमें हाथ भट्टी से बनी कुल 70 लीटर अवैध कच्ची शराब बरामद हुई। पुलिस ने मौके से शराब और तस्करी में प्रयुक्त मोटरसाइकिल को जब्त कर आरोपी अमर सिंह को गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ फतेहगढ़ थाना में अपराध क्रमांक 140/26 के तहत धारा 34(2) आबकारी अधिनियम में मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है। इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी अभिषेक तिवारी सहित फतेहगढ़ थाना स्टाफ और साइबर सेल की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिसकी वरिष्ठ अधिकारियों ने सराहना की है।1