उत्तर प्रदेश के बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर गुरुवार रात एक दर्दनाक हादसा हो गया, जिसमें आजमगढ़ निवासी एक पति की मौत हो गई और उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गईं। दंपति अपने तीन बच्चों के साथ आजमगढ़ घर लौटने के लिए ट्रेन संख्या 15084 उत्सर्ग एक्सप्रेस में सवार होने जा रहे थे, तभी संतुलन बिगड़ने से दोनों ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच फंस गए। मृतक की पहचान 32 वर्षीय मनोज कुमार और घायल पत्नी की पहचान 28 वर्षीय वंदना के रूप में हुई है। ये दोनों लखनऊ के गोमती नगर में प्राइवेट नौकरी करते थे और गुरुवार को अपने तीन बच्चों— हिमांशी (7 वर्ष), स्नेहा (4 वर्ष) और आंशिक (6 माह) — के साथ आजमगढ़ जाने के लिए बस से बाराबंकी पहुंचे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तीनों बच्चों को बोगी में चढ़ाते समय अचानक ट्रेन चल पड़ी, जिससे पत्नी वंदना का पैर फिसल गया और वह ट्रेन तथा प्लेटफॉर्म के बीच जा गिरीं। उन्हें बचाने के प्रयास में पति मनोज भी इसी जगह फंसे गए। हादसे के तुरंत बाद स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई और यात्रियों की भारी भीड़ जमा हो गई। घटना की सूचना मिलने पर जीआरपी और रेलवे पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन जीआरपी ने तत्काल घायलों की मदद नहीं की और लगभग 20 मिनट तक 108 एम्बुलेंस का इंतजार करती रही। प्लेटफॉर्म नंबर दो पर हुए इस हादसे के बाद घायलों को रेलवे अस्पताल से भी कोई मदद नहीं मिली, न ही जीआरपी या आरपीएफ कोई फर्स्टएड या स्ट्रेचर उपलब्ध करा सके। बताया गया है कि अगर जीआरपी तुरंत मदद करती तो शायद मनोज की जान बचाई जा सकती थी। एम्बुलेंस आने पर पुलिसकर्मियों ने स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को बाहर निकाला और बाराबंकी जिला अस्पताल भेजा। जिला अस्पताल में उपचार के दौरान मनोज की मौत हो गई। वहीं, गंभीर रूप से घायल वंदना की चिंताजनक हालत देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया है। डॉक्टरों के अनुसार, वंदना को गंभीर चोटें आई हैं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है। पुलिस के अनुसार, मृतक और घायल महिला मूल रूप से आजमगढ़ जिले के मुहम्मदपुर, पोस्ट तरौका, थाना लाटघाट क्षेत्र के निवासी हैं। पुलिस ने उनके परिजनों को हादसे की सूचना दे दी है और तीनों मासूम बच्चों की देखभाल के लिए जीआरपी तथा रेलवे अधिकारियों द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर गुरुवार रात एक दर्दनाक हादसा हो गया, जिसमें आजमगढ़ निवासी एक पति की मौत हो गई और उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गईं। दंपति अपने तीन बच्चों के साथ आजमगढ़ घर लौटने के लिए ट्रेन संख्या 15084 उत्सर्ग एक्सप्रेस में सवार होने जा रहे थे, तभी संतुलन बिगड़ने से दोनों ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच फंस गए। मृतक की पहचान 32 वर्षीय मनोज कुमार और घायल पत्नी की पहचान 28 वर्षीय वंदना के रूप में हुई है। ये दोनों लखनऊ के गोमती नगर में प्राइवेट नौकरी करते थे और गुरुवार
को अपने तीन बच्चों— हिमांशी (7 वर्ष), स्नेहा (4 वर्ष) और आंशिक (6 माह) — के साथ आजमगढ़ जाने के लिए बस से बाराबंकी पहुंचे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तीनों बच्चों को बोगी में चढ़ाते समय अचानक ट्रेन चल पड़ी, जिससे पत्नी वंदना का पैर फिसल गया और वह ट्रेन तथा प्लेटफॉर्म के बीच जा गिरीं। उन्हें बचाने के प्रयास में पति मनोज भी इसी जगह फंसे गए। हादसे के तुरंत बाद स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई और यात्रियों की भारी भीड़ जमा हो गई। घटना की सूचना मिलने पर जीआरपी और रेलवे पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन जीआरपी
ने तत्काल घायलों की मदद नहीं की और लगभग 20 मिनट तक 108 एम्बुलेंस का इंतजार करती रही। प्लेटफॉर्म नंबर दो पर हुए इस हादसे के बाद घायलों को रेलवे अस्पताल से भी कोई मदद नहीं मिली, न ही जीआरपी या आरपीएफ कोई फर्स्टएड या स्ट्रेचर उपलब्ध करा सके। बताया गया है कि अगर जीआरपी तुरंत मदद करती तो शायद मनोज की जान बचाई जा सकती थी। एम्बुलेंस आने पर पुलिसकर्मियों ने स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को बाहर निकाला और बाराबंकी जिला अस्पताल भेजा। जिला अस्पताल में उपचार के दौरान मनोज की मौत हो गई। वहीं, गंभीर
रूप से घायल वंदना की चिंताजनक हालत देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया है। डॉक्टरों के अनुसार, वंदना को गंभीर चोटें आई हैं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है। पुलिस के अनुसार, मृतक और घायल महिला मूल रूप से आजमगढ़ जिले के मुहम्मदपुर, पोस्ट तरौका, थाना लाटघाट क्षेत्र के निवासी हैं। पुलिस ने उनके परिजनों को हादसे की सूचना दे दी है और तीनों मासूम बच्चों की देखभाल के लिए जीआरपी तथा रेलवे अधिकारियों द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
- राष्ट्र असम वायु सेना दुर्घटना में देश की सेवा में अपना जीवन बलिदान करने वाले एक बहादुर सैनिक के लिए शोक मना रहा है। उनके निधन की खबर से उनके परिवार, दोस्तों और पूरे समुदाय के दिलों में गहरा दुख और दर्द छा गया है। आज, लोग शहीद (शुभम) को अंतिम सम्मान देने के लिए एकत्र हुए हैं, जिनकी घर वापसी वैसी नहीं है जैसी उम्मीद की गई थी, फिर भी उनके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जाएगा। उनके ताबूत के हर कदम के साथ, लोग नुकसान का दर्द महसूस कर रहे हैं, लेकिन उनके साहस और समर्पण पर गर्व भी है। उनके ताबूत को ढँकने वाला झंडा उस स्वतंत्रता और सुरक्षा का प्रतीक है जिसके लिए उन्होंने लड़ाई लड़ी थी, और आसमान में गूँजने वाली सलामी गोलियां एक नायक को अंतिम श्रद्धांजलि हैं। बहने वाले आँसू उनके प्रति प्यार और सम्मान का प्रमाण हैं। (शुभम) सिर्फ एक सैनिक से बढ़कर थे; वह एक बेटा, एक भाई और एक दोस्त भी थे। उनकी स्मृति उन कहानियों में जीवित रहेगी जो उनके बारे में बताई जाती हैं, उन मूल्यों में जो उन्होंने अपने जीवन में धारण किए थे, और उस विरासत में जो उन्होंने छोड़ी है। राष्ट्र उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता है और उन्हें हमेशा अपने दिलों में रखेगा।1
- एक व्यक्ति ने अपने परिवार की स्थिति पर संतुष्टि व्यक्त करते हुए कहा कि वे जितने में हैं, उतने में ही खुश और संतुष्ट हैं।1
- जनपद बाराबंकी की तहसील रामनगर स्थित प्रसिद्ध तीर्थ स्थल श्री लोधेश्वर महादेव धाम में मंगलवार शाम प्रशासन ने कॉरिडोर निर्माण कार्य को लेकर बड़ी कार्रवाई की। जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह के निर्देश पर उन मकानों को ध्वस्त किया गया, जिन्हें पूर्व में अधिग्रहित किया जा चुका था, लेकिन उन पर कार्रवाई शेष थी। यह कार्रवाई पुरुषोत्तम मास मेले के समापन के बाद रात करीब 7 बजे की गई। इस दौरान प्रशासनिक टीम ने दो जेसीबी मशीनों की सहायता से गिल्लावती पांडे के मकान और एक संस्कृत पाठशाला भवन को गिराया। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल और पीएसी की एक बटालियन तैनात की गई थी। राजस्व विभाग के अधिकारी और पुलिसकर्मी मौजूद रहे, और लेखपाल संतोष की मौजूदगी में ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पूरी कराई गई। सुरक्षा व्यवस्था में सब इंस्पेक्टर रविंद्र सिंह, जंग शेर सिंह चौहान, अभिषेक कुमार सहित महादेव पुलिस चौकी के कई पुलिसकर्मी शामिल थे। वहीं, मकान स्वामिनी गिल्लावती पांडे ने प्रशासनिक कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें अभी तक मुआवजा नहीं दिया गया है और उनका मामला बजरंगबली मंदिर के पुजारी रमेश से विवादित है, जो वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद प्रशासन ने यह कार्रवाई की है। उल्लेखनीय है कि श्री लोधेश्वर महादेव धाम को विकसित करने की कॉरिडोर निर्माण योजना के तहत कई भवनों का अधिग्रहण किया गया है। प्रशासन द्वारा अधिग्रहित भूमि और भवनों को चरणबद्ध तरीके से खाली कराकर विकास कार्य को आगे बढ़ाया जा रहा है। मंगलवार को हुई यह कार्रवाई इसी क्रम का एक हिस्सा बताई जा रही है।1
- बाराबंकी के शांति पैलेस में गौरव रावत का जन्मदिन समारोह उत्साह और हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया गया। इस अवसर पर माननीय राजा रितेश कुमार सिंह जी ने पहुंचकर गौरव रावत को गुलदस्ता भेंट कर जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई दी। राजा रितेश कुमार सिंह ने गौरव रावत के उज्ज्वल भविष्य, उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की। उन्होंने यह भी कहा कि युवा समाज की शक्ति हैं और उनके उज्ज्वल भविष्य से ही क्षेत्र का विकास संभव है। इस समारोह में राहुल यादव, राधेश्याम यादव, संतोष रावत, मोहित यादव सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने गौरव रावत को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके सुखद एवं सफल जीवन की कामना की। समारोह के दौरान अतिथियों का स्वागत किया गया तथा आपसी सौहार्द और सामाजिक एकता का संदेश भी दिया गया।3
- बाराबंकी जनपद में भारतीय किसान यूनियन भदौरिया संगठन के किसान कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी को एक सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपा है। यह ज्ञापन उनकी विभिन्न मांगों को लेकर दिया गया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे तहसील का घेराव करेंगे।1
- बाराबंकी के फतेहपुर-सूरतगंज मार्ग पर बुधवार सुबह गनेशपुरवा गांव के पास एक भीषण सड़क हादसा हो गया। फतेहपुर से सवारियां लेकर सूरतगंज जा रहे एक सीएनजी ऑटो रिक्शा की सामने से आ रही मोटरसाइकिल से आमने-सामने की टक्कर हो गई। इस दुर्घटना में कुल सात लोग घायल हुए, जिनमें एक मां-बेटा गंभीर रूप से जख्मी हो गए। टक्कर इतनी भीषण थी कि ऑटो रिक्शा अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक गहरे गड्ढे में पलट गया, जबकि मोटरसाइकिल भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे के बाद मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण इकट्ठा हो गए। सूचना मिलते ही पीआरबी पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। सभी घायलों को 108 और 102 एंबुलेंस की सहायता से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) फतेहपुर भेजा गया।1
- लखनऊ के जानकीपुरम स्थित जानकी वाटिका पार्क मंदिर में मंगलवार को भक्ति और सेवा का एक अनूठा संगम देखने को मिला। सातवें बड़े मंगल के अवसर पर मंदिर परिसर में सुंदरकांड का भव्य पाठ आयोजित किया गया, जिसके साथ ही एक विशाल भंडारे का भी आयोजन हुआ। मंदिर के पुजारी ने बताया कि यहाँ हर मंगलवार को सुंदरकांड का पाठ होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस आयोजन की एक खास बात यह है कि IAS, PCS, जज और IPS जैसे वरिष्ठ अधिकारी भी नियमित रूप से इसमें आते हैं और बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। पुजारी के अनुसार, सबसे खास नज़ारा तब दिखता है जब ये अधिकारी अपने पद और रुतबे को किनारे रखकर एक भिक्षुक की तरह मंदिर में सेवा करते हैं। कोई झाड़ू लगाता है, कोई प्रसाद बांटता है, तो कोई भंडारे में बर्तन साफ करने में जुट जाता है। सेवा की यह भावना मंदिर के माहौल को और भी सादगी भरा बना देती है। इस विशाल भंडारे में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। जानकीपुरम के लोगों के लिए यह मंगलवार का आयोजन अब एक नियमित परंपरा बन गया है, जो भक्ति और निःस्वार्थ सेवा का प्रतीक है।1
- राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले पर कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर ने कड़ा रुख अपनाते हुए तीखे तेवर दिखाए हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मंदिर के धन का गबन करने वाला व्यक्ति 60 हजार साल तक मल का कीड़ा बनेगा। ठाकुर ने तत्काल अधिकारियों को मंदिर से बाहर निकालने की मांग की है। उन्होंने आगे कहा कि वे योगी से आग्रह करेंगे कि वे चार शंकराचार्य में से जो भी उन्हें सबसे अधिक प्रिय हों, उनमें से किसी एक को अध्यक्ष बनाकर एक सनातन कोड का निर्माण किया जाए और इस तरह मंदिर की जिम्मेदारी धर्मज्ञों के हाथ में सौंपी जाए। पोस्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि राम के नाम पर हो रही इस लूट और इस 'महापाप' को दबाने की 'ईश्वरीय' छूट के बावजूद, सनातन आक्रोश का ज्वार फूट रहा है। ऐसा प्रतीत होता है मानो मर्यादा पुरूषोत्तम राम ने स्वयं अपने पापियों के संहार का बीड़ा उठा लिया है।1