*"गांव देवटोला में महुआ के दारू- के दुकान,अत्याचार और धमकी सामाजिक कार्यकर्ताओं नेताओं की दबंगई से कांप उठा देवटोला, पीड़ितों ने गृह विभाग श्री सम्राट चौधरी (उप मुख्यमंत्री बिहार सरकार जी से लगाई इंसाफ की गुहार"* पटना। बिहार के भोजपुर जिले के जगदीशपुर प्रखंड के देवटोला गांव से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। गांव के लोगों ने गृह विभाग श्री सम्राट चौधरी (उप मुख्यमंत्री बिहार सरकार जी एवं पुलिस अधीक्षक भोजपुर को पत्र लिखकर गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। पीड़ितों का आरोप है कि गांव देवटोला में महुआ शराब में शामिल कुछ स्थानीय पदाधिकारी खुलेआम शराब दारू के दुकान और सामाजिक कार्यकर्ताओं को फ्री में दारू पिला कर अत्याचार, छेड़छाड़ और धमकी जैसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। देवटोला निवासी और DPO प्रभारी भूली कुमार यादव के नेतृत्व में पीड़ितों ने जो शिकायत भेजी है, उसमें बताया गया है कि सामाजिक कार्यकर्ताओं से जुड़े एक परिवार के सदस्य पार्टी में प्रभाव का गलत फायदा उठा रहे हैं। दिनदहाड़े घरों में घुसकर महिलाओं से दुर्व्यवहार किया जा रहा है, चेन झपटमारी और छेड़छाड़ की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। शराब के दुकान और सामाजिक कार्यकर्ताओं को फ्री में पिलाने के बाद उत्पात मचाना इनका रोज का काम हो गया है। पीड़ितों का कहना है कि जब इन अपराधों के खिलाफ आवाज उठाई जाती है, तो धमकियां दी जाती हैं—"एफआईआर कराओगे तो गोली मार देंगे या फांसी दे देंगे।" इतना ही नहीं, ये लोग अपने राजनैतिक संपर्कों का हवाला देकर पुलिस और प्रशासन पर भी दबाव बनाते हैं ताकि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न हो सके। देवटोला गांव में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि दिव्यांग बच्चे और बुजुर्ग भी सुरक्षित नहीं हैं। गांव की महिलाएं डर के साए में जी रही हैं और बच्चियां घर से बाहर निकलने में हिचकिचा रही हैं। ग्रामीणों ने पत्र में यह भी लिखा है कि यह सब कुछ राजद सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय विधायक की जानकारी में होते हुए भी अनदेखा किया जा रहा है। गांववासियों का कहना है कि राजद जैसी बड़ी पार्टी को ऐसे लोगों से तत्काल किनारा करना चाहिए जो पार्टी के नाम पर अपराध कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि इस परिवार को तत्काल पार्टी से बाहर किया जाए और इनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, उन्होंने प्रशासन से भी अपील की है कि देवटोला गांव और आसपास के क्षेत्र में पुलिस गश्त बढ़ाई जाए, महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए जाएं, ताकि गांव में कानून का राज स्थापित हो सके। पीड़ितों का यह भी कहना है कि अगर समय रहते उनकी फरियाद नहीं सुनी गई, तो वे बिहार सरकार और पार्टी नेतृत्व से विश्वास खो बैठेंगे। उन्होंने यह चेतावनी भी दी है कि अगर उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सामूहिक रूप से प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। अब सबकी निगाहें राजद अध्यक्ष जगदानंद सिंह और लालू यादव पर टिकी हैं—क्या वे पार्टी की छवि बचाने के लिए ऐसे आरोपित पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करेंगे, या फिर यह मामला भी राजनीतिक रसूख के आगे दबा दिया जाएगा? ग्रामीणों की पीड़ा, उनका डर, और उनका टूटता हुआ भरोसा—ये सब मिलकर एक बड़ा सवाल खड़ा करते हैं कि क्या राजनीतिक दलों को अपने संगठन में ऐसे लोगों को जगह देनी चाहिए, जो जनसेवा के बजाय आतंक और अत्याचार ,,
*"गांव देवटोला में महुआ के दारू- के दुकान,अत्याचार और धमकी सामाजिक कार्यकर्ताओं नेताओं की दबंगई से कांप उठा देवटोला, पीड़ितों ने गृह विभाग श्री सम्राट चौधरी (उप मुख्यमंत्री बिहार सरकार जी से लगाई इंसाफ की गुहार"* पटना। बिहार के भोजपुर जिले के जगदीशपुर प्रखंड के देवटोला गांव से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। गांव के लोगों ने गृह विभाग श्री सम्राट चौधरी (उप मुख्यमंत्री बिहार सरकार जी एवं पुलिस अधीक्षक भोजपुर को पत्र लिखकर गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। पीड़ितों का आरोप है कि गांव देवटोला में महुआ शराब में शामिल कुछ स्थानीय पदाधिकारी खुलेआम शराब दारू के दुकान और सामाजिक कार्यकर्ताओं को फ्री में दारू पिला कर अत्याचार, छेड़छाड़ और धमकी जैसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। देवटोला निवासी और DPO प्रभारी भूली कुमार यादव के नेतृत्व में पीड़ितों ने जो शिकायत भेजी है, उसमें बताया गया है कि सामाजिक कार्यकर्ताओं से जुड़े एक परिवार के सदस्य पार्टी में प्रभाव का गलत फायदा उठा रहे हैं। दिनदहाड़े घरों में घुसकर महिलाओं से दुर्व्यवहार किया जा रहा है, चेन झपटमारी और छेड़छाड़ की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। शराब के दुकान और सामाजिक कार्यकर्ताओं को फ्री में पिलाने के बाद उत्पात मचाना इनका रोज का काम हो गया है। पीड़ितों का कहना है कि जब इन अपराधों के खिलाफ आवाज उठाई जाती है, तो धमकियां दी जाती हैं—"एफआईआर कराओगे तो गोली मार देंगे या फांसी दे देंगे।" इतना ही नहीं, ये लोग अपने राजनैतिक संपर्कों का हवाला देकर पुलिस और प्रशासन पर भी दबाव बनाते हैं ताकि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न हो सके। देवटोला गांव में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि दिव्यांग बच्चे और बुजुर्ग भी सुरक्षित नहीं हैं। गांव की महिलाएं डर के साए में जी रही हैं और बच्चियां घर से बाहर निकलने में हिचकिचा रही हैं। ग्रामीणों ने पत्र में यह भी लिखा है कि यह सब कुछ राजद सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय विधायक की जानकारी में होते हुए भी अनदेखा किया जा रहा है। गांववासियों का कहना है कि राजद जैसी बड़ी पार्टी को ऐसे लोगों से तत्काल किनारा करना चाहिए जो पार्टी के नाम पर अपराध कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि इस परिवार को तत्काल पार्टी से बाहर किया जाए और इनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, उन्होंने प्रशासन से भी अपील की है कि देवटोला गांव और आसपास के क्षेत्र में पुलिस गश्त बढ़ाई जाए, महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए जाएं, ताकि गांव में कानून का राज स्थापित हो सके। पीड़ितों का यह भी कहना है कि अगर समय रहते उनकी फरियाद नहीं सुनी गई, तो वे बिहार सरकार और पार्टी नेतृत्व से विश्वास खो बैठेंगे। उन्होंने यह चेतावनी भी दी है कि अगर उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सामूहिक रूप से प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। अब सबकी निगाहें राजद अध्यक्ष जगदानंद सिंह और लालू यादव पर टिकी हैं—क्या वे पार्टी की छवि बचाने के लिए ऐसे आरोपित पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करेंगे, या फिर यह मामला भी राजनीतिक रसूख के आगे दबा दिया जाएगा? ग्रामीणों की पीड़ा, उनका डर, और उनका टूटता हुआ भरोसा—ये सब मिलकर एक बड़ा सवाल खड़ा करते हैं कि क्या राजनीतिक दलों को अपने संगठन में ऐसे लोगों को जगह देनी चाहिए, जो जनसेवा के बजाय आतंक और अत्याचार ,,
- Post by Chandan chook kaup1
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- Post by Jitendra Kumar1
- पानी और की दोस्ती कैसे होगया मतलब बीजेपी और ओबैसी की दोस्ती ये असम्भव मेल कैसे सम्भव हुवा आइये जानते है vip के प्रवक्ता अरुण मंडल जी से1
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