सुप्रीम कोर्ट द्वारा ग्राम सभाओं के पक्ष में दिए गए निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय संविधान की भावना, रिपोर्टर सन्नू हेमला आदिवासी संस्कृति एवं परंपराओं की संरक्षण तथा पेसा कानून के प्रावधानों की पुनः पुष्टि करता है। छत्तीसगढ़ सरकार ग्राम सभाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी सरकार ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से इस प्रकरण में सशक्त पक्ष रखा और न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि परंपराओं एवं सामाजिक संरचना के संरक्षण हेतु ग्राम सभाएं वैधानिक अधिकारों का प्रयोग कर सकती हैं। यह निर्णय आदिवासी स्वशासन की अवधारणा को सुदृढ़ करने वाला है। राज्य सरकार ग्राम सभाओं के संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण और जनजातीय अस्मिता की रक्षा हेतु निरंतर कार्य करती रहेगी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के लिए पांचवीं अनुसूची के क्षेत्र हेतु पेसा नियमों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा ग्राम सभाओं के पक्ष में दिए गए निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय संविधान की भावना, रिपोर्टर सन्नू हेमला आदिवासी संस्कृति एवं परंपराओं की संरक्षण तथा पेसा कानून के प्रावधानों की पुनः पुष्टि करता है। छत्तीसगढ़ सरकार ग्राम सभाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी सरकार ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से इस प्रकरण में सशक्त पक्ष रखा और न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि परंपराओं एवं सामाजिक संरचना के संरक्षण हेतु ग्राम सभाएं वैधानिक अधिकारों का प्रयोग कर सकती हैं। यह निर्णय आदिवासी स्वशासन की अवधारणा को सुदृढ़ करने वाला है। राज्य सरकार ग्राम सभाओं के संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण और जनजातीय अस्मिता की रक्षा हेतु निरंतर कार्य करती रहेगी। उन्होंने बताया कि राज्य सरका आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के लिए पांचवीं अनुसूची के क्षेत्र हेतु पेसा नियमों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कार्य भी कर रही है। उल्लेखनीय है कि कांकेर जिले के अनेक ग्राम पंचायतों ने गांवों में बाहरी धर्म प्रचारकों के प्रवेश निषेध संबंधी बोर्ड लगाए थे। उक्त निर्णय के विरुद्ध संबंधित पक्षों द्वारा छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि परंपराओं के संरक्षण के लिए पेसा कानून के अंतर्गत ग्राम सभाएं ऐसे निर्णय लेने के अधिकार रखती हैं। हाई कोर्ट के निर्णय के विरुद्ध अपील सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी। 16 फरवरी 2026 के निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने अपील खारिज करने के साथ स्पष्ट किया कि पेसा कानून के अंतर्गत ग्राम सभाएं अपने सामाजिक-सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े विषयों पर निर्णय ले सकती हैं। यह निर्णय आदिवासी स्वशासन, ग्राम स्वायत्तता और परंपरागत अधिकारों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा ग्राम सभाओं के पक्ष में दिए गए निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय संविधान की भावना, रिपोर्टर सन्नू हेमला आदिवासी संस्कृति एवं परंपराओं की संरक्षण तथा पेसा कानून के प्रावधानों की पुनः पुष्टि करता है। छत्तीसगढ़ सरकार ग्राम सभाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी सरकार ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से इस प्रकरण में सशक्त पक्ष रखा और न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि परंपराओं एवं सामाजिक संरचना के संरक्षण हेतु ग्राम सभाएं वैधानिक अधिकारों का प्रयोग कर सकती हैं। यह निर्णय आदिवासी स्वशासन की अवधारणा को सुदृढ़ करने वाला है। राज्य सरकार ग्राम सभाओं के संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण और जनजातीय अस्मिता की रक्षा हेतु निरंतर कार्य करती रहेगी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के लिए पांचवीं अनुसूची के क्षेत्र हेतु पेसा नियमों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा ग्राम सभाओं के पक्ष में दिए गए निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय संविधान की भावना, रिपोर्टर सन्नू हेमला आदिवासी संस्कृति एवं परंपराओं की संरक्षण तथा पेसा कानून के प्रावधानों की पुनः पुष्टि करता है। छत्तीसगढ़ सरकार ग्राम सभाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी सरकार ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग
के माध्यम से इस प्रकरण में सशक्त पक्ष रखा और न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि परंपराओं एवं सामाजिक संरचना के संरक्षण हेतु ग्राम सभाएं वैधानिक अधिकारों का प्रयोग कर सकती हैं। यह निर्णय आदिवासी स्वशासन की अवधारणा को सुदृढ़ करने वाला है। राज्य सरकार ग्राम सभाओं के संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण और जनजातीय अस्मिता की रक्षा हेतु निरंतर कार्य करती रहेगी। उन्होंने बताया कि राज्य सरका आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के लिए पांचवीं अनुसूची के क्षेत्र हेतु पेसा नियमों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कार्य भी कर रही है। उल्लेखनीय है कि कांकेर जिले के अनेक ग्राम पंचायतों ने गांवों में बाहरी धर्म प्रचारकों के प्रवेश निषेध संबंधी बोर्ड लगाए थे। उक्त निर्णय के विरुद्ध संबंधित पक्षों द्वारा छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि परंपराओं के संरक्षण के लिए पेसा कानून के अंतर्गत ग्राम सभाएं ऐसे निर्णय लेने के अधिकार रखती हैं। हाई कोर्ट के निर्णय के विरुद्ध अपील सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी। 16 फरवरी 2026 के निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने अपील खारिज करने के साथ स्पष्ट किया कि पेसा कानून के अंतर्गत ग्राम सभाएं अपने सामाजिक-सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े विषयों पर निर्णय ले सकती हैं। यह निर्णय आदिवासी स्वशासन, ग्राम स्वायत्तता और परंपरागत अधिकारों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
- 🚧 कटेकल्याण से मोखपाल सड़क की समस्या 🚧 नमस्कार दोस्तों, आज मैं हमारे क्षेत्र की एक बहुत ही महत्वपूर्ण समस्या के बारे में बात करना चाहता हूँ। कटेकल्याण से मोखपाल जाने वाली सड़क, जिसके बीच में तेलम और टेटम जैसे गाँव पड़ते हैं, उसकी हालत बहुत खराब हो चुकी है। इस सड़क पर रोज़ गाँव के लोग, स्कूल के बच्चे, मरीज और ज़रूरी काम से आने-जाने वाले लोग निर्भर रहते हैं। लेकिन सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे, टूट-फूट और बरसात में पानी भर जाने की वजह से सफर करना बहुत मुश्किल हो गया है। कई बार तो दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है। सबसे ज्यादा परेशानी आपातकालीन स्थिति में होती है — जब किसी मरीज को अस्पताल ले जाना होता है या किसी ज़रूरी काम से जल्दी पहुँचना होता है। अच्छी सड़क सिर्फ सुविधा नहीं होती, बल्कि हमारे गाँव के विकास की पहचान होती है। हम संबंधित अधिकारियों से निवेदन करते हैं कि कटेकल्याण-मोखपाल सड़क, खासकर तेलम और टेटम के बीच वाले हिस्से की मरम्मत जल्द से जल्द करवाई जाए, ताकि गाँव के लोगों को राहत मिल सके। आइए मिलकर आवाज़ उठाएँ, ताकि हमारे गाँव की सड़क सुरक्षित और बेहतर बन सके। धन्यवाद please support me 🙏🥺1
- सांप तोंगपाल ओसवाल भवन मे कल रात को निकला था जहाँ सुयशा जी आदि ठाना 4 विराजे थे बैठे लोगों में मचा हरदम1
- पखांजूर पुलिस ने 25 वर्षों से फरार स्थायी वारंटी गिरफ्तार, तीन आरोपी जेल भेजे गए1
- थाना करोंधा जिला बलरामपुर रामानुजगंज अपराध क्रमांक 03/2026 धारा 103 (1) 115(2)3(5)bns के आरोपियों को पुलिस द्वारा विधि वक्त गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया।1
- बेंगलुरु में 17वीं शताब्दी का मंदिर बना हुआ है आकर्षण का केंद्र यहां प्रकृति और बाबा भोलेनाथ की कृपा किस तरह से लोगों पर बनी हुई है सभी इस वीडियो पर देखें..... ॐ नमः शिवाय ।।।।🙏🏻1
- नाबालिग की हत्या से मची सनसनी .... दुर्ग शहर के शक्ति नगर क्षेत्र में भगवान शंकर मंदिर के सामने देर रात चाकूबाजी की सनसनीखेज घटना सामने आई है। जानकारी के अनुसार लगभग चार लोगों ने मिलकर एक नाबालिग पर ताबड़तोड़ चाकू से हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि मृतक नाबालिग घोड़ी साज़ का काम करता था और शिव की बारात के दौरान घोड़ी लेकर बारात में पहुंचा था। इसी दौरान आपसी रंजिश के चलते आरोपियों ने उस पर हमला कर दिया। घटना के बाद मौके पर जमीन खून से लाल हो गई और क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया। सूत्रों के अनुसार हमला करने वाले शातिर अपराधी बताए जा रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। यह पूरा मामला मोहन नगर थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है।1
- राजधानी रायपुर में रोज सुबह ओपन प्राउंड में बैडमिंटन खेलने वाले ईदगाहभाठा निवासी कारोबारी 57 वर्षीय अमृत बजाज की बैडमिंटन खेलते समय ही कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई.1
- समय-सीमा की बैठक में कलेक्टर ने की विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी चित्रकोट जलप्रपात के समीप में आयोजित होने वाले चित्रकोट महोत्सव की तैयारियों को लेकर कलेक्टर श्री आकाश छिकारा ने अधिकारियों को समय-सीमा बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में कलेक्टर ने कहा कि महोत्सव में आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।1