कटनी के मित्तल एन्क्लेव में कॉलोनी के रहवासियों और मित्तल कंस्ट्रक्शन/PLM बिल्डर्स के बीच क्लब हाउस के निर्माण को लेकर एक लंबे समय से विवाद चल रहा है। कॉलोनी समिति का आरोप है कि बिल्डर ने कॉलोनी विकसित करते समय जिन सुविधाओं का वादा किया था, उनमें क्लब हाउस का निर्माण आज तक शुरू नहीं किया गया है। समिति के अनुसार, पिछले लगभग एक वर्ष से बिल्डर और रहवासियों के बीच इस मुद्दे पर लगातार संवाद और पत्राचार जारी है, लेकिन अभी तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। इसी कारण कॉलोनीवासियों में बिल्डर के प्रति नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। हाल ही में, समिति ने सार्वजनिक रूप से बोर्ड लगाकर बिल्डर से इस संबंध में जवाब मांगा है और क्लब हाउस का निर्माण शीघ्र प्रारंभ करने की मांग की है। समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि वादों और शर्तों के अनुरूप काम जल्द शुरू नहीं किया गया, तो कॉलोनीवासी एक बार फिर शांतिपूर्ण आंदोलन का रास्ता अपनाने को विवश होंगे। कॉलोनीवासियों का कहना है कि वे केवल वही सुविधाएं चाहते हैं जिनका आश्वासन उन्हें कॉलोनी में निवेश करते समय दिया गया था। अब सभी की निगाहें बिल्डर प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
कटनी के मित्तल एन्क्लेव में कॉलोनी के रहवासियों और मित्तल कंस्ट्रक्शन/PLM बिल्डर्स के बीच क्लब हाउस के निर्माण को लेकर एक लंबे समय से विवाद चल रहा है। कॉलोनी समिति का आरोप है कि बिल्डर ने कॉलोनी विकसित करते समय जिन सुविधाओं का वादा किया था, उनमें क्लब हाउस का निर्माण आज तक शुरू नहीं किया गया है। समिति के अनुसार, पिछले लगभग एक वर्ष से बिल्डर और रहवासियों के बीच इस मुद्दे पर लगातार संवाद और पत्राचार जारी है, लेकिन अभी तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। इसी कारण कॉलोनीवासियों में बिल्डर के प्रति नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। हाल ही में, समिति ने सार्वजनिक रूप से बोर्ड लगाकर बिल्डर से इस संबंध में जवाब मांगा है और क्लब हाउस का निर्माण शीघ्र प्रारंभ करने की मांग की है। समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि वादों और शर्तों के अनुरूप काम जल्द शुरू नहीं किया गया, तो कॉलोनीवासी एक बार फिर शांतिपूर्ण आंदोलन का रास्ता अपनाने को विवश होंगे। कॉलोनीवासियों का कहना है कि वे केवल वही सुविधाएं चाहते हैं जिनका आश्वासन उन्हें कॉलोनी में निवेश करते समय दिया गया था। अब सभी की निगाहें बिल्डर प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
- कटनी नगर में नेशनल मीडिया प्रेस क्लब (NMPC) द्वारा पत्रकारों के लिए एक निःशुल्क कानूनी पाठशाला संचालित की जा रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य डिजिटल युग में पत्रकारिता के गिरते मानकों की रक्षा करना और मीडियाकर्मियों को उनके वैधानिक अधिकारों, सुरक्षा और पत्रकारिता के नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूक करना है। यह कार्यशाला पत्रकारों को कानूनी चुनौतियों से बचाने और उन्हें एक सशक्त व जिम्मेदार प्रहरी के रूप में कार्य करने के लिए तैयार करती है। इस पाठशाला के तहत कानूनी सुरक्षा और अधिकार सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि मीडियाकर्मी कार्यस्थल पर होने वाले गैर-संवैधानिक हमलों, उत्पीड़न या झूठे मुकदमों के खिलाफ कानूनी रूप से लड़ सकें। इसके अतिरिक्त, पत्रकारों को प्रेस की स्वतंत्रता के दायरे में रहकर निष्पक्ष, सटीक और जवाबदेह रिपोर्टिंग करने का प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है। कार्यशाला का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह भारतीय प्रेस परिषद और मीडिया कानूनों, जैसे मानहानि और सूचना का अधिकार, की सटीक व स्पष्ट जानकारी देकर पत्रकारों को बिना किसी भय के कार्य करने हेतु दबाव से मुक्ति दिलाती है। नेशनल मीडिया प्रेस क्लब इस मुहिम में शामिल होने के लिए पत्रकारों को आमंत्रित कर रहा है, जहाँ संगठित होकर अपने अधिकारों व कर्तव्यों की आवाज उठाने पर जोर दिया जा रहा है। ‘संघे शक्ति कलयुगे’ के सिद्धांत को रेखांकित करते हुए, यह बताया गया है कि इस कलयुग में संगठन व संगठित रहना ही शक्ति है। क्लब की ओर से स्पष्ट किया गया है कि केवल नैतिक व संवैधानिक रूप से सही दिशा पर कार्य कर रहे पत्रकार ही इससे जुड़ें। पत्रकारों को संवैधानिक अधिकार मिलने चाहिए, इसी उद्देश्य के साथ यह कानूनी पाठशाला अपने अधिकारों व कर्तव्यों को विस्तार से समझने, संगठित होकर बुलंद आवाज के साथ ‘पत्रकार एकता जिंदाबाद’ का उद्घोष करने और पत्रकारों के हितों की लड़ाई में सहभागिता निभाने का आह्वान करती है।1
- एक बेहद गंभीर मामले में, एक लड़के को 13 साल की उम्र में जेल भेज दिया गया था और अब, 25 साल की उम्र में, वह आखिरकार रिहा हो गया है, जिसने अपनी ज़िंदगी के महत्वपूर्ण 12 साल जेल में बिताए हैं। इस पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं कि एक मासूम 13 साल का लड़का पार्टी पॉलिटिक्स के बारे में क्या जान सकता था। आरोप है कि अभिषेक बनर्जी ने एक दिन लड़के के हाथ में बीजेपी का झंडा देखा, जिसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस को बुलाया और लड़के को ऐसे आरोपों में जेल भेजने का आदेश दिया जिससे उसे ज़िंदगी भर कभी जमानत न मिल सके। इस घटना की तुलना अंग्रेजों के अत्याचार से करते हुए कहा गया है कि अंग्रेज भी इतने बेरहम नहीं थे, फिर भी एक लड़के की पूरी ज़िंदगी बर्बाद कर दी गई। सवाल उठाया गया है कि अब उसके उन सालों के नुकसान की भरपाई कौन करेगा जिनसे उसका भविष्य बनना चाहिए था, और क्या हमारे संविधान में इसका कोई प्रावधान है। यह मांग की गई है कि अभिषेक बनर्जी को लड़के की ज़िंदगी बर्बाद करने के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए और उसे तथा उसके परिवार को तुरंत कम से कम पांच करोड़ रुपये का मुआवज़ा दिया जाना चाहिए। इसके अलावा, एफआईआर दर्ज होने के समय थाने में मौजूद पूरे पुलिस स्टाफ को नौकरी से निकाल देना चाहिए और उनसे जुर्माना भी वसूला जाना चाहिए।1
- अंतरराष्ट्रीय विश्व योग दिवस के अवसर पर कटनी शहर के प्रसिद्ध जागृति पार्क (12 पीपल) में एक भव्य योग एवं ध्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सुबह से ही पार्क में योग प्रेमियों, समाजसेवियों और गणमान्य नागरिकों की बड़ी उपस्थिति रही, जिससे कार्यक्रम को विशेष पहचान मिली। भजनों की मधुर स्वर लहरियों और आध्यात्मिक वातावरण के बीच सभी प्रतिभागियों ने सामूहिक योगाभ्यास किया, और इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य, अनुशासन तथा सकारात्मक जीवनशैली का महत्वपूर्ण संदेश दिया। कार्यक्रम में "करें योग, रहें निरोग" के संदेश के साथ स्वस्थ भारत के निर्माण का संकल्प लिया गया। इस दौरान विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान की क्रियाएं कराई गईं। योग विशेषज्ञों ने बताया कि नियमित योग केवल शरीर को ही स्वस्थ नहीं रखता, बल्कि मानसिक तनाव को भी दूर कर व्यक्ति को ऊर्जावान और आत्मविश्वासी बनाता है। उपस्थित लोगों ने योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प भी लिया। कार्यक्रम में डॉ. उमा निगम, निरंजन पंजवानी, आनंद सुहाने, प्रमोद जायसवाल, लकी गुप्ता, संजय सोनी, संजय खंडेलवाल, अतुल जैन, शिवहरी जी, लक्ष्मीकांत भारद्वाज, पाठक जी, रमेश गुप्ता, कपूर सोनी, अनिल नेमा, सत्येंद्र सिंह चौहान (राजस्थान), अशोक वर्मा, मनीष दुबे, बी.डी. तिवारी जी, पारीक जी, गोयल जी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे और योगाभ्यास में सक्रिय रूप से सहभागिता की। वक्ताओं ने इस अवसर पर कहा कि योग भारत की हजारों वर्षों पुरानी अमूल्य धरोहर है, जिसे आज पूरा विश्व अपना रहा है। योग शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करके जीवन को एक नई दिशा प्रदान करता है। विश्व योग दिवस का मुख्य उद्देश्य भी लोगों को स्वस्थ, तनावमुक्त और जागरूक जीवन की ओर प्रेरित करना है। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने नियमित योग करने और समाज में योग के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन में उत्साह, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का एक अद्भुत संगम देखने को मिला, जिससे जागृति पार्क से एक बार फिर "योग है जीवन का आधार, स्वस्थ शरीर और सशक्त विचार" का सशक्त संदेश दिया गया।1
- जी डी मेमोरियल हॉस्पिटल में एक निशुल्क चिकित्सा शिविर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस शिविर में जबलपुर और नागपुर से आए वरिष्ठ डॉक्टरों ने मरीजों को परामर्श प्रदान किया।1
- महाराष्ट्र के भक्तों के लिए बाबा बागेश्वर ने एक विशेष संदेश दिया है, जिसमें बताया गया है कि सनातन मठ, भिवंडी मुंबई में उनका दो दिवसीय दिव्य दरबार आयोजित किया जाएगा।1
- बड़वारा क्षेत्र की पुलिस और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि वे क्षेत्र के दलित और आदिवासी बच्चों को नशे की आग में धकेल रहे हैं। आरोप है कि लगातार विरोध प्रदर्शनों के बावजूद, पुलिस और प्रशासन शराब माफियाओं पर लगाम लगाने में पूरी तरह असमर्थ हैं। इस स्थिति पर यह सवाल भी उठाया गया है कि आखिर किसके इशारे पर यह सब हो रहा है।1
- पत्रकार पुष्पेंद्र लोधी के पत्रकारिता कार्यों की सराहना करते हुए, उन्हें 'समाज का हीरा' बताया गया है, खासकर एक ब्राह्मण समाज की बेटी के बलात्कार मामले में न्याय दिलाने के लिए खुलकर आवाज उठाने के उनके प्रयासों के लिए। हालांकि, उनके खिलाफ एक बड़े षड्यंत्र का आरोप लगाया गया है, जिसमें कुछ पत्रकारों और पुलिस कर्मियों को जिम्मेदार ठहराया गया है जो उनकी तरक्की पचा नहीं पा रहे हैं। आरोप है कि इन्हीं षड्यंत्रों के चलते पुष्पेंद्र लोधी को कानूनी पेचीदगियों में फंसाया जा रहा है। विडंबना यह है कि जिस ब्राह्मण समाज की बेटी को वे न्याय दिलाना चाहते थे, उसी समाज की ओर से उन्हें फंसाने की साजिश की गई है। पोस्ट में विश्वास व्यक्त किया गया है कि जब इस मामले की सच्चाई सामने आएगी, तो ब्राह्मण समाज भी मजबूरी में पुष्पेंद्र लोधी के साथ खड़ा होगा और षड्यंत्रकारी खुद अकेले में रोएंगे। यह भी कहा गया है कि पुष्पेंद्र लोधी का उद्देश्य बलात्कारी को फाँसी दिलाना है। इस मामले में एक बहुत बड़ी साजिश होने का दावा किया गया है, और क्षेत्र में की गई पड़ताल के अनुसार, एक अच्छी जाँच होने पर असली षड्यंत्रकारी सामने आ सकते हैं। ओबीसी एससी एसटी संगठन ने भी निर्दोष पत्रकार पुष्पेंद्र लोधी पर की गई कार्रवाई की कड़ी निंदा की है।1
- सतना के बरौंधा में पदस्थ रहे रेंजर बृजेंद्र पांडेय, जिनका तबादला अब सीधी हो गया है, और उनकी आरक्षक पत्नी भारती उपाध्याय के बीच का पारिवारिक विवाद गहरा गया है। यह हाईप्रोफाइल विवाद उस समय और बढ़ गया जब रेंजर को रीवा के एक होटल में एक अन्य महिला के साथ रंगे हाथों पकड़ा गया। इस घटना के बाद से दोनों पक्षों में लगातार टकराव जारी है। पति ने अपनी पत्नी पर चोरी का मामला दर्ज कराया है, जबकि पत्नी ने अब पति पर मारपीट और गंभीर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया है। फिलहाल, पुलिस इस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।1