मांडू में दशा माता पर्वः महिलाओं ने ग्रहों के दोष और परेशानियों को दूर करने के लिए व्रत रख की पूजा-अर्चना, पीपल के पेड़ की परिक्रमा करते हुए लपेटा सूत मांडू में दशा माता पर्वः महिलाओं ने ग्रहों के दोष और परेशानियों को दूर करने के लिए व्रत रख की पूजा-अर्चना, पीपल के पेड़ की परिक्रमा करते हुए लपेटा सूत राहुल सेन मांडव मो 9669141814 मांडू न्यूज/मांडू नगर और आसपास के क्षेत्र में महिलाओं ने शुक्रवार को दशा माता का व्रत कर पूजा-अर्चना की। इस दौरान महिलाओं ने मांडू के प्राचीन राम मंदिर के पीछे हनुमान जी परिसर में पीपल के पेड़ की पूजा की। मान्यता है कि इस व्रत को रखने और देवी की पूजा से ग्रहों के दोष और परेशानियां खत्म होती है। कई महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए भी व्रत करती है। इस विधि से की दशा माता की पूजा-अर्चना महिलाएं सुबह सूर्योदय से पूर्व उठी और व्रत का संकल्प लिया। पूजा करते समय दीवार पर स्वास्तिक बनाया और मेहंदी या सिंदूर से अंगुली से दस बिंदिया बनाई। पूजा सामग्री में रोली, मौली, सुपारी, चावल, दीप, नैवेद्य, धुप, अगरबत्ती लेकर महिलाओं ने कच्चे सूत का डोरा लाकर डोरे की कहानी सुनी और कहीं। इसके बाद सूत का बना श्वेत धागे में गांठ लगाई और उसे हल्दी में रंगा। इस धागे को दशा माता की बेल कहा जाता हैं। धागे की पूजा की और डोरे में 10 गांठ लगाकर गले में बांध ली। इसके बाद धागे को पूरे साल कभी न उतारने का संकल्प लिया। महिलाओं ने पीपल की पूजा कर 10 बार पीपल की परिक्रमा करते हुए उस पर सूत लपेटा। मान्यता है कि आज के दिन दशा माता की पूजा करने से दशा माता की कृपा होती है।कहां जाता है कि पूजा करने घर में सुख शांति और समृद्धि आती है। सुहागिन महिलाओं ने आज इस डोरे की पूजा के बाद पूजन स्थल पर नल-दमयंती की कथा सुनी। इसके बाद महिलाएं अपने घरों पर हल्दी और कुमकुम के छापे लगाए।
मांडू में दशा माता पर्वः महिलाओं ने ग्रहों के दोष और परेशानियों को दूर करने के लिए व्रत रख की पूजा-अर्चना, पीपल के पेड़ की परिक्रमा करते हुए लपेटा सूत मांडू में दशा माता पर्वः महिलाओं ने ग्रहों के दोष और परेशानियों को दूर करने के लिए व्रत रख की पूजा-अर्चना, पीपल के पेड़ की परिक्रमा करते हुए लपेटा सूत राहुल सेन मांडव मो 9669141814 मांडू न्यूज/मांडू नगर और आसपास के क्षेत्र में महिलाओं ने शुक्रवार को दशा माता का व्रत कर पूजा-अर्चना की। इस
दौरान महिलाओं ने मांडू के प्राचीन राम मंदिर के पीछे हनुमान जी परिसर में पीपल के पेड़ की पूजा की। मान्यता है कि इस व्रत को रखने और देवी की पूजा से ग्रहों के दोष और परेशानियां खत्म होती है। कई महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए भी व्रत करती है। इस विधि से की दशा माता की पूजा-अर्चना महिलाएं सुबह सूर्योदय से पूर्व उठी और व्रत का संकल्प लिया। पूजा करते समय दीवार पर स्वास्तिक बनाया और
मेहंदी या सिंदूर से अंगुली से दस बिंदिया बनाई। पूजा सामग्री में रोली, मौली, सुपारी, चावल, दीप, नैवेद्य, धुप, अगरबत्ती लेकर महिलाओं ने कच्चे सूत का डोरा लाकर डोरे की कहानी सुनी और कहीं। इसके बाद सूत का बना श्वेत धागे में गांठ लगाई और उसे हल्दी में रंगा। इस धागे को दशा माता की बेल कहा जाता हैं। धागे की पूजा की और डोरे में 10 गांठ लगाकर गले में बांध ली। इसके बाद धागे को पूरे साल कभी न
उतारने का संकल्प लिया। महिलाओं ने पीपल की पूजा कर 10 बार पीपल की परिक्रमा करते हुए उस पर सूत लपेटा। मान्यता है कि आज के दिन दशा माता की पूजा करने से दशा माता की कृपा होती है।कहां जाता है कि पूजा करने घर में सुख शांति और समृद्धि आती है। सुहागिन महिलाओं ने आज इस डोरे की पूजा के बाद पूजन स्थल पर नल-दमयंती की कथा सुनी। इसके बाद महिलाएं अपने घरों पर हल्दी और कुमकुम के छापे लगाए।
- दसवीं की छात्रा से रेप का आरोपी गिरफ्तारः पीथमपुर में लड़की ने परीक्षा केंद्र पर बच्चे को जन्म दिया था राहुल सेन मांडव मो 9669141814 धार पीथमपुर न्यूज/पीथमपुर और बेटमा पुलिस ने दसवीं की छात्रा से बलात्कार के आरोपी कान्हा बर्मन को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला पिछले महीने तब चर्चा में आया था, जब 10वीं की बोर्ड परीक्षा के दौरान छात्रा ने परीक्षा केंद्र के वॉशरूम में एक बच्चे को जन्म दिया था। नाबालिग छात्रा ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि आरोपी कान्हा बर्मन ने उसे बहला-फुसलाकर जीवन ज्योति कॉलोनी स्थित अपने किराए के कमरे पर ले गया था। वहां उसने करीब डेढ़ साल तक छात्रा के साथ लगातार गलत काम किया। परीक्षा के दौरान हुआ था खुलासा यह मामला 24 फरवरी 2026 को सामने आया था। छात्रा पीथमपुर के एक निजी स्कूल में दसवीं का पेपर दे रही थी, तभी अचानक तबीयत बिगड़ने पर वह वॉशरूम गई और वहां एक नवजात शिशु को जन्म दिया। इसके बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए जांच शुरू की और पॉक्सो एक्ट सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया। मनावर से हुई गिरफ्तारी बेटमा थाना प्रभारी के नेतृत्व में बनी पुलिस टीम ने आरोपी की तलाश में कई जगहों पर दबिश दी। 12 मार्च 2026 को पुलिस ने 20 वर्षीय आरोपी कान्हा बर्मन को धार जिले के मनावर क्षेत्र से धरदबोचा। आरोपी मूल रूप से पेटलावद केग्राम अंजनबयडा का रहने वाला है। गिरफ्तारी के बाद शुक्रवार को आरोपी को देपालपुर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है।3
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- आदिवासी समाज ने डीजे, दारू, दहेज पर लगाया प्रतिबंधः मांडू में सामाजिक सुधार की पहल; उल्लंघन पर 25 हजार का जुर्माना राहुल सेन मांडव मो 9669141814 मांडू न्यूज/नालछा ब्लॉक के ग्राम सुलीबयड़ी में आयोजित एक पारंपरिक ग्राम सभा ने आदिवासी समाज में व्याप्त कुरीतियों को जड़ से मिटाने का निर्णय लिया है। समाज ने विवाह समारोहों में डीजे, शराब और दहेज की बढ़ती प्रथा (3D - दहेज, दारू, डीजे) पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का संकल्प लिया है। पारंपरिक वाद्ययंत्रों को बचाने डीजे पर रोक ग्राम सभा में सर्वसम्मति से तय किया गया कि अब विवाह कार्यक्रमों में आधुनिक डीजे और लाउड साउंड सिस्टम का उपयोग नहीं होगा। ग्रामीणों का मानना है कि डीजे के कारण आदिवासी संस्कृति की पहचान 'ढोल और मांदल' जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्र विलुप्त हो रहे हैं। इस निर्णय से न केवल शोर कम होगा, बल्कि अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी पुनर्जीवित किया जा सकेगा।दहेज की सीमा तय, शराब पिलाने पर भारी दंड फिजूलखर्ची और आर्थिक बोझ को कम करने के लिए दहेज की अधिकतम राशि 80 हजार रुपए निर्धारित की गई है। इसके साथ ही, शादी समारोहों में शराब पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी। यदि कोई व्यक्ति शराब पीते या पिलाते हुए पाया गया, तो उस पर 25 हजार रुपए का दंड लगाया जाएगा। बुजुर्गों के अनुसार, भारी दहेज के कारण कई परिवारों को अपने खेत और पशु बेचने पड़ते हैं, जिससे समाज में गरीबी और पलायन बढ़ता है। आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण का लक्ष्य आदिवासी संगठनों ने अब इस मुहिम को गांव-गांव ले जाने का निर्णय लिया है। जागरूकता अभियान के माध्यम से लोगों को अधिक दहेज लेने के दुष्परिणामों के बारे में समझाया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि नशा और दिखावे से दूर रहने से परिवार आर्थिक रूप से मजबूत होंगे और समाज में एकता व अनुशासन स्थापित होगा। दहेज प्रथा में रियायतः प्रेम विवाह और सामान्य विवाह दोनों में ही दहेज की राशि कम कर संतुलन बनाने का प्रयास। संस्कृति का पुनरुत्थानः आधुनिकता के दिखावे को छोड़कर सादगी और मूल परंपराओं की ओर वापसी।कठोर नियमः सामाजिक मर्यादा तोड़ने या गांव में लड़ाई-झगड़ा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान।2