भीलवाड़ा शहर के भीमगंज थाना क्षेत्र में स्थित एक कैफे में मामूली कहासुनी के बाद युवकों के बीच विवाद इतना बढ़ा कि चाकूबाजी तक पहुँच गया। इस घटना में एक युवक ने दो अन्य युवकों पर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। हमलावर वारदात को अंजाम देने के बाद मौके से फरार हो गया। घायल युवकों को भीलवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, भीमगंज थाना प्रभारी सुनील चौधरी ने तत्काल मौके पर पहुँचकर घटना की जानकारी ली। घायल तोहिब हुसैन ने रविवार शाम करीब 7 बजे जिला अस्पताल में बताया कि वह और उसके दोस्त जाफर अंसारी गुलाब वाटिका के पास स्थित जनता टी कैफे में चाय पी रहे थे, तभी आफताब वहाँ आया और उनके आपस में मज़ाक करने के दौरान ही गाली-गलौज करने लगा। तोहिब के अनुसार, आफताब ने बाद में उन पर चाकू से हमला कर दिया, जिससे जाफर और वह दोनों घायल हो गए, और फिर हमलावर वहाँ से भाग निकला।
भीलवाड़ा शहर के भीमगंज थाना क्षेत्र में स्थित एक कैफे में मामूली कहासुनी के बाद युवकों के बीच विवाद इतना बढ़ा कि चाकूबाजी तक पहुँच गया। इस घटना में एक युवक ने दो अन्य युवकों पर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। हमलावर वारदात को अंजाम देने के बाद मौके से फरार हो गया। घायल युवकों को भीलवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, भीमगंज थाना प्रभारी सुनील चौधरी ने तत्काल मौके पर पहुँचकर घटना की जानकारी ली। घायल तोहिब हुसैन ने रविवार शाम करीब 7 बजे जिला अस्पताल में बताया कि वह और उसके दोस्त जाफर अंसारी गुलाब वाटिका के पास स्थित जनता टी कैफे में चाय पी रहे थे, तभी आफताब वहाँ आया और उनके आपस में मज़ाक करने के दौरान ही गाली-गलौज करने लगा। तोहिब के अनुसार, आफताब ने बाद में उन पर चाकू से हमला कर दिया, जिससे जाफर और वह दोनों घायल हो गए, और फिर हमलावर वहाँ से भाग निकला।
- भीलवाड़ा शहर के सुभाष नगर स्थित छोटी पुलिया के पास बनी पीएचईडी की पानी की टंकी की सीढ़ियां शनिवार देर रात तेज तूफान और बारिश के दौरान अचानक भरभराकर ढह गईं। गनीमत रही कि घटना के समय वहां कोई मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। हालांकि, इस हादसे ने विभागीय रखरखाव और पुरानी संरचनाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 25 वर्ष पुरानी इस पानी की टंकी की सीढ़ियां शनिवार और रविवार की मध्यरात्रि लगभग 1 बजे एक तेज आवाज के साथ गिरीं। जानकारी के अनुसार, टंकी के समीप एक ट्रांसफार्मर भी लगा हुआ है, जिससे स्थिति और अधिक जोखिमपूर्ण हो सकती थी। इस घटना के बाद आसपास के क्षेत्र में लोगों में दहशत का माहौल है। चम्बल पम्पिंग स्टेशन पर रात्रि ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारी किशन धोबी ने रविवार दोपहर करीब 12 बजे बताया कि रात 1 बजे उन्हें जोरदार धमाके जैसी आवाज सुनाई दी थी, जिसके बाद बाहर निकलकर देखने पर उन्होंने पानी की टंकी की सीढ़ियां पूरी तरह ज़मीन पर ढही हुई पाईं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह टंकी काफी पुरानी हो चुकी थी और इसकी जर्जर हालत को लेकर पहले भी चिंता जताई गई थी, लेकिन समय रहते मरम्मत और मजबूतीकरण का कार्य नहीं किया गया। लोगों ने प्रशासन और पीएचईडी विभाग से इस मामले की जांच करने, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और शहर में मौजूद अन्य जर्जर जल संरचनाओं का भी तत्काल सर्वे कराने की मांग की है।1
- चित्तौड़गढ़ जिले में दिनभर की प्रमुख खबरों में मंत्री और एसपी के बीच विवाद ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है, जिससे इस मुद्दे पर सियासत काफी गरमा गई है। इसके अतिरिक्त, शहर में जोहर स्मृति संस्थान की नई कार्यकारिणी की घोषणा की गई। सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों के तहत महारानी अहिल्याबाई होल्कर की जयंती धूमधाम से मनाई गई, जबकि विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए एक अभियान भी चलाया गया। सेवा कार्यों के क्रम में माहेश्वरी महिला मंडल ने भीषण गर्मी को देखते हुए शीतल छाछ वितरित की।1
- पोस्ट में आज के मनमोहक दर्शन का अनुभव साझा किया गया है। इसके साथ ही, व्यक्ति ने जीवन को बहुत करीब से देखने का दावा करते हुए एक गहन दार्शनिक विचार व्यक्त किया है, जिसमें 'साँवरिया' को संबोधित करते हुए कहा गया है कि लोग पल भर में पराये हो जाते हैं।1
- पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए 20 किलो ब्राउन शुगर बरामद की है। इस अभियान के दौरान, 5 तस्करों को भी गिरफ्तार किया गया है।1
- चित्तौड़गढ़ जिला पुलिस ने राज्य सरकार के निर्देशानुसार संचालित "वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान" के तहत एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल की है। रविवार सुबह दुर्ग स्थित कालिका माता मंदिर के सामने प्राचीन जलाशय और बावड़ी परिसर में वर्षा जल संरक्षण और स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान जिला पुलिस के अधिकारियों और पुलिस कार्मिकों ने सामूहिक श्रमदान करते हुए जलाशय और आसपास के क्षेत्र की साफ-सफाई की। जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि अभियान के तहत बावड़ी और जल स्रोतों के संरक्षण, वर्षा जल संचयन तथा पर्यावरण संरक्षण के महत्व के संबंध में जनजागरूकता का संदेश भी दिया गया। एसपी धर्मेंद्र सिंह के निर्देशानुसार, लाइन आरआई अनिल पांडे के नेतृत्व में जिला पुलिस के कुल 60 पुलिस कार्मिकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। उन्होंने परिसर से कचरा और झाड़-झंखाड़ हटाकर स्वच्छता का कार्य किया। पुलिस अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि जल संरक्षण वर्तमान समय की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है और प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम के दौरान जल संरक्षण, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने का आह्वान किया गया। पुलिस अधिकारियों और कार्मिकों ने आमजन से जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने में सहयोग करने की अपील की। जिला पुलिस द्वारा आयोजित इस अभियान के माध्यम से जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति एक सकारात्मक संदेश दिया गया, साथ ही समाज में जनभागीदारी बढ़ाने का प्रयास भी किया गया।1
- राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के आसींद में एक 110 फीट गहरा कुआं ढह गया है। इस घटना से किसानों को लाखों रुपये का भारी नुकसान हुआ है, जिसके बाद उन्होंने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है।1
- राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा माध्यमिक शिक्षा विभाग की प्राध्यापक, प्राध्यापक (कृषि) एवं कोच प्रतियोगी परीक्षा-2025 भीलवाड़ा जिले में रविवार से प्रारंभ हो गई है। परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए प्रशासन और शिक्षा विभाग ने व्यापक व्यवस्थाएं की हैं। जिले में कुल 20 परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 14 सरकारी और 6 निजी विद्यालय शामिल हैं। रविवार को दोनों पारियों की परीक्षा में कुल 9264 अभ्यर्थी शामिल होंगे, जिसमें प्रथम पारी में 6308 और द्वितीय पारी में 2956 परीक्षार्थी परीक्षा देंगे। परीक्षा केंद्रों पर सुबह से ही अभ्यर्थियों की भीड़ देखी गई और सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रवेश प्रक्रिया शुरू की गई। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, राजेंद्र मार्ग के प्रधानाचार्य राजेंद्र सिंह गहलोत ने बताया कि उनके केंद्र पर 528 अभ्यर्थी आवंटित किए गए थे। प्रथम पारी के लिए सुबह 7:30 बजे से प्रवेश शुरू हुआ और आयोग के निर्देशानुसार परीक्षा प्रारंभ होने से एक घंटा पूर्व, सुबह 9 बजे प्रवेश बंद कर दिया गया। परीक्षा केंद्र पर प्रशासन, पुलिस प्रशासन और विद्यालय स्टाफ द्वारा सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं। अभ्यर्थियों को वीडियोग्राफी, सघन तलाशी और सुपरवाइजर व फ्लाइंग स्क्वॉड की निगरानी के बाद ही केंद्र में प्रवेश दिया गया। RPSC की गाइडलाइन के अनुसार, अभ्यर्थियों के लिए प्रवेश पत्र, एक मूल पहचान पत्र और नवीनतम पासपोर्ट साइज फोटो लाना अनिवार्य किया गया है, तथा निर्धारित दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही उन्हें परीक्षा केंद्र में प्रवेश मिला। प्रथम पारी में सामान्य ज्ञान एवं सामान्य विज्ञान विषय की परीक्षा सुबह 10 बजे से 11:30 बजे तक आयोजित की गई। वहीं, द्वितीय पारी में हिंदी विषय की परीक्षा दोपहर 2:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक आयोजित की जाएगी। परीक्षा के शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष संचालन के लिए सभी केंद्रों पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं और आयोग द्वारा जारी निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है।1
- यह प्रसिद्ध कहावत, 'जाको राखे साइयां मार सके ना कोई, बाल ना बांका कर सके चाहे जग बैरी होई', ईश्वर में गहरे विश्वास और उसकी सर्वोपरि सुरक्षा को दर्शाती है। इसका अर्थ यह है कि जिसे स्वयं ईश्वर बचाना चाहे, उसे संसार का कोई भी शत्रु, चाहे वह कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, किसी भी प्रकार की हानि नहीं पहुँचा सकता। यह लोकोक्ति इस अटल विश्वास को व्यक्त करती है कि ईश्वरीय संरक्षण प्राप्त व्यक्ति हमेशा सुरक्षित रहता है और उस पर कोई विपदा प्रभावी नहीं होती।1
- पत्नी द्वारा कथित प्रताड़ना, झूठे मामलों के डर और कथित कानूनी दुरुपयोग से परेशान होकर कई पति इच्छा मृत्यु मांगने पर मजबूर हो रहे हैं। इसी कड़ी में, गुजरात के सूरत में किरीट पटेल नामक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की कथित प्रताड़ना और पुलिस से मदद न मिलने का आरोप लगाते हुए कलेक्टर को इच्छा मृत्यु की अर्जी दी है। इससे पहले, मध्य प्रदेश के शिवपुरी में भी एक युवक ने पत्नी द्वारा झूठे केस में फंसाने की धमकी और मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर जनसुनवाई में सुरक्षा की गुहार लगाई थी। सवाल यह है कि जब कोई पुरुष बार-बार अपनी पीड़ा लेकर पुलिस, प्रशासन और अदालतों के चक्कर काटने के बाद भी खुद को असहाय महसूस करता है, तब उसकी आवाज कौन सुनेगा? महिलाओं की सुरक्षा के लिए बने कानून जरूरी हैं, लेकिन यदि कहीं उनका कथित दुरुपयोग होता है तो उस पर भी उतनी ही गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए। न्याय का मतलब केवल एक पक्ष की सुनवाई नहीं, बल्कि हर पीड़ित को समान संवेदना और निष्पक्ष सुनवाई मिलना है। यह एक गंभीर प्रश्न है कि कितने और पति अपनी जान देने की बात कहेंगे, तब जाकर देश पुरुषों के मानसिक उत्पीड़न और आत्महत्या जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा करेगा?1