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श्रुति चौधरी ने प्रदेशवासियों को दी स्वतंत्रता दिवस और हरियाली तीज की हार्दिक शुभकामनाएं श्रुति चौधरी ने प्रदेशवासियों को दी स्वतंत्रता दिवस और हरियाली तीज की हार्दिक शुभकामनाएं

23 hrs ago
user_Shri ram
Shri ram
Local News Reporter पंचकूला, पंचकूला, हरियाणा•
23 hrs ago

श्रुति चौधरी ने प्रदेशवासियों को दी स्वतंत्रता दिवस और हरियाली तीज की हार्दिक शुभकामनाएं श्रुति चौधरी ने प्रदेशवासियों को दी स्वतंत्रता दिवस और हरियाली तीज की हार्दिक शुभकामनाएं

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  • रील्स का पैशन जिंदगी से बड़ा है क्या ? वायरल वीडियो उत्तराखंड का बताया जा रहा है। उत्तराखंड पुलिस ने बारिश के मौसम में लोगों को नदियों, नालों और झरनों के तेज बहाव से सावधान रहने की अपील की. पुलिस ने कहा कि रील्स और फोटो बनाने का पैशन आपकी जिंदगी से बड़ा नहीं होना चाहिए. खतरनाक किनारों पर रील्स बनाने के लिए कोई रिस्क न लें। #khabaraaj @uttarakhandcops #uttarakhand
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    रील्स का पैशन जिंदगी से बड़ा है क्या ?

वायरल वीडियो उत्तराखंड का बताया जा रहा है।

उत्तराखंड पुलिस ने बारिश के मौसम में लोगों को नदियों, नालों और झरनों के तेज बहाव से सावधान रहने की अपील की. पुलिस ने कहा कि रील्स और फोटो बनाने का पैशन आपकी जिंदगी से बड़ा नहीं होना चाहिए. खतरनाक किनारों पर रील्स बनाने के लिए कोई रिस्क न लें। #khabaraaj
@uttarakhandcops 
#uttarakhand
    user_खबर आज
    खबर आज
    Local News Reporter पंचकूला, पंचकूला, हरियाणा•
    4 hrs ago
  • पंजोखड़ा साहिब विवाद पर सियासत तेज, कुमारी शैलजा ने सरकार पर साधा निशाना अंबाला के पंजोखड़ा साहिब विवाद को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं सिरसा सांसद कुमारी शैलजा गुरुद्वारा श्री पंजोखड़ा साहिब पहुंचीं। इससे पहले उन्होंने विवाद में घायल सुरेंद्र सिंह से अस्पताल में मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। शैलजा ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि इंसाफ की मांग कर रहे सिख समुदाय पर अश्रु गैस के गोले छोड़ने की बजाय सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए थी। उन्होंने सीबीआई जांच पर भी विश्वास नहीं होने की बात कही और सरकार से दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की।
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    पंजोखड़ा साहिब विवाद पर सियासत तेज, कुमारी शैलजा ने सरकार पर साधा निशाना
अंबाला के पंजोखड़ा साहिब विवाद को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं सिरसा सांसद कुमारी शैलजा गुरुद्वारा श्री पंजोखड़ा साहिब पहुंचीं। इससे पहले उन्होंने विवाद में घायल सुरेंद्र सिंह से अस्पताल में मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। शैलजा ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि इंसाफ की मांग कर रहे सिख समुदाय पर अश्रु गैस के गोले छोड़ने की बजाय सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए थी। उन्होंने सीबीआई जांच पर भी विश्वास नहीं होने की बात कही और सरकार से दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की।
    user_Shri ram
    Shri ram
    Local News Reporter पंचकूला, पंचकूला, हरियाणा•
    7 hrs ago
  • नागरिक अस्पताल में एसी कॉपर पाइप परचरी मामला, मेंटेनेंस का काम पंचकूला के सेक्टर-6 सिविल अस्पताल में सुरक्षा भगवान भरोसे: 49 गार्ड तैनात, फिर भी धड़ल्ले से हो रही एसी की कॉपर पाइप और तारें चोरी,
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    नागरिक अस्पताल में एसी कॉपर पाइप  परचरी मामला, मेंटेनेंस का काम 
पंचकूला के सेक्टर-6 सिविल अस्पताल में सुरक्षा भगवान भरोसे:
49 गार्ड तैनात, फिर भी धड़ल्ले से हो रही एसी की कॉपर पाइप और तारें चोरी,
    user_News Public Live Kuldeep
    News Public Live Kuldeep
    Local News Reporter पंचकूला, पंचकूला, हरियाणा•
    11 hrs ago
  • pathar ghisai marble polishing Karti Hain 9761 2746 40
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    pathar ghisai marble polishing Karti Hain 9761 2746 40
    user_Gautam Kumar
    Gautam Kumar
    अंबाला, अंबाला, हरियाणा•
    14 hrs ago
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    user_Dr.Sharwan
    Dr.Sharwan
    Local News Reporter Shimla ( Rural ), Himachal Pradesh•
    3 hrs ago
  • योग साधको ने स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराया बांटी मिठाई... योग का लिया संकल्प योग साधको ने योग कक्षा में फहराया तिरंगा, बांटी मिठाई सढोरा, श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर ध्यान केंद्र में लगने वाली नियमित योग कक्षा में योग साधकों द्वारा आजादी के पर्व पर तिरंगा फहराया गया। सी एम विंडो एमिनेट पर्सन नैब सैनी ने ध्वजारोहन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा क्रांतिकारियों की अमर शहादत की बदौलत ही देश आजाद हुआ। अब आवश्यकता देश की आजादी को संभाल कर रखने की है। योग साधक विकास वर्मा, चमन सैनी, रामनाथ व ओम प्रकाश ने देश की आजादी की गाथा बारे जानकारी दी। इस अवसर पर योग साधकों ने नियमित योग करने का संकल्प लिया। योग साधक बलबीर सैनी, ख़ुशी लाल, प्रवीण गर्ग व सुधीर जंगू ने भी आजादी के पर्व पर खुशियां मनाई। इस अवसर योग साधकों द्वारा जमकर योग अभ्यास किया गया।
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    योग साधको ने स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराया बांटी मिठाई... योग का लिया संकल्प 
योग साधको ने योग कक्षा में फहराया तिरंगा, बांटी मिठाई       सढोरा, श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर ध्यान केंद्र में लगने वाली नियमित योग कक्षा में योग साधकों द्वारा आजादी के पर्व पर तिरंगा फहराया गया। सी एम विंडो एमिनेट पर्सन नैब सैनी ने ध्वजारोहन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा क्रांतिकारियों की अमर शहादत की बदौलत ही देश आजाद हुआ। अब आवश्यकता देश की आजादी को संभाल कर रखने की है। योग साधक विकास वर्मा, चमन सैनी, रामनाथ व ओम प्रकाश ने देश की आजादी की गाथा बारे जानकारी दी। इस अवसर पर योग साधकों ने नियमित योग करने का संकल्प लिया। योग साधक बलबीर सैनी, ख़ुशी लाल, प्रवीण गर्ग व सुधीर जंगू ने भी आजादी के पर्व पर खुशियां मनाई। इस अवसर योग साधकों द्वारा जमकर योग अभ्यास किया गया।
    user_Satpal sharma
    Satpal sharma
    Local News Reporter सढौरा एसटी, यमुनानगर, हरियाणा•
    4 hrs ago
  • 🇮🇳 15 अगस्त विशेष — DK NEWS NALAGARH 15 अगस्त के मौके पर पूरे देश में स्कूलों और कॉलेजों में तिरंगा फहराया जाएगा। इन कार्यक्रमों में कई नेता, विधायक और जनप्रतिनिधि पहुंचकर झंडा फहराने के साथ मंच से देशभक्ति के लंबे-लंबे भाषण देंगे। भीड़ देखकर और मंचों पर खड़े होकर देशभक्ति का प्रदर्शन तो होगा, लेकिन अक्सर यह देशभक्ति सिर्फ शब्दों और भाषणों तक ही सीमित रह जाती है। जहां देश भक्ति भाषणों तक सीमित है उसी बीच शहीद शिव सिंह बेला के परिवार को सम्मानित करने पहुंचे SBI अधिकारी रमेश चंद, 10 वर्षों बाद उठे कई बड़े सवाल पंचायत करसौली तहसील पंजैहरा के अंतर्गत गांव गुलरवाला (पजैरा क्षेत्र) के वीर सपूत शहीद शिव सिंह बेला ने वर्ष 2018 में देश की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। आज, उनकी शहादत के वर्षों बाद, 15 अगस्त के मौके पर नालागढ़ SBI के अधिकारी रमेश चंद अपने कर्मचारियों के साथ शहीद शिव सिंह के घर पहुंचे और उनकी माता जसबीर कौर को सम्मानित किया। यह पल सिर्फ एक सम्मान समारोह नहीं था। यह उस मां के लिए बेहद भावुक क्षण था, जिसने देश की रक्षा के लिए अपने बेटे को खो दिया। और यही तस्वीर आज एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर रही है— जब एक SBI अधिकारी शहीद के घर तक पहुंचकर उसकी मां को सम्मान दे सकता है, तो पिछले 10 वर्षों में जिम्मेदार नेता और अधिकारी कितनी बार उनके घर पहुंचे? शहीद शिव सिंह बेला, गांव गुलरावाला, तहसील पजैरा के रहने वाले थे। वर्ष 2018 में देश की रक्षा करते हुए वे वीरगति को प्राप्त हुए। उनके जाने के बाद परिवार ने न सिर्फ अपने बेटे को खोया, बल्कि जीवन में कई कठिन परिस्थितियों का भी सामना किया। लेकिन शहादत के बाद क्या हुआ? परिवार के अनुसार, शहीद की पार्थिव देह जब गांव पहुंची थी, उस समय कई नेता और जनप्रतिनिधि परिवार के साथ खड़े हुए थे और बड़े-बड़े वादे भी किए गए थे। लेकिन परिवार का कहना है कि समय बीतने के साथ वे वादे केवल भाषणों तक ही सीमित रह गए और उसके बाद किसी ने भी परिवार की वास्तविक समस्याओं की ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। दस साल का समय कम नहीं होता। इन वर्षों में शहीद परिवार ने किन परिस्थितियों का सामना किया, यह सवाल आज भी खड़ा है। शहीद शिव सिंह की बहन नर्चना देवी वर्तमान में एक प्राइवेट स्कूल में टीचर के पद पर कार्यरत हैं, लेकिन परिवार का कहना है कि शहीद परिवार को मिलने वाली सरकारी नौकरी की सुविधा अभी तक पूरी तरह से नहीं मिल पाई है। परिवार की ओर से यह भी कहा गया है कि गांव में शहीद शिव सिंह की याद में जो गेट बनाया गया है, वह भी परिवार के प्रयासों से ही संभव हो पाया, जबकि सरकारी स्तर पर अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभागों से होना बाकी है, लेकिन अगर एक शहीद परिवार आज भी अपनी समस्याओं को लेकर सवाल उठा रहा है, तो उन सवालों का जवाब मिलना बेहद जरूरी है। और इसी बीच 15 अगस्त पर SBI अधिकारी रमेश चंद की यह पहल चर्चा का विषय बन गई है। उन्होंने किसी बड़े मंच का इंतजार नहीं किया। न किसी भीड़ का, न किसी राजनीतिक कार्यक्रम का। बल्कि अपने कर्मचारियों के साथ सीधे शहीद शिव सिंह बेला के घर पहुंचे और उनकी माता जसबीर कौर को सम्मानित किया। यही वह तस्वीर है, जो इस 15 अगस्त पर सबसे ज्यादा मायने रखती है। क्योंकि देशभक्ति सिर्फ भाषणों में नहीं होनी चाहिए। देशभक्ति सिर्फ स्कूलों में जाकर झंडा फहराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। देशभक्ति सिर्फ मंचों पर भीड़ देखकर दिए गए भाषणों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। देशभक्ति जमीन पर भी दिखाई देनी चाहिए। और जमीन पर देशभक्ति का सबसे बड़ा उदाहरण तब है, जब किसी शहीद के घर जाकर उसके परिवार से पूछा जाए— “आपको किसी चीज की जरूरत तो नहीं?” आज सवाल उन सभी नेताओं और जिम्मेदार लोगों से है, जो शहीदों के नाम पर मंचों से बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। अगर शहीद की अंतिम यात्रा में हजारों लोगों के बीच खड़े होना देशभक्ति है, तो क्या दस साल बाद उसी शहीद की मां के घर जाकर उनका हाल पूछना देशभक्ति नहीं? अगर मंच से शहीद को श्रद्धांजलि देना जरूरी है, तो क्या उसके परिवार की समस्याओं को सुनना जरूरी नहीं? अगर 15 अगस्त को तिरंगे को सलाम करना हमारा कर्तव्य है, तो क्या उस तिरंगे की आन-बान-शान के लिए अपना बेटा खो चुकी मां का सम्मान करना हमारा कर्तव्य नहीं? यही असली सवाल है। और इसी वजह से SBI नालागढ़ के अधिकारी रमेश चंद की यह पहल सराहनीय है कि उन्होंने शहीद परिवार के घर जाकर सम्मान किया। क्योंकि वहां कोई बड़ी भीड़ नहीं थी। कोई राजनीतिक मंच नहीं था। कोई रिबन काटने का कार्यक्रम नहीं था। वहां सिर्फ एक शहीद की मां थी और उसके सामने खड़े थे वे लोग, जो उसके बेटे की शहादत को सम्मान देने पहुंचे थे। शहीद शिव सिंह की माता जसबीर कौर के लिए शायद यही सबसे बड़ा सम्मान है कि उनके बेटे को आज भी याद किया जा रहा है। क्योंकि एक मां अपने बेटे को वापस नहीं मांगती। वह सिर्फ इतना चाहती है कि देश उसके बेटे की कुर्बानी को भूले नहीं। और यही संदेश इस 15 अगस्त पर जाना चाहिए— शहीदों को सिर्फ एक दिन याद मत कीजिए। उनके परिवारों को भी याद रखिए। सरकार और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों से भी यही सवाल है कि शहीद शिव सिंह के परिवार से जुड़े लंबित मामलों पर अब क्या कार्रवाई होगी? उनकी बहन नर्चना देवी के रोजगार से जुड़े सवाल का समाधान कब होगा? परिवार की अन्य समस्याओं पर कौन जिम्मेदारी लेगा? और सबसे बड़ा सवाल— क्या शहीद परिवारों का सम्मान सिर्फ राष्ट्रीय पर्वों तक रहेगा, या साल के 365 दिन उनके साथ खड़ा होने की व्यवस्था भी बनेगी? 15 अगस्त सिर्फ आजादी का उत्सव नहीं है। यह उन लोगों को याद करने का दिन भी है, जिन्होंने इस आजादी की कीमत अपने खून से चुकाई। शहीद शिव सिंह बेला को शत-शत नमन। उनकी माता जसबीर कौर और पूरे परिवार को सम्मान। और SBI नालागढ़ के अधिकारी रमेश चंद को इस पहल के लिए साधुवाद, जिन्होंने शहीद परिवार के घर पहुंचकर यह संदेश दिया कि— देशभक्ति सिर्फ बातों में नहीं, जमीन पर भी दिखाई देनी चाहिए। 🇮🇳 जय हिंद। वंदे मातरम्। DK NEWS NALAGARH 15 अगस्त विशेष रिपोर्ट 🇮🇳 15 अगस्त विशेष — DK NEWS NALAGARH 15 अगस्त के मौके पर पूरे देश में स्कूलों और कॉलेजों में तिरंगा फहराया जाएगा। इन कार्यक्रमों में कई नेता, विधायक और जनप्रतिनिधि पहुंचकर झंडा फहराने के साथ मंच से देशभक्ति के लंबे-लंबे भाषण देंगे। भीड़ देखकर और मंचों पर खड़े होकर देशभक्ति का प्रदर्शन तो होगा, लेकिन अक्सर यह देशभक्ति सिर्फ शब्दों और भाषणों तक ही सीमित रह जाती है। जहां देश भक्ति भाषणों तक सीमित है उसी बीच शहीद शिव सिंह बेला के परिवार को सम्मानित करने पहुंचे SBI अधिकारी रमेश चंद, 10 वर्षों बाद उठे कई बड़े सवाल पंचायत करसौली तहसील पंजैहरा के अंतर्गत गांव गुलरवाला (पजैरा क्षेत्र) के वीर सपूत शहीद शिव सिंह बेला ने वर्ष 2018 में देश की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। आज, उनकी शहादत के वर्षों बाद, 15 अगस्त के मौके पर नालागढ़ SBI के अधिकारी रमेश चंद अपने कर्मचारियों के साथ शहीद शिव सिंह के घर पहुंचे और उनकी माता जसबीर कौर को सम्मानित किया। यह पल सिर्फ एक सम्मान समारोह नहीं था। यह उस मां के लिए बेहद भावुक क्षण था, जिसने देश की रक्षा के लिए अपने बेटे को खो दिया। और यही तस्वीर आज एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर रही है— जब एक SBI अधिकारी शहीद के घर तक पहुंचकर उसकी मां को सम्मान दे सकता है, तो पिछले 10 वर्षों में जिम्मेदार नेता और अधिकारी कितनी बार उनके घर पहुंचे? शहीद शिव सिंह बेला, गांव गुलरावाला, तहसील पजैरा के रहने वाले थे। वर्ष 2018 में देश की रक्षा करते हुए वे वीरगति को प्राप्त हुए। उनके जाने के बाद परिवार ने न सिर्फ अपने बेटे को खोया, बल्कि जीवन में कई कठिन परिस्थितियों का भी सामना किया। लेकिन शहादत के बाद क्या हुआ? परिवार के अनुसार, शहीद की पार्थिव देह जब गांव पहुंची थी, उस समय कई नेता और जनप्रतिनिधि परिवार के साथ खड़े हुए थे और बड़े-बड़े वादे भी किए गए थे। लेकिन परिवार का कहना है कि समय बीतने के साथ वे वादे केवल भाषणों तक ही सीमित रह गए और उसके बाद किसी ने भी परिवार की वास्तविक समस्याओं की ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। दस साल का समय कम नहीं होता। इन वर्षों में शहीद परिवार ने किन परिस्थितियों का सामना किया, यह सवाल आज भी खड़ा है। शहीद शिव सिंह की बहन नर्चना देवी वर्तमान में एक प्राइवेट स्कूल में टीचर के पद पर कार्यरत हैं, लेकिन परिवार का कहना है कि शहीद परिवार को मिलने वाली सरकारी नौकरी की सुविधा अभी तक पूरी तरह से नहीं मिल पाई है। परिवार की ओर से यह भी कहा गया है कि गांव में शहीद शिव सिंह की याद में जो गेट बनाया गया है, वह भी परिवार के प्रयासों से ही संभव हो पाया, जबकि सरकारी स्तर पर अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभागों से होना बाकी है, लेकिन अगर एक शहीद परिवार आज भी अपनी समस्याओं को लेकर सवाल उठा रहा है, तो उन सवालों का जवाब मिलना बेहद जरूरी है। और इसी बीच 15 अगस्त पर SBI अधिकारी रमेश चंद की यह पहल चर्चा का विषय बन गई है। उन्होंने किसी बड़े मंच का इंतजार नहीं किया। न किसी भीड़ का, न किसी राजनीतिक कार्यक्रम का। बल्कि अपने कर्मचारियों के साथ सीधे शहीद शिव सिंह बेला के घर पहुंचे और उनकी माता जसबीर कौर को सम्मानित किया। यही वह तस्वीर है, जो इस 15 अगस्त पर सबसे ज्यादा मायने रखती है। क्योंकि देशभक्ति सिर्फ भाषणों में नहीं होनी चाहिए। देशभक्ति सिर्फ स्कूलों में जाकर झंडा फहराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। देशभक्ति सिर्फ मंचों पर भीड़ देखकर दिए गए भाषणों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। देशभक्ति जमीन पर भी दिखाई देनी चाहिए। और जमीन पर देशभक्ति का सबसे बड़ा उदाहरण तब है, जब किसी शहीद के घर जाकर उसके परिवार से पूछा जाए— “आपको किसी चीज की जरूरत तो नहीं?” आज सवाल उन सभी नेताओं और जिम्मेदार लोगों से है, जो शहीदों के नाम पर मंचों से बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। अगर शहीद की अंतिम यात्रा में हजारों लोगों के बीच खड़े होना देशभक्ति है, तो क्या दस साल बाद उसी शहीद की मां के घर जाकर उनका हाल पूछना देशभक्ति नहीं? अगर मंच से शहीद को श्रद्धांजलि देना जरूरी है, तो क्या उसके परिवार की समस्याओं को सुनना जरूरी नहीं? अगर 15 अगस्त को तिरंगे को सलाम करना हमारा कर्तव्य है, तो क्या उस तिरंगे की आन-बान-शान के लिए अपना बेटा खो चुकी मां का सम्मान करना हमारा कर्तव्य नहीं? यही असली सवाल है। और इसी वजह से SBI नालागढ़ के अधिकारी रमेश चंद की यह पहल सराहनीय है कि उन्होंने शहीद परिवार के घर जाकर सम्मान किया। क्योंकि वहां कोई बड़ी भीड़ नहीं थी। कोई राजनीतिक मंच नहीं था। कोई रिबन काटने का कार्यक्रम नहीं था। वहां सिर्फ एक शहीद की मां थी और उसके सामने खड़े थे वे लोग, जो उसके बेटे की शहादत को सम्मान देने पहुंचे थे। शहीद शिव सिंह की माता जसबीर कौर के लिए शायद यही सबसे बड़ा सम्मान है कि उनके बेटे को आज भी याद किया जा रहा है। क्योंकि एक मां अपने बेटे को वापस नहीं मांगती। वह सिर्फ इतना चाहती है कि देश उसके बेटे की कुर्बानी को भूले नहीं। और यही संदेश इस 15 अगस्त पर जाना चाहिए— शहीदों को सिर्फ एक दिन याद मत कीजिए। उनके परिवारों को भी याद रखिए। सरकार और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों से भी यही सवाल है कि शहीद शिव सिंह के परिवार से जुड़े लंबित मामलों पर अब क्या कार्रवाई होगी? उनकी बहन नर्चना देवी के रोजगार से जुड़े सवाल का समाधान कब होगा? परिवार की अन्य समस्याओं पर कौन जिम्मेदारी लेगा? और सबसे बड़ा सवाल— क्या शहीद परिवारों का सम्मान सिर्फ राष्ट्रीय पर्वों तक रहेगा, या साल के 365 दिन उनके साथ खड़ा होने की व्यवस्था भी बनेगी? 15 अगस्त सिर्फ आजादी का उत्सव नहीं है। यह उन लोगों को याद करने का दिन भी है, जिन्होंने इस आजादी की कीमत अपने खून से चुकाई। शहीद शिव सिंह बेला को शत-शत नमन। उनकी माता जसबीर कौर और पूरे परिवार को सम्मान। और SBI नालागढ़ के अधिकारी रमेश चंद को इस पहल के लिए साधुवाद, जिन्होंने शहीद परिवार के घर पहुंचकर यह संदेश दिया कि— देशभक्ति सिर्फ बातों में नहीं, जमीन पर भी दिखाई देनी चाहिए। 🇮🇳 जय हिंद। वंदे मातरम्। DK NEWS NALAGARH 15 अगस्त विशेष रिपोर्ट
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    🇮🇳 15 अगस्त विशेष — DK NEWS NALAGARH
15 अगस्त के मौके पर पूरे देश में स्कूलों और कॉलेजों में तिरंगा फहराया जाएगा। इन कार्यक्रमों में कई नेता, विधायक और जनप्रतिनिधि पहुंचकर झंडा फहराने के साथ मंच से देशभक्ति के लंबे-लंबे भाषण देंगे। भीड़ देखकर और मंचों पर खड़े होकर देशभक्ति का प्रदर्शन तो होगा, लेकिन अक्सर यह देशभक्ति सिर्फ शब्दों और भाषणों तक ही सीमित रह जाती है। 
जहां देश भक्ति भाषणों तक सीमित है उसी  बीच 
शहीद शिव सिंह बेला के परिवार को सम्मानित करने पहुंचे SBI अधिकारी रमेश चंद, 10 वर्षों बाद उठे कई बड़े सवाल
पंचायत करसौली तहसील पंजैहरा  के अंतर्गत गांव गुलरवाला (पजैरा क्षेत्र) के वीर सपूत शहीद शिव सिंह बेला ने वर्ष 2018 में देश की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था।
आज, उनकी शहादत के वर्षों बाद, 15 अगस्त के मौके पर नालागढ़ SBI के अधिकारी रमेश चंद अपने कर्मचारियों के साथ शहीद शिव सिंह के घर पहुंचे और उनकी माता जसबीर कौर को सम्मानित किया।
यह पल सिर्फ एक सम्मान समारोह नहीं था।
यह उस मां के लिए बेहद भावुक क्षण था, जिसने देश की रक्षा के लिए अपने बेटे को खो दिया।
और यही तस्वीर आज एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर रही है—
जब एक SBI अधिकारी शहीद के घर तक पहुंचकर उसकी मां को सम्मान दे सकता है, तो पिछले 10 वर्षों में जिम्मेदार नेता और अधिकारी कितनी बार उनके घर पहुंचे?
शहीद शिव सिंह बेला, गांव गुलरावाला, तहसील पजैरा के रहने वाले थे। वर्ष 2018 में देश की रक्षा करते हुए वे वीरगति को प्राप्त हुए। उनके जाने के बाद परिवार ने न सिर्फ अपने बेटे को खोया, बल्कि जीवन में कई कठिन परिस्थितियों का भी सामना किया।
लेकिन शहादत के बाद क्या हुआ?
परिवार के अनुसार, शहीद की पार्थिव देह जब गांव पहुंची थी, उस समय कई नेता और जनप्रतिनिधि परिवार के साथ खड़े हुए थे और बड़े-बड़े वादे भी किए गए थे।
लेकिन परिवार का कहना है कि समय बीतने के साथ वे वादे केवल भाषणों तक ही सीमित रह गए और उसके बाद किसी ने भी परिवार की वास्तविक समस्याओं की ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया।
दस साल का समय कम नहीं होता।
इन वर्षों में शहीद परिवार ने किन परिस्थितियों का सामना किया, यह सवाल आज भी खड़ा है।
शहीद शिव सिंह की बहन नर्चना देवी वर्तमान में एक प्राइवेट स्कूल में टीचर के पद पर कार्यरत हैं, लेकिन परिवार का कहना है कि शहीद परिवार को मिलने वाली सरकारी नौकरी की सुविधा अभी तक पूरी तरह से नहीं मिल पाई है।
परिवार की ओर से यह भी कहा गया है कि गांव में शहीद शिव सिंह की याद में जो गेट बनाया गया है, वह भी परिवार के प्रयासों से ही संभव हो पाया, जबकि सरकारी स्तर पर अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
इन दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभागों से होना बाकी है, लेकिन अगर एक शहीद परिवार आज भी अपनी समस्याओं को लेकर सवाल उठा रहा है, तो उन सवालों का जवाब मिलना बेहद जरूरी है।
और इसी बीच 15 अगस्त पर SBI अधिकारी रमेश चंद की यह पहल चर्चा का विषय बन गई है।
उन्होंने किसी बड़े मंच का इंतजार नहीं किया।
न किसी भीड़ का, न किसी राजनीतिक कार्यक्रम का।
बल्कि अपने कर्मचारियों के साथ सीधे शहीद शिव सिंह बेला के घर पहुंचे और उनकी माता जसबीर कौर को सम्मानित किया।
यही वह तस्वीर है, जो इस 15 अगस्त पर सबसे ज्यादा मायने रखती है।
क्योंकि देशभक्ति सिर्फ भाषणों में नहीं होनी चाहिए।
देशभक्ति सिर्फ स्कूलों में जाकर झंडा फहराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
देशभक्ति सिर्फ मंचों पर भीड़ देखकर दिए गए भाषणों तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
देशभक्ति जमीन पर भी दिखाई देनी चाहिए।
और जमीन पर देशभक्ति का सबसे बड़ा उदाहरण तब है, जब किसी शहीद के घर जाकर उसके परिवार से पूछा जाए—
“आपको किसी चीज की जरूरत तो नहीं?”
आज सवाल उन सभी नेताओं और जिम्मेदार लोगों से है, जो शहीदों के नाम पर मंचों से बड़ी-बड़ी बातें करते हैं।
अगर शहीद की अंतिम यात्रा में हजारों लोगों के बीच खड़े होना देशभक्ति है, तो क्या दस साल बाद उसी शहीद की मां के घर जाकर उनका हाल पूछना देशभक्ति नहीं?
अगर मंच से शहीद को श्रद्धांजलि देना जरूरी है, तो क्या उसके परिवार की समस्याओं को सुनना जरूरी नहीं?
अगर 15 अगस्त को तिरंगे को सलाम करना हमारा कर्तव्य है, तो क्या उस तिरंगे की आन-बान-शान के लिए अपना बेटा खो चुकी मां का सम्मान करना हमारा कर्तव्य नहीं?
यही असली सवाल है।
और इसी वजह से SBI नालागढ़ के अधिकारी रमेश चंद की यह पहल सराहनीय है कि उन्होंने शहीद परिवार के घर जाकर सम्मान किया।
क्योंकि वहां कोई बड़ी भीड़ नहीं थी।
कोई राजनीतिक मंच नहीं था।
कोई रिबन काटने का कार्यक्रम नहीं था।
वहां सिर्फ एक शहीद की मां थी और उसके सामने खड़े थे वे लोग, जो उसके बेटे की शहादत को सम्मान देने पहुंचे थे।
शहीद शिव सिंह की माता जसबीर कौर के लिए शायद यही सबसे बड़ा सम्मान है कि उनके बेटे को आज भी याद किया जा रहा है।
क्योंकि एक मां अपने बेटे को वापस नहीं मांगती।
वह सिर्फ इतना चाहती है कि देश उसके बेटे की कुर्बानी को भूले नहीं।
और यही संदेश इस 15 अगस्त पर जाना चाहिए—
शहीदों को सिर्फ एक दिन याद मत कीजिए।
उनके परिवारों को भी याद रखिए।
सरकार और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों से भी यही सवाल है कि शहीद शिव सिंह के परिवार से जुड़े लंबित मामलों पर अब क्या कार्रवाई होगी?
उनकी बहन नर्चना देवी के रोजगार से जुड़े सवाल का समाधान कब होगा?
परिवार की अन्य समस्याओं पर कौन जिम्मेदारी लेगा?
और सबसे बड़ा सवाल—
क्या शहीद परिवारों का सम्मान सिर्फ राष्ट्रीय पर्वों तक रहेगा, या साल के 365 दिन उनके साथ खड़ा होने की व्यवस्था भी बनेगी?
15 अगस्त सिर्फ आजादी का उत्सव नहीं है।
यह उन लोगों को याद करने का दिन भी है, जिन्होंने इस आजादी की कीमत अपने खून से चुकाई।
शहीद शिव सिंह बेला को शत-शत नमन।
उनकी माता जसबीर कौर और पूरे परिवार को सम्मान।
और SBI नालागढ़ के अधिकारी रमेश चंद को इस पहल के लिए साधुवाद, जिन्होंने शहीद परिवार के घर पहुंचकर यह संदेश दिया कि—
देशभक्ति सिर्फ बातों में नहीं, जमीन पर भी दिखाई देनी चाहिए।
🇮🇳 जय हिंद। वंदे मातरम्।
DK NEWS NALAGARH
15 अगस्त विशेष रिपोर्ट
🇮🇳 15 अगस्त विशेष — DK NEWS NALAGARH
15 अगस्त के मौके पर पूरे देश में स्कूलों और कॉलेजों में तिरंगा फहराया जाएगा। इन कार्यक्रमों में कई नेता, विधायक और जनप्रतिनिधि पहुंचकर झंडा फहराने के साथ मंच से देशभक्ति के लंबे-लंबे भाषण देंगे। भीड़ देखकर और मंचों पर खड़े होकर देशभक्ति का प्रदर्शन तो होगा, लेकिन अक्सर यह देशभक्ति सिर्फ शब्दों और भाषणों तक ही सीमित रह जाती है। 
जहां देश भक्ति भाषणों तक सीमित है उसी  बीच 
शहीद शिव सिंह बेला के परिवार को सम्मानित करने पहुंचे SBI अधिकारी रमेश चंद, 10 वर्षों बाद उठे कई बड़े सवाल
पंचायत करसौली तहसील पंजैहरा  के अंतर्गत गांव गुलरवाला (पजैरा क्षेत्र) के वीर सपूत शहीद शिव सिंह बेला ने वर्ष 2018 में देश की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था।
आज, उनकी शहादत के वर्षों बाद, 15 अगस्त के मौके पर नालागढ़ SBI के अधिकारी रमेश चंद अपने कर्मचारियों के साथ शहीद शिव सिंह के घर पहुंचे और उनकी माता जसबीर कौर को सम्मानित किया।
यह पल सिर्फ एक सम्मान समारोह नहीं था।
यह उस मां के लिए बेहद भावुक क्षण था, जिसने देश की रक्षा के लिए अपने बेटे को खो दिया।
और यही तस्वीर आज एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर रही है—
जब एक SBI अधिकारी शहीद के घर तक पहुंचकर उसकी मां को सम्मान दे सकता है, तो पिछले 10 वर्षों में जिम्मेदार नेता और अधिकारी कितनी बार उनके घर पहुंचे?
शहीद शिव सिंह बेला, गांव गुलरावाला, तहसील पजैरा के रहने वाले थे। वर्ष 2018 में देश की रक्षा करते हुए वे वीरगति को प्राप्त हुए। उनके जाने के बाद परिवार ने न सिर्फ अपने बेटे को खोया, बल्कि जीवन में कई कठिन परिस्थितियों का भी सामना किया।
लेकिन शहादत के बाद क्या हुआ?
परिवार के अनुसार, शहीद की पार्थिव देह जब गांव पहुंची थी, उस समय कई नेता और जनप्रतिनिधि परिवार के साथ खड़े हुए थे और बड़े-बड़े वादे भी किए गए थे।
लेकिन परिवार का कहना है कि समय बीतने के साथ वे वादे केवल भाषणों तक ही सीमित रह गए और उसके बाद किसी ने भी परिवार की वास्तविक समस्याओं की ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया।
दस साल का समय कम नहीं होता।
इन वर्षों में शहीद परिवार ने किन परिस्थितियों का सामना किया, यह सवाल आज भी खड़ा है।
शहीद शिव सिंह की बहन नर्चना देवी वर्तमान में एक प्राइवेट स्कूल में टीचर के पद पर कार्यरत हैं, लेकिन परिवार का कहना है कि शहीद परिवार को मिलने वाली सरकारी नौकरी की सुविधा अभी तक पूरी तरह से नहीं मिल पाई है।
परिवार की ओर से यह भी कहा गया है कि गांव में शहीद शिव सिंह की याद में जो गेट बनाया गया है, वह भी परिवार के प्रयासों से ही संभव हो पाया, जबकि सरकारी स्तर पर अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
इन दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभागों से होना बाकी है, लेकिन अगर एक शहीद परिवार आज भी अपनी समस्याओं को लेकर सवाल उठा रहा है, तो उन सवालों का जवाब मिलना बेहद जरूरी है।
और इसी बीच 15 अगस्त पर SBI अधिकारी रमेश चंद की यह पहल चर्चा का विषय बन गई है।
उन्होंने किसी बड़े मंच का इंतजार नहीं किया।
न किसी भीड़ का, न किसी राजनीतिक कार्यक्रम का।
बल्कि अपने कर्मचारियों के साथ सीधे शहीद शिव सिंह बेला के घर पहुंचे और उनकी माता जसबीर कौर को सम्मानित किया।
यही वह तस्वीर है, जो इस 15 अगस्त पर सबसे ज्यादा मायने रखती है।
क्योंकि देशभक्ति सिर्फ भाषणों में नहीं होनी चाहिए।
देशभक्ति सिर्फ स्कूलों में जाकर झंडा फहराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
देशभक्ति सिर्फ मंचों पर भीड़ देखकर दिए गए भाषणों तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
देशभक्ति जमीन पर भी दिखाई देनी चाहिए।
और जमीन पर देशभक्ति का सबसे बड़ा उदाहरण तब है, जब किसी शहीद के घर जाकर उसके परिवार से पूछा जाए—
“आपको किसी चीज की जरूरत तो नहीं?”
आज सवाल उन सभी नेताओं और जिम्मेदार लोगों से है, जो शहीदों के नाम पर मंचों से बड़ी-बड़ी बातें करते हैं।
अगर शहीद की अंतिम यात्रा में हजारों लोगों के बीच खड़े होना देशभक्ति है, तो क्या दस साल बाद उसी शहीद की मां के घर जाकर उनका हाल पूछना देशभक्ति नहीं?
अगर मंच से शहीद को श्रद्धांजलि देना जरूरी है, तो क्या उसके परिवार की समस्याओं को सुनना जरूरी नहीं?
अगर 15 अगस्त को तिरंगे को सलाम करना हमारा कर्तव्य है, तो क्या उस तिरंगे की आन-बान-शान के लिए अपना बेटा खो चुकी मां का सम्मान करना हमारा कर्तव्य नहीं?
यही असली सवाल है।
और इसी वजह से SBI नालागढ़ के अधिकारी रमेश चंद की यह पहल सराहनीय है कि उन्होंने शहीद परिवार के घर जाकर सम्मान किया।
क्योंकि वहां कोई बड़ी भीड़ नहीं थी।
कोई राजनीतिक मंच नहीं था।
कोई रिबन काटने का कार्यक्रम नहीं था।
वहां सिर्फ एक शहीद की मां थी और उसके सामने खड़े थे वे लोग, जो उसके बेटे की शहादत को सम्मान देने पहुंचे थे।
शहीद शिव सिंह की माता जसबीर कौर के लिए शायद यही सबसे बड़ा सम्मान है कि उनके बेटे को आज भी याद किया जा रहा है।
क्योंकि एक मां अपने बेटे को वापस नहीं मांगती।
वह सिर्फ इतना चाहती है कि देश उसके बेटे की कुर्बानी को भूले नहीं।
और यही संदेश इस 15 अगस्त पर जाना चाहिए—
शहीदों को सिर्फ एक दिन याद मत कीजिए।
उनके परिवारों को भी याद रखिए।
सरकार और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों से भी यही सवाल है कि शहीद शिव सिंह के परिवार से जुड़े लंबित मामलों पर अब क्या कार्रवाई होगी?
उनकी बहन नर्चना देवी के रोजगार से जुड़े सवाल का समाधान कब होगा?
परिवार की अन्य समस्याओं पर कौन जिम्मेदारी लेगा?
और सबसे बड़ा सवाल—
क्या शहीद परिवारों का सम्मान सिर्फ राष्ट्रीय पर्वों तक रहेगा, या साल के 365 दिन उनके साथ खड़ा होने की व्यवस्था भी बनेगी?
15 अगस्त सिर्फ आजादी का उत्सव नहीं है।
यह उन लोगों को याद करने का दिन भी है, जिन्होंने इस आजादी की कीमत अपने खून से चुकाई।
शहीद शिव सिंह बेला को शत-शत नमन।
उनकी माता जसबीर कौर और पूरे परिवार को सम्मान।
और SBI नालागढ़ के अधिकारी रमेश चंद को इस पहल के लिए साधुवाद, जिन्होंने शहीद परिवार के घर पहुंचकर यह संदेश दिया कि—
देशभक्ति सिर्फ बातों में नहीं, जमीन पर भी दिखाई देनी चाहिए।
🇮🇳 जय हिंद। वंदे मातरम्।
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15 अगस्त विशेष रिपोर्ट
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    Local News Reporter पंजेहरा, सोलन, हिमाचल प्रदेश•
    10 hrs ago
  • 🇮🇳 बतौड़ स्कूल में शान से लहराया तिरंगा, देशभक्ति के रंग में रंगा पूरा परिसर पंचकूला के बतौड़ गांव में 80वां स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया गया। सरपंच प्रतिनिधि संदीप राणा ने किया ध्वजारोहण, छात्र-छात्राओं की देशभक्ति से ओत-प्रोत शानदार प्रस्तुतियों ने मोहा सभी का मन। #IndependenceDay #Panchkula #Batour #Tiranga #DeshBhakti #VandeMataram #India #KhabarAaj
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    🇮🇳 बतौड़ स्कूल में शान से लहराया तिरंगा, देशभक्ति के रंग में रंगा पूरा परिसर

पंचकूला के बतौड़ गांव में 80वां स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया गया। सरपंच प्रतिनिधि संदीप राणा ने किया ध्वजारोहण, छात्र-छात्राओं की देशभक्ति से ओत-प्रोत शानदार प्रस्तुतियों ने मोहा सभी का मन।

#IndependenceDay #Panchkula #Batour #Tiranga #DeshBhakti #VandeMataram #India #KhabarAaj
    user_खबर आज
    खबर आज
    Local News Reporter पंचकूला, पंचकूला, हरियाणा•
    23 hrs ago
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