साच उपतहसील में नासिर हुसैन ने संभाला नायब तहसीलदार का कार्यभार, अब राजस्व कार्य स्थानीय स्तर पर होंगे। कृष्ण चंद राणा हिमाचल सरकार द्वारा नासिर हुसैन को पुनर्नियुक्ति देकर साच उपतहसील में नायब तहसीलदार के पद पर तैनात किया गया है। पांगी उपमंडल के साच क्षेत्र के लोगों को अब राजस्व संबंधी कार्यों के लिए पांगी मुख्यालय किलाड़ नहीं जाना पड़ेगा। साच उपतहसील में नायब तहसीलदार के रूप में नासिर हुसैन ने विधिवत कार्यभार संभाल लिया है। नासिर हुसैन ने 27 फरवरी 2026 को पांगी मुख्यालय किलाड़ में अपनी ज्वाइनिंग दी थी और मंगलवार को साच उपतहसील में पदभार ग्रहण किया। उनके कार्यभार संभालने से अब राजस्व संबंधी कार्य नियमित रूप से संचालित होने लगे हैं। हिमाचल सरकार द्वारा उन्हें पुनर्नियुक्ति पर जिला चंबा के साच उपतहसील में भेजा गया है। हुसैन वर्ष 2022 में परागपुर से नायब तहसीलदार पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उनका प्रशासनिक अनुभव लंबा और व्यापक रहा है। पुनः सेवा में लौटते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मुख्य उद्देश्य क्षेत्रवासियों को बेहतर, पारदर्शी और समयबद्ध राजस्व सेवाएं उपलब्ध करवाना है, ताकि आम नागरिकों को छोटे-बड़े कार्यों के लिए अनावश्यक भटकना न पड़े। गौरतलब है कि नवंबर 2025 में हिमाचल सरकार द्वारा साच उपतहसील का विधिवत गठन किया गया था। इस निर्णय से क्षेत्र के हजारों लोगों को बड़ी राहत मिली थी, क्योंकि इससे पहले राजस्व संबंधी कार्यों के लिए उन्हें पांगी मुख्यालय किलाड़ जाना पड़ता था। अब नायब तहसीलदार की नियुक्ति से लोगों को स्थानीय स्तर पर ही सुविधाएं मिलेंगी। हालांकि, उपतहसील के गठन के बाद भी नायब तहसीलदार एवं अन्य स्टाफ की नियमित नियुक्ति न होने के कारण पांगी तहसील से नायब तहसीलदार सप्ताह में दो दिन स्टाफ सहित साच में बैठकर कार्य निपटाते थे। इसमें राजस्व अभिलेखों का संधारण, इंतकाल, नामांतरण, प्रमाण पत्र जारी करना, आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र बनाना तथा भूमि विवादों की सुनवाई जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल थे। अब ये सभी कार्य प्रत्येक कार्यदिवस पर किए जाएंगे। फिलहाल सरकार द्वारा केवल नायब तहसीलदार की नियुक्ति के आदेश जारी किए गए हैं, जबकि अन्य आवश्यक स्टाफ की तैनाती अभी नहीं हो पाई है। उपतहसील में कर्मचारियों की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। राजस्व विभाग के सुचारू संचालन के लिए लिपिकीय स्टाफ, कानूनगो, पटवारी तथा अन्य सहयोगी कर्मचारियों की नियुक्ति आवश्यक है। इसके अतिरिक्त कार्यालय में फर्नीचर, रिकॉर्ड रखने के लिए अलमारियां, बैठने की समुचित व्यवस्था और अन्य आधारभूत सुविधाओं का भी अभाव है। साच में सरकारी आवास सुविधा न होने से कर्मचारियों एवं अधिकारियों को भविष्य में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कार्यभार संभालने के बाद नायब तहसीलदार नासिर हुसैन ने कहा कि नवंबर माह में साच में उपतहसील खोली गई है, लेकिन कार्यालय भवन का निर्माण और पूर्ण स्टाफ की तैनाती अभी शेष है। उन्होंने बताया कि इन सभी आवश्यकताओं के संबंध में आवासीय आयुक्त पांगी तथा उपायुक्त चंबा के माध्यम से सरकार को अवगत करवाया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि साच उपतहसील के अंतर्गत आने वाले चारों पटवार सर्कलों में राजस्व कार्यों के निष्पादन में किसी भी प्रकार की कमी नहीं छोड़ी
साच उपतहसील में नासिर हुसैन ने संभाला नायब तहसीलदार का कार्यभार, अब राजस्व कार्य स्थानीय स्तर पर होंगे। कृष्ण चंद राणा हिमाचल सरकार द्वारा नासिर हुसैन को पुनर्नियुक्ति देकर साच उपतहसील में नायब तहसीलदार के पद पर तैनात किया गया है। पांगी उपमंडल के साच क्षेत्र के लोगों को अब राजस्व संबंधी कार्यों के लिए पांगी मुख्यालय किलाड़ नहीं जाना पड़ेगा। साच उपतहसील में नायब तहसीलदार के रूप में नासिर हुसैन ने विधिवत कार्यभार संभाल लिया है। नासिर हुसैन ने 27 फरवरी 2026 को पांगी मुख्यालय किलाड़ में अपनी ज्वाइनिंग दी थी और मंगलवार को साच उपतहसील में पदभार ग्रहण किया। उनके कार्यभार संभालने से अब राजस्व संबंधी कार्य नियमित रूप से संचालित होने लगे हैं। हिमाचल सरकार द्वारा उन्हें पुनर्नियुक्ति पर जिला चंबा के साच उपतहसील में भेजा गया है। हुसैन वर्ष 2022 में परागपुर से नायब तहसीलदार पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उनका प्रशासनिक अनुभव लंबा और व्यापक रहा है। पुनः सेवा में लौटते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मुख्य उद्देश्य क्षेत्रवासियों को बेहतर, पारदर्शी और समयबद्ध राजस्व सेवाएं उपलब्ध करवाना है, ताकि आम नागरिकों को छोटे-बड़े कार्यों के लिए अनावश्यक भटकना न पड़े। गौरतलब है कि नवंबर 2025 में हिमाचल सरकार द्वारा साच उपतहसील का विधिवत गठन किया गया था। इस निर्णय से क्षेत्र के हजारों लोगों को बड़ी राहत मिली थी, क्योंकि इससे पहले राजस्व संबंधी कार्यों के लिए उन्हें पांगी मुख्यालय किलाड़ जाना पड़ता था। अब नायब तहसीलदार की नियुक्ति से लोगों को स्थानीय स्तर पर ही सुविधाएं मिलेंगी। हालांकि, उपतहसील के गठन के बाद भी नायब तहसीलदार एवं अन्य स्टाफ की नियमित नियुक्ति न होने के कारण पांगी तहसील से नायब तहसीलदार सप्ताह में दो दिन स्टाफ सहित साच में बैठकर कार्य निपटाते थे। इसमें राजस्व अभिलेखों का संधारण, इंतकाल, नामांतरण, प्रमाण पत्र जारी करना, आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र बनाना तथा भूमि विवादों की सुनवाई जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल थे। अब ये सभी कार्य प्रत्येक कार्यदिवस पर किए जाएंगे। फिलहाल सरकार द्वारा केवल नायब तहसीलदार की नियुक्ति के आदेश जारी किए गए हैं, जबकि अन्य आवश्यक स्टाफ की तैनाती अभी नहीं हो पाई है। उपतहसील में कर्मचारियों की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। राजस्व विभाग के सुचारू संचालन के लिए लिपिकीय स्टाफ, कानूनगो, पटवारी तथा अन्य सहयोगी कर्मचारियों की नियुक्ति आवश्यक है। इसके अतिरिक्त कार्यालय में फर्नीचर, रिकॉर्ड रखने के लिए अलमारियां, बैठने की समुचित व्यवस्था और अन्य आधारभूत सुविधाओं का भी अभाव है। साच में सरकारी आवास सुविधा न होने से कर्मचारियों एवं अधिकारियों को भविष्य में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कार्यभार संभालने के बाद नायब तहसीलदार नासिर हुसैन ने कहा कि नवंबर माह में साच में उपतहसील खोली गई है, लेकिन कार्यालय भवन का निर्माण और पूर्ण स्टाफ की तैनाती अभी शेष है। उन्होंने बताया कि इन सभी आवश्यकताओं के संबंध में आवासीय आयुक्त पांगी तथा उपायुक्त चंबा के माध्यम से सरकार को अवगत करवाया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि साच उपतहसील के अंतर्गत आने वाले चारों पटवार सर्कलों में राजस्व कार्यों के निष्पादन में किसी भी प्रकार की कमी नहीं छोड़ी
- हिमालय की दुर्गम और प्राकृतिक रूप से समृद्ध घाटियों में वन्यजीवों की मौजूदगी एक सुखद संकेत मानी जाती है। इसी कड़ी में 3 अप्रैल 2026 को पांगी घाटी के चस्क क्षेत्र में एक स्थानीय व्यक्ति द्वारा हिमालयन आइबेक्स (Himalayan Ibex) का कैमरे में कैद होना न केवल रोमांचक क्षण है, बल्कि यह क्षेत्र में जैव विविधता की समृद्धि और संरक्षण प्रयासों की सफलता को भी दर्शाता है। बताया जा रहा है कि यह दुर्लभ दृश्य चस्क की ऊंची पहाड़ियों में देखा गया, जहां आइबेक्स अपने प्राकृतिक आवास में स्वतंत्र रूप से विचरण करता नजर आया। हिमालयन आइबेक्स एक जंगली बकरी प्रजाति है, जो ऊबड़-खाबड़ चट्टानी इलाकों में रहने के लिए जानी जाती है और इसे देख पाना बेहद कठिन होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की वन्यजीव उपस्थिति यह संकेत देती है कि क्षेत्र का पर्यावरण अभी भी संतुलित है और मानव हस्तक्षेप सीमित है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने इस दुर्लभ क्षण को साझा करते हुए वन्यजीव पर्यटन (Wildlife Tourism) को बढ़ावा देने की अपील की है, ताकि लोग प्रकृति के करीब आ सकें और इसके संरक्षण के प्रति जागरूक बनें। पांगी घाटी, जो अपनी अनछुई सुंदरता और जैव विविधता के लिए जानी जाती है, अब धीरे-धीरे एडवेंचर और इको-टूरिज्म का केंद्र बनती जा रही है। ऐसे में हिमालयन आइबेक्स जैसे दुर्लभ जीवों की मौजूदगी पर्यटकों को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभा सकती है। स्थानीय प्रशासन और वन विभाग से भी यह अपेक्षा की जा रही है कि वे इस दिशा में ठोस कदम उठाएं, ताकि वन्यजीवों का संरक्षण सुनिश्चित हो सके और क्षेत्र में जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा मिल सके। 👉 यह दृश्य न केवल एक फोटोग्राफर की उपलब्धि है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है, जो हमें प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का एहसास कराता है।1
- Post by Varun Slathia1
- नेरचौक में ठेकेदारों का प्रदर्शन 🔥 31 मार्च तक पेमेंट न मिलने पर फूटा गुस्सा | Mandi News Himachal1
- Crafted in wood, designed for timeless living. This wooden dining table blends warmth, durability, and modern elegance—perfect for everyday moments and special gatherings. For interior design ideas and customized solutions, contact Decoory Interiors 📩 DM for inquiries 📞 Contact us: 9821545511 📍Location: GF -71, Gaur City Center, Greater Noida West, Gautam Buddha Nagar, Uttar Pradesh 2013181
- सुजानपुर सुजानपुर के विश्व प्रसिद्ध काली माता मंदिर प्रांगण में शनिवार को विशेष पूजा अर्चना हवन इत्यादि करने के बाद वार्षिक भंडारा आयोजित किया गया मंदिर परिसर के बाहर सैकड़ो लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया बताते चले की मंदिर कमेटी द्वारा प्रतिवर्ष नवरात्र संपन्न होने के बाद वार्षिक भंडारा आयोजित किया जाता है जिसके चलते यह कार्यक्रम आयोजित हुआ भंडारा शुरू होने से पहले मंदिर परिसर में विशेष पूजा पाठ हवन इत्यादि करवाया गया यहां पंडित आचार्य संजय शर्मा द्वारा तमाम वैदिक रस्मों को निभाते हुए सर्वजन मंगल कल्याण की कामना की गई3
- देवभूमि कुल्लू हिमाचल प्रदेश1
- हमीरपुर कांगड़ा घाटी में 4 अप्रैल 1905 को आए विनाशकारी भूकंप की 121वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य पर शनिवार को यहां उपायुक्त कार्यालय परिसर में एक जागरुकता कार्यक्रम, रैली और मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस अवसर पर मिनी सचिवालय परिसर में मॉक ड्रिल करवाई गई तो भंूकंप आने पर किस तरह से बचाव किया जाए इस पर कर्मचारियों व लोगों को जागरूक किया गया है। एसडीएम संजीत सिंह की देखरेख में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दमकल विभाग, पुलिस व कर्मचारियों ने मॉक ड्रिल में हिस्सा लिया और लोगों को बचाव की जानकारी दी। इसके बाद उपायुक्त कार्यालय से लेकर नगर निगम कार्यालय तक एक जागरुकता रैली भी निकाली गई। रैली के बाद उपायुक्त कार्यालय परिसर में एक मॉक ड्रिल भी की गई, जिसमें होमगार्ड्स और अग्निशमन विभाग के बचाव दल ने रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया। उपायुक्त एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की अध्यक्ष गंधर्वा राठौड़ ने कहा है कि 121 वर्ष पूर्व कांगड़ा में आया विनाशकारी भूकंप एक बहुत बड़ी त्रासदी थी। उस समय आपदा प्रबंधन के लिए न तो कोई सिस्टम विकसित हुआ था और न ही आम लोगों में इसके प्रति जागरुकता थी। लेकिन, आज के दौर में किसी भी तरह की आपदा से निपटने के लिए हर जिला स्तर पर डीडीएमए से लेकर उपमंडल स्तर तक एक प्रभावी तंत्र और आधुनिक संसाधन उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि भूकंप और अन्य आपदाओं के दौरान बचाव एवं राहत कार्यों को तत्परता तथा प्रभावी ढंग से अंजाम देने के लिए हमारी पहले से ही तैयारी होनी चाहिए, ताकि वास्तव में आपदा आने पर जान-माल के नुक्सान को कम किया जा सके। इस अवसर पर एसडीएम संजीत सिंह ने उपायुक्त, अन्य अधिकारियों, आईटीआई हमीरपुर और अन्य शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों का स्वागत किया तथा कांगड़ा घाटी की भूकंप त्रासदी के इतिहास पर प्रकाश डाला।2
- करीब दो हफ्तों तक चली लगातार मेहनत, चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों और कठिन संघर्ष के बाद आज विद्युत विभाग ने साच खास पावर हाउस को पूरी तरह बहाल कर क्षेत्र में बिजली आपूर्ति सुचारू कर दी है। भूस्खलन के कारण ठप पड़ी इस महत्वपूर्ण परियोजना को फिर से चालू करने के लिए विभागीय अधिकारियों, तकनीकी कर्मचारियों और ठेकेदार की टीम ने दिन-रात एक कर दिया। बताया जा रहा है कि साच घराट स्थित पावर हाउस में अचानक हुए भूस्खलन ने भारी नुकसान पहुंचाया था, जिससे बिजली उत्पादन पूरी तरह रुक गया था। इस घटना के चलते साच खास सहित आसपास के कई गांवों में अंधेरा छा गया था और लोगों को रोजमर्रा के कार्यों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। विशेष रूप से विद्यार्थियों, छोटे कारोबारियों और घरेलू उपभोक्ताओं को इस दौरान काफी परेशानी झेलनी पड़ी। विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता सुरेश चंदेल ने जानकारी देते हुए बताया कि जैसे ही भूस्खलन की सूचना मिली, विभाग ने तत्काल मौके पर टीम भेजकर स्थिति का आकलन किया और बिना देरी किए बहाली कार्य शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र, लगातार बदलते मौसम और तकनीकी चुनौतियों के बावजूद विभाग की टीम ने पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया। उन्होंने आगे कहा कि इस दौरान क्षतिग्रस्त उपकरणों की मरम्मत, मलबा हटाने, लाइन व्यवस्था को दुरुस्त करने और पावर हाउस की संरचना को सुरक्षित बनाने जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य एक साथ किए गए। यह कार्य बेहद जोखिमपूर्ण था, लेकिन टीम की तत्परता और समन्वय के कारण इसे सफलतापूर्वक पूरा किया जा सका। वहीं, ठेकेदार बलदेव ने बताया कि पिछले दो हफ्तों से मजदूरों और तकनीकी स्टाफ ने विपरीत परिस्थितियों में लगातार काम किया। कई बार मौसम ने भी बाधा डाली, लेकिन टीम ने हार नहीं मानी। उन्होंने कहा कि सभी ने मिलकर लक्ष्य तय किया था कि जल्द से जल्द क्षेत्र में बिजली बहाल की जाए, और आज वह प्रयास सफल हुआ। बिजली आपूर्ति बहाल होने से स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। लंबे समय तक अंधेरे में रहने के बाद अब जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य होने लगा है। लोगों ने विद्युत विभाग और कार्य में जुटी टीम की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बिजली बहाली से न केवल घरों में रोशनी लौटी है, बल्कि मोबाइल नेटवर्क, छोटे उद्योग और बच्चों की पढ़ाई जैसी आवश्यक सेवाएं भी फिर से पटरी पर आ जाएंगी।1