मीरजापुर के ग्रामीण क्षेत्रों में आंधी और बारिश के कारण बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। लालगंज उपकेंद्र के बस्तरा और अमहा फीडर पर पेड़ गिरने से लगभग 30 गांवों की विद्युत आपूर्ति ठप हो गई, जिसके चलते करीब 55 हजार की आबादी को 15 घंटे से अधिक समय तक गंभीर बिजली संकट का सामना करना पड़ा। यह घटना शुक्रवार शाम मौसम खराब होने के दौरान हुई, जब तेज हवाओं के कारण विद्युत लाइन पर पेड़ गिर गया। पूरी रात बिजली नहीं मिलने से लोगों की परेशानी काफी बढ़ गई। उमस भरी गर्मी के बीच घरों में पंखे और कूलर बंद रहने से लोग रातभर चैन की नींद नहीं सो पाए। मोबाइल फोन डिस्चार्ज होने के कारण संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई, जिसका असर छात्रों की पढ़ाई और छोटे कारोबारों पर भी पड़ा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि बरसात के मौसम में हर साल ऐसी ही स्थिति बनती है, लेकिन जर्जर लाइनों और पेड़ों की छंटाई की समस्या का कोई स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया है। लोगों ने विद्युत विभाग से आपूर्ति व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित तथा मजबूत बनाने की मांग की है। शनिवार सुबह तक भी बिजली बहाल न होने पर उपभोक्ताओं ने विभागीय अधिकारियों से संपर्क किया, जिसके बाद कर्मचारियों की एक टीम तुरंत मौके पर पहुंची और गिरे हुए पेड़ को हटाने का काम शुरू किया गया। अवर अभियंता अभिषेक मौर्य ने बताया कि तेज हवा के कारण पेड़ के विद्युत लाइन पर गिरने से आपूर्ति बाधित हुई थी। उन्होंने जानकारी दी कि मरम्मत कार्य तेजी से कराया जा रहा है और जल्द ही सभी प्रभावित गांवों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी।
मीरजापुर के ग्रामीण क्षेत्रों में आंधी और बारिश के कारण बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। लालगंज उपकेंद्र के बस्तरा और अमहा फीडर पर पेड़ गिरने से लगभग 30 गांवों की विद्युत आपूर्ति ठप हो गई, जिसके चलते करीब 55 हजार की आबादी को 15 घंटे से अधिक समय तक गंभीर बिजली संकट का सामना करना पड़ा। यह घटना शुक्रवार शाम मौसम खराब होने के दौरान हुई, जब तेज हवाओं के कारण विद्युत लाइन पर पेड़ गिर गया। पूरी रात बिजली नहीं मिलने से लोगों की परेशानी काफी बढ़ गई। उमस भरी गर्मी के बीच घरों में पंखे और कूलर बंद रहने से लोग रातभर चैन की नींद नहीं सो पाए। मोबाइल फोन डिस्चार्ज होने के कारण संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई, जिसका असर छात्रों की पढ़ाई और छोटे कारोबारों पर भी पड़ा। ग्रामीणों ने
आरोप लगाया है कि बरसात के मौसम में हर साल ऐसी ही स्थिति बनती है, लेकिन जर्जर लाइनों और पेड़ों की छंटाई की समस्या का कोई स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया है। लोगों ने विद्युत विभाग से आपूर्ति व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित तथा मजबूत बनाने की मांग की है। शनिवार सुबह तक भी बिजली बहाल न होने पर उपभोक्ताओं ने विभागीय अधिकारियों से संपर्क किया, जिसके बाद कर्मचारियों की एक टीम तुरंत मौके पर पहुंची और गिरे हुए पेड़ को हटाने का काम शुरू किया गया। अवर अभियंता अभिषेक मौर्य ने बताया कि तेज हवा के कारण पेड़ के विद्युत लाइन पर गिरने से आपूर्ति बाधित हुई थी। उन्होंने जानकारी दी कि मरम्मत कार्य तेजी से कराया जा रहा है और जल्द ही सभी प्रभावित गांवों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी।
- मिर्ज़ापुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी का जन्मदिन मनाया। इस अवसर पर उन्होंने पेपर लीक के मुद्दे को लेकर सरकार को घेरा और उस पर निशाना साधा।1
- विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर विभिन्न संस्थाओं को सम्मानित किया गया।1
- गोपीगंज कोतवाली के गांधी गांव में शुक्रवार को 22 वर्षीय आकाश का शव शिवान में एक बबूल के पेड़ से फंदे पर लटका मिला, जिससे पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इस दुखद घटना के बाद मृतक के परिजनों में गहरा कोहराम मच गया है।1
- ज्ञानपुर, भदोही के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण है, जहाँ 75 वर्षों से शिक्षा का केंद्र रहे काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय को अब विश्वविद्यालय का दर्जा मिल गया है। इसके साथ ही संस्थान का नया नाम काशी नरेश विश्वविद्यालय हो गया है। 1951 में स्थापित इस संस्थान ने हजारों विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्रदान की है, और अब मुख्य प्रवेश द्वार पर नया नाम अंकित होने के साथ ही महाविद्यालय की 75 वर्षों पुरानी पहचान इतिहास का हिस्सा बन गई है। विश्वविद्यालय बनने के बाद, क्षेत्र के छात्रों को शिक्षा, शोध और नए पाठ्यक्रमों के बेहतर अवसर मिलेंगे। इस ऐतिहासिक घटनाक्रम के साथ, काशी नरेश विश्वविद्यालय के गठन, इसके इतिहास और महत्व से जुड़ी पूरी जानकारी अब और भी महत्वपूर्ण हो गई है।1
- भदोही के ज्ञानपुर के लिए एक ऐतिहासिक पल में, 75 वर्षों से शिक्षा के केंद्र रहे काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय को अब विश्वविद्यालय का दर्जा मिल गया है। इसके साथ ही इस प्रतिष्ठित संस्थान को नया नाम 'काशी नरेश विश्वविद्यालय' मिला है। मुख्य प्रवेश द्वार पर भी नए नाम का अंकन कर दिया गया है, जिससे महाविद्यालय की 75 वर्षों पुरानी पहचान अब इतिहास का हिस्सा बन गई है। वर्ष 1951 में स्थापित हुए इस संस्थान ने अब तक हजारों विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्रदान की है। अब विश्वविद्यालय बनने के बाद, क्षेत्र के छात्रों को शिक्षा, शोध और नए पाठ्यक्रमों के लिए बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। यह वीडियो काशी नरेश विश्वविद्यालय के गठन, इसके समृद्ध इतिहास और भविष्य में इसके महत्व से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करता है। ऐसी ही ताजा और विश्वसनीय खबरों के लिए चैनल को सब्सक्राइब करने, वीडियो को लाइक और शेयर करने का भी आग्रह किया गया है।1
- भदोही जनपद के जंगीगंज क्षेत्र अंतर्गत कलनुआ गांव में 55 मीटर चकरोड की बदहाल स्थिति ने ग्रामीणों की परेशानी काफी बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि चकरोड पर इंटरलॉकिंग का कार्य किया गया था, लेकिन लगभग 45 से 55 मीटर का हिस्सा अभी भी अधूरा पड़ा हुआ है, जिससे रास्ता खराब हो गया है। इस अधूरे निर्माण कार्य के कारण सड़क की स्थिति लगातार बिगड़ रही है और बरसात व आवागमन के दौरान लोगों को आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों पर इस ओर ध्यान न देने का आरोप लगाते हुए नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि शेष बचे चकरोड पर इंटरलॉकिंग का कार्य जल्द से जल्द पूरा कराया जाए, ताकि उन्हें आवागमन में हो रही परेशानियों से राहत मिल सके।1
- भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि 'परिवारवादी दलों में टूट मची हुई है'।1
- ग्रीन गुरु नामक पहल ने अपने 4000वें दिन एक विशेष पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर, उन्होंने वृक्षारोपण कर आम जनमानस को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया।1
- भदोही जिले में इस साल का ऐतिहासिक दुलदुल जुलूस 24 जून को निकाला जाएगा। इस भव्य आयोजन की तैयारियों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई है, जिसमें जुलूस से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।1