*सीवरलाइन स्मार्ट, लेकिन पानी निकालने के लिए मोटर का सहारा!* सतना। शहर को आधुनिक, व्यवस्थित और बेहतर नागरिक सुविधाओं से लैस करने के नाम पर स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत करोड़ों रुपये के विकास कार्य किए गए। सड़कें बनीं, सीवरलाइन बिछाई गई, नालियां और जलनिकासी व्यवस्था सुधारने के दावे हुए। कागजों पर शहर को स्मार्ट बनाने की तस्वीर भी खूब सुंदर दिखाई गई। लेकिन जमीनी हकीकत कई जगह इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आती है। सबसे बड़ा सवाल सीवरलाइन प्रोजेक्ट को लेकर सामने आता है। यदि सीवरलाइन बिछाने के बाद भी सीवर टैंक में जमा पानी को बाहर निकालने के लिए अलग से मोटर लगानी पड़े, तो फिर ऐसी सीवर व्यवस्था को स्मार्ट कहने का औचित्य क्या है? *सीवरलाइन है, फिर पानी निकासी की समस्या क्यों?* सीवर सिस्टम का मूल उद्देश्य ही यही है कि घरों और संस्थानों से निकलने वाला गंदा पानी पाइपलाइन के माध्यम से निर्धारित स्थान तक पहुंचे और उसकी निकासी व्यवस्थित तरीके से हो। इसके लिए बाकायदा डिजाइन, ढलान, पाइप की क्षमता, पंपिंग स्टेशन और ट्रीटमेंट सिस्टम जैसी व्यवस्थाओं का प्रावधान किया जाता है। लेकिन जब सीवर टैंक में पानी जमा हो जाए और उसे निकालने के लिए मोटर लगानी पड़े, तो यह सवाल स्वाभाविक है कि परियोजना की डिजाइनिंग और क्रियान्वयन में आखिर कमी कहां रह गई? *करोड़ों का प्रोजेक्ट, फिर भी जुगाड़ से समाधान!* शहर में जब करोड़ों रुपये की परियोजनाएं बनाई जाती हैं तो आम नागरिक यह उम्मीद करता है कि उसे वर्षों तक बेहतर सुविधा मिलेगी। लेकिन यदि किसी सुविधा को चालू रखने के लिए रोजमर्रा में मोटर, पाइप और दूसरे अस्थायी इंतजामों का सहारा लेना पड़े, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर स्मार्ट सिटी की योजना कितनी स्मार्ट तरीके से बनाई गई थी? शहर के निवासियों के लिए यह महज तकनीकी समस्या नहीं है। सीवर का पानी रुकना स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण से भी जुड़ा विषय है। पानी लंबे समय तक जमा रहने से दुर्गंध, मच्छरों और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। अगर बारिश या सीवर टैंक का पानी निकालने के लिए मोटर लगाकर पानी बाहर निकालना पड़े, तो यह तस्वीर स्मार्ट सिटी की सफलता से ज्यादा उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। प्रश्न सीधा है जब सीवरलाइन प्रोजेक्ट पर इतना खर्च किया गया, तो फिर पानी को अपने निर्धारित रास्ते से निकलने के लिए मोटर का सहारा क्यों लेना पड़ रहा है? *मुस्कुराइए...!* *आप सतना स्मार्ट सिटी में हैं।* *सीवरलाइन स्मार्ट, लेकिन पानी निकालने के लिए मोटर का सहारा!* सतना। शहर को आधुनिक, व्यवस्थित और बेहतर नागरिक सुविधाओं से लैस करने के नाम पर स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत करोड़ों रुपये के विकास कार्य किए गए। सड़कें बनीं, सीवरलाइन बिछाई गई, नालियां और जलनिकासी व्यवस्था सुधारने के दावे हुए। कागजों पर शहर को स्मार्ट बनाने की तस्वीर भी खूब सुंदर दिखाई गई। लेकिन जमीनी हकीकत कई जगह इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आती है। सबसे बड़ा सवाल सीवरलाइन प्रोजेक्ट को लेकर सामने आता है। यदि सीवरलाइन बिछाने के बाद भी सीवर टैंक में जमा पानी को बाहर निकालने के लिए अलग से मोटर लगानी पड़े, तो फिर ऐसी सीवर व्यवस्था को स्मार्ट कहने का औचित्य क्या है? *सीवरलाइन है, फिर पानी निकासी की समस्या क्यों?* सीवर सिस्टम का मूल उद्देश्य ही यही है कि घरों और संस्थानों से निकलने वाला गंदा पानी पाइपलाइन के माध्यम से निर्धारित स्थान तक पहुंचे और उसकी निकासी व्यवस्थित तरीके से हो। इसके लिए बाकायदा डिजाइन, ढलान, पाइप की क्षमता, पंपिंग स्टेशन और ट्रीटमेंट सिस्टम जैसी व्यवस्थाओं का प्रावधान किया जाता है। लेकिन जब सीवर टैंक में पानी जमा हो जाए और उसे निकालने के लिए मोटर लगानी पड़े, तो यह सवाल स्वाभाविक है कि परियोजना की डिजाइनिंग और क्रियान्वयन में आखिर कमी कहां रह गई? *करोड़ों का प्रोजेक्ट, फिर भी जुगाड़ से समाधान!* शहर में जब करोड़ों रुपये की परियोजनाएं बनाई जाती हैं तो आम नागरिक यह उम्मीद करता है कि उसे वर्षों तक बेहतर सुविधा मिलेगी। लेकिन यदि किसी सुविधा को चालू रखने के लिए रोजमर्रा में मोटर, पाइप और दूसरे अस्थायी इंतजामों का सहारा लेना पड़े, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर स्मार्ट सिटी की योजना कितनी स्मार्ट तरीके से बनाई गई थी? शहर के निवासियों के लिए यह महज तकनीकी समस्या नहीं है। सीवर का पानी रुकना स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण से भी जुड़ा विषय है। पानी लंबे समय तक जमा रहने से दुर्गंध, मच्छरों और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। अगर बारिश या सीवर टैंक का पानी निकालने के लिए मोटर लगाकर पानी बाहर निकालना पड़े, तो यह तस्वीर स्मार्ट सिटी की सफलता से ज्यादा उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। प्रश्न सीधा है जब सीवरलाइन प्रोजेक्ट पर इतना खर्च किया गया, तो फिर पानी को अपने निर्धारित रास्ते से निकलने के लिए मोटर का सहारा क्यों लेना पड़ रहा है? *मुस्कुराइए...!* *आप सतना स्मार्ट सिटी में हैं।*
*सीवरलाइन स्मार्ट, लेकिन पानी निकालने के लिए मोटर का सहारा!* सतना। शहर को आधुनिक, व्यवस्थित और बेहतर नागरिक सुविधाओं से लैस करने के नाम पर स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत करोड़ों रुपये के विकास कार्य किए गए। सड़कें बनीं, सीवरलाइन बिछाई गई, नालियां और जलनिकासी व्यवस्था सुधारने के दावे हुए। कागजों पर शहर को स्मार्ट बनाने की तस्वीर भी खूब सुंदर दिखाई गई। लेकिन जमीनी हकीकत कई जगह इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आती है। सबसे बड़ा सवाल सीवरलाइन प्रोजेक्ट को लेकर सामने आता है। यदि सीवरलाइन बिछाने के बाद भी सीवर टैंक में जमा पानी को बाहर निकालने के लिए अलग से मोटर लगानी पड़े, तो फिर ऐसी सीवर व्यवस्था को स्मार्ट कहने का औचित्य क्या है? *सीवरलाइन है, फिर पानी निकासी की समस्या क्यों?* सीवर सिस्टम का मूल उद्देश्य ही यही है कि घरों और संस्थानों से निकलने वाला गंदा पानी पाइपलाइन के माध्यम से निर्धारित स्थान तक पहुंचे और उसकी निकासी व्यवस्थित तरीके से हो। इसके लिए बाकायदा डिजाइन, ढलान, पाइप की क्षमता, पंपिंग स्टेशन और ट्रीटमेंट सिस्टम जैसी व्यवस्थाओं का प्रावधान किया जाता है। लेकिन जब सीवर टैंक में पानी जमा हो जाए और उसे निकालने के लिए मोटर लगानी पड़े, तो यह सवाल स्वाभाविक है कि परियोजना की डिजाइनिंग और क्रियान्वयन में आखिर कमी कहां रह गई? *करोड़ों का प्रोजेक्ट, फिर भी जुगाड़ से समाधान!* शहर में जब करोड़ों रुपये की परियोजनाएं बनाई जाती हैं तो आम नागरिक यह उम्मीद करता है कि उसे वर्षों तक बेहतर सुविधा मिलेगी। लेकिन यदि किसी सुविधा को चालू रखने के लिए रोजमर्रा में मोटर, पाइप और दूसरे अस्थायी इंतजामों का सहारा लेना पड़े, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर स्मार्ट सिटी की योजना कितनी स्मार्ट तरीके से बनाई गई थी? शहर के निवासियों के लिए यह महज तकनीकी समस्या नहीं है। सीवर का पानी रुकना स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण से भी जुड़ा विषय है। पानी लंबे समय तक जमा रहने से दुर्गंध, मच्छरों और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। अगर बारिश या सीवर टैंक का पानी निकालने के लिए मोटर लगाकर पानी बाहर निकालना पड़े, तो यह तस्वीर स्मार्ट सिटी की सफलता से ज्यादा उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। प्रश्न सीधा है जब सीवरलाइन प्रोजेक्ट पर इतना खर्च किया गया, तो फिर पानी को अपने निर्धारित रास्ते से निकलने के लिए मोटर का सहारा क्यों लेना पड़ रहा है? *मुस्कुराइए...!* *आप सतना स्मार्ट सिटी में हैं।* *सीवरलाइन स्मार्ट, लेकिन पानी निकालने के लिए मोटर का सहारा!* सतना। शहर को आधुनिक, व्यवस्थित और बेहतर नागरिक सुविधाओं से लैस करने के नाम पर स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत करोड़ों रुपये के विकास कार्य किए गए। सड़कें बनीं, सीवरलाइन बिछाई गई, नालियां और जलनिकासी व्यवस्था सुधारने के दावे हुए। कागजों पर शहर को स्मार्ट बनाने की तस्वीर भी खूब सुंदर दिखाई गई। लेकिन जमीनी हकीकत कई जगह इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आती है। सबसे बड़ा सवाल सीवरलाइन प्रोजेक्ट को लेकर सामने आता है। यदि सीवरलाइन बिछाने के बाद भी सीवर टैंक में जमा पानी को बाहर निकालने के लिए अलग से मोटर लगानी पड़े, तो फिर ऐसी सीवर व्यवस्था को स्मार्ट कहने का औचित्य क्या है? *सीवरलाइन है, फिर पानी निकासी की समस्या क्यों?* सीवर सिस्टम का मूल उद्देश्य ही यही है कि घरों और संस्थानों से निकलने वाला गंदा पानी पाइपलाइन के माध्यम से निर्धारित स्थान तक पहुंचे और उसकी निकासी व्यवस्थित तरीके से हो। इसके लिए बाकायदा डिजाइन, ढलान, पाइप की क्षमता, पंपिंग स्टेशन और ट्रीटमेंट सिस्टम जैसी व्यवस्थाओं का प्रावधान किया जाता है। लेकिन जब सीवर टैंक में पानी जमा हो जाए और उसे निकालने के लिए मोटर लगानी पड़े, तो यह सवाल स्वाभाविक है कि परियोजना की डिजाइनिंग और क्रियान्वयन में आखिर कमी कहां रह गई? *करोड़ों का प्रोजेक्ट, फिर भी जुगाड़ से समाधान!* शहर में जब करोड़ों रुपये की परियोजनाएं बनाई जाती हैं तो आम नागरिक यह उम्मीद करता है कि उसे वर्षों तक बेहतर सुविधा मिलेगी। लेकिन यदि किसी सुविधा को चालू रखने के लिए रोजमर्रा में मोटर, पाइप और दूसरे अस्थायी इंतजामों का सहारा लेना पड़े, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर स्मार्ट सिटी की योजना कितनी स्मार्ट तरीके से बनाई गई थी? शहर के निवासियों के लिए यह महज तकनीकी समस्या नहीं है। सीवर का पानी रुकना स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण से भी जुड़ा विषय है। पानी लंबे समय तक जमा रहने से दुर्गंध, मच्छरों और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। अगर बारिश या सीवर टैंक का पानी निकालने के लिए मोटर लगाकर पानी बाहर निकालना पड़े, तो यह तस्वीर स्मार्ट सिटी की सफलता से ज्यादा उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। प्रश्न सीधा है जब सीवरलाइन प्रोजेक्ट पर इतना खर्च किया गया, तो फिर पानी को अपने निर्धारित रास्ते से निकलने के लिए मोटर का सहारा क्यों लेना पड़ रहा है? *मुस्कुराइए...!* *आप सतना स्मार्ट सिटी में हैं।*
- *ग्राम पंचायत में शराबखोरी का वीडियो वायरल* सतना जिले के रामपुर बघेलान जनपद के करमऊ ग्राम पंचायत में शराबखोरी का वीडियो हुआ वायरल, वायरल वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि इसमें पंचायत सचिव शराब का सेवन करते नजर आ रहे हैं, वीडियो वायरल होने के बाद पंचायत सचिव के कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल, हालांकि वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं। *ग्राम पंचायत में शराबखोरी का वीडियो वायरल* सतना जिले के रामपुर बघेलान जनपद के करमऊ ग्राम पंचायत में शराबखोरी का वीडियो हुआ वायरल, वायरल वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि इसमें पंचायत सचिव शराब का सेवन करते नजर आ रहे हैं, वीडियो वायरल होने के बाद पंचायत सचिव के कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल, हालांकि वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं।1
- सभी सम्मानित लोगों से विनम्र अपील जल्द से जल्द कराए निराकरण ताकि मैहर का भविष्य हो सुरक्षित1
- गुफाओं में श्रद्धालुओं से अवैध चढ़ोत्तरी के खिलाफ श्रद्धालु आक्रोशित, आस्था के साथ किया जा रहा खिलवाड़1
- *सीएम डॉ. मोहन यादव ने किया तिरंगा यात्रा का शुभारंभ, कहा- आजीवन करें देश की सेवा* - *भोपाल के टीटी नगर से शुरू हुई तिरंगा यात्रा* - *सैकड़ों युवाओं ने बारिश के बीच दिखाई देशभक्ति की ताकत* - *पीएम मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में जाग रही देशभक्ति की अलख* - *सीएम डॉ यादव ने 'हर घर तिरंगा' अभियान का भी किया शुभारंभ* भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल 9 अगस्त की सुबह पूरी तरह देशभक्ति के रंग में रंगी रही। सैकड़ों युवाओं ने टीटी नगर स्टेडियम से तिरंगा यात्रा निकाली और राष्ट्र सर्वोपरि का संदेश दिया। इस दौरान आलम यह था कि बारिश के बीच भी युवाओं का जोश कम नहीं हुआ। उन्होंने जोर-शोर से यह यात्रा निकाली और लोगों को प्रेरित किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस 'तिरंगा यात्रा' का शुभारंभ किया। उन्होंने मंच पर तिरंगा लहराया और युवाओं के अंदर जोश भर दिया। उन्होंने युवाओं को आजीवन देशभक्ति का संकल्प लेने के लिए प्रेरित भी किया। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास पर तिरंगा लहराकर हर घर तिरंगा अभियान का भी शुभारंभ किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में अभियान छेड़ा गया है। महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन की तरह आज एक साथ सभी राज्यों में देशभक्त नागरिक तिरंगा यात्रा निकाल रहे हैं। आज इंद्र देवता भी सारे देशभक्तों-वीरों का स्वागत कर रहे हैं। भारत माता की जय। *क्रांतिकारियों के लंबे संघर्ष का परिणाम है आजादी* तिरंगा यात्रा का शुभारंभ करने से पहले सीएम डॉ. यादव ने कहा कि महात्मा गांधी द्वारा अंग्रेजों भारत छोड़ो अभियान की शुरुआत की गई थी। इस अभियान ने अंग्रेजों की चूलें हिला दी थीं। देश की आजादी के लिए क्रांतिकारियों द्वारा दिए गए बलिदान-संघर्ष और अहिंसक आंदोलन से देश में जो ज्वार उठा, उसकी वजह से 5 साल बाद अंग्रेज भारत छोड़कर चले गए और देश को स्वतंत्रता मिली। लंबे संघर्ष के बाद मिली इस आजादी को आज हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 15 अगस्त को 80 साल होंगे। *उत्तरदायित्व का पालन करें* मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हम सभी परमात्मा से कामना करें, सभी शहीदों-स्वतंत्रता सेनानियों को स्मरण करें। क्योंकि, इन सभी के योगदान से भारत को आजादी मिली। हम अपने सर्वहारा वर्ग और देश के नागरिकों के साथ आजादी का पर्व मनाएं, अपने उत्तरदायित्व का पालन करें। हम वसुधैव कुटुम्बकम के मार्ग पर चलें। हम कामना करें कि हमारा भारत चिर युवा और चिर स्वतंत्र रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज हम पूरे देश में तिरंगा यात्रा निकाल कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इसका आह्वान किया है। मैं खुद भी उसमें शामिल होने जा रहा हूं। मैं उम्मीद करता हूं कि पूरे देश में इस तिरंगा यात्रा के माध्यम से युवा-बच्चे-बुजुर्ग-महिलाएं मिलकर संकल्प करेंगे कि वे आजीवन देश की सेवा करते रहेंगे। *सीएम डॉ. मोहन यादव ने किया तिरंगा यात्रा का शुभारंभ, कहा- आजीवन करें देश की सेवा* - *भोपाल के टीटी नगर से शुरू हुई तिरंगा यात्रा* - *सैकड़ों युवाओं ने बारिश के बीच दिखाई देशभक्ति की ताकत* - *पीएम मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में जाग रही देशभक्ति की अलख* - *सीएम डॉ यादव ने 'हर घर तिरंगा' अभियान का भी किया शुभारंभ* भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल 9 अगस्त की सुबह पूरी तरह देशभक्ति के रंग में रंगी रही। सैकड़ों युवाओं ने टीटी नगर स्टेडियम से तिरंगा यात्रा निकाली और राष्ट्र सर्वोपरि का संदेश दिया। इस दौरान आलम यह था कि बारिश के बीच भी युवाओं का जोश कम नहीं हुआ। उन्होंने जोर-शोर से यह यात्रा निकाली और लोगों को प्रेरित किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस 'तिरंगा यात्रा' का शुभारंभ किया। उन्होंने मंच पर तिरंगा लहराया और युवाओं के अंदर जोश भर दिया। उन्होंने युवाओं को आजीवन देशभक्ति का संकल्प लेने के लिए प्रेरित भी किया। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास पर तिरंगा लहराकर हर घर तिरंगा अभियान का भी शुभारंभ किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में अभियान छेड़ा गया है। महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन की तरह आज एक साथ सभी राज्यों में देशभक्त नागरिक तिरंगा यात्रा निकाल रहे हैं। आज इंद्र देवता भी सारे देशभक्तों-वीरों का स्वागत कर रहे हैं। भारत माता की जय। *क्रांतिकारियों के लंबे संघर्ष का परिणाम है आजादी* तिरंगा यात्रा का शुभारंभ करने से पहले सीएम डॉ. यादव ने कहा कि महात्मा गांधी द्वारा अंग्रेजों भारत छोड़ो अभियान की शुरुआत की गई थी। इस अभियान ने अंग्रेजों की चूलें हिला दी थीं। देश की आजादी के लिए क्रांतिकारियों द्वारा दिए गए बलिदान-संघर्ष और अहिंसक आंदोलन से देश में जो ज्वार उठा, उसकी वजह से 5 साल बाद अंग्रेज भारत छोड़कर चले गए और देश को स्वतंत्रता मिली। लंबे संघर्ष के बाद मिली इस आजादी को आज हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 15 अगस्त को 80 साल होंगे। *उत्तरदायित्व का पालन करें* मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हम सभी परमात्मा से कामना करें, सभी शहीदों-स्वतंत्रता सेनानियों को स्मरण करें। क्योंकि, इन सभी के योगदान से भारत को आजादी मिली। हम अपने सर्वहारा वर्ग और देश के नागरिकों के साथ आजादी का पर्व मनाएं, अपने उत्तरदायित्व का पालन करें। हम वसुधैव कुटुम्बकम के मार्ग पर चलें। हम कामना करें कि हमारा भारत चिर युवा और चिर स्वतंत्र रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज हम पूरे देश में तिरंगा यात्रा निकाल कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इसका आह्वान किया है। मैं खुद भी उसमें शामिल होने जा रहा हूं। मैं उम्मीद करता हूं कि पूरे देश में इस तिरंगा यात्रा के माध्यम से युवा-बच्चे-बुजुर्ग-महिलाएं मिलकर संकल्प करेंगे कि वे आजीवन देश की सेवा करते रहेंगे।1