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हिण्डौन विधानसभा क्षेत्र के नयागांव देवलेन में आयोजित विशाल हरिकीर्तन दंगल समारोह में विधायक अनीता जाटव ने शिरकत की। सोमवार दोपहर करीब 3 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने पर, लोगों ने विधायक अनीता जाटव का साफा और माला पहनाकर गर्मजोशी से स्वागत किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक अनीता जाटव ने उन्हें मिले सम्मान के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि धार्मिक कार्यक्रम आपसी भाईचारे को सुदृढ़ करते हैं और पुरानी परंपराओं को जीवित रखते हैं। विधायक ने यह भी कहा कि ऐसे आयोजनों को समय-समय पर होते रहना चाहिए। इस अवसर पर कई अन्य लोग भी मौजूद रहे।
मनोज तिवाड़ी
हिण्डौन विधानसभा क्षेत्र के नयागांव देवलेन में आयोजित विशाल हरिकीर्तन दंगल समारोह में विधायक अनीता जाटव ने शिरकत की। सोमवार दोपहर करीब 3 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने पर, लोगों ने विधायक अनीता जाटव का साफा और माला पहनाकर गर्मजोशी से स्वागत किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक अनीता जाटव ने उन्हें मिले सम्मान के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि धार्मिक कार्यक्रम आपसी भाईचारे को सुदृढ़ करते हैं और पुरानी परंपराओं को जीवित रखते हैं। विधायक ने यह भी कहा कि ऐसे आयोजनों को समय-समय पर होते रहना चाहिए। इस अवसर पर कई अन्य लोग भी मौजूद रहे।
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- टोडाभीम के रंग लाल का पुरा के पास सड़क किनारे मिले अज्ञात व्यक्ति के शव की पहचान हो गई है। सोमवार सुबह रंग लाल का पुरा के पास एक अज्ञात शव पड़ा हुआ मिला था, जिसकी पहचान सोमवार शाम 5:00 बजे करीरी निवासी गोलू मीणा के रूप में हुई है। मृतक के परिजनों ने युवक की हत्या का आरोप लगाते हुए पुलिस को प्राथमिक की पेश की है। आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर परिजनों ने अस्पताल परिसर में धरना शुरू कर दिया है और उन्होंने शव लेने से भी इनकार कर दिया है। पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।1
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- मेघराज मीणा नारौली डांग की कलम से लिखे अनुसार, खण्डीप और उसके आसपास के करीब 25 गांवों में एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिल रहा है। यहाँ माता-बहनें, बड़े-बुजुर्ग और छोटे-छोटे बच्चे आने-जाने वाले लोगों को हाथ जोड़कर ठंडा नींबू पानी, कोल्ड ड्रिंक और नाश्ते का वितरण कर रहे हैं। इस आयोजन को अश्वमेघ यज्ञ की आहुति के समान बताया जा रहा है, जो खण्डीप की धरा पर हो रहा है। इस विराट आयोजन में, कमेटी, कार्यकर्ता और हजारों सेवकों के पैरों में रोज़ धूप में घूमने से छाले पड़ चुके हैं, फिर भी उनके चेहरे पर कोई शिकन नहीं दिखती। लगभग 400-500 महिला-पुरुष बिना रुके, कई घंटों तक हाथों में बीजना लेकर आगंतुकों को हवा कर रहे हैं। यहाँ तक कि 70-80 साल के बुजुर्ग भी हाथ जोड़कर व्यवस्था संभाल रहे हैं, जिनमें कहीं कोई थकान या शिकन का भाव नहीं है। इस महापड़ाव में ना कोई राजनीति, ना कोई पार्टी, ना कोई क्षेत्र और ना ही कोई जाति की भावना है; बल्कि सभी किसान एक अविश्वसनीय एकता का प्रदर्शन कर रहे हैं। वक्ताओं द्वारा सहज और संविधान के दायरे में भाषण दिए जा रहे हैं। यहाँ हर व्यक्ति गांव के मुख्य द्वार से प्रवेश करते ही खुद को जिम्मेदार मानता है, जिसके हाथ अभिवादन के लिए और सिर सम्मान के लिए झुके रहते हैं। इसे सर्व समाज का समुद्र मंथन बताया गया है, जो मात्र एक आंदोलन नहीं बल्कि संविधान पर चलने वालों के लिए एक चुनौतीपूर्ण परीक्षा है, जिसकी तैयारी अब तक जोरों पर चल रही है। जनसमूह की भावना अपने चरम पर है, और लेखक का मानना है कि यदि किसी ने इस 'अश्वमेघ यज्ञ की आहुति ज्वाला' के दर्शन नहीं किए हैं, तो वे जीवन के सबसे बेहतरीन और भावुक क्षणों से वंचित हो रहे हैं। लेखक इस बात पर गर्व महसूस करने का आह्वान करते हैं कि उन्होंने एक सभ्य, संविधान को मानने वाली और समझदार कौम में जन्म लिया है।1