अगर किसान खुद फसल का दाम तय करें तो मजदूर पर क्या असर होगा? भारत में अभी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) जैसी व्यवस्था है, जिसे केंद्र सरकार घोषित करती है। यदि पूरी तरह बाज़ार पर छोड़ दिया जाए और बड़े जमींदार (बड़ी जोत वाले किसान) दाम तय करने लगें, तो संभावित असर: मजदूरी पर दबाव: बड़े जमींदार लागत घटाने के लिए मजदूरी कम रखने की कोशिश कर सकते हैं। छोटे किसान भी प्रभावित: भारत में लगभग 85% किसान छोटे और सीमांत हैं; वे भी बाज़ार में बड़े खिलाड़ियों से कमजोर पड़ सकते हैं। गरीब उपभोक्ता पर असर: अगर दाम बहुत बढ़ें तो रोज़मर्रा का उपभोक्ता महंगी खाद्य वस्तुएँ नहीं खरीद पाएगा। लेकिन दूसरी तरफ यह भी सच है कि: अगर फसल का दाम उचित मिले तो छोटे किसान की आय बढ़ सकती है। सरकार कानूनों और न्यूनतम मजदूरी नियमों से मजदूरों की सुरक्षा कर सकती है। 2️⃣ “जमींदारों की चाल” वाला तर्क भारत में ज़मीन का बड़ा हिस्सा अब छोटे किसानों के पास है। पारंपरिक “जमींदारी” व्यवस्था 1950 के बाद खत्म कर दी गई थी। हालांकि कुछ राज्यों में आज भी बड़ी जोत वाले किसान हैं। इसलिए हर नीति में यह देखना जरूरी है कि: मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी कानून लागू हों मनरेगा जैसी योजनाएँ मजबूत रहें PDS (राशन) प्रणाली गरीबों को सस्ता अनाज देती रहे 3️⃣ संविधान और “पहला हक” की बात आपने जो बात लिखी है, वह सामाजिक न्याय की भावना से जुड़ी है। संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 समानता और आरक्षण से जुड़े हैं, तथा 335, 340, 341, 342 अनुसूचित जाति/जनजाति और पिछड़े वर्गों के प्रावधानों से संबंधित हैं। जहाँ तक “राष्ट्र के संसाधनों पर पहला हक” वाला कथन है—यह कथन अक्सर सार्वजनिक भाषणों में अलग-अलग संदर्भों में नेताओं द्वारा कहा गया है। इसे सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों को प्राथमिकता देने के संदर्भ में समझा जाता है। नरेंद्र मोदी भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री हैं, और उनकी सरकार ने भी विभिन्न कल्याणकारी योजनाएँ (जैसे उज्ज्वला, आवास, आयुष्मान) वंचित वर्गों के लिए चलाई हैं। 4️⃣ संतुलित समाधान क्या हो सकता है? ✔️ MSP और बाजार—दोनों का संतुलन ✔️ मजदूरों के लिए सख्त न्यूनतम मजदूरी लागू करना ✔️ राशन प्रणाली मजबूत रखना ✔️ छोटे किसानों और खेत मजदूरों के लिए अलग सुरक्षा नीति ✔️ भूमि सुधार और सहकारी खेती को बढ़ावा निष्कर्ष मुद्दा “किसान बनाम मजदूर” नहीं होना चाहिए। भारत में किसान और मजदूर अक्सर एक ही सामाजिक वर्ग से आते हैं—कई छोटे किसान खुद भी मजदूरी करते हैं। असली जरूरत है ऐसी नीति की जो: किसान को उचित दाम दे मजदूर को उचित मजदूरी दे गरीब उपभोक्ता को सस्ता अनाज दे
अगर किसान खुद फसल का दाम तय करें तो मजदूर पर क्या असर होगा? भारत में अभी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) जैसी व्यवस्था है, जिसे केंद्र सरकार घोषित करती है। यदि पूरी तरह बाज़ार पर छोड़ दिया जाए और बड़े जमींदार (बड़ी जोत वाले किसान) दाम तय करने लगें, तो संभावित असर: मजदूरी पर दबाव: बड़े जमींदार लागत घटाने के लिए मजदूरी कम रखने की कोशिश कर सकते हैं। छोटे किसान भी प्रभावित: भारत में लगभग 85% किसान छोटे और सीमांत हैं; वे भी बाज़ार में बड़े खिलाड़ियों से कमजोर पड़ सकते हैं। गरीब उपभोक्ता पर असर: अगर दाम बहुत बढ़ें तो रोज़मर्रा का उपभोक्ता महंगी खाद्य वस्तुएँ नहीं खरीद पाएगा। लेकिन दूसरी तरफ यह भी सच है कि: अगर फसल का दाम उचित मिले तो छोटे किसान की आय बढ़ सकती है। सरकार कानूनों और न्यूनतम मजदूरी नियमों से मजदूरों की सुरक्षा कर सकती है। 2️⃣ “जमींदारों की चाल” वाला तर्क भारत में ज़मीन का बड़ा हिस्सा अब छोटे किसानों के पास है। पारंपरिक “जमींदारी” व्यवस्था 1950 के बाद खत्म कर दी गई थी। हालांकि कुछ राज्यों में आज भी बड़ी जोत वाले किसान हैं। इसलिए हर नीति में यह देखना जरूरी है कि: मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी कानून लागू हों मनरेगा जैसी योजनाएँ मजबूत रहें PDS (राशन) प्रणाली गरीबों को सस्ता अनाज देती रहे 3️⃣ संविधान और “पहला हक” की बात आपने जो बात लिखी है, वह सामाजिक न्याय की भावना से जुड़ी है। संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 समानता और आरक्षण से जुड़े हैं, तथा 335, 340, 341, 342 अनुसूचित जाति/जनजाति और पिछड़े वर्गों के प्रावधानों से संबंधित हैं। जहाँ तक “राष्ट्र के संसाधनों पर पहला हक” वाला कथन है—यह कथन अक्सर सार्वजनिक भाषणों में अलग-अलग संदर्भों में नेताओं द्वारा कहा गया है। इसे सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों को प्राथमिकता देने के संदर्भ में समझा जाता है। नरेंद्र मोदी भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री हैं, और उनकी सरकार ने भी विभिन्न कल्याणकारी योजनाएँ (जैसे उज्ज्वला, आवास, आयुष्मान) वंचित वर्गों के लिए चलाई हैं। 4️⃣ संतुलित समाधान क्या हो सकता है? ✔️ MSP और बाजार—दोनों का संतुलन ✔️ मजदूरों के लिए सख्त न्यूनतम मजदूरी लागू करना ✔️ राशन प्रणाली मजबूत रखना ✔️ छोटे किसानों और खेत मजदूरों के लिए अलग सुरक्षा नीति ✔️ भूमि सुधार और सहकारी खेती को बढ़ावा निष्कर्ष मुद्दा “किसान बनाम मजदूर” नहीं होना चाहिए। भारत में किसान और मजदूर अक्सर एक ही सामाजिक वर्ग से आते हैं—कई छोटे किसान खुद भी मजदूरी करते हैं। असली जरूरत है ऐसी नीति की जो: किसान को उचित दाम दे मजदूर को उचित मजदूरी दे गरीब उपभोक्ता को सस्ता अनाज दे
- जालौन एसओजी/सर्विलांस टीम व थाना नदीगांव पुलिस टीम द्वारा हत्या की घटना में संलिप्त 06 अभियुक्तगण को गिऱफ्तार किये जाने के संबन्ध में श्रीमान पुलिस अधीक्षक जालौन की बाईट ।1
- Post by Rtyu Rtyu1
- Post by Sugirv Kushwha1
- Post by अनिल कुदारी1
- खास खबर है जालौन जिले के जालौन नगर क्षेत्र से जुड़ी हुई जहां आज़ एक वीडियो सोशल मीडिया में बड़ी तेज़ी से वायरल हो रहा है दरअसल आज़ जालौन नगर क्षेत्र में एक बारात धूमधाम से निकल रही थी और उसमें डीजे बजाया जा रहा था इसी दौरान सड़क किनारे अपनी मां के साथ आई मासूम बच्ची डीजे की धुन पर थिरकते हुए नजर आई जिसने सभी का मन मोह लिया1
- लखनऊ विधानसभा में गूंजे उरई-जालौन की समस्याओं के मुद्दे लखनऊ। आज विधानसभा सदन में उरई-जालौन विधानसभा क्षेत्र की जनसमस्याओं और विकास कार्यों को लेकर जोरदार ढंग से आवाज उठाई गई। गौरी शंकर वर्मा ने सदन में अपने विचार रखते हुए क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं, अधूरे विकास कार्यों और जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने सड़क, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा व्यवस्था एवं नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। विधायक ने कहा कि उरई-जालौन क्षेत्र के समुचित विकास के लिए ठोस एवं त्वरित कदम उठाए जाना आवश्यक है, ताकि आमजन को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। सदन में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने सरकार से मांग की कि क्षेत्र में चल रही विकास योजनाओं को गति दी जाए तथा लंबित परियोजनाओं को शीघ्र पूर्ण कराया जाए। विधायक के इस प्रयास से क्षेत्रवासियों में आशा की नई किरण जगी है और लोगों ने उम्मीद जताई है कि विधानसभा में उठाए गए मुद्दों पर सकारात्मक कार्रवाई होगी।1
- स्थान -जालौन रिपोर्ट -सुनील सिंह उर्फ़ भीम राजावत Mo. 9628800458 स्लग -72 घंटे में हत्या का खुलासा, 6 आरोपी गिरफ्तार भाई निकला हत्यारा एंकर -नदीगांव पुलिस व एसओजी/सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई उत्तर प्रदेश पुलिस के पुलिस महानिदेशक, कानपुर जोन, कानपुर एवं पुलिस महानिरीक्षक, झांसी परिक्षेत्र, झांसी के निर्देशन तथा पुलिस अधीक्षक जालौन के कुशल नेतृत्व में एसओजी/सर्विलांस टीम व थाना नदीगांव पुलिस ने हत्या की सनसनीखेज घटना का 72 घंटे के भीतर खुलासा करते हुए 6 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। मामला क्या था? दिनांक 14 फरवरी 2026 को थाना नदीगांव में वादिनी श्रीमती रामवती ने अपने पुत्र राघवेन्द्र के अपहरण कर हत्या किए जाने के संबंध में 8 आरोपियों के विरुद्ध तहरीर दी थी। इस पर मु0अ0सं0 21/2026 धारा 140(1)/103(1)/238/61(2) बीएनएस के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया। मृतक के शव का पंचायतनामा एवं भौतिक साक्ष्य संकलन की कार्रवाई फील्ड यूनिट टीम द्वारा की गई। तीन टीमों का गठन, त्वरित कार्रवाई घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक जालौन द्वारा तीन टीमों का गठन किया गया। विवेचना के दौरान इलेक्ट्रॉनिक व भौतिक साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज आदि के आधार पर कृष्णपाल उर्फ कुलदीप पुत्र घनश्याम निवासी ग्राम सराय थाना पूंछ, जिला झांसी सहित 6 आरोपियों की संलिप्तता पाई गई। बरामदगी गिरफ्तार अभियुक्तों के कब्जे से— एक हुण्डई औरा कार (सफेद रंग) एक एक्टिवा स्कूटी एक अवैध पिस्टल व दो जिंदा कारतूस (.32 बोर) दो डाटा केबल एक मफलर एक थैला जिसमें SIR से संबंधित सरकारी दस्तावेज बरामद होने पर मुकदमे में धारा 3/25 आर्म्स एक्ट की बढ़ोत्तरी की गई है। पूछताछ में हुआ खुलासा मुख्य आरोपी कृष्ण कुमार उर्फ कुलदीप ने पूछताछ में बताया कि वह जुआ खेलने का आदी है और उस पर कई लोगों का कर्ज हो गया था। मृतक राघवेन्द्र से भी उसने रुपये उधार लिए थे, जिसे लेकर मृतक लगातार पैसे वापस मांग रहा था। आरोपियों ने पैसे देने के बहाने राघवेन्द्र को बुलाया और कार से अपने साथ ले गए। वहां एक महिला मित्र के साथ मृतक के आपत्तिजनक वीडियो/फोटो बनाकर उसे दबाव में लाने की कोशिश की गई, ताकि वह उधार की मांग न करे। इसी दौरान विवाद बढ़ गया और आवेश में आकर आरोपियों ने मोबाइल डाटा केबल व मफलर से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। बाद में शव को दतिया-सेवड़ा मार्ग पर झाड़ियों में फेंक दिया। पुलिस द्वारा आरोपियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जा रही है तथा अन्य वांछित अभियुक्तों की तलाश जारी है। बाईट -sp दुर्गेश कुमार सिंह1
- वार्षिक चुनाव के नामांकन प्रक्रिया के बाद क्या कुछ बोले एल्डइस कमेटी के चेयरमैन लाजपत राय सक्सेना!! इन्होंने बताया कि 30 लोगों ने अभी तक नामांकन किए हैं अलग-अलग कई पदों के लिए नामांकन किए गए हैं अभी वापसी का समय है जिस पर जब वापस करना है कर सकता है अगर नहीं करता है तो चुनाव कराए जाएंगे।।1