सतना जिले का गुलई गाँव, जो जिला मुख्यालय सतना से लगभग 16 किलोमीटर और कोठी से लगभग 4 किलोमीटर दूर स्थित है, आज भी पक्की सड़क की सुविधा से वंचित है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि वे वर्षों से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह क्षेत्र स्वयं राज्य मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में आता है, फिर भी गाँव में सड़क की समस्या अनसुलझी बनी हुई है। उन्होंने सांसद और राज्य मंत्री पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि उनका ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर कब जाएगा। सड़क न होने के कारण बरसात के मौसम में कच्चा रास्ता दलदल में बदल जाता है, जिससे स्कूली बच्चों, किसानों, मरीजों और आम नागरिकों को अत्यधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, गुलई गाँव के ग्रामीणों ने सांसद, राज्य मंत्री और जिला प्रशासन से तत्काल सड़क निर्माण की मांग की है, ताकि उनकी वर्षों पुरानी इस समस्या का स्थायी समाधान हो सके।
सतना जिले का गुलई गाँव, जो जिला मुख्यालय सतना से लगभग 16 किलोमीटर और कोठी से लगभग 4 किलोमीटर दूर स्थित है, आज भी पक्की सड़क की सुविधा से वंचित है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि वे वर्षों से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह क्षेत्र स्वयं राज्य मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में आता है, फिर भी गाँव में सड़क की समस्या अनसुलझी बनी हुई है। उन्होंने सांसद और राज्य मंत्री पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि उनका ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर कब जाएगा। सड़क न होने के कारण बरसात के मौसम में कच्चा रास्ता दलदल में बदल जाता है, जिससे स्कूली बच्चों, किसानों, मरीजों और आम नागरिकों को अत्यधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, गुलई गाँव के ग्रामीणों ने सांसद, राज्य मंत्री और जिला प्रशासन से तत्काल सड़क निर्माण की मांग की है, ताकि उनकी वर्षों पुरानी इस समस्या का स्थायी समाधान हो सके।
- सतना रेलवे स्टेशन परिसर में एक खुला कबाड़खाना संचालित हो रहा है, जहाँ एक कबाड़ी ने इस्तेमाल की गई प्लास्टिक की खाली बोतलों का एक बड़ा भंडार जमा कर रखा है। इस गतिविधि के कारण आस-पास के क्षेत्र में प्रदूषण फैल रहा है। आरोप है कि कबाड़ का यह अवैध कारोबार जिम्मेदारों की सरपरस्ती में चल रहा है।1
- आज इस्लामिक कैलेंडर का नया साल शुरू हो गया है, जिसके साथ ही मुस्लिम समुदाय देशभर में 10 मोहर्रम यानी यौम-ए-आशूरा पूरी अकीदत और एहतराम के साथ मना रहा है। इस्लामिक कैलेंडर के पहले महीने मोहर्रम की यह दसवीं तारीख सतना समेत देश के कई हिस्सों में खास महत्व रखती है। इस दिन हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत को याद किया जाता है। कर्बला की जंग में हक और इंसाफ के लिए दी गई उनकी कुर्बानी को खिराज-ए-अकीदत पेश करने के लिए ताजिए निकाले जा रहे हैं। सतना में आजाद चौक, धवारी, सर्किट हाउस रोड सहित कई इलाकों से ताजिए के जुलूस निकले, जिनमें 'या हुसैन, या हुसैन' की सदाएं गूंजती रहीं। जगह-जगह सबील लगाकर शरबत और पानी भी पिलाया गया। जिला प्रशासन ने इन आयोजनों के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं, जिसमें चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात है। देर शाम इन ताजियों को कर्बला में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। मोहर्रम का यह त्योहार जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने और इंसानियत की हिफाजत करने का पैगाम देता है।1
- चित्रकूट जिले के पहाड़ी थाना क्षेत्र अंतर्गत ओरा के पांडेय घाट पर जमकर अवैध खनन का कार्य हो रहा है। यह जानकारी सामने आई है कि इस स्थान पर बड़े पैमाने पर खनन गतिविधियाँ जारी हैं।1
- चित्रकूट जनपद के मऊ थाना क्षेत्र में शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात करीब 1:30 बजे एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। पश्चिम पताई टिकरा के पास अनियंत्रित होकर एक कार सड़क किनारे लगे पेड़ से टकरा गई, जिससे कार सवार 48 वर्षीय रामकिशोर की मौके पर ही मौत हो गई। उनकी पत्नी गुड़िया और पड़ोसी व कार चालक चंद्रप्रताप सिंह इस दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतक रामकिशोर बेलहा बरियारी कला थाना मऊ, जनपद चित्रकूट के निवासी थे। परिजनों के अनुसार, रामकिशोर अपनी बेटी सुखमंती के ससुराल मऊ में हुए किसी लड़ाई-झगड़े के संबंध में अपनी पत्नी गुड़िया के साथ पड़ोसी चंद्रप्रताप सिंह की कार से वहां गए थे। बेटी के ससुराल से लौटते समय पश्चिम पताई के पास यह घटना हुई, जब कार अचानक अनियंत्रित होकर पेड़ से जा टकराई। हादसे की सूचना मिलने पर स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचित किया। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को मऊ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। वहां से चंद्रप्रताप को प्रयागराज रेफर किया गया है, जबकि गुड़िया का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। पुलिस ने मृतक रामकिशोर के शव को अपने कब्जे में लेकर आज शनिवार दोपहर 12 बजे जिला मुख्यालय में पोस्टमार्टम कराया है।1
- चित्रकूट जिले के तिरहार क्षेत्र में जनता का भारी गुस्सा देखने को मिला है। यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या रात के अंधेरे ने इलाके में हुए तथाकथित विकास की सच्चाई को उजागर कर दिया है, जिससे जनता का गुस्सा फूट पड़ा है।2
- प्रकाश पाठक ने सभी सोशल मीडिया क्रिएटर्स से एक विशेष अपील की है, जिसमें YouTube, Instagram, Facebook, Moj, ShareChat और अन्य किसी भी प्लेटफॉर्म पर कंटेंट बनाने वालों से समर्थन माँगा गया है। पाठक ने इन क्रिएटर्स से उनके लिए एक वीडियो बनाने का आग्रह किया है, और इसके बदले में वे हर संभव तरीके से सपोर्ट और प्रमोशन देने का वादा करते हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य उन लोगों को जवाब देना है जिन्होंने सोशल मीडिया पर समय बिताने की सार्थकता पर सवाल उठाया था, और अब सोशल मीडिया की वास्तविक ताकत दिखाने का समय आ गया है। जो क्रिएटर्स इसमें शामिल होना चाहते हैं, उनसे कमेंट में 'Ready' लिखने या प्रकाश पाठक को सीधे मैसेज करने का आह्वान किया गया है।1
- सतना में सिविल लाइन थाना परिसर स्थित पुलिस कॉलोनी में शनिवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब एक सरकारी आवास की छत का भारी प्लास्टर अचानक भरभराकर नीचे गिर पड़ा। यह घटना तब हुई जब कुछ ही पल पहले उसी स्थान पर बच्चे खेल रहे थे, जिनका समय रहते वहां से हट जाने के कारण उनकी जान बच गई। इस घटना ने एक संभावित बड़ी जनहानि को टाल दिया, लेकिन पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कॉलोनी में रहने वाले परिवारों में घटना के बाद दहशत का माहौल है। उनका आरोप है कि पुलिस कॉलोनी के अधिकांश आवास वर्षों पुराने और जर्जर हो चुके हैं, जिनमें मरम्मत के अभाव में लगातार गिरावट आ रही है। छतों से प्लास्टर गिरना और दीवारों में दरारें पड़ना अब एक सामान्य बात बन गई है। निवासियों का कहना है कि संबंधित विभाग को कई बार इस गंभीर स्थिति से अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाले पुलिसकर्मी खुद अपने परिवारों की असुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, खासकर बरसात के मौसम में इन खस्ताहाल मकानों में रहना किसी बड़े खतरे से कम नहीं है। स्थानीय लोगों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इन जर्जर भवनों का पुनर्निर्माण या मरम्मत नहीं कराई गई, तो भविष्य में कोई बड़ा और दर्दनाक हादसा हो सकता है। यह सवाल उठाया जा रहा है कि जब पुलिसकर्मियों के परिवार ही असुरक्षित सरकारी आवासों में रहने को मजबूर हैं, तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है और क्या प्रशासन किसी बड़ी जनहानि का इंतजार कर रहा है।1