सवाई माधोपुर के चौथ का बरवाड़ा क्षेत्र स्थित ईसरदा बांध के दोनों ओर सड़क निर्माण का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इस परियोजना के सफल समापन से क्षेत्र के ग्रामीणों और बांध से जुड़े मार्गों पर आवागमन करने वाले लोगों को अब काफी सुविधा मिलने लगी है। संबंधित विभाग ने इस कार्य को गति देते हुए दोनों तरफ की सड़क का निर्माण पूरा कर लिया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस सड़क के बनने से आवागमन सुगम हुआ है और उन्हें बारिश के मौसम में होने वाली परेशानियों से भी राहत मिलेगी। हालांकि, वर्तमान में सड़क से जुड़े कुछ शेष निर्माण कार्य और फिनिशिंग का काम अभी जारी है, जिसे विभाग द्वारा जल्द ही पूरा किए जाने का दावा किया जा रहा है। ग्रामीणों ने इस सड़क निर्माण कार्य पर संतोष व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई है कि शेष बचे हुए कार्य भी शीघ्र पूरे होंगे। उनका मानना है कि इससे क्षेत्र के विकास को और अधिक मजबूती मिलेगी तथा आवागमन की सुविधाएं भी पहले से बेहतर हो पाएंगी।
सवाई माधोपुर के चौथ का बरवाड़ा क्षेत्र स्थित ईसरदा बांध के दोनों ओर सड़क निर्माण का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इस परियोजना के सफल समापन से क्षेत्र के ग्रामीणों और बांध से जुड़े मार्गों पर आवागमन करने वाले लोगों को अब काफी सुविधा मिलने लगी है। संबंधित विभाग ने इस कार्य को गति देते हुए दोनों तरफ की सड़क का निर्माण पूरा कर लिया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस सड़क के बनने से आवागमन सुगम हुआ है और उन्हें बारिश के मौसम में होने वाली परेशानियों से भी राहत मिलेगी। हालांकि, वर्तमान में सड़क से जुड़े कुछ शेष निर्माण कार्य और फिनिशिंग का काम अभी जारी है, जिसे विभाग द्वारा जल्द ही पूरा किए जाने का दावा किया जा रहा है। ग्रामीणों ने इस सड़क निर्माण कार्य पर संतोष व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई है कि शेष बचे हुए कार्य भी शीघ्र पूरे होंगे। उनका मानना है कि इससे क्षेत्र के विकास को और अधिक मजबूती मिलेगी तथा आवागमन की सुविधाएं भी पहले से बेहतर हो पाएंगी।
- जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम1
- यह वीडियो एक कार्यशील बायोगैस प्लांट मॉडल का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है, जहाँ गाय के गोबर को गैस और जैविक खाद में परिवर्तित किया जाता है। इस पूरी प्रणाली को चरण-दर-चरण समझाया गया है, जिसकी शुरुआत स्लरी की तैयारी से होती है, जिसके बाद पाचन प्रक्रिया, गैस उत्पादन, और गुब्बारे प्रणाली का उपयोग करके गैस के भंडारण को दिखाया गया है। उत्पादित कच्ची गैस को फिल्टर के माध्यम से स्वच्छ गैस में बदला जाता है, और फिर इसके आउटपुट उपयोग को स्पष्ट किया जाता है। यह प्लांट स्लरी से वर्मिकॉम्पॉस्ट और वर्मीवॉश के उत्पादन को भी संभव बनाता है, जिससे यह अपशिष्ट से धन कमाने का एक व्यावहारिक प्रतिमान बन जाता है। यह संपूर्ण सेटअप ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे पैमाने के व्यावसायिक विचारों के लिए बेहद उपयुक्त है, क्योंकि यह नवीकरणीय ऊर्जा और जैविक खेती के सिद्धांतों पर आधारित है।1
- उनियारा उपखंड मुख्यालय स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में शांतिनाथ मंडल विधान का आयोजन बड़े ही हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान जैन धर्मावलंबियों ने सामूहिक रूप से जिनेंद्र देव की पूजा-अर्चना करते हुए विश्व शांति की कामना की। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकाल जिनेंद्र देव के शांतिधारा अभिषेक के साथ हुई, जिसके बाद अष्ट द्रव्यों से सामूहिक पूजन किया गया। इस दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। विधान में चार वलयों में क्रमशः 8, 16, 32 और 64 अर्घ्य समर्पित किए गए, जिसमें कुल 120 श्रीफल जिनेंद्र देव के चरणों में भेंट किए गए। मंदिर समिति के कोषाध्यक्ष संदीप कुमार जैन और सचिव अनिल जैन ने बताया कि उनियारा निवासी श्रेष्ठी कपूर चंद जैन, अशोक जैन, राजेंद्र जैन, दिनेश जैन, चंद्रमोहन जैन, मनीष जैन, संजय जैन के साथ-साथ शांति देवी, सुशीला जैन और मंजू जैन (खूटवाला परिवार) ने मुख्य विधानकर्ता के रूप में पूजा संपन्न की। इस सफल आयोजन पर मंदिर समिति के अध्यक्ष राकेश जैन, संरक्षक पारस जैन, उपाध्यक्ष महेंद्र जैन और अमोलक चंद जैन ने पुण्यार्जक खूटवाला परिवार का जैन रीति-रिवाजों के अनुसार भव्य स्वागत किया। इस स्वागत में केसर का तिलक लगाना, पगड़ी पहनाना और माला पहनाना शामिल था। इस धार्मिक अवसर पर ककोड जैन महिला मंडल की सदस्य रत्नमाला जैन, मंजू जैन, कमलेश जैन, रिंकू जैन, बादाम देवी सहित बड़ी संख्या में समाज के पुरुष और महिला श्रद्धालु मौजूद रहे।2
- कोटा-दौसा मेगा हाईवे पर आजन्दा से पापड़ी रेलवे ओवरब्रिज तक का लगभग 20 किलोमीटर लंबा मार्ग गहरे गड्ढों से पूरी तरह छलनी हो चुका है, जिससे सड़क पर दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है। बरसात के दौरान इन गड्ढों में पानी भर जाने से स्थिति और भी खराब हो जाती है, जिसके चलते वाहन चालक हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर यात्रा करने को मजबूर हैं। सोमवार रात को भी घाट का बराणा में रघुनाथ मंदिर के समीप गड्ढों से बचने के प्रयास में एक कार और बाइक में टक्कर हो गई, हालांकि दोनों वाहनों की गति कम होने के कारण किसी को ज्यादा गंभीर चोटें नहीं आईं। यह उल्लेखनीय है कि करीब एक वर्ष पहले भी घाट का बराणा स्थित रघुनाथ मंदिर के पास इन्हीं जानलेवा गड्ढों के कारण एक यात्री बस बड़े हादसे का शिकार हो गई थी, जिसमें चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस भयावह घटना के बावजूद, सड़क की स्थायी मरम्मत न होने से स्थानीय ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति भारी रोष व्याप्त है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल इस क्षतिग्रस्त और खतरनाक मार्ग की मरम्मत कराने की पुरजोर मांग की है, क्योंकि चार मौतों के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई होती नहीं दिख रही है।4
- जिला कलेक्टर कानाराम के निर्देश पर चलाए जा रहे 'रास्ता खोलो अभियान' के तहत चौथ का बरवाड़ा में अब तक 72 जगहों से अतिक्रमण हटाया जा चुका है। यह अभियान 1 मई को शुरू हुआ था और 30 जून तक जारी रहेगा। इस अभियान के अंतर्गत राजस्व विभाग की टीम द्वारा लगातार सालों से हो रहे अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिल रही है।1
- पूरे माहौल में लगातार 'जय श्री राम' के नारे गूँजते रहे। यह उद्घोष बार-बार दोहराया गया।1
- सवाई माधोपुर जिले में जिला कलक्टर काना राम की पहल पर चलाए जा रहे "रास्ता खोलो अभियान" ने ग्रामीण क्षेत्रों में सुशासन और त्वरित राहत की नई मिसाल कायम की है। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की प्रेरणा से यह अभियान, वर्षों से बंद पड़े रास्तों को खोलकर हजारों किसानों, ग्रामीणों, पशुपालकों और विद्यार्थियों के जीवन को आसान बना रहा है। यह केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि ग्रामीणों को उनके अधिकार दिलाने और सामाजिक सौहार्द बढ़ाने का एक कल्याणकारी प्रयास बन गया है। लंबे समय से गांवों, ढाणियों और खेतों तक पहुंचने वाले रास्ते अतिक्रमण या विवादों के कारण अवरुद्ध थे, जिससे कृषि कार्यों, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में कठिनाई होती थी। जिला प्रशासन ने 1 मई से 8 जून 2026 तक (प्रत्येक बुधवार और शुक्रवार) चलाए गए विशेष अभियान के दौरान संवाद, सहमति और समझाइश के आधार पर इन समस्याओं का समाधान किया है। इस अवधि में 1,914 चिन्हित प्रकरणों में से कुल 830 रास्ते खुलवाए जा चुके हैं, जिससे हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिला है। अभियान की सफलता जिला कलक्टर काना राम की नियमित समीक्षा और प्रभावी मॉनिटरिंग का परिणाम है, जिसमें उपखंड और तहसील स्तर तक अधिकारियों को स्पष्ट लक्ष्य दिए गए हैं। इस अभियान के तहत बौंली तहसील में सर्वाधिक 158 रास्ते खोले गए हैं, जबकि खण्डार में 97, मलारना डूंगर में 95, बामनवास में 87, चौथ का बरवाड़ा में 72, मित्रपुरा में 71, बरनाला में 64, गंगापुर सिटी में 58, वजीरपुर में 50, सवाई माधोपुर तहसील में 49 और तलावड़ा में 29 रास्ते खुलवाकर ग्रामीणों को राहत प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त, जिला प्रशासन राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के निस्तारण पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है। राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम की धारा 251-ए के अंतर्गत लंबित 25 प्रकरणों का निस्तारण किया गया है और शेष मामलों में सुनवाई प्रक्रिया को गति दी गई है। रास्ते खुलने से किसानों को कृषि यंत्र और उपज पहुंचाने में सुविधा मिली है, ग्रामीणों को आवागमन के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ रही है, विद्यार्थियों का स्कूल-कॉलेज तक पहुंचना आसान हुआ है, और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में भी सुधार हुआ है। इन बाधाओं के दूर होने से ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक एवं सामाजिक गतिविधियों को नई गति मिली है। अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि अधिकांश विवादों का समाधान आपसी सहमति और संवाद से हुआ, जिससे वर्षों पुराने विवाद समाप्त हुए और सामाजिक सौहार्द व आपसी विश्वास मजबूत हुआ। जिला कलक्टर ने बताया कि लगभग 2 हजार चिन्हित प्रकरणों में से लगभग 900 रास्ते खुलवाए जा चुके हैं और उन्होंने जिलेवासियों से 30 जून तक अभियान को सफल बनाने में सहयोग की अपील की।1
- सवाई माधोपुर के सारसोप गांव में ब्राह्मण समाज द्वारा श्मशान भूमि पर मोक्ष धाम का निर्माण कार्य करवाया जा रहा है। यह पहल ग्रामीणों को लंबे समय से बारिश के मौसम में अंतिम संस्कार के दौरान होने वाली भारी परेशानियों से निजात दिलाने के उद्देश्य से की गई है। दरअसल, बरसात के दिनों में श्मशान भूमि पर पानी भर जाने और छाया की उचित व्यवस्था न होने के कारण लोगों को अंतिम संस्कार व संबंधित धार्मिक क्रियाओं में अत्यधिक कठिनाई का सामना करना पड़ता था। इन्हीं गंभीर समस्याओं को ध्यान में रखते हुए, ब्राह्मण समाज ने सामूहिक सहयोग से इस मोक्ष धाम के निर्माण का कार्य शुरू किया है। इस निर्माण के पूरा होने के बाद, ग्रामीणों और परिजनों को अंतिम संस्कार के साथ-साथ अन्य धार्मिक क्रियाओं के दौरान बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। ग्रामीणों ने बताया कि इस मोक्ष धाम में आवश्यक सुविधाओं का विकास होने से क्षेत्र के लोगों को पूरे वर्ष लाभ मिलेगा। ग्रामीणों ने ब्राह्मण समाज के पदाधिकारियों और भामाशाहों के इस जनहितकारी कार्य के लिए आभार व्यक्त किया है, और इसे समाज सेवा तथा जनकल्याण का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया है।1