वोटर के नजरिए से देखें तो इस उपचुनाव की स्थिति को,राजनीति या अवसरवाद, (Political Opportunism) या 'जनादेश का उल्लंघन' कहा जा सकता है। जब कोई निर्दलीय जीतता है, तो जनता उसे किसी विशेष पार्टी के खिलाफ या उसके स्वतंत्र व्यक्तित्व के कारण चुनती है। जीतने के बाद किसी पार्टी में शामिल होना अक्सर उन मतदाताओं को रास नहीं आता जिन्होंने पार्टी विचारधारा से हटकर भरोसा जताया था। राजन शुक्ला के मामले के दो मुख्य पहलू हैं: नैतिकता बनाम राजनीति: यदि राजन शुक्ला ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर साथ दिया था और उम्मीदवार ने बाद में भाजपा जॉइन कर ली, तो राजन शुक्ला के साथ अन्य सपोर्टर का खुद को आंशिक रूप से ठगा हुआ महसूस करना स्वाभाविक है। राजनीति में इसे 'वैचारिक मतभेद' के कारण रास्ते अलग करना माना जाता है। पार्टी के प्रति निष्ठा: अब जबकि राजन शुक्ला सपा (SP) में शामिल हो चुके हैं, तो एक अनुशासित कार्यकर्ता के तौर पर उनका धर्म और कर्तव्य अपनी वर्तमान पार्टी के उम्मीदवार को जिताना ही है। राजनीति में समीकरण बदलते रहते हैं, और आज की स्थिति में वह अपने दल के प्रति वफादार रहकर वही कर रहे हैं जो एक राजनेता को करना चाहिए। संक्षेप में, इसे 'राजनीतिक परिस्थितियों का बदलाव' कहा जाएगा, जहाँ पुराने धोखे या अनुभवों के आधार पर नेता अपनी नई राह और निष्ठा तय करते हैं। और आखिर में राजनीति में कोई किसी का नहीं होता और जो होता है वास्तव में वह भी नहीं होता,,,,,
वोटर के नजरिए से देखें तो इस उपचुनाव की स्थिति को,राजनीति या अवसरवाद, (Political Opportunism) या 'जनादेश का उल्लंघन' कहा जा सकता है। जब कोई निर्दलीय जीतता है, तो जनता उसे किसी विशेष पार्टी के खिलाफ या उसके स्वतंत्र व्यक्तित्व के कारण चुनती है। जीतने के बाद किसी पार्टी में शामिल होना अक्सर उन मतदाताओं को रास नहीं आता जिन्होंने पार्टी विचारधारा से हटकर भरोसा जताया था। राजन शुक्ला के मामले के दो मुख्य पहलू हैं: नैतिकता बनाम राजनीति: यदि राजन शुक्ला ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर साथ दिया था और उम्मीदवार ने बाद में भाजपा जॉइन कर ली, तो राजन शुक्ला के साथ अन्य सपोर्टर का खुद को आंशिक रूप से ठगा हुआ महसूस करना स्वाभाविक है। राजनीति में इसे 'वैचारिक मतभेद' के कारण रास्ते अलग करना माना जाता है। पार्टी के प्रति निष्ठा: अब जबकि राजन शुक्ला सपा (SP) में शामिल हो चुके हैं, तो एक अनुशासित कार्यकर्ता के तौर पर उनका धर्म और कर्तव्य अपनी वर्तमान पार्टी के उम्मीदवार को जिताना ही है। राजनीति में समीकरण बदलते रहते हैं, और आज की स्थिति में वह अपने दल के प्रति वफादार रहकर वही कर रहे हैं जो एक राजनेता को करना चाहिए। संक्षेप में, इसे 'राजनीतिक परिस्थितियों का बदलाव' कहा जाएगा, जहाँ पुराने धोखे या अनुभवों के आधार पर नेता अपनी नई राह और निष्ठा तय करते हैं। और आखिर में राजनीति में कोई किसी का नहीं होता और जो होता है वास्तव में वह भी नहीं होता,,,,,
- Post by मुन्ना पड़रौना कुशीनगर1
- ये है जीरो टॉलरेंस की योगी सरकार, जनता त्रस्त, अधिकारी मस्त कुशीनगर। जिले के पड़रौना तहसील परिसर से भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां तैनात कानूनगो हीरालाल का कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि जमीन की पैमाइश के नाम पर खुलेआम पैसे लिए जा रहे हैं। आरोप है कि यह कोई पहली घटना नहीं, बल्कि लंबे समय से इस तरह की वसूली की शिकायतें सामने आती रही हैं। इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि तहसील स्तर पर ही अगर इस तरह का भ्रष्टाचार होगा, तो आम जनता को न्याय कैसे मिलेगा। वहीं, वीडियो वायरल होने के बाद अब प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। अधिकारी मामले की जांच की बात कह रहे हैं, लेकिन लोगों की नजर इस पर टिकी है कि क्या वाकई सख्त कार्रवाई होगी या मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाएगा। 👉 फिलहाल, यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।1
- Post by Abulaish Ansari Kushinagr News1
- adhikariyon ki laparvahi1
- Post by MANOJ KUMAR YADAV1
- पिछले दरवाजे से बनी सरकार चोर दरवाजे से शराबबंदी हटाएगी1
- Post by Times of Uttar Pradesh1
- Post by मुन्ना पड़रौना कुशीनगर1
- रसोई का बजट बिगड़ा या स्थिर रहा? गैस सिलेंडर के नए रेट ने बढ़ाई उत्सुकता, पूरी लिस्ट देखकर दंग रह जाएंगे! आज एलपीजी सिलेंडर के नए रेट अपडेट कर दिए हैं। सरकार के अनुसार घरेलू गैस की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और कहीं भी कमी नहीं है। वहीं कमर्शियल एलपीजी की लगभग 70% सप्लाई बहाल कर दी गई है। जिससे एलपीजी की सप्लाई में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल द्वारा जारी नए एलपीजी रेट में आज कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि घरेलू और कमर्शियल दोनों तरह के सिलेंडर के दाम स्थिर बने हुए हैं। यह लगातार राहत भरा दिन माना जा रहा है क्योंकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की बढ़ोतरी का सामना नहीं करना पड़ा। राजधानी दिल्ली में 14.2 किलो घरेलू सिलेंडर 913 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 2078.50 रुपये में मिल रहा है। सरकार ने क्या कहा? पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि देश में एलपीजी सप्लाई पर कुछ असर जरूर पड़ा था। लेकिन स्थिति अब नियंत्रण में है। सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने, बुकिंग सिस्टम सुधारने और गलत उपयोग रोकने के लिए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) लागू किया है। अब तक करीब 92% DAC लक्ष्य हासिल कर लिया गया है, जिससे सिस्टम और मजबूत हुआ है।1