बिहार में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर देश भर में तीखी चर्चा हो रही है। यह बताया गया है कि भरत का कोई आपराधिक इतिहास नहीं था और उसकी माँगें भी निजी या अनुचित नहीं थीं। उसने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण भी कर दिया था, बावजूद इसके उसके मामले को 'मानसिक विक्षिप्त' बताकर बंद करने का प्रयास किया जा रहा है। आरोप है कि उसके आक्रोश को, जो एक 'क्रांतिबीज' बन सकता था, उससे पहले ही कुचल दिया गया। इस घटना को भगत सिंह के विद्रोह से जोड़ा जा रहा है, जहाँ दोनों के कदम विद्रोहपूर्ण और सरकार की दृष्टि से गैरकानूनी थे। स्मरण कराया गया है कि 1929 में भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने 'सेंट्रल असेंबली' में बम किसी की जान लेने के लिए नहीं बल्कि ब्रिटिश सरकार को उसकी नीतियों के खिलाफ जगाने के लिए फेंके थे, जिसके बाद उन्होंने गिरफ्तारी देकर अदालत को अपने विचारों के प्रचार का माध्यम बनाया। पाठ में कहा गया है कि दोनों युवा थे और आतंकवादी नहीं थे, पर दोनों हुकूमतों ने उन्हें आतंकवादी सिद्ध करने का प्रयास किया। दोनों के सशस्त्र, गैरकानूनी और बगावती कदमों में फर्क यह बताया गया है कि अंग्रेजों ने भगत सिंह को सुनवाई का कानूनी अवसर दिया, जबकि भरत की 'राजनीतिक और प्रशासनिक हत्या' की गई। इस घटना से गहरे सवाल उठ रहे हैं: क्या भरत का विद्रोह उस व्यवस्था के खिलाफ नहीं था जहाँ नेता और अफसरों ने अपनी कमाई का एक 'संवैधानिक मैकेनिज्म' तैयार कर लिया है और जनता को नशे की ओर धकेल दिया है? क्या आज अमीर और अमीर तथा गरीब और गरीब नहीं होता जा रहा है? क्या आज कोई ऐसा लोकसेवक या जनसेवक है जो अपने पद और पैसे की चिंता से ऊपर उठकर सोच रहा हो? क्या समाज के सभी वर्गों के भविष्य की चिंता करने वाला कोई राजनीतिक विचार आज दिख रहा है? यह भी पूछा गया है कि आज हर आदमी सरकार ही क्यों बन जाना चाहता है। चेतावनी दी गई है कि जो भी ऐसे सवाल पूछने की हिम्मत करेगा, उसे पागल बताकर समाप्त कर दिया जाएगा। हालांकि, यह आशंका भी जताई गई है कि हमें जल्दी भूलने की आदत है और यह घटना भुला दी जाएगी, जिसके बाद लोग बैकवर्ड, फॉरवर्ड, दलित में बँटकर जातीय समायोजन करते हुए राजनीति के मोहरे बन जाएंगे। बिहार में भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर पर सरकार और पुलिस दोनों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यह बताया गया है कि समाज की आवाज़ उठाने वाले और हिंदू राष्ट्र की माँग करने वाले भरत भूषण तिवारी के खिलाफ पुलिस रिकॉर्ड में अब तक कोई शिकायत नहीं थी। ऐसे में, जब भरत ने आत्मसमर्पण कर दिया तो पुलिस ने उस पर गोली क्यों चलाई, इन सभी सवालों के जवाब मांगे गए हैं। भरत की अंतिम यात्रा में उमड़ी भारी भीड़ देखकर अनुमान लगाया गया है कि वहाँ के लोगों में उसकी कैसी छवि थी। यह स्पष्ट किया गया है कि यह अंतिम यात्रा न किसी नेता की थी और न किसी अभिनेता की, बल्कि एक क्रांतिकारी भरत भूषण तिवारी की थी जिसने सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाई थी। एक अद्यतन समाचार (20/जून /26, AIN नेटवर्क से प्रधान संपादक अनुज रावत द्वारा) में बिहार के युवा भरत भूषण तिवारी की अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ने की जानकारी दी गई है।
बिहार में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर देश भर में तीखी चर्चा हो रही है। यह बताया गया है कि भरत का कोई आपराधिक इतिहास नहीं था और उसकी माँगें भी निजी या अनुचित नहीं थीं। उसने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण भी कर दिया था, बावजूद इसके उसके मामले को 'मानसिक विक्षिप्त' बताकर बंद करने का प्रयास किया जा रहा है। आरोप है कि उसके आक्रोश को, जो एक 'क्रांतिबीज' बन सकता था, उससे पहले ही कुचल दिया गया। इस घटना को भगत सिंह के विद्रोह से जोड़ा जा रहा है, जहाँ दोनों के कदम विद्रोहपूर्ण और सरकार की दृष्टि से गैरकानूनी थे। स्मरण कराया गया है कि 1929 में भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने 'सेंट्रल असेंबली' में बम किसी की जान लेने के लिए नहीं बल्कि ब्रिटिश सरकार को उसकी नीतियों के खिलाफ जगाने के लिए फेंके थे, जिसके बाद उन्होंने गिरफ्तारी देकर अदालत को अपने विचारों के प्रचार का माध्यम बनाया। पाठ में कहा गया है कि दोनों युवा थे और आतंकवादी नहीं थे, पर दोनों हुकूमतों ने उन्हें आतंकवादी सिद्ध करने का प्रयास किया। दोनों के सशस्त्र, गैरकानूनी और बगावती कदमों में फर्क यह बताया गया है कि अंग्रेजों ने भगत सिंह को सुनवाई का कानूनी अवसर दिया, जबकि भरत की 'राजनीतिक और प्रशासनिक हत्या' की गई। इस घटना से गहरे सवाल उठ रहे हैं: क्या भरत का विद्रोह उस व्यवस्था के खिलाफ नहीं था जहाँ नेता और अफसरों ने अपनी कमाई का एक 'संवैधानिक मैकेनिज्म' तैयार कर लिया है और जनता को नशे की ओर धकेल दिया है? क्या आज अमीर और अमीर तथा गरीब और गरीब नहीं होता जा रहा है? क्या आज कोई ऐसा लोकसेवक या जनसेवक है जो अपने पद और पैसे की चिंता से ऊपर उठकर सोच रहा हो? क्या समाज के सभी वर्गों के भविष्य की चिंता करने वाला कोई राजनीतिक विचार आज दिख रहा है? यह भी पूछा गया है कि आज हर आदमी सरकार ही क्यों बन जाना चाहता है। चेतावनी दी गई है कि जो भी ऐसे सवाल पूछने की हिम्मत करेगा, उसे पागल बताकर समाप्त कर दिया जाएगा। हालांकि, यह आशंका भी जताई गई है कि हमें जल्दी भूलने की आदत है और यह घटना भुला दी जाएगी, जिसके बाद लोग बैकवर्ड, फॉरवर्ड, दलित में बँटकर जातीय समायोजन करते हुए राजनीति के मोहरे बन जाएंगे। बिहार में भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर पर सरकार और पुलिस दोनों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यह बताया गया है कि समाज की आवाज़ उठाने वाले और हिंदू राष्ट्र की माँग करने वाले भरत भूषण तिवारी के खिलाफ पुलिस रिकॉर्ड में अब तक कोई शिकायत नहीं थी। ऐसे में, जब भरत ने आत्मसमर्पण कर दिया तो पुलिस ने उस पर गोली क्यों चलाई, इन सभी सवालों के जवाब मांगे गए हैं। भरत की अंतिम यात्रा में उमड़ी भारी भीड़ देखकर अनुमान लगाया गया है कि वहाँ के लोगों में उसकी कैसी छवि थी। यह स्पष्ट किया गया है कि यह अंतिम यात्रा न किसी नेता की थी और न किसी अभिनेता की, बल्कि एक क्रांतिकारी भरत भूषण तिवारी की थी जिसने सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाई थी। एक अद्यतन समाचार (20/जून /26, AIN नेटवर्क से प्रधान संपादक अनुज रावत द्वारा) में बिहार के युवा भरत भूषण तिवारी की अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ने की जानकारी दी गई है।
- उत्तर प्रदेश के टूंडला स्थित चूल्हावली रोड पर खाद्य विभाग ने एक बड़े अभियान के तहत नकली देसी घी बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में ₹5.5 लाख मूल्य का 525 किलोग्राम फर्जी घी बरामद किया गया है, जिसके साथ एक आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया है। यह गोरखधंधा एक किराए के मकान से चलाया जा रहा था और खाद्य विभाग की इस कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। मुखबिर की सटीक सूचना पर मारे गए छापे में पता चला कि रिफाइंड और केमिकल का इस्तेमाल कर नकली देसी घी तैयार किया जा रहा था, जिसे 35 टीन में भरकर रखा गया था। सहायक आयुक्त खाद्य डॉ. चंदन पांडे के निर्देशन में हुई इस बड़ी कार्रवाई ने देसी घी के नाम पर चल रहे 'जहर के कारोबार' की पोल खोल दी है, जिससे नकली घी माफियाओं पर शिकंजा कस गया है।1
- जोधपुर शहर में गुरुवार को हुड़को चौराहा क्षेत्र में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाना और आमजन को राहत प्रदान करना है। नगर निगम दक्षिण और ट्रैफिक पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए फुटपाथों, सड़क किनारों और सार्वजनिक स्थानों पर किए गए अतिक्रमणों को हटाया। इस अभियान के कारण क्षेत्र में हड़कंप मच गया और कई हाथ ठेला संचालक व अस्थायी दुकानदार अपना सामान हटाते हुए देखे गए। नगर निगम दक्षिण के अतिक्रमण निरोधक दस्ते ने पुलिस बल की उपस्थिति में यह कार्रवाई की। अधिकारियों ने बताया कि अतिक्रमणों के कारण यातायात बाधित हो रहा था और पैदल चलने वाले राहगीरों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। नगर निगम दक्षिण के अतिक्रमण प्रभारी रजनीश बारासा ने जानकारी दी कि शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए यह अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक मार्गों और फुटपाथों पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, यातायात पुलिस की अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त शालिनी राज शर्मा ने कहा कि सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिक्रमण हटाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने आमजन और व्यापारियों से यातायात नियमों का पालन करने और सार्वजनिक मार्गों को अवरुद्ध न करने की अपील की। स्थानीय लोगों ने हुड़को चौराहा क्षेत्र के अतिक्रमण मुक्त होने पर संतोष व्यक्त किया और कहा कि इससे आवागमन सुगम होगा। हालांकि, कुछ ठेला संचालकों ने प्रशासन से वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की मांग भी रखी। प्रशासन ने इस पर स्पष्ट किया कि शहर में यातायात और जनसुविधाओं को ध्यान में रखते हुए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।1
- आगरा के थाना मलपुरा क्षेत्र के माकरोल गांव का एक पीड़ित परिवार फर्जी हरिजन एक्ट के मुकदमे में कार्रवाई की मांग को लेकर सल्फास की गोली लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचा। पीड़ित परिवार का आरोप है कि थाना मलपुरा पुलिस ने उनके खिलाफ फर्जी तरीके से छेड़छाड़ और हरिजन एक्ट का मुकदमा लिखा है। पीड़ित परिवार ने पुलिस आयुक्त कार्यालय पर मौजूद पुलिसकर्मियों को सल्फास की गोलियां दिखाईं, लेकिन इसके बावजूद गोलियां बरामद नहीं की गईं। पुलिस अधिकारियों के सामने गोली दिखाने के बावजूद भी किसी ने उन्हें बरामद करने की जहमत नहीं उठाई। पीड़ित परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में सही जांच नहीं हुई, तो उनके परिवार के पांचों सदस्य गोली खाकर आत्महत्या कर लेंगे।1
- फ़िरोज़ाबाद के टूंडला क्षेत्र में नकली देशी घी का एक बड़ा खेल सामने आया है। जानकारी के अनुसार, यहाँ रिफाइंड तेल में एसेंस मिलाकर नकली घी तैयार किया जा रहा था। खाद्य विभाग ने इस गोरखधंधे का भंडाफोड़ करते हुए मौके पर छापा मारा।1
- फ़िरोज़ाबाद में एक फ़ैक्ट्री, जिसने पिछले तीन साल में लाखों का कारोबार किया था, अब मिट्टी की कमी के कारण संकट का सामना कर रही है।1
- जनपद फिरोजाबाद के थाना शिकोहाबाद क्षेत्र में 19 जून 2026 को डायल-112 के माध्यम से सूचना मिली कि भूड़ा नहर में दो शव तैरते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस सूचना के तुरंत बाद थाना शिकोहाबाद पुलिस मौके पर पहुँची और दोनों शवों को नहर से बाहर निकलवाया। पुलिस ने पाया कि दोनों शवों के हाथ चुन्नी से बंधे हुए थे। पुलिस को इनमें से एक शव की जेब से एक घड़ी, पर्स, मोबाइल फोन और जितेन्द्र कुमार पुत्र उमेशचन्द, निवासी शनैवा, थाना अवागढ़, जनपद एटा के नाम का आधार कार्ड बरामद हुआ है। पुलिस ने दोनों शवों की शिनाख्त कराकर उनके परिजनों को सूचित कर दिया है। क्षेत्राधिकारी शिकोहाबाद द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, शवों को पंचायतनामा की कार्यवाही के बाद पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भिजवाया जा रहा है, और इस पूरे प्रकरण में साक्ष्य संकलन सहित अन्य आवश्यक कानूनी कार्यवाही की जा रही है।1
- वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक फिरोजाबाद के निर्देशानुसार, जनपद में अवैध शराब के निर्माण, बिक्री और तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत थाना दक्षिण पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। थाना दक्षिण पुलिस ने दो अलग-अलग मामलों में कार्रवाई करते हुए हरियाणा मार्का की अवैध अंग्रेजी शराब की एक बड़ी खेप बरामद की है। इस कार्रवाई के दौरान दो आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है।1
- औरैया के अजीतमल में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है, जहाँ अजीतमल थाना पुलिस ने चोरी के तीन बड़े मामलों का खुलासा करते हुए दो शातिर चोरों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपी सज्जन सिंह और बृजेश कुमार के कब्जे से चोरी का माल बेचकर मिले 2 लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं। पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपियों पर पहले से ही दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस पूछताछ में यह सामने आया कि दोनों आरोपी रात के समय सूने घरों की रेकी करते थे और फिर चोरी की वारदातों को अंजाम देते थे। इन्होंने पृथ्वीपुर और गढ़ा आजाद नगर स्थित तीन घरों से नकदी और जेवरात चुराए थे। आरोपियों का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी है; सज्जन सिंह पर पहले से ही 27 मुकदमे दर्ज हैं, जबकि बृजेश पर 13 मुकदमे दर्ज हैं। अजीतमल थाना प्रभारी रमेश सिंह की टीम ने नगला भोज मोड़ से इन शातिर चोरों को गिरफ्तार कर इस कार्रवाई को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है।1