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*+नव दृष्टि नेत्रालय एवं फेको सेंटर +* आपके शहर कस्बा हैदरगढ़ में प्रत्येक रविवार 10:00 बजे से 5:00 तक उपलब्ध सुविधाएं अत्याधुनिक मशीनों द्वारा आंखों की जांच आंखों के सभी बीमारियों का परामर्श उपचार एवं ऑपरेशन डायबिटिक रेटीनापैथी एवं अन्य रेटिना परदे के अन्य बीमारियों का सफल उपचार मोतियाबिंद ऑपरेशन मात्र ₹5000 से शुरू आंखों के चश्मे भी उचित रेट पर उपलब्ध आंखों के सभी दवाइयां पर 15% की छूट आयुष्मान कार्ड से भी मोतियाबिंद ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध आपके क्षेत्र में लगातार 3 वर्षों से काम कर रहे डॉक्टर विशाल जायसवाल पता:: गायत्री शक्तिपीठ मंदिर वाली गली वन विभाग के सामने रनापुर हैदरगढ़ बाराबंकी। 9793854240 पर भी संपर्क कर सकते हैं

5 hrs ago
user_CHIEF BUREAU Om Prakash Srivastava
CHIEF BUREAU Om Prakash Srivastava
हैदरगढ़, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश•
5 hrs ago
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*+नव दृष्टि नेत्रालय एवं फेको सेंटर +* आपके शहर कस्बा हैदरगढ़ में प्रत्येक रविवार 10:00 बजे से 5:00 तक उपलब्ध सुविधाएं अत्याधुनिक मशीनों द्वारा आंखों की जांच आंखों के सभी बीमारियों का परामर्श उपचार एवं ऑपरेशन डायबिटिक रेटीनापैथी एवं अन्य रेटिना परदे के अन्य बीमारियों का सफल उपचार मोतियाबिंद ऑपरेशन मात्र ₹5000 से शुरू आंखों के चश्मे भी उचित रेट पर उपलब्ध आंखों के सभी दवाइयां पर 15% की छूट आयुष्मान कार्ड से भी मोतियाबिंद ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध आपके क्षेत्र में लगातार 3 वर्षों से काम कर रहे डॉक्टर विशाल जायसवाल पता:: गायत्री शक्तिपीठ मंदिर वाली गली वन विभाग के सामने रनापुर हैदरगढ़ बाराबंकी। 9793854240 पर भी संपर्क कर सकते हैं

More news from Lucknow and nearby areas
  • 26 जनवरी की उन्हें बधाई जिसने जन्म दिया है मेरे भाई लाइक शेयर कमेंट फॉलो
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    26 जनवरी की उन्हें बधाई जिसने जन्म दिया है मेरे भाई लाइक शेयर कमेंट फॉलो
    user_भारतीय दिव्यांग यूनियन सदस्य सुभाष चंद्र जिला लखीमपुर खीरी
    भारतीय दिव्यांग यूनियन सदस्य सुभाष चंद्र जिला लखीमपुर खीरी
    Mohanlalganj, Lucknow•
    6 hrs ago
  • गणतंत्र दिवस की सुरक्षा को लेकर पुलिस अलर्ट मोड में, फ्लैग मार्च और सघन चेकिंग अभियान रायबरेली। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जिला पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए अलर्ट मोड में आ गई है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर जनपद के सभी थानों की पुलिस ने फ्लैग मार्च निकाला, जिसमें संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी गई।अपर पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार सिन्हा के नेतृत्व में शहर के प्रमुख चौराहों जैसे सुपरमार्केट, घंटाघर, सराफा बाजार और रेलवे स्टेशन पर सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। फ्लैग मार्च के दौरान बाइक से तेज रफ्तार में फर्राटा भर रहे कई संदिग्ध युवकों की तलाशी ली गई। रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के बैगों और सामान की गहन जांच की गई, ताकि किसी भी संभावित खतरे को रोका जा सके।इस अभियान में सीओ सिटी अरुण नौवहार और शहर कोतवाल शिव शंकर सिंह भी मौजूद रहे। अपर पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार सिन्हा ने कहा, "गणतंत्र दिवस के अवसर पर जनता की सुरक्षा सर्वोपरि है। हमारी टीमें निरंतर गश्त और चेकिंग के माध्यम से किसी भी असामाजिक तत्व को सक्रिय नहीं होने देंगी। शांतिपूर्ण उत्सव सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।"
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    गणतंत्र दिवस की सुरक्षा को लेकर पुलिस अलर्ट मोड में, फ्लैग मार्च और सघन चेकिंग अभियान
रायबरेली। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जिला पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए अलर्ट मोड में आ गई है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर जनपद के सभी थानों की पुलिस ने फ्लैग मार्च निकाला, जिसमें संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी गई।अपर पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार सिन्हा के नेतृत्व में शहर के प्रमुख चौराहों जैसे सुपरमार्केट, घंटाघर, सराफा बाजार और रेलवे स्टेशन पर सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। 
फ्लैग मार्च के दौरान बाइक से तेज रफ्तार में फर्राटा भर रहे कई संदिग्ध युवकों की तलाशी ली गई। रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के बैगों और सामान की गहन जांच की गई, ताकि किसी भी संभावित खतरे को रोका जा सके।इस अभियान में सीओ सिटी अरुण नौवहार और शहर कोतवाल शिव शंकर सिंह भी मौजूद रहे। 
अपर पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार सिन्हा ने कहा, "गणतंत्र दिवस के अवसर पर जनता की सुरक्षा सर्वोपरि है। हमारी टीमें निरंतर गश्त और चेकिंग के माध्यम से किसी भी असामाजिक तत्व को सक्रिय नहीं होने देंगी। शांतिपूर्ण उत्सव सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।"
    user_Ravindra Kumar
    Ravindra Kumar
    Journalist Rae Bareli, Uttar Pradesh•
    6 hrs ago
  • Post by Utkarsh Kumar
    1
    Post by Utkarsh Kumar
    user_Utkarsh Kumar
    Utkarsh Kumar
    मोहनलालगंज, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • लाइट, कैमरा, एक्शन... यूपी की अलीगढ़ पुलिस ने अपने हाथ से चाकू इन दोनों लड़कों की जेब में रखे, फिर Video बनवाकर गिरफ्तारी दिखाई। 1 दिसंबर 2025 को पुलिस ने सूरज गौतम और सोनू को मोबाइल स्नेचिंग में गिरफ्तार किया था।
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    लाइट, कैमरा, एक्शन...
यूपी की अलीगढ़ पुलिस ने अपने हाथ से चाकू इन दोनों लड़कों की जेब में रखे, फिर Video बनवाकर गिरफ्तारी दिखाई।
1 दिसंबर 2025 को पुलिस ने सूरज गौतम और सोनू को मोबाइल स्नेचिंग में गिरफ्तार किया था।
    user_MAKKI TV
    MAKKI TV
    Journalist लखनऊ, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • भारत का संविधान हर नागरिक को अनुच्छेद 14 (समानता), अनुच्छेद 20 (मनमानी दंड से संरक्षण) और अनुच्छेद 21 (जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता) की गारंटी देता है। जब वर्दीधारी खुद “हथियार” पकड़वाकर “रिकवरी” दिखाते हैं, तो यह ड्यू प्रोसेस ऑफ लॉ की खुली हत्या है। यह न सिर्फ निर्दोषता के सिद्धांत (Presumption of Innocence) को रौंदता है, बल्कि न्यायपालिका को गुमराह करने की साजिश भी बन जाता है। ऐसी कार्रवाई कानून-व्यवस्था नहीं, संवैधानिक अपराध है। अलीगढ़, उत्तर प्रदेश से आया ये वीडियो रोंगटे खड़े कर देने वाला है। जहां वर्दी अपराधियों पर चाकू नहीं पकड़ रही… वर्दी खुद चाकू पकड़ा रही है! वीडियो में साफ दिख रहा है पहले “हथियार” रखवाओ, फिर “रिकवरी” का ड्रामा रचो, और फिर दो बेगुनाहों को अपराधी बताकर जेल ठूंस दो। सूरज गौतम और सोनू इनका कसूर क्या था? बस इतना कि इनके हाथ में सिस्टम ने अपराध थमा दिया। ये सवाल नहीं… ये आरोप है ये पुलिसिया कार्रवाई नहीं, सबूत गढ़ने का धंधा है। ये कानून का राज नहीं, वर्दी की गुंडागर्दी है। सामाजिक दृष्टि से पुलिस समाज और नागरिक के बीच भरोसे की आख़िरी कड़ी होती है। जब वही कड़ी फर्ज़ी मामलों, झूठी बरामदगी और निर्दोषों को फँसाने का औज़ार बन जाए, तो समाज में डर, अविश्वास और आक्रोश पैदा होता है। सूरज गौतम और सोनू जैसे नाम सिर्फ व्यक्ति नहीं रह जाते—वे उस आम नागरिक का प्रतीक बन जाते हैं, जिसे कभी भी “केस” बनाकर कुचल दिया जा सकता है। यह सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने वाली प्रवृत्ति है। नैतिक दृष्टि से वर्दी सिर्फ कपड़ा नहीं, जिम्मेदारी और मर्यादा का प्रतीक होती है। जिस हाथ को नागरिक की रक्षा करनी चाहिए, वही हाथ अगर सबूत गढ़े—तो यह नैतिक पतन की पराकाष्ठा है। यह सत्ता का दुरुपयोग है, जो बताता है कि समस्या “कुछ लोगों” की नहीं, बल्कि जवाबदेही की कमी की है। निष्कर्ष यह सवाल नहीं है—यह आरोप है। यह पुलिसिया कार्रवाई नहीं—सबूत गढ़ने का धंधा है। यह कानून का राज नहीं—वर्दी की गुंडागर्दी है। जब तक ऐसे मामलों में स्वतंत्र जांच, कड़ी सज़ा और संस्थागत सुधार नहीं होंगे, तब तक संविधान सिर्फ किताबों में और न्याय सिर्फ भाषणों में रहेगा। #RuleOfLaw #PoliceAccountability #संविधान_बचाओ #JusticeForSurajSonu
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    भारत का संविधान हर नागरिक को अनुच्छेद 14 (समानता), अनुच्छेद 20 (मनमानी दंड से संरक्षण) और अनुच्छेद 21 (जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता) की गारंटी देता है।
जब वर्दीधारी खुद “हथियार” पकड़वाकर “रिकवरी” दिखाते हैं, तो यह ड्यू प्रोसेस ऑफ लॉ की खुली हत्या है।
यह न सिर्फ निर्दोषता के सिद्धांत (Presumption of Innocence) को रौंदता है, बल्कि न्यायपालिका को गुमराह करने की साजिश भी बन जाता है।
ऐसी कार्रवाई कानून-व्यवस्था नहीं, संवैधानिक अपराध है।
अलीगढ़, उत्तर प्रदेश से आया ये वीडियो रोंगटे खड़े कर देने वाला है।
जहां वर्दी अपराधियों पर चाकू नहीं पकड़ रही…
वर्दी खुद चाकू पकड़ा रही है!
वीडियो में साफ दिख रहा है 
पहले “हथियार” रखवाओ,
फिर “रिकवरी” का ड्रामा रचो,
और फिर दो बेगुनाहों को अपराधी बताकर जेल ठूंस दो।
सूरज गौतम और सोनू
इनका कसूर क्या था?
बस इतना कि इनके हाथ में सिस्टम ने अपराध थमा दिया।
ये सवाल नहीं… ये आरोप है  
ये पुलिसिया कार्रवाई नहीं, सबूत गढ़ने का धंधा है।
ये कानून का राज नहीं, वर्दी की गुंडागर्दी है।
सामाजिक दृष्टि से
पुलिस समाज और नागरिक के बीच भरोसे की आख़िरी कड़ी होती है।
जब वही कड़ी फर्ज़ी मामलों, झूठी बरामदगी और निर्दोषों को फँसाने का औज़ार बन जाए, तो समाज में डर, अविश्वास और आक्रोश पैदा होता है।
सूरज गौतम और सोनू जैसे नाम सिर्फ व्यक्ति नहीं रह जाते—वे उस आम नागरिक का प्रतीक बन जाते हैं, जिसे कभी भी “केस” बनाकर कुचल दिया जा सकता है।
यह सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने वाली प्रवृत्ति है।
नैतिक दृष्टि से
वर्दी सिर्फ कपड़ा नहीं, जिम्मेदारी और मर्यादा का प्रतीक होती है।
जिस हाथ को नागरिक की रक्षा करनी चाहिए, वही हाथ अगर सबूत गढ़े—तो यह नैतिक पतन की पराकाष्ठा है।
यह सत्ता का दुरुपयोग है, जो बताता है कि समस्या “कुछ लोगों” की नहीं, बल्कि जवाबदेही की कमी की है।
निष्कर्ष
यह सवाल नहीं है—यह आरोप है।
यह पुलिसिया कार्रवाई नहीं—सबूत गढ़ने का धंधा है।
यह कानून का राज नहीं—वर्दी की गुंडागर्दी है।
जब तक ऐसे मामलों में स्वतंत्र जांच, कड़ी सज़ा और संस्थागत सुधार नहीं होंगे, तब तक संविधान सिर्फ किताबों में और न्याय सिर्फ भाषणों में रहेगा।
#RuleOfLaw #PoliceAccountability #संविधान_बचाओ #JusticeForSurajSonu
    user_Vinay Kumar Srivastav
    Vinay Kumar Srivastav
    Journalist सलोन, रायबरेली, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • कमालगंज बाजार में हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा (30,01,2026) दिया शुक्रवार को सभी हिन्दू भाई बहनों को आमंत्रित किया गया है सभी हिन्दू भाई बहन ज्यादा से ज्यादा लोग पहुंचे 🙏🚩 जय श्री राम
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    कमालगंज बाजार में हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा (30,01,2026) दिया शुक्रवार को सभी हिन्दू भाई बहनों को आमंत्रित किया गया है सभी हिन्दू भाई बहन ज्यादा से ज्यादा लोग पहुंचे 🙏🚩
जय श्री राम
    user_Anuj Rawat kamalganj bazzar vala
    Anuj Rawat kamalganj bazzar vala
    Farmer सलोन, रायबरेली, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • हरदोई गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जनपद के विभिन्न थाना क्षेत्रों में एसपी ने भारी संख्या में सुरक्षा बलों के साथ सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था के दृष्टिगत जनपद में पड़ने वाले रेलवे स्टेशन,होटल,सराय,ढाबे आदि पर संदिग्ध व्यक्ति/वस्तु की चेकिंग की गई।
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    हरदोई गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जनपद के विभिन्न थाना क्षेत्रों में एसपी ने भारी संख्या में सुरक्षा बलों के साथ सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था के दृष्टिगत जनपद में पड़ने वाले रेलवे स्टेशन,होटल,सराय,ढाबे आदि पर संदिग्ध व्यक्ति/वस्तु की चेकिंग की गई।
    user_संतोष तिवारी ब्यूरो चीफ दैनिक विश्ववार्ता समाचार पत्र हरदोई यूपी
    संतोष तिवारी ब्यूरो चीफ दैनिक विश्ववार्ता समाचार पत्र हरदोई यूपी
    Reporter लखनऊ, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • **सवर्ण समाज को शिक्षा से वंचित करने का नियोजित प्रयास? UGC इक्विटी व्यवस्था के विरोध में ‘घर-घर चलो अभियान’ तेज** रायबरेली/लखनऊ। राष्ट्रीय सवर्ण परिषद ने घोषणा की है कि वह सवर्णों एवं सनातन समाज की आवाज को घर-घर तक पहुँचाने के अपने संकल्प पर पहले की तरह अडिग है और भविष्य में भी इसे और मजबूती से उठाती रहेगी। परिषद का आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा विश्वविद्यालयीय व्यवस्था में “समानता” के नाम पर लागू की जा रही UGC इक्विटी नीति वास्तव में समान अवसर नहीं, बल्कि पक्षपातपूर्ण विशेषाधिकार व्यवस्था है, जिससे सवर्ण समाज को योजनाबद्ध तरीके से उच्च शिक्षा से वंचित किया जा रहा है। परिषद के पदाधिकारियों का कहना है कि शिक्षा संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 15 (भेदभाव निषेध) की मूल भावना पर आधारित होनी चाहिए, न कि ऐसी नीतियों पर जो सामाजिक संतुलन को बिगाड़ें। उनका आरोप है कि वर्तमान नीति सामाजिक न्याय की आड़ में राजनीतिक तुष्टिकरण को बढ़ावा दे रही है, जिससे विश्वविद्यालयों में योग्यता, प्रतिस्पर्धा और समान अवसर की अवधारणा कमजोर हो रही है। इसी के विरोध में राष्ट्रीय सवर्ण परिषद एवं उसके सहयोगी संगठनों द्वारा “घर-घर चलो अभियान” का आगाज किया गया है। इस अभियान के माध्यम से आम जनमानस को बताया जा रहा है कि UGC की यह इक्विटी व्यवस्था किस प्रकार संवैधानिक मर्यादाओं, नीति-नियमों और नैतिक मूल्यों के विपरीत है तथा कैसे यह भारतीय समाज के पारंपरिक सामाजिक ताने-बाने को झकझोरने का काम कर रही है। परिषद का कहना है कि वे किसी भी समाज के विरोध में नहीं, बल्कि समान अधिकारों की निष्पक्ष व्यवस्था के पक्षधर हैं। संगठन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह UGC इक्विटी नीति पर पुनर्विचार करे, सभी वर्गों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करे और शिक्षा को सामाजिक प्रयोगशाला बनने से रोके। राष्ट्रीय सवर्ण परिषद ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने जनभावनाओं की अनदेखी जारी रखी, तो यह आंदोलन जनांदोलन का रूप ले सकता है और इसे लोकतांत्रिक व संवैधानिक तरीके से देशव्यापी स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।
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    **सवर्ण समाज को शिक्षा से वंचित करने का नियोजित प्रयास?
UGC इक्विटी व्यवस्था के विरोध में ‘घर-घर चलो अभियान’ तेज**
रायबरेली/लखनऊ।
राष्ट्रीय सवर्ण परिषद ने घोषणा की है कि वह सवर्णों एवं सनातन समाज की आवाज को घर-घर तक पहुँचाने के अपने संकल्प पर पहले की तरह अडिग है और भविष्य में भी इसे और मजबूती से उठाती रहेगी। परिषद का आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा विश्वविद्यालयीय व्यवस्था में “समानता” के नाम पर लागू की जा रही UGC इक्विटी नीति वास्तव में समान अवसर नहीं, बल्कि पक्षपातपूर्ण विशेषाधिकार व्यवस्था है, जिससे सवर्ण समाज को योजनाबद्ध तरीके से उच्च शिक्षा से वंचित किया जा रहा है।
परिषद के पदाधिकारियों का कहना है कि शिक्षा संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 15 (भेदभाव निषेध) की मूल भावना पर आधारित होनी चाहिए, न कि ऐसी नीतियों पर जो सामाजिक संतुलन को बिगाड़ें। उनका आरोप है कि वर्तमान नीति सामाजिक न्याय की आड़ में राजनीतिक तुष्टिकरण को बढ़ावा दे रही है, जिससे विश्वविद्यालयों में योग्यता, प्रतिस्पर्धा और समान अवसर की अवधारणा कमजोर हो रही है।
इसी के विरोध में राष्ट्रीय सवर्ण परिषद एवं उसके सहयोगी संगठनों द्वारा “घर-घर चलो अभियान” का आगाज किया गया है। इस अभियान के माध्यम से आम जनमानस को बताया जा रहा है कि UGC की यह इक्विटी व्यवस्था किस प्रकार संवैधानिक मर्यादाओं, नीति-नियमों और नैतिक मूल्यों के विपरीत है तथा कैसे यह भारतीय समाज के पारंपरिक सामाजिक ताने-बाने को झकझोरने का काम कर रही है।
परिषद का कहना है कि वे किसी भी समाज के विरोध में नहीं, बल्कि समान अधिकारों की निष्पक्ष व्यवस्था के पक्षधर हैं। संगठन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह UGC इक्विटी नीति पर पुनर्विचार करे, सभी वर्गों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करे और शिक्षा को सामाजिक प्रयोगशाला बनने से रोके।
राष्ट्रीय सवर्ण परिषद ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने जनभावनाओं की अनदेखी जारी रखी, तो यह आंदोलन जनांदोलन का रूप ले सकता है और इसे लोकतांत्रिक व संवैधानिक तरीके से देशव्यापी स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।
    user_Vinay Kumar Srivastav
    Vinay Kumar Srivastav
    Journalist सलोन, रायबरेली, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • लखनऊ में ब्लैक आउट में मॉकड्रिल किया गया
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    लखनऊ में ब्लैक आउट में मॉकड्रिल किया गया
    user_Jai Tripathi
    Jai Tripathi
    Journalist सदर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश•
    12 hrs ago
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