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आप जो बात कह रहे हैं, उसमें एक बड़ा सही पॉइंट है—वादा करना आसान है, लेकिन उसे जमीन पर उतारना बहुत मुश्किल। खासकर “लाखों रोजगार” जैसे बड़े दावे अक्सर बिना स्पष्ट प्लान के किए जाते हैं। Manish Kashyap का जो बयान है (20 लाख–40 लाख रोजगार), वो सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन ऐसे दावों के पीछे कुछ जरूरी सवाल उठते हैं: रोजगार कहाँ से आएगा—सरकारी नौकरी या प्राइवेट सेक्टर? बजट कितना लगेगा? कितने साल में पूरा होगा? कौन-सा सेक्टर (इंडस्ट्री, कृषि, IT, स्टार्टअप) फोकस में होगा? आपका यह कहना कि “पहले 4 हजार लोगों को नौकरी देकर दिखाइए”—यह एक तरह से प्रैक्टिकल चैलेंज है। यही असल लोकतंत्र की ताकत है कि जनता सवाल पूछे। लेकिन एक बात ध्यान में रखनी चाहिए: किसी भी व्यक्ति के पास बिना सत्ता (power) के बड़े पैमाने पर सरकारी नौकरी देना संभव नहीं होता। इसलिए अगर आप सही तरीके से चुनौती देना चाहते हैं, तो सवाल ऐसे होने चाहिए: अभी उनके पास क्या मॉडल है रोजगार बनाने का? उन्होंने अपने स्तर पर (मीडिया/संगठन के जरिए) कितने लोगों को रोजगार दिया? उनकी नीति (policy) क्या है, सिर्फ बयान नहीं? अगर आप चाहें, तो मैं आपके इसी मुद्दे पर एक �⁠दमदार पोस्टर लाइन, �⁠वीडियो स्क्रिप्ट या �⁠सोशल मीडिया मैसेज बना सकता हूँ—जो सीधे और प्रभावी तरीके से आपकी बात लोगों आप जो बात कह रहे हैं, उसमें एक बड़ा सही पॉइंट है—वादा करना आसान है, लेकिन उसे जमीन पर उतारना बहुत मुश्किल। खासकर “लाखों रोजगार” जैसे बड़े दावे अक्सर बिना स्पष्ट प्लान के किए जाते हैं। Manish Kashyap का जो बयान है (20 लाख–40 लाख रोजगार), वो सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन ऐसे दावों के पीछे कुछ जरूरी सवाल उठते हैं: रोजगार कहाँ से आएगा—सरकारी नौकरी या प्राइवेट सेक्टर? बजट कितना लगेगा? कितने साल में पूरा होगा? कौन-सा सेक्टर (इंडस्ट्री, कृषि, IT, स्टार्टअप) फोकस में होगा? आपका यह कहना कि “पहले 4 हजार लोगों को नौकरी देकर दिखाइए”—यह एक तरह से प्रैक्टिकल चैलेंज है। यही असल लोकतंत्र की ताकत है कि जनता सवाल पूछे। लेकिन एक बात ध्यान में रखनी चाहिए: किसी भी व्यक्ति के पास बिना सत्ता (power) के बड़े पैमाने पर सरकारी नौकरी देना संभव नहीं होता। इसलिए अगर आप सही तरीके से चुनौती देना चाहते हैं, तो सवाल ऐसे होने चाहिए: अभी उनके पास क्या मॉडल है रोजगार बनाने का? उन्होंने अपने स्तर पर (मीडिया/संगठन के जरिए) कितने लोगों को रोजगार दिया? उनकी नीति (policy) क्या है, सिर्फ बयान नहीं? अगर आप चाहें, तो मैं आपके इसी मुद्दे पर एक �⁠दमदार पोस्टर लाइन, �⁠वीडियो स्क्रिप्ट या �⁠सोशल मीडिया मैसेज बना सकता हूँ—जो सीधे और प्रभावी तरीके से आपकी बात लोगों

2 hrs ago
user_S.K SINGH
S.K SINGH
Medical Lab शेखपुरा, शेखपुरा, बिहार•
2 hrs ago

आप जो बात कह रहे हैं, उसमें एक बड़ा सही पॉइंट है—वादा करना आसान है, लेकिन उसे जमीन पर उतारना बहुत मुश्किल। खासकर “लाखों रोजगार” जैसे बड़े दावे अक्सर बिना स्पष्ट प्लान के किए जाते हैं। Manish Kashyap का जो बयान है (20 लाख–40 लाख रोजगार), वो सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन ऐसे दावों के पीछे कुछ जरूरी सवाल उठते हैं: रोजगार कहाँ से आएगा—सरकारी नौकरी या प्राइवेट सेक्टर? बजट कितना लगेगा? कितने साल में पूरा होगा? कौन-सा सेक्टर (इंडस्ट्री, कृषि, IT, स्टार्टअप) फोकस में होगा? आपका यह कहना कि “पहले 4 हजार लोगों को नौकरी देकर दिखाइए”—यह एक तरह से प्रैक्टिकल चैलेंज है। यही असल लोकतंत्र की ताकत है कि जनता सवाल पूछे। लेकिन एक बात ध्यान में रखनी चाहिए: किसी भी व्यक्ति के पास बिना सत्ता (power) के बड़े पैमाने पर सरकारी नौकरी देना संभव नहीं होता। इसलिए अगर आप सही तरीके से चुनौती देना चाहते हैं, तो सवाल ऐसे होने चाहिए: अभी उनके पास क्या मॉडल है रोजगार बनाने का? उन्होंने अपने स्तर पर (मीडिया/संगठन के जरिए) कितने लोगों को रोजगार दिया? उनकी नीति (policy) क्या है, सिर्फ बयान नहीं? अगर आप चाहें, तो मैं आपके इसी मुद्दे पर एक �⁠दमदार पोस्टर लाइन, �⁠वीडियो स्क्रिप्ट या �⁠सोशल मीडिया मैसेज बना सकता हूँ—जो सीधे और प्रभावी तरीके से आपकी बात लोगों आप जो बात कह रहे हैं, उसमें एक बड़ा सही पॉइंट है—वादा करना आसान है, लेकिन उसे जमीन पर उतारना बहुत मुश्किल। खासकर “लाखों रोजगार” जैसे बड़े दावे अक्सर बिना स्पष्ट प्लान के किए जाते हैं। Manish Kashyap का जो बयान है (20 लाख–40 लाख रोजगार), वो सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन ऐसे दावों के पीछे कुछ जरूरी सवाल उठते हैं: रोजगार कहाँ से आएगा—सरकारी नौकरी या प्राइवेट सेक्टर? बजट कितना लगेगा? कितने साल में पूरा होगा? कौन-सा सेक्टर (इंडस्ट्री, कृषि, IT, स्टार्टअप) फोकस में होगा? आपका यह कहना कि “पहले 4 हजार लोगों को नौकरी देकर दिखाइए”—यह एक तरह से प्रैक्टिकल चैलेंज है। यही असल लोकतंत्र की ताकत है कि जनता सवाल पूछे। लेकिन एक बात ध्यान में रखनी चाहिए: किसी भी व्यक्ति के पास बिना सत्ता (power) के बड़े पैमाने पर सरकारी नौकरी देना संभव नहीं होता। इसलिए अगर आप सही तरीके से चुनौती देना चाहते हैं, तो सवाल ऐसे होने चाहिए: अभी उनके पास क्या मॉडल है रोजगार बनाने का? उन्होंने अपने स्तर पर (मीडिया/संगठन के जरिए) कितने लोगों को रोजगार दिया? उनकी नीति (policy) क्या है, सिर्फ बयान नहीं? अगर आप चाहें, तो मैं आपके इसी मुद्दे पर एक �⁠दमदार पोस्टर लाइन, �⁠वीडियो स्क्रिप्ट या �⁠सोशल मीडिया मैसेज बना सकता हूँ—जो सीधे और प्रभावी तरीके से आपकी बात लोगों

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  • #19_अप्रैल_2026 को #गुजरात_के_सूरत में #उधना_रेलवे स्टेशन पर #यूपी_और_बिहार जाने वाले #प्रवासी_मजदूरों पर #पुलिस ने लाठ अपने क्षेत्र की सभी वायरल विडियोज के लिए डाउनलोड करें शुरू ऐप (Shuru App) 👇🏻 https:
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    #19_अप्रैल_2026 को #गुजरात_के_सूरत में #उधना_रेलवे स्टेशन पर #यूपी_और_बिहार जाने वाले #प्रवासी_मजदूरों पर  #पुलिस ने  लाठ
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    user_S.K SINGH
    S.K SINGH
    Medical Lab शेखपुरा, शेखपुरा, बिहार•
    33 min ago
  • सिंथेटिक ड्रग्स वर्तमान समय में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में उभर रहे हैं। ये ऐसे रासायनिक पदार्थ होते हैं जिन्हें प्रयोगशालाओं में कृत्रिम रूप से संश्लेषित (Chemical Synthesis) किया जाता है। प्राकृतिक नशीले पदार्थों के विपरीत, इनकी संरचना और प्रभाव अधिक तीव्र एवं अनिश्चित होते हैं। मेथामफेटामिन, एमडीएमए तथा सिंथेटिक कैनाबिनॉइड्स इसके प्रमुख उदाहरण हैं, जो विशेष रूप से युवा वर्ग में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। जैविक दृष्टिकोण से, सिंथेटिक ड्रग्स मानव शरीर के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) को प्रभावित करते हैं। ये डोपामिन, सेरोटोनिन और नॉरएड्रेनालिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर के स्तर को असामान्य रूप से बढ़ा देते हैं, जिससे व्यक्ति को अस्थायी आनंद (Euphoria) की अनुभूति होती है। हालांकि, यह प्रभाव अल्पकालिक होता है और इसके बाद गंभीर दुष्प्रभाव देखने को मिलते हैं। शारीरिक रूप से यह हृदय गति (Tachycardia), उच्च रक्तचाप (Hypertension), शरीर के तापमान में वृद्धि (Hyperthermia) और अनिद्रा (Insomnia) जैसी स्थितियों को जन्म देता है। मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी अत्यंत गंभीर होते हैं। नियमित उपयोग से व्यक्ति में अवसाद (Depression), चिंता (Anxiety), भ्रम (Hallucinations) तथा आक्रामक व्यवहार विकसित हो सकता है। लंबे समय तक सेवन करने पर मस्तिष्क की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है, जिससे निर्णय क्षमता (Decision-making ability) और स्मरण शक्ति (Memory) में गिरावट आती है। यह लत (Addiction) की स्थिति को जन्म देता है, जो एक क्रॉनिक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के रूप में विकसित हो सकता है। सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी सिंथेटिक ड्रग्स का प्रभाव व्यापक है। इसके कारण अपराध दर में वृद्धि, कार्यक्षमता में कमी तथा स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त बोझ देखने को मिलता है। परिवारों में विघटन, बेरोजगारी और सामाजिक अस्थिरता जैसी समस्याएं भी इससे जुड़ी होती हैं। विशेष रूप से युवा वर्ग में इसका बढ़ता प्रचलन समाज के भविष्य के लिए गंभीर खतरा है, क्योंकि यह उनकी शिक्षा, करियर और मानसिक विकास को प्रभावित करता है। इस समस्या के नियंत्रण के लिए बहुआयामी रणनीति की आवश्यकता है। जन जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को इसके दुष्प्रभावों के बारे में शिक्षित करना आवश्यक है। साथ ही, सरकार द्वारा कठोर नीतियों और कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन भी जरूरी है, ताकि अवैध उत्पादन और तस्करी पर रोक लगाई जा सके। स्वास्थ्य क्षेत्र में डिटॉक्सिफिकेशन, पुनर्वास केंद्रों और मनोवैज्ञानिक परामर्श सेवाओं को सुदृढ़ करना चाहिए, जिससे प्रभावित व्यक्तियों को पुनः सामान्य जीवन में लाया जा सके। सिंथेटिक ड्रग्स केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य की समस्या नहीं है, बल्कि यह एक बहुआयामी सामाजिक, आर्थिक और चिकित्सा चुनौती है। इसके प्रभावी नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नीतिगत हस्तक्षेप और सामाजिक सहयोग अत्यंत आवश्यक है। #होलसेल_रिटेल_ड्रगलाइसेंसआपफार्मासिस्टk_केवल_फार्मासिस्ट_के_नाम_जारी_हो #फार्मेसीएक्ट #PharmacyProfession #DCGI #Dtab #PharmacistUnity #healthcare #pharmacist #SafeWomen #PostViral सरकारी फार्मासिस्ट Bijendra Singh Poonia Pharmacist Shailendra Yaduvanshi Vaidya Acharya Vidhayak Giri MP Pharmacist Association MPPA Bhupendra Kumar Prem Choudhary Surendra Bera Krishna Nayak Vijay Dwivedi
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    सिंथेटिक ड्रग्स वर्तमान समय में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में उभर रहे हैं। ये ऐसे रासायनिक पदार्थ होते हैं जिन्हें प्रयोगशालाओं में कृत्रिम रूप से संश्लेषित (Chemical Synthesis) किया जाता है। प्राकृतिक नशीले पदार्थों के विपरीत, इनकी संरचना और प्रभाव अधिक तीव्र एवं अनिश्चित होते हैं। मेथामफेटामिन, एमडीएमए तथा सिंथेटिक कैनाबिनॉइड्स इसके प्रमुख उदाहरण हैं, जो विशेष रूप से युवा वर्ग में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
जैविक दृष्टिकोण से, सिंथेटिक ड्रग्स मानव शरीर के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) को प्रभावित करते हैं। ये डोपामिन, सेरोटोनिन और नॉरएड्रेनालिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर के स्तर को असामान्य रूप से बढ़ा देते हैं, जिससे व्यक्ति को अस्थायी आनंद (Euphoria) की अनुभूति होती है। हालांकि, यह प्रभाव अल्पकालिक होता है और इसके बाद गंभीर दुष्प्रभाव देखने को मिलते हैं। शारीरिक रूप से यह हृदय गति (Tachycardia), उच्च रक्तचाप (Hypertension), शरीर के तापमान में वृद्धि (Hyperthermia) और अनिद्रा (Insomnia) जैसी स्थितियों को जन्म देता है।
मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी अत्यंत गंभीर होते हैं। नियमित उपयोग से व्यक्ति में अवसाद (Depression), चिंता (Anxiety), भ्रम (Hallucinations) तथा आक्रामक व्यवहार विकसित हो सकता है। लंबे समय तक सेवन करने पर मस्तिष्क की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है, जिससे निर्णय क्षमता (Decision-making ability) और स्मरण शक्ति (Memory) में गिरावट आती है। यह लत (Addiction) की स्थिति को जन्म देता है, जो एक क्रॉनिक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के रूप में विकसित हो सकता है।
सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी सिंथेटिक ड्रग्स का प्रभाव व्यापक है। इसके कारण अपराध दर में वृद्धि, कार्यक्षमता में कमी तथा स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त बोझ देखने को मिलता है। परिवारों में विघटन, बेरोजगारी और सामाजिक अस्थिरता जैसी समस्याएं भी इससे जुड़ी होती हैं। विशेष रूप से युवा वर्ग में इसका बढ़ता प्रचलन समाज के भविष्य के लिए गंभीर खतरा है, क्योंकि यह उनकी शिक्षा, करियर और मानसिक विकास को प्रभावित करता है।
इस समस्या के नियंत्रण के लिए बहुआयामी रणनीति की आवश्यकता है। जन जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को इसके दुष्प्रभावों के बारे में शिक्षित करना आवश्यक है। साथ ही, सरकार द्वारा कठोर नीतियों और कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन भी जरूरी है, ताकि अवैध उत्पादन और तस्करी पर रोक लगाई जा सके। स्वास्थ्य क्षेत्र में डिटॉक्सिफिकेशन, पुनर्वास केंद्रों और मनोवैज्ञानिक परामर्श सेवाओं को सुदृढ़ करना चाहिए, जिससे प्रभावित व्यक्तियों को पुनः सामान्य जीवन में लाया जा सके।
सिंथेटिक ड्रग्स केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य की समस्या नहीं है, बल्कि यह एक बहुआयामी सामाजिक, आर्थिक और चिकित्सा चुनौती है। इसके प्रभावी नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नीतिगत हस्तक्षेप और सामाजिक सहयोग अत्यंत आवश्यक है।
#होलसेल_रिटेल_ड्रगलाइसेंसआपफार्मासिस्टk_केवल_फार्मासिस्ट_के_नाम_जारी_हो #फार्मेसीएक्ट #PharmacyProfession #DCGI #Dtab #PharmacistUnity #healthcare #pharmacist #SafeWomen #PostViral सरकारी फार्मासिस्ट Bijendra Singh Poonia Pharmacist Shailendra Yaduvanshi Vaidya Acharya Vidhayak Giri MP Pharmacist Association MPPA  Bhupendra Kumar Prem Choudhary Surendra Bera Krishna Nayak Vijay Dwivedi
    user_Dr Lalan Kumar
    Dr Lalan Kumar
    Accountant चेवारा, शेखपुरा, बिहार•
    6 hrs ago
  • चेवाड़ा प्रखंड के कपासी गांव में सोमवार को गेहूं की पराली में लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। तेज हवा के कारण लपटें करीब एक किलोमीटर दूर करंडे गांव तक पहुंच गईं। इस भीषण आग में कई किसानों की नेबारी, भूसा, बोरिंग और बांसबिट्टी जलकर राख हो गई। ग्रामीणों के अनुसार, आग किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा लगाई गई हो सकती है, जिसने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। घटना की सूचना मिलते ही दमकल टीम मौके पर पहुंची और घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। आग बुझने के बाद ही ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
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    चेवाड़ा प्रखंड के कपासी गांव में सोमवार को गेहूं की पराली में लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। तेज हवा के कारण लपटें करीब एक किलोमीटर दूर करंडे गांव तक पहुंच गईं। इस भीषण आग में कई किसानों की नेबारी, भूसा, बोरिंग और बांसबिट्टी जलकर राख हो गई। ग्रामीणों के अनुसार, आग किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा लगाई गई हो सकती है, जिसने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। घटना की सूचना मिलते ही दमकल टीम मौके पर पहुंची और घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। आग बुझने के बाद ही ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
    user_NK 24 News
    NK 24 News
    Local News Reporter शेखपुरा, शेखपुरा, बिहार•
    12 hrs ago
  • सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर बिहारीऔर up के मजदूर का जनसैलाब 😱! Saurav Jbtsaurav BIHAR VIDHAN SABHA Samrat Choudhary R.J.D - राष्ट्रीय जनता दल Surat City Police Narendra Modi Tejashwi Yadav Janata Dal (United) Yogi Adityanath : Report Card Indian National Congress TravelTours Western Railway Central Railway Ministry of Railways, Government of India East Central Railway Ashwini Vaishnaw @sauravjbt
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    सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर बिहारीऔर up के मजदूर का जनसैलाब 😱! Saurav Jbtsaurav BIHAR VIDHAN SABHA Samrat Choudhary R.J.D - राष्ट्रीय जनता दल Surat City Police Narendra Modi Tejashwi Yadav Janata Dal (United) Yogi Adityanath : Report Card Indian National Congress TravelTours Western Railway Central Railway Ministry of Railways, Government of India East Central Railway Ashwini Vaishnaw
@sauravjbt
    user_Saurav Jbt
    Saurav Jbt
    Video Creator चेवारा, शेखपुरा, बिहार•
    17 hrs ago
  • धानुक,समाज, यानि EBC,बिहार में, और दूसरे राज्य में, sc,st, हैं, लेकिन बिहार में, ebc क्यों, बैठक में,देखिए, क्या बोलें अरविंद कुमार धानुक, ji,
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    धानुक,समाज, यानि EBC,बिहार में, और दूसरे राज्य में, sc,st, हैं, लेकिन बिहार में, 
ebc क्यों, बैठक में,देखिए, क्या बोलें अरविंद कुमार धानुक, ji,
    user_SSDBIHARCOD108
    SSDBIHARCOD108
    News Anchor शेखपुरा, शेखपुरा, बिहार•
    21 hrs ago
  • मदद करने से कोई घाटा नहीं होता क्योंकि कहावत में है जो जैसा होता है उसे करता है
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    मदद करने से कोई घाटा नहीं होता क्योंकि कहावत में है जो जैसा होता है उसे करता है
    user_Rajaram
    Rajaram
    Artist शेखोपुर सराय, शेखपुरा, बिहार•
    22 hrs ago
  • रामगढ़ चौक में द्वितीय एवं तृतीय बैच की जनगणना प्रशिक्षण हुआ प्रारंभ। लखीसराय जिले के रामगढ़ चौक प्रखंड अंतर्गत बीआरसी भवन में भारत की जनगणना 2027 की सफलता को लेकर प्रखंड के द्वितीय एवं तृतीय बैच का प्रशिक्षण प्रखंड विकास पदाधिकारी सह चार्ज पदाधिकारी अभिषेक कुमार जिला सांख्यिकी पदाधिकारी सह नोडल पदाधिकारी राम विनोद प्रसाद प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी अभिषेक कुमार एवं सभी फील्ड ट्रेनर के द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर प्रशिक्षण सत्र का शुभारंभ किया गया कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी सह चार्ज पदाधिकारी अभिषेक कुमार ने बताया कि इस बार डिजिटल जनगणना भारत सरकार के द्वारा कराई जा रही है जनगणना के आधार पर ही सरकार अपने योजना का बजट बनती है एवं इसके आधार पर ही परिसीमन तय होता है इसलिए इस कार्य में पारदर्शिता अत्यंत जरूरी है मैं आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास करता हूं कि हमारे प्रखंड के जितने भी प्रगणक के एवं पर्यवेक्षक हैं इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर करेंगे जिसका रिजल्ट भविष्य में सुनहला होगा। यह प्रशिक्षण अगले 21 अप्रैल तक चलेगा इसके उपरांत अगले बैच का प्रशिक्षण सत्र प्रारंभ की जाएगी।
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    रामगढ़ चौक में द्वितीय एवं तृतीय बैच की जनगणना प्रशिक्षण हुआ प्रारंभ।
लखीसराय जिले के रामगढ़ चौक प्रखंड अंतर्गत बीआरसी भवन में  भारत की जनगणना 2027 की सफलता को लेकर प्रखंड के द्वितीय एवं तृतीय बैच का प्रशिक्षण प्रखंड विकास पदाधिकारी सह चार्ज पदाधिकारी अभिषेक कुमार जिला सांख्यिकी पदाधिकारी सह नोडल पदाधिकारी राम विनोद प्रसाद प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी अभिषेक कुमार एवं सभी फील्ड ट्रेनर के द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर प्रशिक्षण सत्र का शुभारंभ किया गया कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी सह चार्ज पदाधिकारी अभिषेक कुमार ने बताया कि इस बार डिजिटल जनगणना भारत सरकार के द्वारा कराई जा रही है जनगणना के आधार पर ही सरकार अपने योजना का बजट बनती है एवं इसके आधार पर ही परिसीमन तय होता है इसलिए इस कार्य में पारदर्शिता अत्यंत जरूरी है मैं आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास करता हूं कि हमारे प्रखंड के जितने भी प्रगणक के एवं पर्यवेक्षक हैं इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर करेंगे जिसका रिजल्ट भविष्य में सुनहला होगा। यह प्रशिक्षण अगले 21 अप्रैल तक चलेगा इसके उपरांत अगले बैच का प्रशिक्षण सत्र प्रारंभ की जाएगी।
    user_Kumar Amlesh
    Kumar Amlesh
    पत्रकार लखीसराय, लखीसराय, बिहार•
    2 hrs ago
  • सिंथेटिक ड्रग्स वर्तमान समय में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में उभर रहे हैं। ये ऐसे रासायनिक पदार्थ होते ह अपने क
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    सिंथेटिक ड्रग्स वर्तमान समय में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में उभर रहे हैं। ये ऐसे रासायनिक पदार्थ होते ह
अपने क
    user_S.K SINGH
    S.K SINGH
    Medical Lab शेखपुरा, शेखपुरा, बिहार•
    35 min ago
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