पुलिस अनुसंधान अधिकारी पर पसंदीदा वकील नियुक्त करने का दबाव बनाने का गंभीर आरोप* *पुलिस अनुसंधान अधिकारी पर पसंदीदा वकील नियुक्त करने का दबाव बनाने का गंभीर आरोप* *अखिल भारतीय संयुक्त अधिवक्ता मंच के प्रदेश सचिव मनोज आहूजा एडवोकेट ने DGP राजस्थान को लिखा पत्र* *“पुलिस का काम निष्पक्ष अनुसंधान करना है,अधिवक्ता तय करना नहीं”_मनोज आहूजा* केकड़ी (1 अगस्त )सड़क दुर्घटना में मृतक के परिजनों पर मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण में एक विशेष अधिवक्ता को नियुक्त करने के लिए पुलिस अनुसंधान अधिकारी द्वारा कथित रूप से दबाव बनाने और बात नहीं मानने पर क्लेम प्रभावित करने की धमकी देने का गंभीर मामला सामने आया है। इस संबंध में अखिल भारतीय संयुक्त अधिवक्ता मंच के प्रदेश सचिव मनोज आहूजा एडवोकेट ने राजस्थान के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच करवाने, वर्तमान अनुसंधान अधिकारी को तत्काल बदलने तथा आरोप सही पाए जाने पर कठोर विभागीय एवं विधिक कार्रवाई करने की मांग की है। आहूजा ने बताया कि अजमेर जिले के भगवानपुरा,टांटोटी निवासी पूसाराम पुत्र सुखदेव गुर्जर के मामा के लड़के रामलाल पुत्र भोलूराम की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी।इस संबंध में 27 जुलाई 2026 को एमबीजीएच हॉस्पिटल, उदयपुर की मोर्चरी में पुलिस थाना खेरोदा के सहायक उप निरीक्षक के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी। आहूजा के अनुसार पीड़ित पक्ष द्वारा उन्हें दी गई जानकारी में आरोप लगाया गया है कि रिपोर्ट लेने के बाद संबंधित पुलिस अधिकारी ने बेहतर मोटर दुर्घटना क्लेम दिलाने की बात कहते हुए एक विशेष अधिवक्ता से फोन पर बातचीत करवाई।उक्त अधिवक्ता द्वारा कथित रूप से थाना एवं न्यायालय में अपनी अच्छी “सेटिंग” होने की बात कहते हुए अच्छा क्लेम दिलाने का दावा किया गया। मामले में पुलिस थाना खेरोदा द्वारा एफआईआर संख्या 130/2026 अंतर्गत धारा 281 एवं 106(1) भारतीय न्याय संहिता दर्ज कर अनुसंधान सहायक उप निरीक्षक अशोक कुमार को सौंपा गया। क्लेम प्रभावित करने की धमकी देने का आरोप आहूजा ने DGP को लिखे पत्र में कहा कि पीड़ित पक्ष के अनुसार अंतिम संस्कार के बाद अनुसंधान अधिकारी तथा संबंधित अधिवक्ता द्वारा लगातार फोन कर उसी अधिवक्ता को नियुक्त करने का कथित दबाव बनाया गया। आरोप है कि ऐसा नहीं करने पर क्लेम प्रभावित करने,प्रतिकूल रिपोर्ट प्रस्तुत करने तथा चश्मदीद गवाहों के संबंध में अनुसंधान को प्रभावित करने जैसी बातें कही गईं।जब पीड़ित पक्ष ने अपनी पसंद के अधिवक्ता के माध्यम से केकड़ी में दावा प्रस्तुत करने की बात कही तो कथित रूप से यह तक कहा गया कि जांच उनके हाथ में है और उनकी बात नहीं मानने पर “एक रुपया भी नहीं मिलेगा।” “चश्मदीद गवाह मैनेज” करने जैसी कथित बातचीत बेहद गंभीर : आहूजा आहूजा ने बताया कि 29 जुलाई को पीड़ित पक्ष के लोग थाना खेरोदा पहुंचे और अनुसंधान अधिकारी के साथ घटनास्थल पर गए।पीड़ित पक्ष का आरोप है कि नक्शा मौका तैयार करते समय भी दो प्रत्यक्षदर्शी गवाह लाने और संबंधित विशेष अधिवक्ता को नियुक्त करने का दबाव बनाया गया। आहूजा के अनुसार जब उन्होंने स्वयं अनुसंधान अधिकारी से दूरभाष पर बातचीत कर पूछा कि किसी विशेष अधिवक्ता को नियुक्त करने के लिए पीड़ित पक्ष पर दबाव क्यों बनाया जा रहा है,तब अनुसंधान अधिकारी द्वारा कथित रूप से संबंधित अधिवक्ता के स्थानीय होने, “चश्मदीद गवाह मैनेज” करवाने तथा मजिस्ट्रेट से “सेटिंग” होने जैसी बातें कही गईं। आहूजा ने कहा कि इन आरोपों की सत्यता की निष्पक्ष जांच अत्यंत आवश्यक है।यदि कोई पुलिस अधिकारी अनुसंधान की शक्ति का इस्तेमाल किसी विशेष अधिवक्ता को लाभ पहुंचाने अथवा पक्षकार की स्वतंत्र पसंद को प्रभावित करने के लिए करता है तो यह पुलिस व्यवस्था की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। “वकील चुनना पक्षकार का अधिकार,पुलिस अधिकारी का नहीं” प्रदेश सचिव मनोज आहूजा ने कहा— “पुलिस अधिकारी का दायित्व निष्पक्ष,स्वतंत्र और कानूनसम्मत अनुसंधान करना है।किसी नागरिक को यह बताना कि वह किस अधिवक्ता को नियुक्त करे और अधिवक्ता नियुक्त नहीं करने पर जांच अथवा क्लेम प्रभावित करने का भय दिखाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। पक्षकार किस अधिवक्ता से अपनी पैरवी करवाएगा, यह उसका स्वतंत्र निर्णय है।” उन्होंने कहा कि पुलिस एवं न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए इस प्रकार की शिकायतों को अत्यंत गंभीरता से लिया जाना चाहिए।यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध ऐसी कठोर कार्रवाई होनी चाहिए जिससे भविष्य में किसी पीड़ित परिवार पर इस प्रकार का दबाव बनाने का साहस कोई न कर सके। DGP से पांच प्रमुख मांगें आहूजा ने पुलिस महानिदेशक से पूरे प्रकरण की वरिष्ठ अधिकारी से निष्पक्ष जांच करवाने,अनुसंधान अधिकारी एवं संबंधित अधिवक्ता के बीच कथित मिलीभगत की जांच करने,पीड़ित पक्ष को किए गए फोन कॉल एवं धमकियों के आरोपों की जांच कराने, एफआईआर संख्या 130/2026 का अनुसंधान किसी अन्य निष्पक्ष अधिकारी को सौंपने तथा पीड़ित परिवार एवं गवाहों को किसी प्रकार की प्रतिशोधात्मक कार्रवाई से संरक्षण प्रदान करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने मांग की है कि राजस्थान पुलिस में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं कि कोई भी पुलिस अधिकारी किसी परिवादी,पीड़ित अथवा उसके परिवार पर किसी विशेष अधिवक्ता को नियुक्त करने के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दबाव नहीं बनाए। पत्र की प्रतिलिपि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन व महानिरीक्षक पुलिस,उदयपुर रेंज तथा पुलिस अधीक्षक,उदयपुर को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रेषित की गई है।
पुलिस अनुसंधान अधिकारी पर पसंदीदा वकील नियुक्त करने का दबाव बनाने का गंभीर आरोप* *पुलिस अनुसंधान अधिकारी पर पसंदीदा वकील नियुक्त करने का दबाव बनाने का गंभीर आरोप* *अखिल भारतीय संयुक्त अधिवक्ता मंच के प्रदेश सचिव मनोज आहूजा एडवोकेट ने DGP राजस्थान को लिखा पत्र* *“पुलिस का काम निष्पक्ष अनुसंधान करना है,अधिवक्ता तय करना नहीं”_मनोज आहूजा* केकड़ी (1 अगस्त )सड़क दुर्घटना में मृतक के परिजनों पर मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण में एक विशेष अधिवक्ता को नियुक्त करने के लिए पुलिस अनुसंधान अधिकारी द्वारा कथित रूप से दबाव बनाने और बात नहीं मानने पर क्लेम प्रभावित करने की धमकी देने का गंभीर मामला सामने आया है। इस संबंध में अखिल भारतीय संयुक्त अधिवक्ता मंच के प्रदेश सचिव मनोज आहूजा एडवोकेट ने राजस्थान के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच करवाने, वर्तमान अनुसंधान अधिकारी को तत्काल बदलने तथा आरोप सही पाए जाने पर कठोर विभागीय एवं विधिक कार्रवाई करने की मांग की है। आहूजा ने बताया कि अजमेर जिले के भगवानपुरा,टांटोटी निवासी पूसाराम पुत्र सुखदेव गुर्जर के मामा के लड़के रामलाल पुत्र भोलूराम की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी।इस संबंध में 27 जुलाई 2026 को एमबीजीएच हॉस्पिटल, उदयपुर की मोर्चरी में पुलिस थाना खेरोदा के सहायक उप निरीक्षक के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी। आहूजा के अनुसार पीड़ित पक्ष द्वारा उन्हें दी गई जानकारी में आरोप लगाया गया है कि रिपोर्ट लेने के बाद संबंधित पुलिस अधिकारी ने बेहतर मोटर दुर्घटना क्लेम दिलाने की बात कहते हुए एक विशेष अधिवक्ता से फोन पर बातचीत करवाई।उक्त अधिवक्ता द्वारा कथित रूप से थाना एवं न्यायालय में अपनी अच्छी “सेटिंग” होने की बात कहते हुए अच्छा क्लेम दिलाने का दावा किया गया। मामले में पुलिस थाना खेरोदा द्वारा एफआईआर संख्या 130/2026 अंतर्गत धारा 281 एवं 106(1) भारतीय न्याय संहिता दर्ज कर अनुसंधान सहायक उप निरीक्षक अशोक कुमार को सौंपा गया। क्लेम प्रभावित करने की धमकी देने का आरोप आहूजा ने DGP को लिखे पत्र में कहा कि पीड़ित पक्ष के अनुसार अंतिम संस्कार के बाद अनुसंधान अधिकारी तथा संबंधित अधिवक्ता द्वारा लगातार फोन कर उसी अधिवक्ता को नियुक्त करने का कथित दबाव बनाया गया। आरोप है कि ऐसा नहीं करने पर क्लेम प्रभावित करने,प्रतिकूल रिपोर्ट प्रस्तुत करने तथा चश्मदीद गवाहों के संबंध में अनुसंधान को प्रभावित करने जैसी बातें कही गईं।जब पीड़ित पक्ष ने अपनी पसंद के अधिवक्ता के माध्यम से केकड़ी में दावा प्रस्तुत करने की बात कही तो कथित रूप से यह तक कहा गया कि जांच उनके हाथ में है और उनकी बात नहीं मानने पर “एक रुपया भी नहीं मिलेगा।” “चश्मदीद गवाह मैनेज” करने जैसी कथित बातचीत बेहद गंभीर : आहूजा आहूजा ने बताया कि 29 जुलाई को पीड़ित पक्ष के लोग थाना खेरोदा पहुंचे और अनुसंधान अधिकारी के साथ घटनास्थल पर गए।पीड़ित पक्ष का आरोप है कि नक्शा मौका तैयार करते समय भी दो प्रत्यक्षदर्शी गवाह लाने और संबंधित विशेष अधिवक्ता को नियुक्त करने का दबाव बनाया गया। आहूजा के अनुसार जब उन्होंने स्वयं अनुसंधान अधिकारी से दूरभाष पर बातचीत कर पूछा कि किसी विशेष अधिवक्ता को नियुक्त करने के लिए पीड़ित पक्ष पर दबाव क्यों बनाया जा रहा है,तब अनुसंधान अधिकारी द्वारा कथित रूप से संबंधित अधिवक्ता के स्थानीय होने, “चश्मदीद गवाह मैनेज” करवाने तथा मजिस्ट्रेट से “सेटिंग” होने जैसी बातें कही गईं। आहूजा ने कहा कि इन आरोपों की सत्यता की निष्पक्ष जांच अत्यंत आवश्यक है।यदि कोई पुलिस अधिकारी अनुसंधान की शक्ति का इस्तेमाल किसी विशेष अधिवक्ता को लाभ पहुंचाने अथवा पक्षकार की स्वतंत्र पसंद को प्रभावित करने के लिए करता है तो यह पुलिस व्यवस्था की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। “वकील चुनना पक्षकार का अधिकार,पुलिस अधिकारी का नहीं” प्रदेश सचिव मनोज आहूजा ने कहा— “पुलिस अधिकारी का दायित्व निष्पक्ष,स्वतंत्र और कानूनसम्मत अनुसंधान करना है।किसी नागरिक को यह बताना कि वह किस अधिवक्ता को नियुक्त करे और अधिवक्ता नियुक्त नहीं करने पर जांच अथवा क्लेम प्रभावित करने का भय दिखाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। पक्षकार किस अधिवक्ता से अपनी पैरवी करवाएगा, यह उसका स्वतंत्र निर्णय है।” उन्होंने कहा कि पुलिस एवं न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए इस प्रकार की शिकायतों को अत्यंत गंभीरता से लिया जाना चाहिए।यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध ऐसी कठोर कार्रवाई होनी चाहिए जिससे भविष्य में किसी पीड़ित परिवार पर इस प्रकार का दबाव बनाने का साहस कोई न कर सके। DGP से पांच प्रमुख मांगें आहूजा ने पुलिस महानिदेशक से पूरे प्रकरण की वरिष्ठ अधिकारी से निष्पक्ष जांच करवाने,अनुसंधान अधिकारी एवं संबंधित अधिवक्ता के बीच कथित मिलीभगत की जांच करने,पीड़ित पक्ष को किए गए फोन कॉल एवं धमकियों के आरोपों की जांच कराने, एफआईआर संख्या 130/2026 का अनुसंधान किसी अन्य निष्पक्ष अधिकारी को सौंपने तथा पीड़ित परिवार एवं गवाहों को किसी प्रकार की प्रतिशोधात्मक कार्रवाई से संरक्षण प्रदान करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने मांग की है कि राजस्थान पुलिस में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं कि कोई भी पुलिस अधिकारी किसी परिवादी,पीड़ित अथवा उसके परिवार पर किसी विशेष अधिवक्ता को नियुक्त करने के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दबाव नहीं बनाए। पत्र की प्रतिलिपि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन व महानिरीक्षक पुलिस,उदयपुर रेंज तथा पुलिस अधीक्षक,उदयपुर को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रेषित की गई है।
- विकास की नई राह पर निरंतर आगे बढ़ते केकड़ी-रोडवेज डिपो को मिली 13 नई बसे* *बसों की विधिवत पूजा अर्चना कर उन्हें हरी झंडी दिखाकर विधायक गौतम ने किया रवाना।* *केकड़ी किसी के बाप की जागीर नहीं जो मुख्यमंत्री को यंहा आने के लिए किसी से पूंछना पड़े या वीजा लेना पड़े -गौतम* *विकास की नई राह पर निरंतर आगे बढ़ते केकड़ी-रोडवेज डिपो को मिली 13 नई बसे* *बसों की विधिवत पूजा अर्चना कर उन्हें हरी झंडी दिखाकर विधायक गौतम ने किया रवाना।* *केकड़ी किसी के बाप की जागीर नहीं जो मुख्यमंत्री को यंहा आने के लिए किसी से पूंछना पड़े या वीजा लेना पड़े -गौतम* *केकड़ी 01 अगस्त (ब्यूरो )* *विकास की राह पर दौड़ते केकड़ी रोडवेज डिपो के बेड़े को निगम द्वारा मुख्यमंत्री की अनुशंसा पर 13 नई बसों की सौगात मिली इस पर शनिवार को विधायक शत्रुघ्न गौतम ने बसों की विधिवत पूजा अर्चना कर हरी झंडी दिखाकर किया रवाना l* *इससे पूर्व विधायक गौतम का अजमेर रोड स्थित राजस्थान परिवहन कार्यालय पर पंहुचने पर चीफ डिपो मैनेजर हेमराज मीणा व केकड़ी बुकिंग प्रभारी ईश्वर सिंह द्वारा मालार्पण कर साफा बंधवा कर राजस्थानी परम्परा के अनुसार स्वागत किया गया l* *यह केवल बसों का विस्तार नहीं, बल्कि हर परिवार तक बेहतर, सुरक्षित और सुविधाजनक यातायात पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है-शत्रुघ्न गौतम विधायक* *केकड़ी केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि मेरा अपना परिवार है। यहाँ के हर नागरिक का विश्वास मेरी सबसे बड़ी पूंजी है और उनकी उम्मीदों पर खरा उतरना मेरा कर्तव्य।* *आमजन के स्नेह और आशीर्वाद से केकड़ी निरंतर विकास की नई ऊँचाइयों को छू रही है। मेरा संकल्प है कि जनसेवा और विकास की यह यात्रा इसी विश्वास के साथ निरंतर आगे बढ़ती रहे।* *रघु शर्मा पर किया पलटवार* *अपने उद्बोधन मे विधायक गौतम ने पूर्व केबिनेट मंत्री एवं विधायक रघु शर्मा पर पलटवार करते हुये कहा की रघु शर्मा पर किए तीखे कटाक्ष: विधायक eत्रध्न गौतमने पूर्व विधायक डॉ. टघु eमा के हालिया बयानों पटतीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किकड़ी किसी के बाप की जागीर नहीं है, जो मुख्यमंत्री को केकड़ी आने से रोक सके। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के पांच वर्षों के कार्यकाल में एक बार भी मुख्यमंत्री केकड़ी नहीं* *आए,जबकि भाजपा सरकार के ढाई वर्षों में मुख्यमंत्री भजनलाल पांच बार केकड़ी आ चुके हैं और करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं की सौगात दे चुके हैं।उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार विकास की अविरल गंगा बहाने वाली सरकार है। उन्होंने कांग्रेस के रघु शर्मा के हालिया बयानों पर पलटवार करते हुए कहा कि वह पहले यह तय कर लें कि चुनाव धृतराष्ट्र लडेंगे या दुर्योधन।* *भाजपा कार्यकर्ताओं की सरकार है तथा कार्यकर्ताओ को ही संगठन व सरकार में जिम्मेदारियां मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि हमारे कार्यकर्ताओ का इलाज करने की बात करने वाले पहले अपना इलाज कर ले।* *जनता उनका पांच बार इलाज कर चुकी है, फिर भी वे संभल नहीं रहे।*4
- केकड़ी क्षेत्र वासियों सहित आसपास के ग्रामीणों को मिलेगी बेहतर यातायात सुविधा केकड़ी डिपो को मिली 13 नई बसे। स्थानीय विधायक शत्रुघ्न गौतम के निरंतर प्रयासों से अब केकड़ी डिपो को मिली 13 नई बसे जो केकड़ी - देवली, बूंदी, भीलवाड़ा, ब्यावर, कोटा विभिन्न इलाकों में होगा संचालन।2
- Raghu Sharma ji samjha kekdi I aur Inka bhashan aap dekh Lo क्या-क्या bol rahe hain Raghu Sharma ji Sahi bol rahe hain ya nahin aap hi batao2
- गोयला में बारिश से कई पेड़ गिर गए और 2 घंटा तक बिजली नहीं आई तार टूटने के कारण1
- धाकड़ व सेन का भव्य स्वागत, गौभक्तों का उमड़ा जनसैलाब 101 निराश्रित गोवंशों को बांधे गए रक्षा सूत्र, गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा देने की उठी मांग शाहपुरा बालाजी गौवंश हेल्पलाइन परिवार द्वारा त्रिमूर्ति स्मारक पर आयोजित भव्य स्वागत एवं सम्मान समारोह में गुरुवार को गौभक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद, चित्तौड़ प्रांत के प्रांत गोरक्षा प्रमुख रामेश्वर लाल धाकड़ एवं बालाजी गौवंश हेल्पलाइन के राजस्थान प्रांत प्रमुख राजेश सेन का ढोल-नगाड़ों और जयघोष के साथ भव्य अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दोपहर 1:30 बजे बस स्टैंड से हुआ। ढोल-नगाड़ों के साथ शोभायात्रा भारत त्रिमूर्ति स्मारक पहुंची, जहां रामेश्वर लाल धाकड़ द्वारा माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। बड़ी संख्या में धर्मप्रेमियों, गौसेवकों और क्षेत्रवासियों ने भाग लेकर समारोह की शोभा बढ़ाई। 101 गोवंशों को बांधे रक्षा सूत्र– समारोह का मुख्य आकर्षण 101 निराश्रित गोवंशों को रक्षा सूत्र यानी रेडियम बेल्ट बांधने का अभियान रहा। यह सेवा कार्य बालाजी गौवंश हेल्पलाइन अध्यक्ष खुशराज वैष्णव, मैनेजमेंट प्रभारी ओमप्रकाश साहू और जिलाध्यक्ष विष्णु शर्मा के सानिध्य में संपन्न हुआ। आयोजकों ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य सड़कों पर भटक रहे गोवंशों की सुरक्षा और पहचान सुनिश्चित करना है। *गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा देने की मांग* इस अवसर पर नव नियुक्त पदाधिकारियों ने गौ माता को 'राष्ट्र माता' का दर्जा दिलाने की मांग उठाई। वक्ताओं ने कहा कि गौसेवा ही राष्ट्रसेवा है और समाज को गौसंरक्षण के लिए आगे आना होगा। कार्यक्रम में दिनेश प्रजापत, कमल बगड़ावत, सुरेश भाट, रवि खारोल, भगवत सिंह लूलांस, प्रतीक देव गुर्जर, मुकेश प्रजापत, परमानंद धोबी, देवराज जाट सहित सैकड़ों गौभक्त मौजूद रहे। अंत में सभी ने गौसंरक्षण के लिए निरंतर सेवा का संकल्प लिया। "जय श्री राम" और "जय गौमाता" के नारों से गूंजे इस आयोजन को शाहपुरा-भीलवाड़ा क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण और प्रेरणादायक बताया गया।2
- छाबडियो का नया गांव धाकड़ मोहल्ले में तेजाजी के स्थान पर 3 वर्षों से पानी की समस्या बूंदी जिले के हिंडोली तहसील में स्थित ग्राम पंचायत छाब डी यों का नया गांव तेजाजी के स्थान में पूर्व में टंकी वह हेड पंप लगा हुआ था लेकिन विगत वर्षों से हेड पंप और टंकी दोनों नकारा पड़ी हुई है यहां पर पानी की समस्या को लेकर ग्रामीणों ने ग्रामीण राहत शिवर वर्ष 2025 में अवगत करवाया गया लेकिन कोई समाधान नहीं उसके बाद वार्ड पंच नंदलाल नागर ने राजस्थान संपर्क पोर्टल 181 पर समस्या को दर्ज करवाया लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ एवं पंचायत के द्वारा बताया गया कि वहां पर पानी की कोई समस्या नहीं है लोगों का काम चल रहा है जबकि पानी की समस्या होने पर ही तो पूर्व में हेड पंप और टंकी लगाई गई थी जो आज की स्थिति में नकारा पड़ी हुई है और प्रशासन को ध्यान देने की हत्या आवश्यकता है समय रहते पानी की समस्या को खत्म नहीं किया गया तो वार्ड पंच को ग्रामीण पानी की समस्या सफाई व्यवस्था नरेगा संबंधी समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय को अवगत करवाएगी1
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- यह खबर पुष्कर की है जहां पर पंचायत में जीत कर आए नसीराबाद कोटा चौराया का नहीं है यह वीडियो पुष्कर का है1