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बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की हार को लेकर पूछे गए सवाल पर शाहनवाज हुसैन ने कहा कि यह भाजपा की जीती हुई सीट थी और यहां हार होने का उन्हें दुख है बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की हार को लेकर पूछे गए सवाल पर शाहनवाज हुसैन ने कहा कि यह भाजपा की जीती हुई सीट थी और यहां हार होने का उन्हें दुख है
Akshay Raj
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की हार को लेकर पूछे गए सवाल पर शाहनवाज हुसैन ने कहा कि यह भाजपा की जीती हुई सीट थी और यहां हार होने का उन्हें दुख है बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की हार को लेकर पूछे गए सवाल पर शाहनवाज हुसैन ने कहा कि यह भाजपा की जीती हुई सीट थी और यहां हार होने का उन्हें दुख है
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- विशेष ड्रोन से अंतरराष्ट्रीय सीमा की निगरानी कर रही फुलकाहा एसएसबी। सीमा पर संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर, प्रशिक्षित जवान ड्रोन के जरिए कर रहे निगरानी। रंजीत ठाकुर, नरपतगंज। भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के लिए सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की फुलकाहा इकाई ने विशेष ड्रोन के माध्यम से सीमा क्षेत्र की निगरानी तेज कर दी है। अत्याधुनिक तकनीक से लैस ड्रोन सीमा के संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी कर रहे हैं, जिससे संदिग्ध गतिविधियों पर समय रहते नजर रखी जा सके। एसएसबी के प्रशिक्षित जवान ड्रोन का संचालन कर सीमा क्षेत्र में होने वाली प्रत्येक संदिग्ध गतिविधि पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। ड्रोन से प्राप्त तस्वीरों और वीडियो को सुरक्षित रूप से रिकॉर्ड किया जा रहा है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर संबंधित गतिविधियों की जांच और कार्रवाई में इसका उपयोग किया जा सके। आई समवाय फुलकाहा के प्रभारी सहायक सेना नायक राणा कुमार ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा एसएसबी की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। सीमा क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पारंपरिक गश्ती के साथ आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। विशेष ड्रोन की मदद से ऐसे इलाकों पर भी नजर रखी जा रही है, जहां सामान्य गश्ती के दौरान निगरानी अपेक्षाकृत चुनौतीपूर्ण होती है। उन्होंने बताया कि सीमा पर तस्करी, अवैध आवाजाही और अन्य संदिग्ध गतिविधियों को रोकने के लिए जवान लगातार सतर्क हैं। ड्रोन निगरानी से सीमा क्षेत्र की गतिविधियों की वास्तविक समय में जानकारी प्राप्त करने में मदद मिल रही है। इसके साथ ही एसएसबी जवानों की गश्ती और निगरानी अभियान भी लगातार जारी है। एसएसबी की इस तकनीकी पहल से भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होने की उम्मीद है। सीमा पर आधुनिक निगरानी तकनीक के इस्तेमाल से सुरक्षा बलों को संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर त्वरित कार्रवाई करने में महत्वपूर्ण मदद मिल रही है।1
- अस्सलाम अलैकुम वरहमतुल्लाहि वबरकातुहु 🤲आमीन 👍❤️👇 तुम से जूरकर बस इतना जाना है फोलो मी4
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- अर्राबाड़ी फुटबॉल मैदान में धूमधाम से मना विश्व आदिवासी दिवस, संस्कृति संरक्षण के साथ शिक्षा और एकजुटता पर जोर पोठिया प्रखंड अंतर्गत रायपुर पंचायत के अर्राबाड़ी फुटबॉल मैदान में रविवार को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आदिवासी समाज की ओर से भव्य समारोह का आयोजन किया गया। आदिवासी युवा संगठन के अध्यक्ष तासु मरांडी की अगुवाई में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक ढोल-नगाड़ों और आदिवासी रीति-रिवाजों के साथ हुआ। समारोह में बड़ी संख्या में समाज के लोग, युवा, महिलाएं और बच्चे शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज की भाषा, संस्कृति, परंपरा और पहचान को संरक्षित रखने के साथ-साथ जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया गया। मुख्य अतिथि के रूप में रायपुर पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि धीरज कुमार दास एवं पूर्व पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि देव कुमार दास मौजूद रहे। अतिथियों ने समाज की एकता और सामाजिक विकास के लिए मिलकर काम करने पर जोर दिया। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे लोगों ने अपनी समृद्ध संस्कृति की झलक प्रस्तुत की। ढोल-नगाड़ों की धुन पर पारंपरिक गीत और नृत्य ने पूरे वातावरण को उत्सवी बना दिया। बच्चों और युवाओं में भी कार्यक्रम को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अधिकार, पहचान और अस्तित्व से जुड़े मुद्दों पर चिंतन करने का अवसर भी है। आदिवासी समाज की जीवनशैली प्रकृति से गहराई से जुड़ी रही है। जल, जंगल और जमीन उनके जीवन, संस्कृति और आजीविका का आधार हैं, इसलिए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ समुदाय के अधिकारों की सुरक्षा भी जरूरी है। वक्ताओं ने बदलते समय में आदिवासी भाषा, लोकगीत, लोकनृत्य, रीति-रिवाज और पारंपरिक ज्ञान को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही कहा कि अपनी संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखते हुए समाज को आधुनिक शिक्षा एवं तकनीकी ज्ञान के क्षेत्र में भी आगे बढ़ना होगा। समारोह में शिक्षा को समाज के विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया गया। अभिभावकों से बच्चों को नियमित विद्यालय भेजने और उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने की अपील की गई। युवाओं से शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों को समझते हुए समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम में समाज की एकजुटता पर भी विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास के लिए समाज का संगठित होना जरूरी है। आपसी मतभेदों को भुलाकर सामूहिक हित में काम करने से ही समाज अपनी समस्याओं को मजबूती से सामने रख सकता है। आदिवासी युवा संगठन के अध्यक्ष तासु मरांडी ने कहा कि समाज की तरक्की के लिए युवाओं को आगे आना होगा। शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जागरूकता के साथ अपनी संस्कृति और परंपराओं को बचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संगठन की ओर से आगे भी समाज को जागरूक करने और युवाओं को शिक्षा के प्रति प्रेरित करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। समारोह के अंत में समाज के लोगों ने आदिवासी संस्कृति एवं परंपराओं को अक्षुण्ण रखने, जल-जंगल-जमीन के अधिकारों की रक्षा करने तथा शिक्षा और एकजुटता के माध्यम से समाज को मजबूत बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम ने उत्सव के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक संरक्षण का संदेश दिया।2