Shuru
Apke Nagar Ki App…
Lalu Kumar
More news from बिहार and nearby areas
- समस्तीपुर के ताजपुर प्रखंड अंतर्गत मौलानाचक और सरसौना गांव में शनिवार को अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) द्वारा सदस्यता अभियान चलाया गया। इस अभियान का नेतृत्व भाकपा (माले) के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह और खेग्रामस के प्रखंड अध्यक्ष प्रभात रंजन गुप्ता ने किया। इस दौरान कुल 45 लोगों ने खेग्रामस की सदस्यता ग्रहण की।1
- बिहार में भाजपा उम्मीदवार द्वारा अपना नाम वापस लिए जाने के घटनाक्रम पर प्रशांत किशोर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इस स्थिति को 'जन बल' की जीत करार देते हुए कहा कि जनता की ताकत के आगे कोई दूसरा बल नहीं टिक सकता। प्रशांत किशोर ने अपनी टिप्पणी में कहा कि अब तक लोग भाजपा के डर से भागते रहे हैं, लेकिन यह पहली बार हुआ है कि भाजपा का अपना उम्मीदवार ही मैदान छोड़कर भाग गया है। उन्होंने इसे इंसाफ की एक बड़ी घटना के रूप में रेखांकित किया।1
- Post by Lalu Kumar1
- बिहार के समस्तीपुर में बारिश के कारण जगह-जगह भारी जलजमाव हो गया है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित है। बारिश के इस मौसम में जलभराव की स्थिति ऐसी है कि सड़क पर चल रहे सभी वाहन चालकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। 'हम किराए के राजा' की ओर से इस समस्या को दिखाते हुए लोगों से समर्थन की अपील की गई है।1
- बिहार के समस्तीपुर में जूट मिल रोड का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें सड़क पर जलजमाव की स्थिति दिखाई दे रही है। यह वीडियो राजमार्ग के काम और बारिश के बीच की स्थिति को दर्शाता है, जिसे स्थानीय स्तर पर बारिश के 'प्रसाद' के रूप में देखा जा रहा है।1
- समस्तीपुर के रेलवे घाट स्थित शमशान काली मंदिर में किन्नर मुखिया सपना के नेतृत्व में आज मुन्ना किन्नर आश्रम का उद्घाटन किया गया। इस आश्रम का शुभारंभ स्व. मुन्ना किन्नर की पुण्य तिथि एवं उनकी स्मृति में किया गया है। इस अवसर पर कार्यक्रम में आए अतिथियों को चादर और स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही, इस समारोह के दौरान एक रंगारंग कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया।1
- समस्तीपुर जिले के मोहनपुर प्रखंड अंतर्गत दशहरा पंचायत स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय दशहरा का पूरा परिसर बारिश के पानी के कारण झील में तब्दील हो गया है। इस जलजमाव के बाद अब सबसे बड़ी समस्या यह खड़ी हो गई है कि आखिर क्लासरूम में जाया कैसे जाए। इस कठिन परिस्थिति का सामना करते हुए विद्यालय के शिक्षक और बच्चे मजबूरन इस झील रूपी पानी को पार करके ही अपनी क्लासों में जाने को विवश हैं। इस तरह पानी के बीच से गुजरने के कारण हर वक्त हादसे का डर बना रहता है, जिससे शिक्षकों या बच्चों के हाथ-पैर टूटने या फिर कोई और गंभीर अनहोनी होने की पूरी आशंका बनी हुई है। इस संवेदनशील मामले को लेकर अब तक विभागीय पदाधिकारियों या प्रशासन की नींद नहीं खुली है और वे पूरी तरह मौन साधे हुए हैं। परिसर में जमा हुए इस पानी की निकासी के लिए प्रशासनिक स्तर पर कोई भी कदम नहीं उठाया गया है और न ही इस समस्या से उबरने का कोई प्रयास किया जा रहा है।1
- Post by Lalu Kumar1