जीवन के प्रथम छह वर्ष मस्तिष्क विकास के लिए स्वर्णिम काल, पोषण पखवाड़े में विशेषज्ञों ने दी जानकारी जीवन के प्रथम छह वर्ष मस्तिष्क विकास के लिए स्वर्णिम काल, पोषण पखवाड़े में विशेषज्ञों ने दी जानकारी शासकीय महाविद्यालय में 'पोषण पखवाड़ा' संपन्न: बच्चों के भविष्य के लिए सही खान-पान और देखभाल पर जोर बच्चों का सही पोषण और देखभाल ही सशक्त राष्ट्र की नींव - डॉ. तावड़े निवाली 22 अप्रेल बुधवार (स्वतंत्र पत्रकार सुनील सोनी ) { नमामि निवाली }मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग के मार्गदर्शन और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सहयोग से स्थानीय पद्मश्री स्व. कान्ता बहन त्यागी शासकीय महाविद्यालय में 8वें 'पोषण पखवाड़ा' के तहत एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य केंद्र "जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क के विकास को अधिकतम करना" विषय रहा। शिशु विकास और गर्भावस्था का महत्व कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्राचार्य डॉ. के तावड़े ने कहा कि जन्म से लेकर छह वर्ष तक की आयु बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास का आधार स्तंभ होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बच्चे के मस्तिष्क का तीव्र विकास इसी अवधि में होता है, जिसके लिए गर्भावस्था के दौरान माता का पोषण और जन्म के पश्चात अनुकूल वातावरण अनिवार्य है। डॉ. तावड़े ने छह माह तक केवल स्तनपान और उसके बाद संतुलित पूरक आहार की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। कुपोषण के विरुद्ध जागरूकता डॉ. पी. सी. किराड़े ने कुपोषण के गंभीर दुष्परिणामों से अवगत कराते हुए बताया कि सही पोषण के अभाव में बच्चों की सीखने की क्षमता कम हो जाती है और वे रोगों के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं। वहीं डॉ. शारदा खरते ने गर्भवती महिलाओं के आहार और शिशु को दिए जाने वाले दाल, खिचड़ी, फल जैसे पूरक आहार के महत्व को समझाया। राष्ट्र निर्माण और पोषण मंच का संचालन करते हुए डॉ. चाँदनी गोले ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण साझा किया कि पहले छह वर्ष का निवेश केवल बच्चे के लिए ही नहीं, बल्कि राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए निवेश है। कार्यक्रम के अंत में डॉ. सुल्तान मोरे ने आभार प्रदर्शन करते हुए उपस्थित जनों से समाज में पोषण के प्रति जागरूकता फैलाने की अपील की। इस अवसर पर प्रो. अनारसिंह किराड़े, प्रो. नवलसिंह बरडे, प्रो. नीलम डावर, डॉ. राकेश जाधव, विजय चौधरी सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
जीवन के प्रथम छह वर्ष मस्तिष्क विकास के लिए स्वर्णिम काल, पोषण पखवाड़े में विशेषज्ञों ने दी जानकारी जीवन के प्रथम छह वर्ष मस्तिष्क विकास के लिए स्वर्णिम काल, पोषण पखवाड़े में विशेषज्ञों ने दी जानकारी शासकीय महाविद्यालय में 'पोषण पखवाड़ा' संपन्न: बच्चों के भविष्य के लिए सही खान-पान और देखभाल पर जोर बच्चों का सही पोषण और देखभाल ही सशक्त राष्ट्र की नींव - डॉ. तावड़े निवाली 22 अप्रेल बुधवार (स्वतंत्र पत्रकार सुनील सोनी ) { नमामि निवाली }मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग के मार्गदर्शन और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सहयोग से
स्थानीय पद्मश्री स्व. कान्ता बहन त्यागी शासकीय महाविद्यालय में 8वें 'पोषण पखवाड़ा' के तहत एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य केंद्र "जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क के विकास को अधिकतम करना" विषय रहा। शिशु विकास और गर्भावस्था का महत्व कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्राचार्य डॉ. के तावड़े ने कहा कि जन्म से लेकर छह वर्ष तक की आयु बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास का आधार स्तंभ होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बच्चे के मस्तिष्क का तीव्र विकास इसी अवधि में होता है,
जिसके लिए गर्भावस्था के दौरान माता का पोषण और जन्म के पश्चात अनुकूल वातावरण अनिवार्य है। डॉ. तावड़े ने छह माह तक केवल स्तनपान और उसके बाद संतुलित पूरक आहार की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। कुपोषण के विरुद्ध जागरूकता डॉ. पी. सी. किराड़े ने कुपोषण के गंभीर दुष्परिणामों से अवगत कराते हुए बताया कि सही पोषण के अभाव में बच्चों की सीखने की क्षमता कम हो जाती है और वे रोगों के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं। वहीं डॉ. शारदा खरते ने गर्भवती महिलाओं के आहार और शिशु को दिए जाने वाले दाल, खिचड़ी, फल
जैसे पूरक आहार के महत्व को समझाया। राष्ट्र निर्माण और पोषण मंच का संचालन करते हुए डॉ. चाँदनी गोले ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण साझा किया कि पहले छह वर्ष का निवेश केवल बच्चे के लिए ही नहीं, बल्कि राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए निवेश है। कार्यक्रम के अंत में डॉ. सुल्तान मोरे ने आभार प्रदर्शन करते हुए उपस्थित जनों से समाज में पोषण के प्रति जागरूकता फैलाने की अपील की। इस अवसर पर प्रो. अनारसिंह किराड़े, प्रो. नवलसिंह बरडे, प्रो. नीलम डावर, डॉ. राकेश जाधव, विजय चौधरी सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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