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- होली मिलन में गूंजे किसान एकता के स्वर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) का पनवाड़ी में आयोजन दैनिक रिपब्लिक रैनैसां ब्यूरो हरी सिंह वर्मा पनवाड़ी (महोबा)। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) द्वारा रविवार को पनवाड़ी ब्लॉक महासचिव नीरज शर्मा के प्रतिष्ठान पर होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। रंगों के इस पावन अवसर पर पदाधिकारियों एवं किसानों ने एक-दूसरे को तिलक लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं और संगठनात्मक एकता को मजबूत करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों की विभिन्न समस्याओं और उनके समाधान को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि संगठन किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए सदैव प्रतिबद्ध है और क्षेत्रीय समस्याओं को प्रशासन के समक्ष मजबूती से उठाया जाएगा। किसान हित सर्वोपरि है और इसके लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रहेगा। समारोह में जिला उपाध्यक्ष अशोक राजपूत, डॉ. विपिन मिश्रा, जिला प्रवक्ता महेंद्र मिश्रा, जिला मीडिया प्रभारी वेद प्रकाश नायक, जिला सचिव बृजेंद्र सोनकिया, तहसील अध्यक्ष मन बहादुर राजपूत, तहसील उपाध्यक्ष रविंद्र राजपूत, ब्लॉक अध्यक्ष ओम प्रकाश मिश्रा, ब्लॉक मीडिया प्रभारी शिवनंदन अग्निहोत्री, तहसील कोषाध्यक्ष (कुलपहाड़) शिवनारायण राजपूत, तहसील सचिव श्याम सुंदर, युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष अमन शर्मा, महिला मोर्चा ब्लॉक अध्यक्ष भारती राजपूत, ब्लॉक सचिव सुनीता अग्निहोत्री, ब्लॉक महासचिव नीरज शर्मा सहित अनेक पदाधिकारी व किसान मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन किसान एकता और संगठन की मजबूती के नारों के साथ हुआ। इस अवसर पर सहभोज का भी आयोजन किया गया।1
- #Apkiawajdigital राजसत्ता पोस्ट का वायरल वीडियो तेहरान/दुबई: ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु की खबरों के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस वीडियो में एक ईरानी युवती, जो बिना हिजाब के नजर आ रही है, सत्ता के सबसे शक्तिशाली प्रतीक—सर्वोच्च नेता खामेनेई—की जलती हुई तस्वीर की लौ से बेखौफ होकर अपनी सिगरेट जलाती दिख रही है। विद्रोह का नया चेहरा: यह दृश्य केवल एक व्यक्तिगत जश्न नहीं, बल्कि दशकों से चले आ रहे कड़े धार्मिक और राजनीतिक अंकुश के खिलाफ एक "शक्तिशाली विद्रोह" माना जा रहा है। वीडियो में लड़की के चेहरे पर कोई डर नहीं, बल्कि एक अजीब सी शांति और जीत की मुस्कान दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तस्वीर आने वाले समय में ईरानी महिलाओं के संघर्ष और वहां बदलती हवाओं का सबसे बड़ा 'आइकन' बन सकती है। जश्न और आक्रोश का माहौल: ईरान के कई शहरों, विशेषकर तेहरान और मशहद से ऐसी खबरें आ रही हैं जहाँ लोग सड़कों पर मिठाइयां बांट रहे हैं और आतिशबाजी कर रहे हैं। इस युवती का वीडियो वायरल होने के बाद, दुनिया भर में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इसे 'ईरान की नई सुबह' करार दिया है। हालांकि, ईरान की आंतरिक सुरक्षा एजेंसियां इस तरह के कृत्यों को 'अपराध' मान रही हैं और इंटरनेट पर नियंत्रण कड़ा कर दिया गया है। सांकेतिक महत्व: ईरान के इतिहास में सर्वोच्च नेता की तस्वीर जलाना या उसका अपमान करना मौत की सजा तक का कारण बन सकता था। ऐसे में उस तस्वीर की आग से सिगरेट जलाना यह संदेश देता है कि अब जनता के मन से सत्ता का भय पूरी तरह समाप्त हो चुका है।1
- छतरपुर में आयोजित संकल्प यात्रा कार्यक्रम के दौरान मंच पर बैठे आजाद समाज पार्टी (मध्य प्रदेश) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील असते ने भाषण के समय जूता दिखाया, जिसके बाद कार्यक्रम में राजनीतिक चर्चा तेज हो गई। इस वीडियो में देखें: • पूरा घटनाक्रम • मंच से दिया गया बयान • जूता दिखाने का पल • कार्यक्रम का माहौल यह वीडियो मौके से रिकॉर्ड किया गया है। 📍 स्थान: छतरपुर 🎥 रिपोर्ट: Ankit Speaks News आप इस घटना को कैसे देखते हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें।1
- Post by Raj Trivedi1
- तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि “28 साल के ढोंगी लड़के के यहां चंदा-मित्र लेने प्रशासन के लोग लगे रहते हैं।” उनका यह बयान सभा स्थल पर मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। बताया जा रहा है कि यह बयान दामोदर यादव की सभा के दौरान दिया गया, जिसके बाद कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में मंच से प्रशासन और कथित व्यक्तियों पर आरोप लगाए जाते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, इस बयान को लेकर प्रशासन या संबंधित पक्ष की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।1
- आरक्षण आर्थिक आधार पर पर बांट दो जाति अल्पजाति में बना विभाजन कर दो।।1
- ब्राह्मण महासभा कुलपहाड द्वारा हुआ शपथ ग्रहण समारोह का भव्य आयोजन1
- #Apkiawajdigital कराची, 2 मार्च 2026: ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की अमेरिका और इजरायल द्वारा कथित हत्या के विरोध में कल रविवार (1 मार्च) को पूरा पाकिस्तान सुलग उठा। सबसे भीषण हिंसा कराची में देखने को मिली, जहाँ प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास (Consulate) की बाहरी सुरक्षा दीवार तोड़कर परिसर में घुसने की कोशिश की। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में अमेरिकी मरीन सुरक्षा गार्डों को भीड़ को रोकने के लिए सीधी गोलीबारी करते देखा गया है। घटना का विवरण: प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय अस्पतालों के अनुसार, कराची में अब तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें से अधिकांश को गोलियां लगी हैं। प्रदर्शनकारियों ने दूतावास के रिसेप्शन एरिया और पास की पुलिस चौकी में आग लगा दी। केवल कराची ही नहीं, बल्कि उत्तरी क्षेत्र के गिलगित-बल्तिस्तान में भी संयुक्त राष्ट्र (UN) के कार्यालयों पर हमला हुआ, जहाँ 11 अन्य लोगों के मारे जाने की खबर है। देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों में अब तक कुल 21 से 22 लोगों की जान जा चुकी है और 120 से अधिक घायल हैं। वैश्विक तनाव और सुरक्षा: अमेरिकी विदेश विभाग ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है और अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। इस्लामाबाद और लाहौर में भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और प्रमुख सड़कों को सील कर दिया गया है। पाकिस्तान सरकार ने शांति की अपील करते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। विशेष टिप्पणी: सोशल मीडिया पर 'अमेरिकी मरीन' की गोलीबारी के जो वीडियो सामने आए हैं, वे इस समय पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बने हुए हैं और पाकिस्तान के राजनयिक संबंधों में नया तनाव पैदा कर रहे हैं।1
- द्वारा कथित रूप से “मनुवादियों” को जूता दिखाकर संबोधित करने का मामला सामने आया है। घटना के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है। जानकारों का कहना है कि भारत का संविधान, जिसकी रचना में डॉ. भीमराव अंबेडकर की अहम भूमिका रही, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तो देता है, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर मर्यादा और शिष्टाचार बनाए रखने की भी अपेक्षा करता है। संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिकों को बोलने की आज़ादी देता है, परंतु यह स्वतंत्रता कानून व्यवस्था और सार्वजनिक शांति की सीमाओं के भीतर है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराने के कई संवैधानिक तरीके हैं, लेकिन जूता दिखाकर संबोधन करना लोकतांत्रिक संवाद की गरिमा के अनुरूप नहीं माना जाता। इस तरह की घटनाएं समाज में वैचारिक टकराव को और बढ़ा सकती हैं। वहीं सभा के दौरान कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि वास्तव में समाजहित प्राथमिकता है, तो भ्रष्टाचार, विकास, महंगाई और रोजगार जैसे ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा क्यों नहीं हो रही। ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन और स्थानीय समस्याओं पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई गई। घटना के बाद आमजन में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। अब देखना होगा कि इस मामले में संबंधित पक्ष की ओर से कोई स्पष्टीकरण सामने आता है या नहीं।1